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वांगचुक ने नड्डाजी के हाथों जूस पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया है। आंदोलन के संबंध में सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर कोई पुलिस केस दर्ज नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने शिक्षा प्रणाली में सुधार का भी आश्वासन दिया है, हालांकि प्रधान के इस्तीफे की शर्त को सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। उधर सुबह पांच बजे जंतर-मंतर पर छात्रों ने तिरंगा लहराया। यह पूरी जानकारी राजपथ न्यूज़ की छह बड़ी खबरों के अंतर्गत सामने आई है।
Rajpath News
वांगचुक ने नड्डाजी के हाथों जूस पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया है। आंदोलन के संबंध में सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर कोई पुलिस केस दर्ज नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने शिक्षा प्रणाली में सुधार का भी आश्वासन दिया है, हालांकि प्रधान के इस्तीफे की शर्त को सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। उधर सुबह पांच बजे जंतर-मंतर पर छात्रों ने तिरंगा लहराया। यह पूरी जानकारी राजपथ न्यूज़ की छह बड़ी खबरों के अंतर्गत सामने आई है।
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- 26 दिनों की लंबी भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से मिले आश्वासन के बाद यह निर्णय लिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने, NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों और छात्रों से जुड़े तमाम मामलों पर संसद में चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है।1
- पेपर लीक मामले पर मोदीजी का पहला वीडियो संदेश सामने आया है। देश में पेपर लीक के खिलाफ मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सोमवार को कैबिनेट की बैठक में बिल पास कराया जाएगा। इसके बाद इसी मानसून सत्र में इस बिल को पास कराने की तैयारी है। इस पूरी खबर का विवरण राजपथ न्यूज़ पर देखा जा सकता है।1
- दिल्ली में सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है। केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत और बैठक संपन्न होने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक बीते 28 जून से लगातार अनशन पर बैठे हुए थे।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए घटनाक्रम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे मामले में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच का असली सच क्या है, इसको लेकर स्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है।1
- देश भर से युवाओं के एक भावुक कर देने वाले जज़्बे के साथ दिल्ली पहुँचने का वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर किसी की भी आँखों में आँसू आ जाएँगे। पोस्ट में कहा गया है कि अगर देश का युवा इसी जुनून और हौसले के साथ दिल्ली पहुँचता रहा, तो इस आंदोलन को दुनिया की कोई भी ताक़त नहीं रोक सकती।1
- पत्रकार पंडित विशाल शर्मा 'लव' द्वारा किए गए कूटनीतिक और आध्यात्मिक विश्लेषण के अनुसार, 2014 से 2026 का यह महा-दशक भारत और संपूर्ण विश्व के लिए एक बहुत बड़े काल-चक्र का मोड़ साबित हो रहा है। वेदों और पुराणों के विधान का हवाला देते हुए आलेख में कहा गया है कि अकारण ज्ञानियों, धर्म-रक्षकों और निर्दोषों को प्रताड़ित करने वाली सत्ता का विनाश तय है। अथर्ववेद और गरुड़ पुराण के संदर्भों के साथ-साथ इतिहास के उदाहरणों जैसे राजा वेन, नहुष, सहस्रबाहु और राजा परीक्षित के पतन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, 7 नवंबर 1966 को संसद के सामने गो-हत्या विरोधी संत आंदोलन पर हुए बल प्रयोग के परिणाम स्वरूप तत्कालीन सत्ताधीश परिवार को संजय गांधी की विमान दुर्घटना, इंदिरा गांधी की हत्या और राजीव गांधी के अंत जैसी त्रासदियों का सामना करना पड़ा। इतिहास की पड़ताल करते हुए आलेख में बताया गया है कि 80 के दशक में हुई कूटनीतिक चूकों, तुष्टिकरण, मुफ्त की योजनाओं और जातिगत विभाजन की राजनीति ने पंजाब में कट्टरपंथ और वैचारिक गुलामी को बढ़ावा दिया। वहीं 2014 से 2026 के वैश्विक दौर में 2014 का क्रीमिया विलय, 2022 का रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैक-वॉर, लाल सागर में इसराइल-हमास संघर्ष, कोविड-19 महामारी और तुर्की-सीरिया भूकंप जैसे कई प्राकृतिक व सैन्य संकट देखने को मिले हैं। इस महा-संकट के बीच भारत ने रूस से तेल खरीदकर अपने रणनीतिक हितों की रक्षा की, QUAD व IMEC से जुड़ाव बढ़ाया, 'वैक्सीन मैत्री' के माध्यम से 100 से अधिक देशों की मदद की और G20 के जरिए 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनकर उभरा। दूसरी ओर, वर्तमान व्यवस्था में आंतरिक स्तम्भों पर प्रहार का मुद्दा उठाते हुए आलेख में सच दिखाने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के उत्पीड़न, OROP व पेंशन मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैनिकों, किसानों और रोजगार की मांग कर रहे युवाओं पर लाठियां व जल-तोपें चलाने को एक गंभीर चक्रव्यूह बताया गया है। जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और लाल किले पर निहंग परंपरा द्वारा ध्वज लहराने की घटना को नए युग और 'कलगीधर' की शक्तियों के उदय का आध्यात्मिक संकेत माना गया है। विश्लेषण का निष्कर्ष है कि बाह्य शक्तियां भारत को आंतरिक रूप से बांटना चाहती हैं, लेकिन युवा, किसान, फौजी, मजदूर और पत्रकारों की एकजुटता से अधर्म, छल और लाठी-तंत्र पर टिकी राजनीति का अंत निकट है।1
- वांगचुक ने नड्डाजी के हाथों जूस पीकर अपना अनशन समाप्त कर दिया है। आंदोलन के संबंध में सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर कोई पुलिस केस दर्ज नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने शिक्षा प्रणाली में सुधार का भी आश्वासन दिया है, हालांकि प्रधान के इस्तीफे की शर्त को सरकार ने स्वीकार नहीं किया है। उधर सुबह पांच बजे जंतर-मंतर पर छात्रों ने तिरंगा लहराया। यह पूरी जानकारी राजपथ न्यूज़ की छह बड़ी खबरों के अंतर्गत सामने आई है।1
- उत्तराखंड के धारचूला-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटने का लाइव वीडियो सामने आया है। पहाड़ गिरने का यह मंजर साक्षात कयामत जैसा था, जिससे जमीन भी दहल गई। गनीमत यह रही कि जिस वक्त पहाड़ का यह हिस्सा टूटा, उस दौरान वहां से कोई भी वाहन नहीं गुजर रहा था।1