झारखंड सरायकेला रिपोर्ट: कामदेव कुमार सरायकेला-8987845811 स्लग:टायो कॉलोनी में सनसनीखेज हत्या, पुत्र पर पिता की नृशंस हत्या का संदेह एंकर: सरायकेला जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत टायो कॉलोनी के फ्लैट संख्या G-2 में मंगलवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक पुरुष की बेहद निर्मम हालत में लाश बरामद की गई। मृतक की पहचान रामानाथ दास के रूप में हुई है, जो पूर्व में टीजीएस के कर्मचारी रह चुके थे और फिलहाल ईएसएस ले चुके थे।जानकारी के अनुसार रामानाथ दास अपने पुत्र मनसा दास के साथ उक्त फ्लैट में रहते थे।घटना की सूचना मिलते ही टाटा स्टील के सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और गम्हरिया थाना को सूचित किया। इसके बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार शव नग्न अवस्था में था, मृतक का लिंग कटा हुआ था तथा चेहरा पूरी तरह कुचला हुआ मिला, जिससे हत्या की नृशंसता का अंदाजा लगाया जा रहा है।पुलिस ने मृतक के पुत्र मनसा दास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि हत्या पुत्र द्वारा ही की गई हो सकती है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच में जुटी है। बाईट: समीर सवैया, एसडीपीओ सरायकेला
झारखंड सरायकेला रिपोर्ट: कामदेव कुमार सरायकेला-8987845811 स्लग:टायो कॉलोनी में सनसनीखेज हत्या, पुत्र पर पिता की नृशंस हत्या का संदेह एंकर: सरायकेला जिले के गम्हरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत टायो कॉलोनी के फ्लैट संख्या G-2 में मंगलवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक पुरुष की बेहद निर्मम हालत में लाश बरामद की गई। मृतक की पहचान रामानाथ दास के रूप में हुई है, जो पूर्व में टीजीएस के कर्मचारी रह चुके थे और फिलहाल ईएसएस ले चुके थे।जानकारी के अनुसार रामानाथ दास अपने पुत्र मनसा दास के साथ उक्त फ्लैट में रहते थे।घटना की सूचना मिलते ही टाटा स्टील के सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे और गम्हरिया थाना को सूचित किया। इसके बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार शव नग्न अवस्था में था, मृतक का लिंग कटा हुआ था तथा चेहरा पूरी तरह कुचला हुआ मिला, जिससे हत्या की नृशंसता का अंदाजा लगाया जा रहा है।पुलिस ने मृतक के पुत्र मनसा दास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि हत्या पुत्र द्वारा ही की गई हो सकती है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से मामले की गहन जांच में जुटी है। बाईट: समीर सवैया, एसडीपीओ सरायकेला
- #BREAKING_NEWS गोला प्रखंड के चोपादारू गांव मे एक जंगली हाथी की मौत जांच मे जुटी वन विभाग की टीम1
- 12 दिनों से लापता अंश और अंशिका को ढूंढने में पुलिस समर्थ,बीजेपी कार्यकर्ताओं ने किया S.S.P ऑफिस का घेराव।1
- *लापता अंश-अंशिका मिले रामगढ़ के चितरपुर में, दो लोग भी गिरफ्तार* लापता अंश-अंशिका का सुराग मिल गया है। मिली जानकारी के अनुसार दोनों भाई बहन रामगढ़ के चितरपुर में है। उन्हें लेने के लिए रांची से SP रवाना हो चुके हैं। दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।1
