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सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं लेख: अजीत मिश्रा (खोजी) कहते हैं कि अस्पताल 'धरती का स्वर्ग' और डॉक्टर 'भगवान' का रूप होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से आई एक वायरल वीडियो ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। अब अस्पताल 'स्वर्ग' तो नहीं, हाँ 'मयखाना' ज़रूर बन गए हैं। बांदा के एक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान 'डॉक्टर साहब' और उनके सहयोगियों की 'दारू पार्टी' का दृश्य देखकर लगता है कि यहाँ मरीजों की धड़कनें नापने के लिए स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि बोतलों के ढक्कन नापने का पैमाना इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर 'नशे' की नुमाइश हैरानी की बात यह नहीं है कि अस्पताल में शराब पी जा रही थी—भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस दौर में यह अब 'आम' बात लगने लगी है। असली तमाशा तो यह है कि इसे बाकायदा 'डॉ. सुशील' नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट किया गया। यानी सिस्टम का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि अब अपराध छिपकर नहीं, बल्कि 'रील' बनाकर और 'लाइक-शेयर' बटोरने के लिए किया जा रहा है। शायद डॉक्टर साहब को लगा होगा कि सफेद कोट पहनकर जाम छलकाते हुए वे किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लगेंगे। जब डॉक्टर ही 'टल्ली' हो, तो मरीज का क्या? अब जरा उस मरीज की कल्पना कीजिए जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में आधी रात को अस्पताल पहुँचता है। उसे क्या पता कि जो हाथ उसका ऑपरेशन करेंगे या सुई लगाएंगे, वो खुद लड़खड़ा रहे हैं। इलाज या खिलवाड़? शराब के नशे में धुत डॉक्टर मरीज को दवा देगा या जहर, इसकी गारंटी तो अब भगवान भी नहीं ले सकते। सरकारी संरक्षण का गुरूर: ये वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि इन 'सफेदपोशों' को प्रशासन का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि जाँच होगी, कमेटी बैठेगी और फिर मामला 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया जाएगा। सिस्टम की बेहोशी का इलाज कौन करेगा? बांदा की यह घटना केवल एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट तो डकारती है, लेकिन अस्पतालों में अनुशासन कायम नहीं रख पाती। क्या सरकारी अस्पताल अब केवल रसूखदारों की अय्याशी के अड्डे बनकर रह गए हैं? कड़वा सवाल: > "साहब! अगर डॉक्टर ही नशे में रहेगा, तो मरीज को होश में लाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अब अस्पतालों के बाहर 'दवा' के साथ-साथ 'चखने' की दुकान खोलना ही बाकी रह गया है?" प्रशासन को चाहिए कि केवल सस्पेंशन का 'नाटक' न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी 'डॉ. सुशील' की हिम्मत अस्पताल को बार (Bar) बनाने की न हो। वरना जनता तो यही कहेगी— "मरीज का राम नाम सत्य है, क्योंकि डॉक्टर साहब अभी 'मस्त' हैं।" बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट

6 hrs ago
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
6 hrs ago

सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं लेख: अजीत मिश्रा (खोजी) कहते हैं कि अस्पताल 'धरती का स्वर्ग' और डॉक्टर 'भगवान' का रूप होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से आई एक वायरल वीडियो ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। अब अस्पताल 'स्वर्ग' तो नहीं, हाँ 'मयखाना' ज़रूर बन गए हैं। बांदा के एक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान 'डॉक्टर साहब' और उनके सहयोगियों की 'दारू पार्टी' का दृश्य देखकर लगता है कि यहाँ मरीजों की धड़कनें नापने के लिए स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि बोतलों के ढक्कन नापने का पैमाना इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर 'नशे' की नुमाइश हैरानी की बात यह नहीं है कि अस्पताल में शराब पी जा रही थी—भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस दौर में यह अब 'आम' बात लगने लगी है। असली तमाशा तो यह है कि इसे बाकायदा 'डॉ. सुशील' नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट किया गया। यानी सिस्टम का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि अब अपराध छिपकर नहीं, बल्कि 'रील' बनाकर और 'लाइक-शेयर' बटोरने के लिए किया जा रहा है। शायद डॉक्टर साहब को लगा होगा कि सफेद कोट पहनकर जाम छलकाते हुए वे किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लगेंगे। जब डॉक्टर ही 'टल्ली' हो, तो मरीज का क्या? अब जरा उस मरीज की कल्पना कीजिए जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में आधी रात को अस्पताल पहुँचता है। उसे क्या पता कि जो हाथ उसका ऑपरेशन