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बाघमारा क्षेत्र के बाघमारा क्षेत्र के कतरास स्थित जी एन एम प्लस टू खेल मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया इसमें आगे क्या कुछ हुआ लिए जानते हैं इस खबर में

3 hrs ago
user_संतोष कुमार दे
संतोष कुमार दे
Journalist Baghmara-Cum-Katras, Dhanbad•
3 hrs ago

बाघमारा क्षेत्र के बाघमारा क्षेत्र के कतरास स्थित जी एन एम प्लस टू खेल मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया इसमें आगे क्या कुछ हुआ लिए जानते हैं इस खबर में

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  • बाघमारा क्षेत्र के बाघमारा क्षेत्र के कतरास स्थित जी एन एम प्लस टू खेल मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया इसमें आगे क्या कुछ हुआ लिए जानते हैं इस खबर में
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    बाघमारा क्षेत्र के बाघमारा क्षेत्र के कतरास स्थित जी एन एम प्लस टू खेल मैदान में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया इसमें आगे क्या कुछ हुआ लिए जानते हैं इस खबर में
    user_संतोष कुमार दे
    संतोष कुमार दे
    Journalist Baghmara-Cum-Katras, Dhanbad•
    3 hrs ago
  • Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है दबाव पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!
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    Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है  दबाव पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता  है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!
    user_Md Afroz
    Md Afroz
    बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    9 hrs ago
  • झारखंड में आज भी परंपरागत और रोचक खेल है 'मुर्गा लड़ाई'। झारखंड के जनजातीय ओर ग्रामीण इलाकों में लगने वाले ग्रामीण हाट-बाजारों के अलावा कई अन्य स्थानों पर आज भी एक परंपरागत खेल 'मुर्गा लड़ाई' बेहद लोकप्रिय है। इसमें हारने वाला मुर्गा जीतने वाले मुर्गा के मालिक को मिल जाता, कई जिलों में इस लड़ाई को आदिवासियों की संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है. इस छेत्र के समाज के ग्रामीणों में ऐसी मान्यता है कि उनकी कई पीढ़ियों से ये मुर्गा लड़ाई म हुदा के भदवार टाँड़ राजा के जमाने होता आ रहा है। सबसे बड़ी बात है लाखो की संख्या में लोग आते है कोई अपनी घर परिवार को चलाने के लिए ठेला लगता है तो कोई कपड़ा बेचता है तो कोई गन्ना तो कोई होटल खोलकर अपना रोजगार करता है कुछ घंटों के इस मैले में। ये मुर्गा लड़ाई कोई भी कमिटी नही करती ओर न कोई इसका आयोजन कर्ता होता है झारखंड के हर जिले के अलावा उससे सटे कई राज्यो के लोग इस मेले में आते है। जिसे लोग बावड़ी मेला कहते है। करीब 20 फुट के घेरे में दो मुर्गो की लड़ाई होती है. लड़ाई के दौरान मुर्गे की पैंतरेबाजी देखने लायक होती है. लड़ाई में एक चक्र अमूमन सात से 10 मिनट तक चलता है. लड़ाई शुरू होने से पहले और लड़ाई के दौरान लोग मुर्गो पर दांव लगाते हैं. सट्टेबाज लोगों को उकसाते हुए चारों तरफ घूमते रहते हैं. इस दौरान मुर्गे को उत्साहित करने के लिए मुर्गा का मालिक तरह-तरह की आवाजें निकालता रहता है, जिसके बाद मुर्गा और खतरनाक हो जाता है. मुर्गा लड़ाई के लिए मुर्गा पालने के शौकीन लड़ाई में प्रशिक्षित मुर्गे उतारे जाते हैं. लड़ने के लिए तैयार मुर्गे के एक पैर में 'कत्थी' बांधा जाता है ऐसा नहीं कि यह कत्थी कोई व्यक्ति बांध सकता है. इसके बांधने की भी अपनी कला है. कत्थी बांधने का कार्य करने वालों को 'कातकीर' कहा जाता है जो इस कला में माहिर होता है. मुर्गे आपस में कत्थी द्वारा एक दूसरे पर वार करते रहते हैं. इस दौरान मुर्गा लहुलूहान हो जाता है. जो मुर्गा गिर या बैठ जाता इस लड़ाई में तभी समाप्त होती है जब तक मुर्गा घायल न हो जाए या मैदान छोड़कर भाग जाए. तब तक जीत हार का मान्य नही होता। जानकार बताते हैं कि मुर्गा को लड़ाकू बनाने के लिए खास तौर पर न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है बल्कि उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. लड़ाई के लिए तैयार किए जाने वाले मुर्गे को ताकतवर बनाने के लिए उन्हें सूखी मछली का घोल, किशमिश, उबला हुआ मक्का और विटामिन के इंजेक्शन तक दिए जाते हैं.
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    झारखंड में आज भी परंपरागत और रोचक खेल है 'मुर्गा लड़ाई'।
