सोमवार को अस्पताल चौराहे पर प्रोफेसर डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन कर सचिव और प्राचार्य का पुतला दहन किया गया। पी.एम.एस. कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। कॉलेज के सचिव डॉ. रघुनाथ प्रसाद कच्छवे और प्रभारी प्राचार्य डॉ. बलराम प्रसाद सिंह पर अनुदान वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाते हुए सोमवार को अस्पताल चौराहे पर प्रोफेसर डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन कर सचिव और प्राचार्य का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दोनों की मिलीभगत से करीब ढाई करोड़ रुपये के अनुदान में अनियमितता हुई है। कॉलेज के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी अनुदान और सुरक्षा कोष की राशि के वितरण में भारी गड़बड़ी की गई है, जिससे अधिकांश कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद सचिव द्वारा आमसभा नहीं बुलाई जा रही है, जिससे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में कुलपति, राज्यपाल (कुलाधिपति) समेत संबंधित अधिकारियों को जांच के लिए आवेदन भी भेजा गया है। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने साफ कहा कि यह आंदोलन सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण वितरण के लिए है। शिक्षकों ने कहा कि हम लोग काफी समय से लड़ रहे हैं ताकि सबके साथ न्याय हो। लेकिन अनुदान का बंटवारा बंदरबांट की तरह किया गया है—जो पक्ष में हैं उन्हें ज्यादा, और बाकी 70% शिक्षकों को बहुत कम दिया गया। सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह ने भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ शिक्षकों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मियों को ज्यादा राशि दी गई, जिससे असंतोष और बढ़ गया है। वहीं, केमिस्ट्री विभाग की डॉ. कुमारी प्रियंका सिन्हा ने इसे व्यापक भ्रष्टाचार करार देते हुए कहा कि भविष्य में अनुदान का वितरण सरकारी गाइडलाइन के अनुसार पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई और समान रूप से अनुदान वितरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह प्रदर्शन सचिव और प्राचार्य के खिलाफ है। फिलहाल, कॉलेज प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब सभी की नजर संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी है।इंग्लिश विभाग के सहायक प्रोफेसर सूर्यकांत वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई शिक्षकों को उनके हक का 50 से 70 प्रतिशत कम अनुदान मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को भी राशि दी गई। उन्होंने कहा कि 2007 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी भुगतान किया गया, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां शिक्षकों को 30 से 50 हजार रुपये मिले, वहीं कुछ चपरासियों को डेढ़ लाख रुपये तक दिए गए और उनसे भी राशि वापस ली गई, जो घोर अनियमितता को दर्शाता है। इस आंदोलन में डॉ संजय कुमार, डॉ अनिल कुमार, डॉ प्रियंका कुमारी, समेत सैकड़ों शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीगण मौजूद रहें।
सोमवार को अस्पताल चौराहे पर प्रोफेसर डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन कर सचिव और प्राचार्य का पुतला दहन किया गया। पी.एम.एस. कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। कॉलेज के सचिव डॉ. रघुनाथ प्रसाद कच्छवे और प्रभारी प्राचार्य डॉ. बलराम प्रसाद सिंह पर अनुदान वितरण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और पक्षपात के आरोप लगाते हुए सोमवार को अस्पताल चौराहे पर प्रोफेसर डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन कर सचिव और प्राचार्य का पुतला दहन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दोनों की मिलीभगत से करीब ढाई करोड़ रुपये के अनुदान में अनियमितता हुई है। कॉलेज के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी अनुदान और सुरक्षा कोष
की राशि के वितरण में भारी गड़बड़ी की गई है, जिससे अधिकांश कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद सचिव द्वारा आमसभा नहीं बुलाई जा रही है, जिससे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस संबंध में कुलपति, राज्यपाल (कुलाधिपति) समेत संबंधित अधिकारियों को जांच के लिए आवेदन भी भेजा गया है। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने साफ कहा कि यह आंदोलन सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण वितरण के लिए है। शिक्षकों ने कहा कि हम लोग काफी समय से लड़ रहे हैं ताकि सबके साथ न्याय हो। लेकिन अनुदान का बंटवारा बंदरबांट की तरह किया गया है—जो पक्ष में हैं उन्हें ज्यादा, और बाकी 70% शिक्षकों को बहुत कम दिया गया। सेवानिवृत्त
विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह ने भी आरोप लगाया कि वरिष्ठ शिक्षकों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मियों को ज्यादा राशि दी गई, जिससे असंतोष और बढ़ गया है। वहीं, केमिस्ट्री विभाग की डॉ. कुमारी प्रियंका सिन्हा ने इसे व्यापक भ्रष्टाचार करार देते हुए कहा कि भविष्य में अनुदान का वितरण सरकारी गाइडलाइन के अनुसार पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई और समान रूप से अनुदान वितरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह प्रदर्शन सचिव और प्राचार्य के खिलाफ है। फिलहाल, कॉलेज प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब
सभी की नजर संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी है।इंग्लिश विभाग के सहायक प्रोफेसर सूर्यकांत वर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई शिक्षकों को उनके हक का 50 से 70 प्रतिशत कम अनुदान मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को भी राशि दी गई। उन्होंने कहा कि 2007 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी भुगतान किया गया, जो नियमों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां शिक्षकों को 30 से 50 हजार रुपये मिले, वहीं कुछ चपरासियों को डेढ़ लाख रुपये तक दिए गए और उनसे भी राशि वापस ली गई, जो घोर अनियमितता को दर्शाता है। इस आंदोलन में डॉ संजय कुमार, डॉ अनिल कुमार, डॉ प्रियंका कुमारी, समेत सैकड़ों शिक्षक एवं अन्य कर्मचारीगण मौजूद रहें।
- बिहारशरीफ के P.M.S. College में इन दिनों विवाद गहराता जा रहा है। कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी प्रेस-कॅफरेश में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग कॉलेज के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। बताया गया है कि गाली-गलौज और दबाव की वजह से कॉलेज के सचिव, उनके परिवार के सदस्य, प्राचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रेस नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग कॉलेज पर अवैध कब्जा करने की योजना बना रहे हैं और प्राचार्य के साथ मारपीट कर उन्हें हटाने की साजिश की बात कही गई है। कॉलेज प्रशासन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है।1
- बिहारशरीफ के P.M.S. College में इन दिनों विवाद गहराता जा रहा है। कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी प्रेस-कॅफरेश में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग कॉलेज के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। बताया गया है कि गाली-गलौज और दबाव की वजह से कॉलेज के सचिव, उनके परिवार के सदस्य, प्राचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रेस नोट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग कॉलेज पर अवैध कब्जा करने की योजना बना रहे हैं और प्राचार्य के साथ मारपीट कर उन्हें हटाने की साजिश की बात कही गई है। कॉलेज प्रशासन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है।1
- एंकर, नालंदा जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। बिहार शरीफ में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर के बढ़े दामों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन कर विरोध जताया। बताया जा रहा है कि जिला कांग्रेस कार्यालय से जुलूस निकालकर कार्यकर्ता अस्पताल चौराहा पहुंचे, जहां जमकर नारेबाजी की गई और प्रधानमंत्री का पुतला जलाया गया। इस दौरान नालंदा जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अचानक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता परेशान हो गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिले के कई इलाकों में गैस की होम डिलीवरी नहीं हो पा रही है, जिसके कारण लोगों को लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि बढ़ी हुई गैस कीमतों को तुरंत वापस लिया जाए और उपभोक्ताओं के घर-घर तक गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए। फिलहाल इस विरोध प्रदर्शन के बाद इलाके में सियासी हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।1
- कुरान पर आपत्तिजनक पोस्ट से बवाल, आरोपी फरार—पुलिस सख्त कार्रवाई में जुटी1
- pms कॉलेज पर क्या होगा एक परिवार का कब्जा नालंदा1
- यूजीसी लागू करने के लिए रोड पर उतरे और कुछ लोग को अभी रियासत में रखा गया जो कोतवाली थाना पटना में।1
- आज का ताजा खबर पटना कोतवाली थाना यूजीसी रिलेशन लागू करने के लिए भीम आर्मी आज समाज पार्टी और विभिन्न प्रकार के संगठन वाले पटना में धरना प्रदर्शन किया उसी के दरबार में कोतवाली थाना अभी कुछ लोगों को अमर आजाद पासवान और प्रेम पासवान और उनके बहुत सारे ऐसे कार्यकर्ता को अभी हिरासत में रखे हुए हैं1
- बिहारशरीफ में जियोमार्ट के डिलीवरी बॉय द्वारा की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर सभी डिलीवरी कर्मी एकजुट होकर काम बंद कर हड़ताल पर चले गए थे, जिससे डिलीवरी सेवाएं प्रभावित हो गई थीं। इस संबंध में जानकारी देते हुए युवा नेता बंटी कुमार ने बताया कि डिलीवरी बॉय की प्रमुख मांगों को कंपनी ने मान लिया है। इसके बाद सभी कर्मियों ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। मांगें पूरी होने की खुशी में डिलीवरी बॉय ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी और मिठाइयां खिलाकर खुशी का इजहार किया। उन्होंने कहा कि एकजुटता के कारण ही यह संभव हो पाया है और उनकी आवाज को सुना गया। इस घटनाक्रम के बाद अब जियोमार्ट की डिलीवरी सेवाएं फिर से सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।4