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विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण - राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल अनूपपुर - मध्य प्रदेश शासन कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्रप्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से प्रदेश में शासन, प्रशासन के समन्वय से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को विकसित भारत की संकल्पना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की सहभागिता से विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व का ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के तहत शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोतमा में विकासखण्ड स्तरीय चित्रकला, निबंध, रंगोली एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने प्रतियोगिताओं का अवलोकन कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उक्ताशय के विचार व्यक्त किए। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि भारत विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, रेल एवं अन्य अधोसंरचना, डिजिटल तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। चंद्रयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई पहचान दी है। किसानों और महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जीत धुर्वे के चित्र और परिधि पाण्डेय के भाषण की सराहना राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए चित्रों का अवलोकन किया और उनके विषय एवं कल्पना के संबंध में विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान विद्यार्थी जीत धुर्वे द्वारा विकसित भारत की संकल्पना पर तैयार किए गए चित्र का अवलोकन करते हुए राज्यमंत्री ने उसकी विषयवस्तु एवं रचनात्मक प्रस्तुति की सराहना की तथा विद्यार्थी का उत्साहवर्धन किया। भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थी परिधि पाण्डेय ने ‘विकसित भारत’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। राज्यमंत्री ने परिधि पाण्डेय के विचारों एवं प्रस्तुति की सराहना करते हुए उसे प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्ति उनके भीतर की प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सोच को सामने लाती है। विद्यार्थियों ने चित्रों और रचनात्मक प्रस्तुतियों से दिखाई विकसित भारत की कल्पना प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रधानमंत्री आवास, बेहतर सड़क एवं परिवहन सुविधाएं, आधुनिक तकनीक, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न विषयों को चित्रकला, निबंध, रंगोली एवं भाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने वर्ष 2047 के विकसित भारत की अपनी कल्पना को रचनात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया। राज्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने भविष्य का लक्ष्य अभी से निर्धारित करें और अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप क्षेत्र का चयन कर पूरी मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ें। पढ़ाई के साथ सामान्य ज्ञान तथा अपने समाज, नगर, प्रदेश और देश से संबंधित विषयों की जानकारी भी रखें। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत के भविष्य के निर्माता हैं। विद्यार्थी अपने ज्ञान, कौशल, अनुशासन और परिश्रम के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न भी पूछे गए, जिनका विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिया। राज्यमंत्री ने विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढ़ने, अपनी प्रतिभा को निखारने तथा अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग समाज और देश के हित में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प प्रत्येक नागरिक की सहभागिता, परिश्रम और जिम्मेदारी से साकार होगा। इस अवसर पर ‌अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोतमा टी आर नाग, नगर पालिका अध्यक्ष कोतमा अजय सराफ, उपाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताम्रकार, बीईओ आर के मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित थे।

6 hrs ago
user_Anupam Singh patrkar
Anupam Singh patrkar
अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
6 hrs ago

विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण - राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल अनूपपुर - मध्य प्रदेश शासन कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्रप्रभार) दिलीप जायसवाल ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से प्रदेश में शासन, प्रशासन के समन्वय से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को विकसित भारत की संकल्पना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की सहभागिता से विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व का ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित किए जा रहे ‘मेरे सपनों का भारत’ कार्यक्रम के तहत शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोतमा में विकासखण्ड स्तरीय चित्रकला, निबंध, रंगोली एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने प्रतियोगिताओं का अवलोकन कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उक्ताशय के विचार व्यक्त किए। मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि भारत विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, रेल