झारखंड में नया मुखिया बनकर सरकार की पैसा लूटें l कागज़पर योजना को दिखाकर पैशाकिए गमन l झारखंड में सरकारी योजनाओं (जैसे 15वें वित्त आयोग, प्रधानमंत्री आवास योजना या विकास कार्यों) के फंड से अवैध रूप से पैसा निकालने या वित्तीय हेराफेरी करने वाले मुखिया के खिलाफ झारखंड सरकार और जिला प्रशासन झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 के तहत सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करती है। [1, 2] ऐसी शिकायतों या जांच में दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं: 1. वित्तीय अधिकार छीनना ( suspension of Financial Powers) भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग की प्राथमिक पुष्टि होने पर जिला प्रशासन सबसे पहले मुखिया के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सस्पेंड (जब्त) कर देता है। इसके बाद पंचायत के विकास कार्यों को जारी रखने के लिए ये अधिकार उप-मुखिया (Deputy Mukhiya) या किसी अन्य अधिकृत समिति को सौंप दिए जाते हैं। [1, 2] 2. पद से हटाना (Removal from Post) झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 की धारा 64 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत, पद के दुरुपयोग और सरकारी धन की हेराफेरी के गंभीर मामलों में सरकार दोषी मुखिया को पद से बर्खास्त (Dismiss) कर सकती है। [1, 2] 3. एफआईआर (FIR) और जेल की कार्रवाई अवैध निकासी सीधे तौर पर एक आपराधिक धोखाधड़ी (Fraud) है। इसलिए जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी मुखिया और उनके सहयोगियों (जैसे पंचायत सेवक या बिचौलिए) के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसके तहत धोखाधड़ी, सरकारी पैसे के गबन और जालसाजी की धाराओं में न्यायिक हिरासत या जेल भेजने की कानूनी कार्रवाई होती है। [1, 2] 4. अवैध पैसे की वसूली (Recovery of Embezzled Amount) मुखिया द्वारा जो भी सरकारी राशि अवैध रूप से निकाली गई है, उसकी रिकवरी (वसूली) की प्रक्रिया शुरू की जाती है। यदि दोषी व्यक्ति पैसे नहीं लौटाता है, तो उसकी निजी संपत्ति की नीलामी या जब्ती (Certificate Case) के जरिए सरकारी धन की भरपाई की जाती है। 5. भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक यदि भ्रष्टाचार के आरोपों में मुखिया को कोर्ट से सजा होती है या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर कदाचार (Misconduct) का दोषी पाया जाता है, तो उन्हें भविष्य में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
झारखंड में नया मुखिया बनकर सरकार की पैसा लूटें l कागज़पर योजना को दिखाकर पैशाकिए गमन l झारखंड में सरकारी योजनाओं (जैसे 15वें वित्त आयोग, प्रधानमंत्री आवास योजना या विकास कार्यों) के फंड से अवैध रूप से पैसा निकालने या वित्तीय हेराफेरी करने वाले मुखिया के खिलाफ झारखंड सरकार और जिला प्रशासन झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 के तहत सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करती है। [1, 2] ऐसी शिकायतों या जांच में दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं: 1. वित्तीय अधिकार छीनना ( suspension of Financial Powers) भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग की प्राथमिक पुष्टि होने पर जिला प्रशासन सबसे पहले मुखिया के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सस्पेंड (जब्त) कर देता है। इसके बाद पंचायत के विकास कार्यों को जारी रखने के लिए ये अधिकार उप-मुखिया (Deputy Mukhiya) या किसी अन्य अधिकृत समिति को सौंप दिए जाते हैं। [1, 2] 2. पद से हटाना (Removal from Post) झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 की धारा 64 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत, पद के दुरुपयोग और सरकारी धन की हेराफेरी के गंभीर मामलों में सरकार दोषी मुखिया को पद से बर्खास्त (Dismiss) कर सकती है। [1, 2] 3. एफआईआर (FIR) और जेल की कार्रवाई अवैध निकासी सीधे तौर पर एक आपराधिक धोखाधड़ी (Fraud) है। इसलिए जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी मुखिया और उनके सहयोगियों (जैसे पंचायत सेवक या बिचौलिए) के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसके तहत धोखाधड़ी, सरकारी पैसे के गबन और जालसाजी की धाराओं में न्यायिक हिरासत या जेल भेजने की कानूनी कार्रवाई होती है। [1, 2] 4. अवैध पैसे की वसूली (Recovery of Embezzled Amount) मुखिया द्वारा जो भी सरकारी राशि अवैध रूप से निकाली गई है, उसकी रिकवरी (वसूली) की प्रक्रिया शुरू की जाती है। यदि दोषी व्यक्ति पैसे नहीं लौटाता है, तो उसकी निजी संपत्ति की नीलामी या जब्ती (Certificate Case) के जरिए सरकारी धन की भरपाई की जाती है। 5. भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक यदि भ्रष्टाचार के आरोपों में मुखिया को कोर्ट से सजा होती है या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर कदाचार (Misconduct) का दोषी पाया जाता है, तो उन्हें भविष्य में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
- झारखंड में नया मुखिया बनकर सरकार की पैसा लूटें l कागज़पर योजना को दिखाकर पैशाकिए गमन l झारखंड में सरकारी योजनाओं (जैसे 15वें वित्त आयोग, प्रधानमंत्री आवास योजना या विकास कार्यों) के फंड से अवैध रूप से पैसा निकालने या वित्तीय हेराफेरी करने वाले मुखिया के खिलाफ झारखंड सरकार और जिला प्रशासन झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 के तहत सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करती है। [1, 2] ऐसी शिकायतों या जांच में दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं: 1. वित्तीय अधिकार छीनना ( suspension of Financial Powers) भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग की प्राथमिक पुष्टि होने पर जिला प्रशासन सबसे पहले मुखिया के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सस्पेंड (जब्त) कर देता है। इसके बाद पंचायत के विकास कार्यों को जारी रखने के लिए ये अधिकार उप-मुखिया (Deputy Mukhiya) या किसी अन्य अधिकृत समिति को सौंप दिए जाते हैं। [1, 2] 2. पद से हटाना (Removal from Post) झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 की धारा 64 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत, पद के दुरुपयोग और सरकारी धन की हेराफेरी के गंभीर मामलों में सरकार दोषी मुखिया को पद से बर्खास्त (Dismiss) कर सकती है। [1, 2] 3. एफआईआर (FIR) और जेल की कार्रवाई अवैध निकासी सीधे तौर पर एक आपराधिक धोखाधड़ी (Fraud) है। इसलिए जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी मुखिया और उनके सहयोगियों (जैसे पंचायत सेवक या बिचौलिए) के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। इसके तहत धोखाधड़ी, सरकारी पैसे के गबन और जालसाजी की धाराओं में न्यायिक हिरासत या जेल भेजने की कानूनी कार्रवाई होती है। [1, 2] 4. अवैध पैसे की वसूली (Recovery of Embezzled Amount) मुखिया द्वारा जो भी सरकारी राशि अवैध रूप से निकाली गई है, उसकी रिकवरी (वसूली) की प्रक्रिया शुरू की जाती है। यदि दोषी व्यक्ति पैसे नहीं लौटाता है, तो उसकी निजी संपत्ति की नीलामी या जब्ती (Certificate Case) के जरिए सरकारी धन की भरपाई की जाती है। 5. भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक यदि भ्रष्टाचार के आरोपों में मुखिया को कोर्ट से सजा होती है या प्रशासनिक स्तर पर गंभीर कदाचार (Misconduct) का दोषी पाया जाता है, तो उन्हें भविष्य में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।1
- फूल व्यवसाय संघ रंका, गढ़वा-पलामू की बैठक में छत्तीसगढ़ से फूल नहीं मंगाने का निर्णय, नियम उल्लंघन पर लगेगा 21000 का जुर्माना रंका। फूल व्यवसाय संघ रंका, गढ़वा एवं पलामू के व्यवसायियों की ओर से रविवार को डालटनगंज स्थित शिवम होटल में आवश्यक बैठक आयोजित की गई। बैठक में फूल व्यवसाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में व्यवसायियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ से आने वाले कुछ फूलों की गुणवत्ता खराब एवं गंदगीयुक्त होने के कारण व्यवसायियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए फूल व्यवसाय संघ ने आपसी सहमति से कुछ महत्वपूर्ण