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किसानों ने मोहन सरकार से मूंग की शत-प्रतिशत (100%) तुलाई सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत एक किसान रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 'जय जवान जय किसान' के नारे लगाए गए।
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किसानों ने मोहन सरकार से मूंग की शत-प्रतिशत (100%) तुलाई सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत एक किसान रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 'जय जवान जय किसान' के नारे लगाए गए।
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- किसान अपनी मूंग की फसल की 100% खरीदी की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन पर उतर आए हैं। इस विरोध प्रदर्शन के तहत किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सरकार की शव यात्रा निकाली, जिससे उनकी नाराजगी और मांग स्पष्ट रूप से सामने आई।1
- किसानों ने मोहन सरकार से मूंग की शत-प्रतिशत (100%) तुलाई सुनिश्चित करने की मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत एक किसान रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 'जय जवान जय किसान' के नारे लगाए गए।1
- भारतीय किसान संघ ने मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी की मांग को लेकर अपना अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखा है। इसी कड़ी में, आज किसान संघ के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर शासन और प्रशासन से भिक्षा मांगकर अपना अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान अपने हाथों में कटोरा लिए, भजन गाते हुए सरकार और प्रशासन के सामने आए और भीख मांगी, यह दर्शाते हुए कि 'सरकार मूंग नहीं खरीद रही तो अन्नदाता भूखा न रहे' और उन्हें अपना गुजारा करने में मदद करें। भारतीय किसान संघ के आंदोलन संयोजक ललित सिंह चौहान ने बताया कि यह आंदोलन बीते तीन दिनों से लगातार चल रहा है, जिसमें किसान अपने खर्च पर खाना बना रहे हैं, टेंट लगाए हैं और कूलर की व्यवस्था भी की है ताकि उनके स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। उन्होंने शिकायत की कि सरकार ने अभी तक मूंग की खरीदी की कोई घोषणा नहीं की है, और किसानों को दो महीने पहले बेचे गए गेहूं का भुगतान भी नहीं मिला है। किसानों के पास आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं, इसलिए उन्होंने भिक्षा मांगकर शासन-प्रशासन से सहयोग की अपील की है। संघ के संभागीय मंत्री देवेंद्र पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि किसान अन्नदाता और प्रजापालक हैं, जो अन्न का उत्पादन कर प्रजा का भरण-पोषण करते हैं। लेकिन आज अन्नदाता के पास स्वयं के पालन-पोषण के लिए भी पैसे नहीं हैं और वह परिवार छोड़कर आंदोलन में बैठा है। सरकार द्वारा कोई भुगतान न होने से किसान परेशान हैं और आंदोलन का खर्च कैसे उठाएं, इसी वजह से भिक्षा मांगकर सहयोग चाहा गया है। जिला सहमंत्री रजत दुबे ने बताया कि किसानों ने कड़ी मेहनत से प्रति एकड़ 4-5 क्विंटल मूंग का बंपर उत्पादन किया है। हालांकि, सरकार ने केवल 1 क्विंटल 20 किलो प्रति किसान की उपज खरीदने की घोषणा की है, जो बहुत कम है। इससे किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर मंडियों में बेचनी पड़ेगी, जहां भाव ₹4500-₹5000 प्रति क्विंटल चल रहे हैं, जिससे लाखों रुपये का नुकसान होगा। संघ ने सरकार से शीघ्रता से शत-प्रतिशत मूंग खरीदी की घोषणा करने की मांग की है। इस विरोध प्रदर्शन में डोलरिया, नर्मदापुरम और इटारसी के कार्यकर्ता शामिल रहे। उपस्थित पदाधिकारियों में संभागीय मंत्री देवेंद्र पटेल, जिला सहमंत्री रजत दुबे, आंदोलन संयोजक ललित सिंह चौहान, श्रीराम दुबे, डोलरिया तहसील अध्यक्ष बदामीलाल साध, विनोद दुबे, राजकुमार राजपूत, श्यामशरण तिवारी, शरद पटेल, अविनेश चौधरी, सुभाष साध, राजेश साध, पन्नालाल गौर और ब्रजकिशोर लोवंशी प्रमुख थे।1
- इटारसी के वार्ड नंबर 12 से पार्षद मनजीत कलोसिया पर एक बार फिर लापरवाही और भेदभाव के गंभीर आरोप लगे हैं। वार्ड के निवासियों का दावा है कि पार्षद के एक 'खास' व्यक्ति करण बरगले के घर के सामने और आसपास तो नियमित रूप से झाड़ू लगाई जाती है, लेकिन उसी लाइन में आगे के 4-5 घरों के सामने साफ-सफाई नहीं की जाती। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी पार्षद का 'खास' होना जरूरी है। इतना ही नहीं, जनता की समस्याओं को सुनने के लिए बनाए गए वार्ड के व्हाट्सएप ग्रुप पर जैसे ही कोई निवासी कचरे या गंदी नाली की शिकायत करता है, पार्षद जी उसे तुरंत डिलीट कर देते हैं। पूछने पर पार्षद द्वारा 'गलती से डिलीट हो गया' का बहाना दिया जाता है। इस मामले पर वार्ड 12 की जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है।1