एवं अन्य अधोसंरचना, डिजिटल तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। चंद्रयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई पहचान दी है। किसानों और महिलाओं के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जीत धुर्वे के चित्र और परिधि पाण्डेय के भाषण की सराहना राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए चित्रों का अवलोकन किया और उनके विषय एवं कल्पना के संबंध में विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान विद्यार्थी जीत धुर्वे द्वारा विकसित भारत की संकल्पना पर तैयार किए गए चित्र का अवलोकन करते हुए राज्यमंत्री ने उसकी विषयवस्तु एवं रचनात्मक प्रस्तुति की सराहना की तथा विद्यार्थी का उत्साहवर्धन किया। भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थी परिधि पाण्डेय ने ‘विकसित भारत’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। राज्यमंत्री ने परिधि पाण्डेय के विचारों एवं प्रस्तुति की सराहना करते हुए उसे प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्ति उनके भीतर की प्रतिभा और राष्ट्र निर्माण के प्रति सोच को सामने लाती है। विद्यार्थियों ने चित्रों और रचनात्मक प्रस्तुतियों से दिखाई विकसित भारत की कल्पना प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रधानमंत्री आवास, बेहतर सड़क एवं परिवहन सुविधाएं, आधुनिक तकनीक, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, वैज्ञानिक उपलब्धियों एवं पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न विषयों को चित्रकला, निबंध, रंगोली एवं भाषण के माध्यम से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने वर्ष 2047 के विकसित भारत की अपनी कल्पना को रचनात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया। राज्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने भविष्य का लक्ष्य अभी से निर्धारित करें और अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप क्षेत्र का चयन कर पूरी मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ें। पढ़ाई के साथ सामान्य ज्ञान तथा अपने समाज, नगर, प्रदेश और देश से संबंधित विषयों की जानकारी भी रखें। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही विकसित भारत के भविष्य के निर्माता हैं। विद्यार्थी अपने ज्ञान, कौशल, अनुशासन और परिश्रम के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न भी पूछे गए, जिनका विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिया। राज्यमंत्री ने विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढ़ने, अपनी प्रतिभा को निखारने तथा अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग समाज और देश के हित में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प प्रत्येक नागरिक की सहभागिता, परिश्रम और जिम्मेदारी से साकार होगा। इस अवसर पर ‌अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोतमा टी आर नाग, नगर पालिका अध्यक्ष कोतमा अजय सराफ, उपाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताम्रकार, बीईओ आर के मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित थे।

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  • कहानी बदलाव की सशक्त भारत, आत्मनिर्भर भारत नवीन सिंघनिया को मिला सरकार का साथ,बढाया आत्मनिर्भरता की ओर कदम #SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान #शहडोल #shahdol
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    कहानी बदलाव की

सशक्त भारत, आत्मनिर्भर भारत 

 नवीन सिंघनिया को मिला सरकार का साथ,बढाया आत्मनिर्भरता की ओर कदम

#SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान #शहडोल #shahdol
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • हवाई पट्टी के पास सड़क हादसा, तीन गम्भीर रूप से घायल... *हवाई पट्टी के पास सड़क हादसा, तीन गम्भीर रूप से घायल* मध्य प्रदेश उमरिया मुख्यालय हवाई पट्टी के करीब सड़क हादसे में तीन बाईक सवार के घायल होने की खबर है। हादसे के बाद तीनों घायलों को सिविल चौकी पुलिस की मदद से जिला अस्पताल लाया गया। बताया गया है कि दो बाइक की जोड़दार टक्कर हो गई। जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। खबर है कि सड़क हादसे में एक की पहचान दुब्बार निवासी दिनेश यादव के रूप में हुई है। जो पिपरिया स्थित पेट्रोल पंप टंकी में कर्मी है। बाकी दूसरी बाइक में सवार युवकों की पहचान नहीं हो सकी है। हालांकि बताया जाता है कि ये दोनों खरहटा गांव से उमरिया शहर की ओर आ रहे थे। दरअसल वे तीनों हादसे के बाद गंभीर अवस्था में है। जिस वजह से हादसे के कारण और पहचान वर्तमान में नहीं हो पाई है।
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    हवाई पट्टी के पास सड़क हादसा, तीन गम्भीर रूप से घायल...
*हवाई पट्टी के पास सड़क हादसा, तीन गम्भीर रूप से घायल*
मध्य प्रदेश 
उमरिया मुख्यालय हवाई पट्टी के करीब सड़क हादसे में तीन बाईक सवार के घायल होने की खबर है। हादसे के बाद तीनों घायलों को सिविल चौकी पुलिस की मदद से जिला अस्पताल लाया गया। बताया गया है कि दो बाइक की जोड़दार टक्कर हो गई। जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। खबर है कि सड़क हादसे में एक की पहचान दुब्बार निवासी दिनेश यादव के रूप में हुई है। जो पिपरिया स्थित पेट्रोल पंप टंकी में कर्मी है। बाकी दूसरी बाइक में सवार युवकों की पहचान नहीं हो सकी है। हालांकि बताया जाता है कि ये दोनों खरहटा गांव से उमरिया शहर की ओर आ रहे थे। दरअसल वे तीनों हादसे के बाद गंभीर अवस्था में है। जिस वजह से    हादसे के कारण और पहचान वर्तमान में नहीं हो पाई है।