नियम बनाए हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि फिलहाल छत्तीसगढ़ से फूल नहीं मंगाया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर फूल उपलब्ध कराने वाले लोगों के साथ भी बैठक आयोजित कर फूल की गुणवत्ता, कीमत और आपूर्ति को लेकर लिखित रूप से निर्णय लिया जाएगा। संघ के सदस्यों ने कहा कि व्यवसाय में पारदर्शिता और अच्छी गुणवत्ता बनाए रखना सभी व्यवसायियों की जिम्मेदारी है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संघ द्वारा बनाए गए नियमों का उल्लंघन कर यदि कोई व्यवसायी छत्तीसगढ़ से फूल मंगाता है या प्रतिबंधित माल की खरीद करता है, तो उस पर 21000 का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यवसायी द्वारा मंगाए गए फूल खराब होने, माल उतर जाने या किसी अन्य प्रकार की क्षति होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित व्यवसायी की होगी। संघ किसी प्रकार की क्षति की जिम्मेदारी नहीं लेगा। बैठक में फूल व्यवसाय से जुड़े विकास मालाकार, विशाल मंगलम, दीपक मालाकार, प्रकाश मालाकार, सुरेंद्र मालाकार, राजेंद्र मालाकार, मंद्र मालाकार, अनुज मालाकार एवं करण कुमार मालाकार सहित अन्य व्यवसायी उपस्थित रहे। व्यवसायियों ने संघ के नियमों का पालन करते हुए आपसी समन्वय से फूल व्यवसाय को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने पर सहमति जताई।1
- पूर्व सो दीपक वर्मा पहुंचे पलामू। कायस्थ सम्मेलन में हुआ भव्य स्वागत।पूर्व SP दीपक वर्मा पहुंचे पलामू। कायस्थ सम्मेलन में हुआ भव्य स्वागत। #latestnewspalamu #latestnewsjharkhand #PalamuPolice #डाल्टनगंज #कायस्थसमाज #sppalamu #ipsdeepakwarma #palamu #झारखण्ड #पलामू पलामू जिला के पूर्व SP दीपक वर्मा पहुंचे डाल्टनगंज।1
- पाटन पुलिस अंचल निरीक्षक कार्यालय में चला विशेष स्वच्छता अभियान, पुलिसकर्मियों व ग्रामीण पुलिस ने मिलकर की साफ-सफाई पाटन (पलामू): पाटन पुलिस अंचल निरीक्षक कार्यालय परिसर में रविवार को विशेष साफ-सफाई अभियान चलाया गया। अंचल पुलिस निरीक्षक सुरेश मंडल के नेतृत्व में फटिक वीर जवानों ने कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई की। अंचल निरीक्षक सुरेश मंडल ने बताया कि बारिश के मौसम में कार्यालय परिसर के आसपास काफी झाड़ियां और घास उग गई थी। इसके कारण मच्छरों एवं विभिन्न प्रकार के कीड़े-मकौड़ों की संख्या भी बढ़ गई थी। अब बारिश का मौसम लगभग समाप्त होने के बाद परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान चलाया गया। साफ-सफाई अभियान के दौरान जवानों ने कार्यालय परिसर के आसपास उगी झाड़ियों और अनावश्यक घास को हटाया तथा पूरे परिसर की सफाई की। खास बात यह रही कि पुलिस निरीक्षक सुरेश मंडल स्वयं भी जवानों के साथ साफ-सफाई अभियान में शामिल हुए और श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया। अभियान के समापन के बाद पुलिस निरीक्षक सुरेश मंडल ने जवानों के कार्य से प्रभावित होकर सभी फटिक वीर जवानों को जलेबी खिलाकर उनका मुंह मीठा कराया। मिठाई मिलने के बाद जवानों में खुशी का माहौल देखने को मिला। पुलिस अधिकारियों और जवानों द्वारा चलाए गए इस स्वच्छता अभियान से कार्यालय परिसर न केवल साफ-सुथरा नजर आया, बल्कि पुलिसकर्मियों ने स्वच्छता और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया।मौके पर कई पुलिस जवान व पाटन अंचल के सभी पंचायत के ग्रामीण पुलिस(चौकीदार)मौजूद रहे!1
- धुरकी हाथियों के आतंक से प्रभावित गांवों में विधायक ने बांटी ,टॉर्च व पटाखे हाथियों के आतंक से प्रभावित गांवों में विधायक ने बांटी ,टॉर्च व पटाखे धुरकी प्रखंड क्षेत्र के कन्हार तटीय इलाके में इन दिनों जंगली हाथियों के आतंक से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। विधायक प्रतिनिधि लक्ष्मण प्रसाद यादव झामुमो प्रखंड अध्यक्ष इसराइल खान की अध्यक्षता में पारसपानी कला,आम्बाखोरेया, बरसोती एवं कदवा लिखनीधौरा में आयोजन किया गया जिसमें हाथियों के झुंड द्वारा लगातार खेतों में पहुंचकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ ग्रामीणों की जान को भी खतरा बना हुआ है। हाथियों