मनगवां टीआई समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित: एनडीपीएस कार्रवाई में शिकायत के बाद बड़ा एक्शन, “30 के खेला” से पहले भी हो चुकी है कार्रवाई रीवा। जिले के मनगवां थाने में की गई एनडीपीएस एक्ट एवं औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई के दौरान प्राप्त शिकायत पर पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। प्रारंभिक जांच में आचरण संदिग्ध और प्रथम दृष्टया भ्रष्ट पाए जाने पर कार्यवाहक निरीक्षक सहित दो आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों—गौरव राजपूत (पुलिस महानिरीक्षक), हेमंत चौहान (डीआईजी), शैलेन्द्र सिंह चौहान (पुलिस अधीक्षक) एवं संदीप मिश्रा (प्रभारी एसपी)—के निर्देशन में की गई जांच के बाद सामने आई है। क्या है मामला? जानकारी के अनुसार, थाना मनगवां में एनडीपीएस एक्ट और 5/13 औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में कार्रवाई की प्रक्रिया, जब्ती एवं अन्य बिंदुओं को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए थे। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराई गई जांच में कार्यवाहक निरीक्षक गजेन्द्र सिंह धाकड़, आरक्षक विजय यादव एवं आरक्षक बृजकिशोर अहिरवार का आचरण प्रथम दृष्टया संदिग्ध एवं भ्रष्ट पाया गया। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। “30 के खेला” से पहले भी कार्रवाई पुलिस विभाग में यह कोई पहला मामला नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी कथित “30 के खेला” जैसे मामलों में कई पुलिस कर्मचारी कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। विभागीय स्तर पर समय-समय पर ऐसे मामलों में जांच और दंडात्मक कार्रवाई की जाती रही है। सख्त संदेश इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट संकेत है कि अवैध वसूली, भ्रष्ट आचरण या संदिग्ध कार्यप्रणाली किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे क्या? निलंबन के साथ ही विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय दंड के साथ-साथ अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई संभव है। रीवा जिले में इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति है और इसे प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। आमजन में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि भ्रष्टाचार या संदिग्ध कार्यप्रणाली के खिलाफ अब उच्च स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है।
मनगवां टीआई समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित: एनडीपीएस कार्रवाई में शिकायत के बाद बड़ा एक्शन, “30 के खेला” से पहले भी हो चुकी है कार्रवाई रीवा। जिले के मनगवां थाने में की गई एनडीपीएस एक्ट एवं औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई के दौरान प्राप्त शिकायत पर पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। प्रारंभिक जांच में आचरण संदिग्ध और प्रथम दृष्टया भ्रष्ट पाए जाने पर कार्यवाहक निरीक्षक सहित दो आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों—गौरव राजपूत (पुलिस महानिरीक्षक), हेमंत चौहान (डीआईजी), शैलेन्द्र सिंह चौहान (पुलिस अधीक्षक) एवं संदीप मिश्रा (प्रभारी एसपी)—के निर्देशन में की गई जांच के बाद सामने आई है। क्या है मामला? जानकारी के अनुसार, थाना मनगवां में एनडीपीएस एक्ट और 5/13 औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में कार्रवाई की प्रक्रिया, जब्ती एवं अन्य बिंदुओं को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए थे। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराई गई जांच में कार्यवाहक निरीक्षक गजेन्द्र सिंह धाकड़, आरक्षक विजय यादव एवं आरक्षक बृजकिशोर अहिरवार का आचरण प्रथम दृष्टया संदिग्ध एवं भ्रष्ट पाया गया। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर
दिया गया। “30 के खेला” से पहले भी कार्रवाई पुलिस विभाग में यह कोई पहला मामला नहीं है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी कथित “30 के खेला” जैसे मामलों में कई पुलिस कर्मचारी कार्रवाई की जद में आ चुके हैं। विभागीय स्तर पर समय-समय पर ऐसे मामलों में जांच और दंडात्मक कार्रवाई की जाती रही है। सख्त संदेश इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट संकेत है कि अवैध वसूली, भ्रष्ट आचरण या संदिग्ध कार्यप्रणाली किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे क्या? निलंबन के साथ ही विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय दंड के साथ-साथ अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई संभव है। रीवा जिले में इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति है और इसे प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। आमजन में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि भ्रष्टाचार या संदिग्ध कार्यप्रणाली के खिलाफ अब उच्च स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है।
- 💥 बड़ी खबर💥 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल के लिए रवाना हुए। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बुलावे पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी, 2026 को इज़राइल का राजकीय दौरा करेंगे। यह प्रधानमंत्री का इज़राइल का दूसरा दौरा होगा। इससे पहले उन्होंने 2017 में इज़राइल का दौरा किया था, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इज़राइल यात्रा थी।1
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- Post by लखन लाल पाण्डेय(रिप्पू )2
- मऊगंज में अवैध खनन का काला साम्राज्य: कैमरे के सामने बेनकाब, कानून को खुली चुनौती। एनजीटी के आदेश बेअसर, खनन माफिया बेलगाम: मऊगंज के पहाड़ों से यूपी-बिहार तक चल रहा पत्थर का काला खेल। दर्जनों गांवों में सैकड़ों अवैध खदानें: जंगल उजड़ रहे, पहाड़ हो रहे खोखले, सरकार को करोड़ों का चूना। दीपक सिंह गहरवार विस्तार न्यूज़ मऊगंज ✍️ मो.89650741301
- Post by चंदन भइया1
- Post by Ramji kushwha1
- मध्य प्रदेश के सीधी में सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे के चेहरे पर कालिख पोतने के आरोपी और शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडे को लगभग 100 दिनों के बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दी कि आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं, जबकि पहले सुरक्षा चिंताओं के कारण जमानत खारिज कर दी गई थी।1
- सामाजिक विसंगतियों को खत्म करने के लिए जाति खत्म करना जरूरी - डॉ रघु राज प्रताप जी1
- रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा में चल रही है संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा कथा वाचक आदरणीय गोकर्ण शास्त्री द्वारा बताया गया भगवान कृष्ण और रुक्मिणी रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा अंतर्गत शाहपुर,ब्लॉक शाहपुर के अंतर्गत ग्राम सुकवार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा कथावाचक गोकर्ण शास्त्री द्वारा विस्तार पूर्वक बताया कि रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की बेटी थीं। वह बहुत ही सुंदर और गुणवान थीं। रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण की कई कथाएं सुनी थीं और उन पर मोहित हो गई थीं। उन्होंने कृष्ण को अपना दिल दे दिया और उनसे विवाह करना चाहती थीं। *शिशुपाल से विवाह* लेकिन रुक्मिणी के भाई रुक्मी ने शिशुपाल से उनका विवाह तय कर दिया। शिशुपाल चेदि का राजा था और वह बहुत ही दुष्ट था। रुक्मिणी को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने कृष्ण को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति बताई और उनसे मदद मांगी। *कृष्ण की मदद* रुक्मिणी का पत्र पढ़कर कृष्ण ने उनकी मदद करने का फैसला किया। वह अपने भाई बलराम के साथ विदर्भ पहुंचे। रुक्मिणी ने अपने परिवार को बताया कि वह भगवान परशुराम की पूजा करने जा रही हैं, लेकिन वह कृष्ण के साथ भाग गईं। *विवाह* कृष्ण और रुक्मिणी का विवाह द्वारका में हुआ। इस विवाह में कई देवताओं ने भाग लिया और कृष्ण को आशीर्वाद दिया। रुक्मिणी और कृष्ण का विवाह एक आदर्श विवाह माना जाता है, जिसमें प्रेम, भक्ति, और साहस का अद्भुत मेल है। इस कथा से हमें यह सीखने को मिलता है कि भगवान पर भरोसा रखने से हमारी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। सभी श्रोता गण भाव विभोर हो गए और सभी जय राधे जय राधे2