    user_ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • झमाझम बारिश के बीच बांधवगढ़ में पांच दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आगाज, नन्हें 'कृष्णा' की अठखेलियों ने मोहा मन झमाझम बारिश के बीच बांधवगढ़ में पांच दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आगाज, नन्हें 'कृष्णा' की अठखेलियों ने मोहा मन उमरिया। झमाझम बारिश के बीच विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पांच दिवसीय हाथी महोत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। परासी गेट के समीप स्थित धमोखर बफर क्षेत्र में आयोजित उद्घाटन समारोह में कलेक्टर राखी सहाय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पत्रकार, स्थानीय रहवासी और ईडीसी (पारिस्थितिकी विकास समिति) के पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान बांधवगढ़ के कैंप हाथियों की भूमिका और उनके संरक्षण को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 15 कैंप हाथी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से चार हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन, दो अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कार्य और नौ हाथी पुनर्यौवनीकरण (रेजुवेनेशन) कैंप में शामिल हैं। आकर्षण का केंद्र बना नन्हा 'कृष्णा' महोत्सव के पहले दिन नन्हें नर हाथी 'कृष्णा' ने अपनी अठखेलियों और उछलकूद से वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बता दें कि कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था, जिसका नामकरण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया था। सेहत और सेवा को समर्पित महोत्सव इस पांच दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण करना, उनकी विशेष देखभाल करना और उन्हें उनकी पसंद का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही, इस महोत्सव के माध्यम से स्थानीय लोगों को हाथियों को करीब से जानने, उनके स्वभाव को समझने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक होने का एक अनूठा अवसर मिल रहा है।
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    झमाझम बारिश के बीच बांधवगढ़ में पांच दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आगाज, नन्हें 'कृष्णा' की अठखेलियों ने मोहा मन

झमाझम बारिश के बीच बांधवगढ़ में पांच दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आगाज, नन्हें 'कृष्णा' की अठखेलियों ने मोहा मन
उमरिया। झमाझम बारिश के बीच विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पांच दिवसीय हाथी महोत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। परासी गेट के समीप स्थित धमोखर बफर क्षेत्र में आयोजित उद्घाटन समारोह में कलेक्टर राखी सहाय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पत्रकार, स्थानीय रहवासी और ईडीसी (पारिस्थितिकी विकास समिति) के पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान बांधवगढ़ के कैंप हाथियों की भूमिका और उनके संरक्षण को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 15 कैंप हाथी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से चार हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन, दो अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कार्य और नौ हाथी पुनर्यौवनीकरण (रेजुवेनेशन) कैंप में शामिल हैं।
आकर्षण का केंद्र बना नन्हा 'कृष्णा'
महोत्सव के पहले दिन नन्हें नर हाथी 'कृष्णा' ने अपनी अठखेलियों और उछलकूद से वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बता दें कि कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था, जिसका नामकरण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया था।
सेहत और सेवा को समर्पित महोत्सव
इस पांच दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण करना, उनकी विशेष देखभाल करना और उन्हें उनकी पसंद का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही, इस महोत्सव के माध्यम से स्थानीय लोगों को हाथियों को करीब से जानने, उनके स्वभाव को समझने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक होने का एक अनूठा अवसर मिल रहा है।
    user_Deepak kumar verma
    Deepak kumar verma
    Local News Reporter बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • *विकास" ने डंडी का रास्ता देखा ही नहीं! गड्ढों में सड़क ढूंढ रहे ग्रामीण, बोले: "पंचायत लौटा दो, कम से कम बहाने तो नहीं मिलते थे* *विकास" ने डंडी का रास्ता देखा ही नहीं! गड्ढों में सड़क ढूंढ रहे ग्रामीण, बोले: "पंचायत लौटा दो, कम से कम बहाने तो नहीं मिलते थे* मानपुर।नगर परिषद मानपुर के वार्ड 11 और 12 में डंडी पहुंच मार्ग पर चलना अब सड़क यात्रा नहीं, साहसिक खेल है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि इंजीनियर चाहें तो इनमें "जल संरक्षण परियोजना" का उद्घाटन कर दें। सड़क कहां है, यह खोजने के लिए अब ग्रामीणों को गूगल मैप नहीं, खुदाई विभाग की जरूरत है। *2018 में पंचायत ने सड़क बनवाई, आज सिर्फ यादें बचीं* उक्त सड़क ग्राम पंचायत मानपुर ने वर्ष 2018 में बनवाई थी, तब डंडी गांव खुशी से झूम उठा था। फिर शासन ने डंडी में वेयरहाउस बनाया, पर भारी ट्रकों के लिए अलग सड़क बनाने की "छोटी सी बात" भूल गया। नतीजा यह कि पंचायत की बनवाई सड़क ने ट्रकों का बोझ उठाते-उठाते दम तोड़ दिया। ग्रामीणों की सड़क पर शासन के गोदाम का बोझ लादा गया, और अब बदहाली की जिम्मेदारी लेने कोई आगे नहीं आ रहा। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि गोदाम बनाते वक्त अनाज का हिसाब तो रखा गया, पर उसके रास्ते का हिसाब किसके खाते में गया? *मानपुर में सड़कों का जाल, डंडी में गड्ढों का जाल* नगर परिषद बनी तो ग्रामीणों ने सोचा कि अब अच्छे दिन आएंगे। चुनाव में नेताजी वादों की बारिश करके गए, वह बारिश भी सिर्फ गड्ढों में भरने के काम आई। 4 साल से ज्यादा हो गए, डंडी का रास्ता जस का तस है। उधर मानपुर में गली-मोहल्लों से खेत-खलिहानों तक बीटी और सीसी सड़कों की चमक है। डंडी, बगैहा, कुदरा टोला और गोवर्द को क्या मिला? गड्ढे, कीचड़ और आश्वासन। ग्रामीण पूछते हैं, "यह कैसा विकास है, जो खेतों तक पहुंच गया पर हम तक नहीं पहुंचा?" *साहब, विकास आप रख लो, हमें पुरानी पंचायत लौटा दो!* ग्रामीणों का धैर्य अब व्यंग्य बनकर बह रहा है: "हम इस विकास से ऊब चुके हैं साहब, हमें वही पुरानी अव्यवस्थित ग्राम पंचायत लौटा दी जाए।" आखिर सड़क तो उसी पंचायत ने बनवाई थी, नगर परिषद तो चार साल में एक गड्ढा भी नहीं भर पाई। टैक्स और तरह-तरह के कर वे ईमानदारी से भर रहे हैं, पर बदले में विकास का एक कंकड़ भी नसीब नहीं हुआ। उनकी मांग है कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी एक बार आकर मौका मुआयना करें, एसी गाड़ी से उतरकर पैदल चलें, फिर बताएं कि सड़क कहां है। *राशन भी फंसा, बच्चे-बुजुर्ग भी* इसी रास्ते से बच्चे स्कूल, बुजुर्ग बाजार और मरीज अस्पताल जाते हैं, हर कदम पर हड्डी बचाते हुए। मानपुर जनपद की सभी राशन दुकानों तक पीडीएस का अनाज पहुंचाने वाली अन्दूत की गाड़ियां भी यहीं से गुजरती हैं और गड्ढों-कीचड़ में दिन-दिन भर फंसी रहती हैं। हर महीने की 1 तारीख से पहले राशन पहुंचाना होता है, पर सड़क की हालत देखकर लगता है कि गरीब की थाली तक अनाज पहुंचने से पहले कीचड़ का "प्रसाद" पहुंच रहा है। *आवेदन, निवेदन, प्रतिवेदन… और नगर परिषद की कुंभकर्णी नींद* ग्रामीणों और चालकों ने नगर परिषद को इतने आवेदन, निवेदन और प्रतिवेदन दिए कि अब कागज भी शर्मिंदा है। पर जवाब में मिला सिर्फ सन्नाटा। आरोप है कि परिषद वार्ड 11 और 12 के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है: 4 साल में सड़क बनी नहीं, और अब गड्ढे भरने में भी आनाकानी है। शायद परिषद को डर है कि गड्ढे भर गए तो "विकास" का सबूत मिट जाएगा, या फिर फाइलें भी इन्हीं गड्ढों में गिरकर लापता हैं। *कलेक्टर साहब, अब आपसे ही आस* थक-हारकर रहवासियों ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि डंडी पहुंच मार्ग का नया आरसीसी या बीटी सड़क निर्माण जल्द कराया जाए, और तत्काल व्यवस्था के तौर पर नगर परिषद को निर्देश देकर गड्ढे भरवाए जाएं। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की कुंभकर्णी नींद पहले टूटती है, या ग्रामीणों का सब्र। सड़क तो वैसे भी कब की टूट चुकी है।
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    *विकास" ने डंडी का रास्ता देखा ही नहीं! गड्ढों में सड़क ढूंढ रहे ग्रामीण, बोले: "पंचायत लौटा दो, कम से कम बहाने तो नहीं मिलते थे*
*विकास" ने डंडी का रास्ता देखा ही नहीं! गड्ढों में सड़क ढूंढ रहे ग्रामीण, बोले: "पंचायत लौटा दो, कम से कम बहाने तो नहीं मिलते थे*
मानपुर।नगर परिषद मानपुर के वार्ड 11 और 12 में डंडी पहुंच मार्ग पर चलना अब सड़क यात्रा नहीं, साहसिक खेल है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि इंजीनियर चाहें तो इनमें "जल संरक्षण परियोजना" का उद्घाटन कर दें। सड़क कहां है, यह खोजने के लिए अब ग्रामीणों को गूगल मैप नहीं, खुदाई विभाग की जरूरत है।
*2018 में पंचायत ने सड़क बनवाई, आज सिर्फ यादें बचीं*
उक्त सड़क ग्राम पंचायत मानपुर ने वर्ष 2018 में बनवाई थी, तब डंडी गांव खुशी से झूम उठा था। फिर शासन ने डंडी में वेयरहाउस बनाया, पर भारी ट्रकों के लिए अलग सड़क बनाने की "छोटी सी बात" भूल गया। नतीजा यह कि पंचायत की बनवाई सड़क ने ट्रकों का बोझ उठाते-उठाते दम तोड़ दिया। ग्रामीणों की सड़क पर शासन के गोदाम का बोझ लादा गया, और अब बदहाली की जिम्मेदारी लेने कोई आगे नहीं आ रहा। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि गोदाम बनाते वक्त अनाज का हिसाब तो रखा गया, पर उसके रास्ते का हिसाब किसके खाते में गया?
*मानपुर में सड़कों का जाल, डंडी में गड्ढों का जाल*
नगर परिषद बनी तो ग्रामीणों ने सोचा कि अब अच्छे दिन आएंगे। चुनाव में नेताजी वादों की बारिश करके गए, वह बारिश भी सिर्फ गड्ढों में भरने के काम आई। 4 साल से ज्यादा हो गए, डंडी का रास्ता जस का तस है। उधर मानपुर में गली-मोहल्लों से खेत-खलिहानों तक बीटी और सीसी सड़कों की चमक है। डंडी, बगैहा, कुदरा टोला और गोवर्द को क्या मिला? गड्ढे, कीचड़ और आश्वासन। ग्रामीण पूछते हैं, "यह कैसा विकास है, जो खेतों तक पहुंच गया पर हम तक नहीं पहुंचा?"
*साहब, विकास आप रख लो, हमें पुरानी पंचायत लौटा दो!*
ग्रामीणों का धैर्य अब व्यंग्य बनकर बह रहा है: "हम इस विकास से ऊब चुके हैं साहब, हमें वही पुरानी अव्यवस्थित ग्राम पंचायत लौटा दी जाए।" आखिर सड़क तो उसी पंचायत ने बनवाई थी, नगर परिषद तो चार साल में एक गड्ढा भी नहीं भर पाई। टैक्स और तरह-तरह के कर वे ईमानदारी से भर रहे हैं, पर बदले में विकास का एक कंकड़ भी नसीब नहीं हुआ। उनकी मांग है कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी एक बार आकर मौका मुआयना करें, एसी गाड़ी से उतरकर पैदल चलें, फिर बताएं कि सड़क कहां है।
*राशन भी फंसा, बच्चे-बुजुर्ग भी*