करेंगे या सुई लगाएंगे, वो खुद लड़खड़ा रहे हैं। इलाज या खिलवाड़? शराब के नशे में धुत डॉक्टर मरीज को दवा देगा या जहर, इसकी गारंटी तो अब भगवान भी नहीं ले सकते। सरकारी संरक्षण का गुरूर: ये वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि इन 'सफेदपोशों' को प्रशासन का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि जाँच होगी, कमेटी बैठेगी और फिर मामला 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया जाएगा। सिस्टम की बेहोशी का इलाज कौन करेगा? बांदा की यह घटना केवल एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट तो डकारती है, लेकिन अस्पतालों में अनुशासन कायम नहीं रख पाती। क्या सरकारी अस्पताल अब केवल रसूखदारों की अय्याशी के अड्डे बनकर रह गए हैं? कड़वा सवाल: > "साहब! अगर डॉक्टर ही नशे में रहेगा, तो मरीज को होश में लाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अब अस्पतालों के बाहर 'दवा' के साथ-साथ 'चखने' की दुकान खोलना ही बाकी रह गया है?" प्रशासन को चाहिए कि केवल सस्पेंशन का 'नाटक' न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी 'डॉ. सुशील' की हिम्मत अस्पताल को बार (Bar) बनाने की न हो। वरना जनता तो यही कहेगी— "मरीज का राम नाम सत्य है, क्योंकि डॉक्टर साहब अभी 'मस्त' हैं।" बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • 🙏👍
    1
    🙏👍
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    3 hrs ago
  • सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं लेख: अजीत मिश्रा (खोजी) कहते हैं कि अस्पताल 'धरती का स्वर्ग' और डॉक्टर 'भगवान' का रूप होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से आई एक वायरल वीडियो ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। अब अस्पताल 'स्वर्ग' तो नहीं, हाँ 'मयखाना' ज़रूर बन गए हैं। बांदा के एक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान 'डॉक्टर साहब' और उनके सहयोगियों की 'दारू पार्टी' का दृश्य देखकर लगता है कि यहाँ मरीजों की धड़कनें नापने के लिए स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि बोतलों के ढक्कन नापने का पैमाना इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर 'नशे' की नुमाइश हैरानी की बात यह नहीं है कि अस्पताल में शराब पी जा रही थी—भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस दौर में यह अब 'आम' बात लगने लगी है। असली तमाशा तो यह है कि इसे बाकायदा 'डॉ. सुशील' नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट किया गया। यानी सिस्टम का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि अब अपराध छिपकर नहीं, बल्कि 'रील' बनाकर और 'लाइक-शेयर' बटोरने के लिए किया जा रहा है। शायद डॉक्टर साहब को लगा होगा कि सफेद कोट पहनकर जाम छलकाते हुए वे किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लगेंगे। जब डॉक्टर ही 'टल्ली' हो, तो मरीज का क्या? अब जरा उस मरीज की कल्पना कीजिए जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में आधी रात को अस्पताल पहुँचता है। उसे क्या पता कि जो हाथ उसका ऑपरेशन करेंगे या सुई लगाएंगे, वो खुद लड़खड़ा रहे हैं। इलाज या खिलवाड़? शराब के नशे में धुत डॉक्टर मरीज को दवा देगा या जहर, इसकी गारंटी तो अब भगवान भी नहीं ले सकते। सरकारी संरक्षण का गुरूर: ये वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि इन 'सफेदपोशों' को प्रशासन का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि जाँच होगी, कमेटी बैठेगी और फिर मामला 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया जाएगा। सिस्टम की बेहोशी का इलाज कौन करेगा? बांदा की यह घटना केवल एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट तो डकारती है, लेकिन अस्पतालों में अनुशासन कायम नहीं रख पाती। क्या सरकारी अस्पताल अब केवल रसूखदारों की अय्याशी के अड्डे बनकर रह गए हैं? कड़वा सवाल: > "साहब! अगर डॉक्टर ही नशे में रहेगा, तो मरीज को होश में लाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अब अस्पतालों के बाहर 'दवा' के साथ-साथ 'चखने' की दुकान खोलना ही बाकी रह गया है?" प्रशासन को चाहिए कि केवल सस्पेंशन का 'नाटक' न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी 'डॉ. सुशील' की हिम्मत अस्पताल को बार (Bar) बनाने की न हो। वरना जनता तो यही कहेगी— "मरीज का राम नाम सत्य है, क्योंकि डॉक्टर साहब अभी 'मस्त' हैं।" बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट
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    सरकारी अस्पताल या 'मयखाना'? जहाँ इलाज से पहले 'जाम' टकराते हैं
लेख: अजीत मिश्रा (खोजी)