के बढ़ते उत्पात को देखते हुए भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनंत प्रताप देव ने प्रभावित ग्रामीणों के बीच टॉर्च एवं पटाखों का वितरण किया। विधायक अनंत प्रताप देव, केंद्रीय सदस्य ताहीर अंसारी एवं युवा नेता मन्नू बाबा ने धुरकी प्रखंड क्षेत्र के कन्हार तटीय इलाके के आंबाखोरेया पंचायत अंतर्गत परासपानी कला, आंबाखोरेया, बरसोती एवं लिखनीधौरा गांव का दौरा कर ग्रामीणों से जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीणों ने हाथियों के कारण हो रहे फसल नुकसान एवं जान-माल के खतरे से नेताओं को अवगत कराया। विधायक अनंत प्रताप देव ने कहा कि हाथियों के लगातार गांवों में आने से ग्रामीणों में डर का माहौल है। किसानों की मेहनत से तैयार फसलों को हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तत्काल टॉर्च एवं पटाखे उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि हाथियों के गांव की ओर आने पर उन्हें दूर रखने का प्रयास किया जा सके। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल क्षति एवं ग्रामीणों की समस्याओं को संबंधित विभाग के समक्ष रखा जाएगा। केंद्रीय सदस्य ताहीर अंसारी ने कहा कि हाथियों के आतंक से प्रभावित ग्रामीणों के साथ पार्टी एवं जनप्रतिनिधि खड़े हैं। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने तथा रात के समय अकेले जंगल या खेत की ओर नहीं जाने की अपील की। मौके पर पार्टी उपाध्यक्ष शैलेश यादव, कृष्णा सिंह, रामाधार राम,मुखिया रघुनाथ सिंह वसंत सिंह गोड़ ,पचिया देवी,प्रमुख प्रतिनिधि राम किशुन कोरवा, अनुरुद्ध गुप्ता वसी अहमद अंसारी एवं काफी संख्या में झामुमो के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।4
- चलो गांव की ओर बोल बम सेवा समिति की ग्रामीण अंचल की यात्रा जिसमें दिखाऊंगा गांव की झीले, और झीलों में नहाते हुए छोटे-छोटे बच्चे जो सुरक्षा की देर से गलत भी है और ऐसी जगह पर अपने छोटे-छोटे बच्चों को अकेले ना छोड़े कभी भी खतरा हो सकता है और इस झील पर कई बार खतरा हो भी चुका है लोगों की जाने जा भी चुकी है लेकिन फिर भी लोग सचेत नहीं हो रहे हैं अभी वीडियो के माध्यम से देखें और कमेंट के द्वारा अपनी प्रक्रिया जरुर व्यक्त करें धन्यवाद1
- थाना दुद्धी पुलिस द्वारा भूसी की आड़ में तस्करी कर ले जाई जा रही 4,297 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब की बरामदगी के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी दुद्धी, सोनभद्र श्री विनय प्रभाकर साहनी की बाइट। थाना दुद्धी पुलिस द्वारा भूसी की आड़ में तस्करी कर ले जाई जा रही 4,297 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब की बरामदगी के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी दुद्धी, सोनभद्र श्री विनय प्रभाकर साहनी की बाइट।1
- बहाहारा पंचायत के गासेदाग खड़ियाही में जर्जर सड़क से ग्रामीण परेशान, सड़क नहीं तो वोट नहीं रंका प्रखंड के बहाहारा पंचायत अंतर्गत गासेदाग टोला खड़ियाही में सड़क की जर्जर को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। करीब 400 घरों की आबादी वाले इस टोले के ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। आज बरसात के दिनों में सड़क की स्थिति और खराब हो जाने से ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में आज रविवार सुबह करीब 9 बजे पंचायत के बीडीसी उपेंद्र भुईयां ने बताया कि ग्रामीण गांव के विकास और मूलभूत सुविधाओं की उम्मीद में मुखिया, विधायक और सांसद का चुनाव करते हैं, ताकि गांव में खुशहाली आए और सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य सुविधाओं का विकास हो। लेकिन गासेदाग खड़ियाही की सड़क की स्थिति वर्षों से बदहाल बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सड़क की हालत ऐसी है कि आज भी ग्रामीणों को आवागमन में कठिनाई होती है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 400 घरों की आबादी होने के बावजूद अब तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं कराया गया तो आगामी चुनाव में “अबकी बार सड़क नहीं तो वोट नहीं” का निर्णय लिया जाएगा।1