इसी रास्ते से बच्चे स्कूल, बुजुर्ग बाजार और मरीज अस्पताल जाते हैं, हर कदम पर हड्डी बचाते हुए। मानपुर जनपद की सभी राशन दुकानों तक पीडीएस का अनाज पहुंचाने वाली अन्दूत की गाड़ियां भी यहीं से गुजरती हैं और गड्ढों-कीचड़ में दिन-दिन भर फंसी रहती हैं। हर महीने की 1 तारीख से पहले राशन पहुंचाना होता है, पर सड़क की हालत देखकर लगता है कि गरीब की थाली तक अनाज पहुंचने से पहले कीचड़ का "प्रसाद" पहुंच रहा है।
*आवेदन, निवेदन, प्रतिवेदन… और नगर परिषद की कुंभकर्णी नींद*
ग्रामीणों और चालकों ने नगर परिषद को इतने आवेदन, निवेदन और प्रतिवेदन दिए कि अब कागज भी शर्मिंदा है। पर जवाब में मिला सिर्फ सन्नाटा। आरोप है कि परिषद वार्ड 11 और 12 के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है: 4 साल में सड़क बनी नहीं, और अब गड्ढे भरने में भी आनाकानी है। शायद परिषद को डर है कि गड्ढे भर गए तो "विकास" का सबूत मिट जाएगा, या फिर फाइलें भी इन्हीं गड्ढों में गिरकर लापता हैं।
*कलेक्टर साहब, अब आपसे ही आस*
थक-हारकर रहवासियों ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि डंडी पहुंच मार्ग का नया आरसीसी या बीटी सड़क निर्माण जल्द कराया जाए, और तत्काल व्यवस्था के तौर पर नगर परिषद को निर्देश देकर गड्ढे भरवाए जाएं।
अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की कुंभकर्णी नींद पहले टूटती है, या ग्रामीणों का सब्र। सड़क तो वैसे भी कब की टूट चुकी है।
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • cra hai me good video has been checked my account number good morning sir
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    cra hai me good video has been checked my account number 
good morning sir
    user_Aasni Kumar
    Aasni Kumar
    Tour Guide सोनहत, कोरिया, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक। खेत से लैब तक नहीं, किसान पहुंचे ‘मॉडल फार्म’ की जमीन पर! AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक खेती में बदलाव केवल कागजों और प्रशिक्षण कक्षों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान नई तकनीकों को अपनी आंखों से देखें और उनके व्यावहारिक उपयोग को समझें—इसी उद्देश्य से HDFC Bank Parivartan एवं CARD संस्था द्वारा सतना स्थित AKS विश्वविद्यालय में किसानों के लिए एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गया। करीब 70 किसानों ने इस भ्रमण में हिस्सा लेकर आधुनिक, प्राकृतिक एवं कृषि आधारित आयवर्धक गतिविधियों के प्रत्यक्ष मॉडल देखे। भ्रमण के दौरान किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जैविक खाद, पशुपालन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, अजोला, पॉलीहाउस, ऑफ-सीजन खेती और गुलाब उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर समन्वय से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं। 120 शाहीवाल-गिर गायों ने खींचा ध्यान विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की उन्नत गायों को देखा। विशेषज्ञों ने नस्ल की विशेषताओं, पोषण, रख-रखाव और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी। किसानों ने पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर आय का अतिरिक्त माध्यम बनाने की संभावनाओं को समझा। पॉलीहाउस में दिखा मौसम को मात देकर खेती का मॉडल पॉलीहाउस इकाई में किसानों ने संरक्षित वातावरण में फसल उत्पादन की तकनीक देखी। विशेषज्ञों ने ऑफ-सीजन सब्जियों एवं अन्य फसलों के उत्पादन, बाजार की मांग और संरक्षित खेती की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं गुलाब की खेती ने भी किसानों का ध्यान आकर्षित किया। केंचुआ खाद से अजोला तक, कम लागत वाले मॉडल पर जोर वर्मी कम्पोस्ट इकाई में किसानों ने जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया देखी। अजोला इकाई में इसके उत्पादन और पशुपालन में उपयोग की जानकारी दी गई। मुर्गी पालन इकाई में वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से छोटे स्तर पर अतिरिक्त आय की संभावनाओं को समझाया गया। CARD संस्था की ओर से श्रीमती भावना पवार, सुश्री वंशिका गुप्ता एवं श्री प्रेम चंद्र पाल उपस्थित रहे। AKS विश्वविद्यालय की ओर से डीन डॉ. ए.के. भोमिक, डॉ. चतुर्वेदी, डॉ. डूमर सिंह, सुश्री गरिमा सिंह एवं डॉ. गौरव गुप्ता ने किसानों का मार्गदर्शन किया। भ्रमण के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने कहा कि विभिन्न गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें अपनी खेती और आजीविका में नई तकनीकों को अपनाने के लिए व्यावहारिक जानकारी मिली। ▌एक्सपोजर में क्या-क्या देखा? प्राकृतिक खेती • जैविक खाद • पशुपालन • मुर्गी पालन • वर्मी कम्पोस्ट • अजोला • पॉलीहाउस • ऑफ-सीजन खेती • गुलाब उत्पादन ▌70 किसानों ने देखा खेती का नया मॉडल सतना के AKS विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट में करीब 70 किसानों ने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी हासिल की। ▌120 उन्नत नस्ल की गायें विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की गायों का अवलोकन किया और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी ली। ▌पॉलीहाउस बना आकर्षण का केंद्र संरक्षित वातावरण में ऑफ-सीजन फसल उत्पादन की तकनीक देखकर किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप वैकल्पिक आय की संभावनाओं को समझा।
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    AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक।

खेत से लैब तक नहीं, किसान पहुंचे ‘मॉडल फार्म’ की जमीन पर!
AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक
खेती में बदलाव केवल कागजों और प्रशिक्षण कक्षों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान नई तकनीकों को अपनी आंखों से देखें और उनके व्यावहारिक उपयोग को समझें—इसी उद्देश्य से HDFC Bank Parivartan एवं CARD संस्था द्वारा सतना स्थित AKS विश्वविद्यालय में किसानों के लिए एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गया। करीब 70 किसानों ने इस भ्रमण में हिस्सा लेकर आधुनिक, प्राकृतिक एवं कृषि आधारित आयवर्धक गतिविधियों के प्रत्यक्ष मॉडल देखे।
भ्रमण के दौरान किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जैविक खाद, पशुपालन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, अजोला, पॉलीहाउस, ऑफ-सीजन खेती और गुलाब उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर समन्वय से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं।
120 शाहीवाल-गिर गायों ने खींचा ध्यान
विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की उन्नत गायों को देखा। विशेषज्ञों ने नस्ल की विशेषताओं, पोषण, रख-रखाव और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी। किसानों ने पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर आय का अतिरिक्त माध्यम बनाने की संभावनाओं को समझा।
पॉलीहाउस में दिखा मौसम को मात देकर खेती का मॉडल
पॉलीहाउस इकाई में किसानों ने संरक्षित वातावरण में फसल उत्पादन की तकनीक देखी। विशेषज्ञों ने ऑफ-सीजन सब्जियों एवं अन्य फसलों के उत्पादन, बाजार की मांग और संरक्षित खेती की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं गुलाब की खेती ने भी किसानों का ध्यान आकर्षित किया।
केंचुआ खाद से अजोला तक, कम लागत वाले मॉडल पर जोर
वर्मी कम्पोस्ट इकाई में किसानों ने जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया देखी। अजोला इकाई में इसके उत्पादन और पशुपालन में उपयोग की जानकारी दी गई। मुर्गी पालन इकाई में वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से छोटे स्तर पर अतिरिक्त आय की संभावनाओं को समझाया गया।
CARD संस्था की ओर से श्रीमती भावना पवार, सुश्री वंशिका गुप्ता एवं श्री प्रेम चंद्र पाल उपस्थित रहे। AKS विश्वविद्यालय की ओर से डीन डॉ. ए.के. भोमिक, डॉ. चतुर्वेदी, डॉ. डूमर सिंह, सुश्री गरिमा सिंह एवं डॉ. गौरव गुप्ता ने किसानों का मार्गदर्शन किया।
भ्रमण के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने कहा कि विभिन्न गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें अपनी खेती और आजीविका में नई तकनीकों को अपनाने के लिए व्यावहारिक जानकारी मिली।    ▌एक्सपोजर में क्या-क्या देखा?
प्राकृतिक खेती • जैविक खाद • पशुपालन • मुर्गी पालन • वर्मी कम्पोस्ट • अजोला • पॉलीहाउस • ऑफ-सीजन खेती • गुलाब उत्पादन
▌70 किसानों ने देखा खेती का नया मॉडल
सतना के AKS विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट में करीब 70 किसानों ने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी हासिल की।
▌120 उन्नत नस्ल की गायें
विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की गायों का अवलोकन किया और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी ली।
▌पॉलीहाउस बना आकर्षण का केंद्र
संरक्षित वातावरण में ऑफ-सीजन फसल उत्पादन की तकनीक देखकर किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप वैकल्पिक आय की संभावनाओं को समझा।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • *कप्तान साहब! युवा ब्रदर्स को नहीं है प्रशासन का खौफ*? *भूतहा नाला से रोजाना रेत का कथित अवैध उत्खनन, ट्रैक्टरों से हो रही सप्लाई; कार्रवाई के बावजूद बेखौफ कारोबार के आरोप* धनपुरी। शहडोल जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर प्रशासन की सख्ती के दावों के बीच धनपुरी थाना क्षेत्र के सिलपरी में हल्दीघाटी नर्सरी के पास स्थित भूतहा नाला से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई दिनों से यहां मजदूरों के जरिए दिनभर रेत निकाली जा रही है और उसे आसपास अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी रूप से जमा करने के बाद सुबह-सुबह ट्रैक्टरों के माध्यम से सप्लाई किए जाने का आरोप है। समाचार प्रकाशित होने के बाद भी नहीं थमा कारोबार सूत्रों का दावा है कि मामले को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद भी कथित रेत कारोबार से जुड़े लोगों में प्रशासन का कोई खौफ नजर नहीं आया। सूत्रों के अनुसार, युवा ब्रदर्स से जुड़े लोगों द्वारा कथित तौर पर प्रशासन को लेकर आपत्तिजनक एवं चुनौतीपूर्ण बातें कही गईं और यह तक दावा किया गया कि अब भूतहा नाले के बाद पुरानी अमराडंडी के गाडाघाट क्षेत्र से भी रेत निकाली जाएगी। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक कार्रवाई और अवैध उत्खनन पर जारी निर्देशों की गंभीर अनदेखी का मामला हो सकता है। गाडाघाट वही इलाका, जहां हादसे में गई थी दो मासूमों की जान सबसे गंभीर बात यह है कि जिस पुरानी अमराडंडी के गाडाघाट से रेत निकालने की बात कही जा रही है, उसी क्षेत्र में कुछ माह पूर्व पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दो छोटे बच्चों की मौत हो चुकी है। ऐसे में यदि वहां दोबारा खनन या गड्ढों का निर्माण होता है तो स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। एसपी के सख्त निर्देशों के बावजूद कैसे चल रहा खेल? शहडोल पुलिस अधीक्षक द्वारा अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद यदि भूतहा नाला क्षेत्र में लगातार रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदार विभागों की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ रही? सूत्रों की मानें तो रेत निकालने के लिए दिनभर मजदूर लगाए जाते हैं। निकाली गई रेत को मुख्य स्थल से कुछ दूरी पर अलग-अलग जगहों पर जमा किया जाता है और फिर सुबह के समय ट्रैक्टरों के जरिए उसकी सप्लाई किए जाने की बात सामने आ रही है। वन अमले की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की चर्चा भी की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जिम्मेदार विभाग कब करेगा मौके का निरीक्षण? अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर भूतहा नाला एवं पुरानी अमराडंडी के गाडाघाट क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे? क्या रेत के कथित अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन की जांच होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी? मामले में प्रशासनिक जांच और मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी। इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की संभावना है। आगे की जानकारी के लिए बने रहिए हमारे साथ...
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    *कप्तान साहब! युवा ब्रदर्स को नहीं है प्रशासन का खौफ*?