कहते हैं कि अस्पताल 'धरती का स्वर्ग' और डॉक्टर 'भगवान' का रूप होते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा से आई एक वायरल वीडियो ने इस परिभाषा को ही बदल दिया है। अब अस्पताल 'स्वर्ग' तो नहीं, हाँ 'मयखाना' ज़रूर बन गए हैं। बांदा के एक सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान 'डॉक्टर साहब' और उनके सहयोगियों की 'दारू पार्टी' का दृश्य देखकर लगता है कि यहाँ मरीजों की धड़कनें नापने के लिए स्टेथोस्कोप नहीं, बल्कि बोतलों के ढक्कन नापने का पैमाना इस्तेमाल होता है।
सोशल मीडिया पर 'नशे' की नुमाइश
हैरानी की बात यह नहीं है कि अस्पताल में शराब पी जा रही थी—भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस दौर में यह अब 'आम' बात लगने लगी है। असली तमाशा तो यह है कि इसे बाकायदा 'डॉ. सुशील' नाम के इंस्टाग्राम हैंडल से पोस्ट किया गया। यानी सिस्टम का खौफ इतना खत्म हो चुका है कि अब अपराध छिपकर नहीं, बल्कि 'रील' बनाकर और 'लाइक-शेयर' बटोरने के लिए किया जा रहा है। शायद डॉक्टर साहब को लगा होगा कि सफेद कोट पहनकर जाम छलकाते हुए वे किसी फिल्म के विलेन से कम नहीं लगेंगे।
जब डॉक्टर ही 'टल्ली' हो, तो मरीज का क्या?
अब जरा उस मरीज की कल्पना कीजिए जो अपनी जान बचाने की उम्मीद में आधी रात को अस्पताल पहुँचता है। उसे क्या पता कि जो हाथ उसका ऑपरेशन करेंगे या सुई लगाएंगे, वो खुद लड़खड़ा रहे हैं।
इलाज या खिलवाड़? शराब के नशे में धुत डॉक्टर मरीज को दवा देगा या जहर, इसकी गारंटी तो अब भगवान भी नहीं ले सकते।
सरकारी संरक्षण का गुरूर: ये वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि इन 'सफेदपोशों' को प्रशासन का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि जाँच होगी, कमेटी बैठेगी और फिर मामला 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया जाएगा।
सिस्टम की बेहोशी का इलाज कौन करेगा?
बांदा की यह घटना केवल एक अस्पताल की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर तमाचा है जो स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों का बजट तो डकारती है, लेकिन अस्पतालों में अनुशासन कायम नहीं रख पाती। क्या सरकारी अस्पताल अब केवल रसूखदारों की अय्याशी के अड्डे बनकर रह गए हैं?
कड़वा सवाल: > "साहब! अगर डॉक्टर ही नशे में रहेगा, तो मरीज को होश में लाने की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या अब अस्पतालों के बाहर 'दवा' के साथ-साथ 'चखने' की दुकान खोलना ही बाकी रह गया है?"
प्रशासन को चाहिए कि केवल सस्पेंशन का 'नाटक' न करे, बल्कि ऐसी कठोर कार्रवाई करे कि भविष्य में किसी भी 'डॉ. सुशील' की हिम्मत अस्पताल को बार (Bar) बनाने की न हो। वरना जनता तो यही कहेगी— "मरीज का राम नाम सत्य है, क्योंकि डॉक्टर साहब अभी 'मस्त' हैं।"
बस्ती ब्यूरो रिपोर्ट
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *पब्लिक का भी ग़ज़ब हाल है!* *हापुड में रेलवे लाइन के पास पालीथीन में महिला की हेयर विग पड़ी थीं।* *किसी ने पुलिस को सूचना सरका दी,रेलवे लाइन के पास "महिला का सिर कटा पड़ा है"।* *पुलिस पहुंची,जांच की तो कटे सर का रहस्य पुलिस की समझ में आ गया।* *मौके पर बरामद स्टाइलिश हेयर विग को देखकर पुलिस भी हंसी नहीं रोक पाई।*
    1
    *पब्लिक का भी ग़ज़ब हाल है!*
*हापुड में रेलवे लाइन के पास पालीथीन में महिला की हेयर विग पड़ी थीं।*
*किसी ने पुलिस को सूचना सरका दी,रेलवे लाइन के पास "महिला का सिर कटा पड़ा है"।*
*पुलिस पहुंची,जांच की तो कटे सर का रहस्य पुलिस की समझ में आ गया।*
*मौके पर बरामद स्टाइलिश हेयर विग को देखकर पुलिस भी हंसी नहीं रोक पाई।*
    user_Republic India live
    Republic India live
    हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by हरिशंकर पांडेय
    1
    Post by हरिशंकर पांडेय
    user_हरिशंकर पांडेय
    हरिशंकर पांडेय
    स्वतंत्र पत्रकारिता हर्रैया, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडेय सहित समस्त विवेचक, चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान क्षेत्राधिकारी ने लंबित विवेचनाओं की गहन समीक्षा करते हुए उनके शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति का भी विस्तार से मूल्यांकन किया गया। क्षेत्राधिकारी ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करने पर विशेष जोर दिया। इसके अतिरिक्त थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। #SantKabirNagar #MahuliThana #PoliceMeeting #ReviewMeeting #UPPolice #LawAndOrder #IGRS #SakshyaApp #YakshApp #PublicGrievance #CrimeControl #PoliceUpdate #BreakingNews #HindiNews #liveuponenews
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    संतकबीरनगर। 
पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर  संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडेय सहित समस्त विवेचक, चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान क्षेत्राधिकारी ने लंबित विवेचनाओं की गहन समीक्षा करते हुए उनके शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति का भी विस्तार से मूल्यांकन किया गया।