झारखंड के जनजातीय ओर ग्रामीण इलाकों में लगने वाले ग्रामीण हाट-बाजारों के अलावा कई अन्य स्थानों पर आज भी एक परंपरागत खेल 'मुर्गा लड़ाई' बेहद लोकप्रिय है। इसमें हारने वाला मुर्गा जीतने वाले मुर्गा के मालिक को मिल जाता, कई जिलों में इस लड़ाई को आदिवासियों की संस्कृति से जोड़कर देखा जाता है. इस छेत्र के समाज के ग्रामीणों में ऐसी मान्यता है कि उनकी कई पीढ़ियों से ये मुर्गा लड़ाई म हुदा के भदवार टाँड़ राजा के जमाने होता आ रहा है। सबसे बड़ी बात है लाखो की संख्या में लोग आते है कोई अपनी घर परिवार को चलाने के लिए ठेला लगता है तो कोई कपड़ा बेचता है तो कोई गन्ना तो कोई होटल खोलकर अपना रोजगार करता है कुछ घंटों के इस मैले में। ये मुर्गा लड़ाई कोई भी कमिटी नही करती ओर न कोई इसका आयोजन कर्ता होता है झारखंड के हर जिले के अलावा उससे सटे कई राज्यो के लोग इस मेले में आते है।  जिसे लोग बावड़ी मेला कहते है।
करीब 20 फुट के घेरे में दो मुर्गो की लड़ाई होती है. लड़ाई के दौरान मुर्गे की पैंतरेबाजी देखने लायक होती है. लड़ाई में एक चक्र अमूमन सात से 10 मिनट तक चलता है. लड़ाई शुरू होने से पहले और लड़ाई के दौरान लोग मुर्गो पर दांव लगाते हैं. सट्टेबाज लोगों को उकसाते हुए चारों तरफ घूमते रहते हैं. इस दौरान मुर्गे को उत्साहित करने के लिए मुर्गा का मालिक तरह-तरह की आवाजें निकालता रहता है, जिसके बाद मुर्गा और खतरनाक हो जाता है. मुर्गा लड़ाई के लिए मुर्गा पालने के शौकीन लड़ाई में प्रशिक्षित मुर्गे उतारे जाते हैं. लड़ने के लिए तैयार मुर्गे के एक पैर में 'कत्थी' बांधा जाता है ऐसा नहीं कि यह कत्थी कोई व्यक्ति बांध सकता है. इसके बांधने की भी अपनी कला है. कत्थी बांधने का कार्य करने वालों को 'कातकीर' कहा जाता है जो इस कला में माहिर होता है. मुर्गे आपस में कत्थी द्वारा एक दूसरे पर वार करते रहते हैं. इस दौरान मुर्गा लहुलूहान हो जाता है. जो मुर्गा गिर या बैठ जाता इस लड़ाई में तभी समाप्त होती है जब तक मुर्गा घायल न हो जाए या मैदान छोड़कर भाग जाए. तब तक जीत हार का मान्य नही होता। जानकार बताते हैं कि मुर्गा को लड़ाकू बनाने के लिए खास तौर पर न केवल प्रशिक्षण दिया जाता है बल्कि उसके खान-पान पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. लड़ाई के लिए तैयार किए जाने वाले मुर्गे को ताकतवर बनाने के लिए उन्हें सूखी मछली का घोल, किशमिश, उबला हुआ मक्का और विटामिन के इंजेक्शन तक दिए जाते हैं.
    user_Raushan Journalist
    Raushan Journalist
    Journalist धनबाद-कम-केंदुआडीह-कम-जागता, धनबाद, झारखंड•
    42 min ago
  • मासूम लड़की और भेड़िया
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    मासूम लड़की और भेड़िया
    user_Journalist - Roshan Gupta
    Journalist - Roshan Gupta
    Journalist Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    11 hrs ago
  • गलास या बोतल में पानी डालते समय गिरना आम समस्या है, लेकिन इसके पीछे साफ़ विज्ञान काम करता है। सही एंगल पर बर्तन झुकाने और ग्लास को पास रखने से हवा का गैप कम होता है, जिससे पानी की धार नियंत्रित रहती है। सतह तनाव और फ्लो रेट संतुलित होने पर पानी साफ़ तरीके से गिरता है। यह छोटा सा तरीका रोज़मर्रा की गंदगी से बचा सकता है। #ScienceHack #PhysicsTrick #LifeHacks #EverydayScience #FluidDynamics #SmartTips
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    गलास या बोतल में पानी डालते समय गिरना आम समस्या है, लेकिन इसके पीछे साफ़ विज्ञान काम करता है। सही एंगल पर बर्तन झुकाने और ग्लास को पास रखने से हवा का गैप कम होता है, जिससे पानी की धार नियंत्रित रहती है। सतह तनाव और फ्लो रेट संतुलित होने पर पानी साफ़ तरीके से गिरता है। यह छोटा सा तरीका रोज़मर्रा की गंदगी से बचा सकता है।
#ScienceHack #PhysicsTrick #LifeHacks #EverydayScience #FluidDynamics #SmartTips
    user_द संक्षेप
    द संक्षेप
    Media company Dhanbad-Cum-Kenduadih-Cum-Jagata, Jharkhand•
    23 hrs ago
  • ग्रामीणों के आंदोलन का असर: नरेश रजवार हादसे में कंपनी ने दिया मुआवजा
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    ग्रामीणों के आंदोलन का असर: नरेश रजवार हादसे में कंपनी ने दिया मुआवजा
    user_Independent Bharat
    Independent Bharat
    Journalist चंदनकियारी, बोकारो, झारखंड•
    13 hrs ago
  • Post by Birendar Tudu
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    Post by Birendar Tudu
    user_Birendar Tudu
    Birendar Tudu
    Video Creator Dumri, Giridih•
    12 hrs ago
  • युवाओं को मिला प्रेरणा संदेश | स्वामी विवेकानंद जयंती पर अमर कुमार बाउरी का संबोधन
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    युवाओं को मिला प्रेरणा संदेश | स्वामी विवेकानंद जयंती पर अमर कुमार बाउरी का संबोधन
    user_Independent Bharat
    Independent Bharat
    Journalist चंदनकियारी, बोकारो, झारखंड•
    14 hrs ago
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