*भूतहा नाला से रोजाना रेत का कथित अवैध उत्खनन, ट्रैक्टरों से हो रही सप्लाई; कार्रवाई के बावजूद बेखौफ कारोबार के आरोप*
धनपुरी। शहडोल जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर प्रशासन की सख्ती के दावों के बीच धनपुरी थाना क्षेत्र के सिलपरी में हल्दीघाटी नर्सरी के पास स्थित भूतहा नाला से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर रेत निकाले जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई दिनों से यहां मजदूरों के जरिए दिनभर रेत निकाली जा रही है और उसे आसपास अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी रूप से जमा करने के बाद सुबह-सुबह ट्रैक्टरों के माध्यम से सप्लाई किए जाने का आरोप है।
समाचार प्रकाशित होने के बाद भी नहीं थमा कारोबार
सूत्रों का दावा है कि मामले को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद भी कथित रेत कारोबार से जुड़े लोगों में प्रशासन का कोई खौफ नजर नहीं आया। सूत्रों के अनुसार, युवा ब्रदर्स से जुड़े लोगों द्वारा कथित तौर पर प्रशासन को लेकर आपत्तिजनक एवं चुनौतीपूर्ण बातें कही गईं और यह तक दावा किया गया कि अब भूतहा नाले के बाद पुरानी अमराडंडी के गाडाघाट क्षेत्र से भी रेत निकाली जाएगी।
इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक कार्रवाई और अवैध उत्खनन पर जारी निर्देशों की गंभीर अनदेखी का मामला हो सकता है।
गाडाघाट वही इलाका, जहां हादसे में गई थी दो मासूमों की जान
सबसे गंभीर बात यह है कि जिस पुरानी अमराडंडी के गाडाघाट से रेत निकालने की बात कही जा रही है, उसी क्षेत्र में कुछ माह पूर्व पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दो छोटे बच्चों की मौत हो चुकी है। ऐसे में यदि वहां दोबारा खनन या गड्ढों का निर्माण होता है तो स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
एसपी के सख्त निर्देशों के बावजूद कैसे चल रहा खेल?
शहडोल पुलिस अधीक्षक द्वारा अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद यदि भूतहा नाला क्षेत्र में लगातार रेत का उत्खनन और परिवहन हो रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदार विभागों की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ रही?
सूत्रों की मानें तो रेत निकालने के लिए दिनभर मजदूर लगाए जाते हैं। निकाली गई रेत को मुख्य स्थल से कुछ दूरी पर अलग-अलग जगहों पर जमा किया जाता है और फिर सुबह के समय ट्रैक्टरों के जरिए उसकी सप्लाई किए जाने की बात सामने आ रही है।
वन अमले की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की चर्चा भी की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिम्मेदार विभाग कब करेगा मौके का निरीक्षण?
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर भूतहा नाला एवं पुरानी अमराडंडी के गाडाघाट क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे? क्या रेत के कथित अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन की जांच होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
मामले में प्रशासनिक जांच और मौके की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की संभावना है। आगे की जानकारी के लिए बने रहिए हमारे साथ...
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Insurance Agent सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • कहानी बदलाव की, स्वस्थ्य भारत, स्वस्थ्य समाज आयुष्मान कार्ड योजना से पात्र मरीजों का हो रहा नि: शुल्क उपचार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार #शहडोल #shahdol #SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान
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    कहानी बदलाव की, स्वस्थ्य भारत, स्वस्थ्य समाज 

आयुष्मान कार्ड योजना से पात्र मरीजों का हो रहा नि: शुल्क उपचार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार

#शहडोल #shahdol #SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • नगर परिषद मानपुर के डंडी पहुंच मार्ग पर ‘विकास’ के गड्ढे! जनचिंगारी एक्सक्लूसिव | डंडी पहुंच मार्ग पर ‘विकास’ के गड्ढे! 2018 में पंचायत ने बनाई थी सड़क, नगर परिषद बनने के चार साल बाद भी नहीं सुधरी हालत; भारी वाहनों ने सड़क को बनाया गड्ढों का रास्ता मानपुर। नगर परिषद मानपुर के वार्ड क्रमांक 11 और 12 से डंडी गांव को जोड़ने वाला पहुंच मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और उखड़ी हुई सतह ने ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क अब सड़क कम और गड्ढों की श्रृंखला अधिक नजर आती है। 2018 में पंचायत ने बनाई थी सड़क, अब सिर्फ अवशेष ग्रामीणों के मुताबिक उक्त सड़क का निर्माण वर्ष 2018 में तत्कालीन ग्राम पंचायत मानपुर द्वारा कराया गया था। इसके बाद डंडी क्षेत्र में वेयरहाउस बनने से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गोदाम तक पहुंचने के लिए भारी ट्रकों की नियमित आवाजाही के बावजूद सड़क की क्षमता और रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन वर्षों से भारी वाहनों का दबाव झेल रही सड़क अब जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब वेयरहाउस के लिए व्यवस्था की गई, तब उसके आवागमन वाले मार्ग की मजबूती और रखरखाव की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई? नगर परिषद बनी, लेकिन सड़क की हालत नहीं बदली ग्रामीणों का कहना है कि नगर परिषद बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा, लेकिन डंडी पहुंच मार्ग की स्थिति वर्षों बाद भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार डंडी के साथ बगैहा, कुदरा टोला और गोवर्द क्षेत्र के लोगों को भी इसी मार्ग की खराब हालत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का सवाल है—जब शहर और आसपास के अन्य क्षेत्रों में बीटी एवं सीसी सड़कें बनाई जा रही हैं, तो डंडी पहुंच मार्ग विकास की प्राथमिकता से बाहर क्यों है? राशन परिवहन से लेकर स्कूल-अस्पताल तक परेशानी यह मार्ग केवल ग्रामीणों की सामान्य आवाजाही का