क्षेत्राधिकारी ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करने पर विशेष जोर दिया।
इसके अतिरिक्त थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
#SantKabirNagar #MahuliThana #PoliceMeeting #ReviewMeeting #UPPolice #LawAndOrder #IGRS #SakshyaApp #YakshApp #PublicGrievance #CrimeControl #PoliceUpdate #BreakingNews #HindiNews
#liveuponenews
    user_LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    LIVE UP ONE NEWS UTTAR PRADESH
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    15 min ago
  • धनघटा। पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समस्त विवेचकों एवं पुलिस कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडेय, समस्त चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे। बैठक के दौरान लंबित विवेचनाओं के निस्तारण की समीक्षा करते हुए उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। क्षेत्राधिकारी द्वारा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करें। बैठक के दौरान थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
    4
    धनघटा।
पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर  संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा  अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समस्त विवेचकों एवं पुलिस कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली  दुर्गेश कुमार पांडेय, समस्त चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान लंबित विवेचनाओं के निस्तारण की समीक्षा करते हुए उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
क्षेत्राधिकारी द्वारा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करें।
बैठक के दौरान थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
    user_Ashwini Kumar Pandey
    Ashwini Kumar Pandey
    पत्रकार Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    33 min ago
  • पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा द्वारा थाना महुली पर समीक्षा बैठक आयोजित* पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर *श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा श्री अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समस्त विवेचकों एवं पुलिस कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली श्री दुर्गेश कुमार पांडेय, समस्त चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।* बैठक के दौरान लंबित विवेचनाओं के निस्तारण की समीक्षा करते हुए उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। क्षेत्राधिकारी महोदय द्वारा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करें। बैठक के दौरान थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
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    पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा द्वारा थाना महुली पर समीक्षा बैठक आयोजित*
पुलिस अधीक्षक संत कबीर नगर *श्री संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी धनघटा श्री अभय नाथ मिश्र द्वारा थाना महुली पर समस्त विवेचकों एवं पुलिस कर्मियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। बैठक में थानाध्यक्ष महुली श्री दुर्गेश कुमार पांडेय, समस्त चौकी प्रभारी, हल्का प्रभारी, एसएसआई एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।*
बैठक के दौरान लंबित विवेचनाओं के निस्तारण की समीक्षा करते हुए उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आईजीआरएस (IGRS) पर प्राप्त शिकायतों, जनसुनवाई, ई-समन, साक्ष्य ऐप (Sakshya App) तथा यक्ष ऐप (Yaksh App) के उपयोग एवं प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
क्षेत्राधिकारी महोदय द्वारा सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि सभी प्रकरणों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करें तथा शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन की शिकायतों का त्वरित समाधान करें।
बैठक के दौरान थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
    user_Ramesh Dubey
    Ramesh Dubey
    पत्रकारिता Ghanghata, Sant Kabeer Nagar•
    52 min ago
  • 🙏सहयोग आपका,संर्घष हमारा।👍 "हमारी संस्था का एक ही सपना, ✍️पढ़ा लिखा हो समाज अपना"।
    1
    🙏सहयोग आपका,संर्घष हमारा।👍
"हमारी संस्था का एक ही सपना,
✍️पढ़ा लिखा हो समाज अपना"।
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    16 hrs ago
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