- हरदा जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से “सांझ चौपाल” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में, गुरुवार 9 जुलाई को जिले के ग्राम मकड़ाई में इस “सांझ चौपाल” का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए कलेक्टर श्री सिद्धार्थ जैन के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक श्री शशांक, वनमण्डलाधिकारी श्रीमती ज्योति मुड़िया, और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अंजली जोसेफ जोनाथन सहित सभी जिला अधिकारी कलेक्टर परिसर से एक ही बस में रवाना हुए। प्रशासन की यह पहल “टीम वर्क” और “ग्राम के प्रति प्रतिबद्धता” का संदेश देती है। कलेक्टर श्री जैन ने बताया कि “सांझ चौपाल” में सभी विभागों के अधिकारी एक साथ उपस्थित रहेंगे, जिससे कोई भी आवेदक बिना समाधान के वापस नहीं लौटेगा। इस चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों की राजस्व, पेंशन, राशन, बिजली, पानी और आवास सहित अन्य समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया जाएगा। साथ ही, इस दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों को अपने-अपने विभागों में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।1
- आज इटारसी में नगरपालिका स्वास्थ्य विभाग के सभापति राकेश जाधव द्वारा आयोजित जनसुनवाई में नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया, जहाँ कई मुद्दों का मौके पर ही निराकरण किया गया। इस दौरान बस स्टैंड क्षेत्र की सफाई, नाली निकासी और सड़क निर्माण के बाद ठेकेदारों द्वारा छोड़ी गई निर्माण सामग्री जैसी शिकायतों पर सभापति ने विशेष रूप से कड़ा रुख अपनाया। जनसुनवाई में कई समस्याओं का तुरंत समाधान किया गया, जबकि शेष कार्यों के लिए अगले दिन तक की समय-सीमा तय की गई है। इस पहल में स्वास्थ्य विभाग से कमल आर्य, जगदीश पटेल और संतोष तिवारी भी मौजूद रहे। नागरिकों ने नगरपालिका की इस त्वरित और सराहनीय कार्रवाई का स्वागत किया है।1
- भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में गुरुवार दोपहर 3 बजे मध्य प्रदेश के सिवनी मालवा में ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी सहित विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने एक विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली। तवा कॉलोनी से शुरू हुई यह रैली तहसीलदार कार्यालय पहुँची, जहाँ किसानों ने मध्य प्रदेश शासन की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव के विरोध में भी नारे लगाए गए, जिसमें किसानों का गुस्सा साफ दिखाई दिया। तहसील कार्यालय पहुँचने पर किसानों ने शव यात्रा के साथ कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया, जहाँ भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। इसके बाद, यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम विजय राय को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि नर्मदापुरम जिले सहित प्रदेश के कई जिलों के किसानों ने भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में ग्रीष्मकालीन मूंग का उत्पादन किया, लेकिन सरकार ने केवल 25 प्रतिशत उपज खरीदने का निर्णय लेकर उनके साथ अन्याय किया है। ज्ञापन में किसानों द्वारा उत्पादित पूरी ग्रीष्मकालीन मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी की मांग की गई है। किसानों ने खाद वितरण की ई-विकास प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए, यह कहते हुए कि ई-टोकन व्यवस्था के कारण उन्हें डीएपी और यूरिया समय पर नहीं मिल पा रही है। भारतीय किसान यूनियन ने मांग की कि छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी ई-टोकन प्रणाली को तुरंत बंद कर खाद वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने पूरी मूंग की खरीदी नहीं की, तो किसान अपने सभी ट्रैक्टर तहसील कार्यालय में खड़े कर उनकी चाबियां तहसीलदार को सौंप देंगे और अपनी मांगों के समर्थन में पैदल भोपाल कूच करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ हिस्सा लिया, और तहसील कार्यालय परिसर में सुरक्षा के लिए प्रशासन तथा पुलिस बल तैनात रहे।1