रास्ता नहीं है। इसी मार्ग से विद्यार्थी स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग बाजार पहुंचते हैं और मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक मानपुर जनपद क्षेत्र की राशन दुकानों तक पीडीएस खाद्यान्न पहुंचाने वाले वाहनों की आवाजाही भी इस मार्ग से होती है। खराब सड़क के कारण भारी वाहन कई बार कीचड़ और गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है। आवेदन-निवेदन के बाद भी समाधान नहीं ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि सड़क की मरम्मत एवं निर्माण को लेकर नगर परिषद के जिम्मेदारों को कई बार आवेदन और मौखिक रूप से शिकायतें की गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वार्ड 11 और 12 के इस मार्ग की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि तत्काल गड्ढों की मरम्मत के साथ-साथ स्थायी रूप से आरसीसी अथवा बीटी सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए। कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग लगातार खराब होती सड़क से परेशान ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और वस्तुस्थिति देखने के बाद संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत तथा स्थायी सड़क निर्माण के निर्देश दें। ग्रामीणों का कहना है कि “हमें आश्वासन नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए।” अब जिम्मेदारों की बारी डंडी पहुंच मार्ग की बदहाली ने नगर परिषद की सड़क निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि वर्ष 2018 में बनी सड़क यदि भारी वाहनों के दबाव से क्षतिग्रस्त हुई तो उसके बाद स्थायी समाधान के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई? अब निगाह इस बात पर है कि जिला प्रशासन और नगर परिषद इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और वर्षों से बदहाल इस मार्ग को कब तक राहत मिलती है।
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    नगर परिषद मानपुर के डंडी पहुंच मार्ग पर ‘विकास’ के गड्ढे!

जनचिंगारी एक्सक्लूसिव | डंडी पहुंच मार्ग पर ‘विकास’ के गड्ढे!
2018 में पंचायत ने बनाई थी सड़क, नगर परिषद बनने के चार साल बाद भी नहीं सुधरी हालत; भारी वाहनों ने सड़क को बनाया गड्ढों का रास्ता
मानपुर। नगर परिषद मानपुर के वार्ड क्रमांक 11 और 12 से डंडी गांव को जोड़ने वाला पहुंच मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और उखड़ी हुई सतह ने ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क अब सड़क कम और गड्ढों की श्रृंखला अधिक नजर आती है।
2018 में पंचायत ने बनाई थी सड़क, अब सिर्फ अवशेष
ग्रामीणों के मुताबिक उक्त सड़क का निर्माण वर्ष 2018 में तत्कालीन ग्राम पंचायत मानपुर द्वारा कराया गया था। इसके बाद डंडी क्षेत्र में वेयरहाउस बनने से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गोदाम तक पहुंचने के लिए भारी ट्रकों की नियमित आवाजाही के बावजूद सड़क की क्षमता और रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई।
नतीजतन वर्षों से भारी वाहनों का दबाव झेल रही सड़क अब जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब वेयरहाउस के लिए व्यवस्था की गई, तब उसके आवागमन वाले मार्ग की मजबूती और रखरखाव की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई?
नगर परिषद बनी, लेकिन सड़क की हालत नहीं बदली
ग्रामीणों का कहना है कि नगर परिषद बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा, लेकिन डंडी पहुंच मार्ग की स्थिति वर्षों बाद भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार डंडी के साथ बगैहा, कुदरा टोला और गोवर्द क्षेत्र के लोगों को भी इसी मार्ग की खराब हालत का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का सवाल है—जब शहर और आसपास के अन्य क्षेत्रों में बीटी एवं सीसी सड़कें बनाई जा रही हैं, तो डंडी पहुंच मार्ग विकास की प्राथमिकता से बाहर क्यों है?
राशन परिवहन से लेकर स्कूल-अस्पताल तक परेशानी
यह मार्ग केवल ग्रामीणों की सामान्य आवाजाही का रास्ता नहीं है। इसी मार्ग से विद्यार्थी स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग बाजार पहुंचते हैं और मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक मानपुर जनपद क्षेत्र की राशन दुकानों तक पीडीएस खाद्यान्न पहुंचाने वाले वाहनों की आवाजाही भी इस मार्ग से होती है। खराब सड़क के कारण भारी वाहन कई बार कीचड़ और गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है।
आवेदन-निवेदन के बाद भी समाधान नहीं
ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि सड़क की मरम्मत एवं निर्माण को लेकर नगर परिषद के जिम्मेदारों को कई बार आवेदन और मौखिक रूप से शिकायतें की गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वार्ड 11 और 12 के इस मार्ग की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि तत्काल गड्ढों की मरम्मत के साथ-साथ स्थायी रूप से आरसीसी अथवा बीटी सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
लगातार खराब होती सड़क से परेशान ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और वस्तुस्थिति देखने के बाद संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत तथा स्थायी सड़क निर्माण के निर्देश दें।
ग्रामीणों का कहना है कि “हमें आश्वासन नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए।”
अब जिम्मेदारों की बारी
डंडी पहुंच मार्ग की बदहाली ने नगर परिषद की सड़क निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि वर्ष 2018 में बनी सड़क यदि भारी वाहनों के दबाव से क्षतिग्रस्त हुई तो उसके बाद स्थायी समाधान के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई?
अब निगाह इस बात पर है कि जिला प्रशासन और नगर परिषद इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और वर्षों से बदहाल इस मार्ग को कब तक राहत मिलती है।
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
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