- झारखंड में आज भी परंपरागत और रोचक खेल है 'मुर्गा लड़ाई'। झारखंड के जनजातीय ओर ग्रामीण इलाकों में लगने वाले ग्रामीण हाट-बाजारों के अलावा कई अन्य स्थानों पर आज भी एक परंपरागत खेल 'मुर्गा लड़ाई' बेहद लोकप्रिय है। इसमें हारने वाला मुर्गा जीतने वाले मुर्गा के मालिक को मिल जाता, कई जिलों में इस लड़ाई को आदिवासियों की संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है. इस छेत्र के समाज के ग्रामीणों में ऐसी मान्यता है कि उनकी कई पीढ़ियों से ये मुर्गा लड़ाई म हुदा के भदवार टाँड़ राजा के जमाने होता आ रहा है। सबसे बड़ी बात है लाखो की संख्या में लोग आते है कोई अपनी घर परिवार को चलाने के लिए ठेला लगता है तो कोई कपड़ा बेचता है तो कोई गन्ना तो कोई होटल खोलकर अपना रोजगार करता है कुछ घंटों के इस मैले में। ये मुर्गा लड़ाई कोई भी कमिटी नही करती ओर न कोई इसका आयोजन कर्ता होता है झारखंड के हर जिले के अलावा उससे सटे कई राज्यो के लोग इस मेले में आते है। जिसे लोग बावड़ी मेला कहते है। करीब 20 फुट के घेरे में दो मुर्गो की लड़ाई होती है. लड़ाई के दौरान मुर्गे की पैंतरेबाजी देखने लायक होती है. लड़ाई में एक चक्र अमूमन सात से 10 मिनट तक चलता है. लड़ाई शुरू होने से पहले और लड़ाई के दौरान लोग मुर्गो पर दांव लगाते हैं. सट्टेबाज लोगों को उकसाते हुए चारों तरफ घूमते रहते हैं. इस दौरान मुर्गे को उत्साहित करने के लिए मुर्गा का मालिक तरह-तरह की आवाजें निकालता रहता है, जिसके बाद मुर्गा और खतरनाक हो जाता है. मुर्गा लड़ाई के लिए मुर्गा पालने के शौकीन लड़ाई में प्रशिक्षित मुर्गे उतारे जाते हैं. लड़ने के लिए तैयार मुर्गे के एक पैर में 'कत्थी' बांधा जाता है ऐसा नहीं कि यह कत्थी कोई व्यक्ति बांध सकता है. इसके बांधने की भी अपनी कला है. कत्थी बांधने का कार्य करने वालों को 'कातकीर' कहा जाता है जो इस कला में माहिर होता है. मुर्गे आपस में कत्थी द्वारा एक दूसरे पर वार करते रहते हैं. इस दौरान मुर्गा लहुलूहान हो जाता है. जो मुर्गा गिर या बैठ जाता इस लड़ाई में तभी समाप्त होती है जब तक मुर्गा घायल न हो जाए या मैदान छोड़कर भाग जाए. तब तक जीत हार का मान्य नही होता। जानकार बताते हैं कि मुर्गा को लड़ाकू बनाने के लिए खास तौर पर न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है बल्कि उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. लड़ाई के लिए तैयार किए जाने वाले मुर्गे को ताकतवर बनाने के लिए उन्हें सूखी मछली का घोल, किशमिश, उबला हुआ मक्का और विटामिन के इंजेक्शन तक दिए जाते हैं.1
- रांची के रहने वाले sho दिल्ली पुलिस प्रभाँशु जी के आवास पर सम्मान किया गया... लोंगो कि करते है मदद1
- धनबाद कोयलांचल में मकर संक्रांति 2 दिन होने के कारण लोगों में अजमंजश देखी गई लेकिन बाजारों में लोगों की भीड़ देखने को बनती है लोग दही चूड़ा अच्छा तिलकुट एवं अन्य सामग्री लेने के लिए दुकानों में जुटे आइए हम आपको दिखाते हैं तिलकुट किस प्रकार बनता है और आपके घर तक पहुंचता है हमने इस संबंध में कई दुकानदारों से बात की तो उन्होंने क्या कुछ कहा आइए जानते हैं इस खबर में1
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- बाघमारा क्षेत्र के बाघमारा क्षेत्र के कतरास स्थित जी एन एम प्लस टू खेल मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया इसमें आगे क्या कुछ हुआ लिए जानते हैं इस खबर में1
- Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है दबाव पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!4