AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक। खेत से लैब तक नहीं, किसान पहुंचे ‘मॉडल फार्म’ की जमीन पर! AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक खेती में बदलाव केवल कागजों और प्रशिक्षण कक्षों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान नई तकनीकों को अपनी आंखों से देखें और उनके व्यावहारिक उपयोग को समझें—इसी उद्देश्य से HDFC Bank Parivartan एवं CARD संस्था द्वारा सतना स्थित AKS विश्वविद्यालय में किसानों के लिए एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गया। करीब 70 किसानों ने इस भ्रमण में हिस्सा लेकर आधुनिक, प्राकृतिक एवं कृषि आधारित आयवर्धक गतिविधियों के प्रत्यक्ष मॉडल देखे। भ्रमण के दौरान किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जैविक खाद, पशुपालन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, अजोला, पॉलीहाउस, ऑफ-सीजन खेती और गुलाब उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर समन्वय से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं। 120 शाहीवाल-गिर गायों ने खींचा ध्यान विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की उन्नत गायों को देखा। विशेषज्ञों ने नस्ल की विशेषताओं, पोषण, रख-रखाव और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी। किसानों ने पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर आय का अतिरिक्त माध्यम बनाने की संभावनाओं को समझा। पॉलीहाउस में दिखा मौसम को मात देकर खेती का मॉडल पॉलीहाउस इकाई में किसानों ने संरक्षित वातावरण में फसल उत्पादन की तकनीक देखी। विशेषज्ञों ने ऑफ-सीजन सब्जियों एवं अन्य फसलों के उत्पादन, बाजार की मांग और संरक्षित खेती की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं गुलाब की खेती ने भी किसानों का ध्यान आकर्षित किया। केंचुआ खाद से अजोला तक, कम लागत वाले मॉडल पर जोर वर्मी कम्पोस्ट इकाई में किसानों ने जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया देखी। अजोला इकाई में इसके उत्पादन और पशुपालन में उपयोग की जानकारी दी गई। मुर्गी पालन इकाई में वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से छोटे स्तर पर अतिरिक्त आय की संभावनाओं को समझाया गया। CARD संस्था की ओर से श्रीमती भावना पवार, सुश्री वंशिका गुप्ता एवं श्री प्रेम चंद्र पाल उपस्थित रहे। AKS विश्वविद्यालय की ओर से डीन डॉ. ए.के. भोमिक, डॉ. चतुर्वेदी, डॉ. डूमर सिंह, सुश्री गरिमा सिंह एवं डॉ. गौरव गुप्ता ने किसानों का मार्गदर्शन किया। भ्रमण के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने कहा कि विभिन्न गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें अपनी खेती और आजीविका में नई तकनीकों को अपनाने के लिए व्यावहारिक जानकारी मिली। ▌एक्सपोजर में क्या-क्या देखा? प्राकृतिक खेती • जैविक खाद • पशुपालन • मुर्गी पालन • वर्मी कम्पोस्ट • अजोला • पॉलीहाउस • ऑफ-सीजन खेती • गुलाब उत्पादन ▌70 किसानों ने देखा खेती का नया मॉडल सतना के AKS विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट में करीब 70 किसानों ने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी हासिल की। ▌120 उन्नत नस्ल की गायें विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की गायों का अवलोकन किया और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी ली। ▌पॉलीहाउस बना आकर्षण का केंद्र संरक्षित वातावरण में ऑफ-सीजन फसल उत्पादन की तकनीक देखकर किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप वैकल्पिक आय की संभावनाओं को समझा।
AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक। खेत से लैब तक नहीं, किसान पहुंचे ‘मॉडल फार्म’ की जमीन पर! AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक खेती में बदलाव केवल कागजों और प्रशिक्षण कक्षों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान नई तकनीकों को अपनी आंखों से देखें और उनके व्यावहारिक उपयोग को समझें—इसी उद्देश्य से HDFC Bank Parivartan एवं CARD संस्था द्वारा सतना स्थित AKS विश्वविद्यालय में किसानों के लिए एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गया। करीब 70 किसानों ने इस भ्रमण में हिस्सा लेकर आधुनिक, प्राकृतिक एवं कृषि आधारित आयवर्धक गतिविधियों के प्रत्यक्ष मॉडल देखे। भ्रमण के दौरान किसानों
को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जैविक खाद, पशुपालन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, अजोला, पॉलीहाउस, ऑफ-सीजन खेती और गुलाब उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर समन्वय से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं। 120 शाहीवाल-गिर गायों ने खींचा ध्यान विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की उन्नत गायों को देखा। विशेषज्ञों ने नस्ल की विशेषताओं, पोषण, रख-रखाव और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी। किसानों ने पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर आय का अतिरिक्त माध्यम बनाने की संभावनाओं को समझा। पॉलीहाउस में दिखा मौसम को मात देकर खेती का मॉडल पॉलीहाउस इकाई में किसानों ने संरक्षित वातावरण में फसल उत्पादन की तकनीक देखी। विशेषज्ञों ने ऑफ-सीजन सब्जियों एवं अन्य
फसलों के उत्पादन, बाजार की मांग और संरक्षित खेती की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं गुलाब की खेती ने भी किसानों का ध्यान आकर्षित किया। केंचुआ खाद से अजोला तक, कम लागत वाले मॉडल पर जोर वर्मी कम्पोस्ट इकाई में किसानों ने जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया देखी। अजोला इकाई में इसके उत्पादन और पशुपालन में उपयोग की जानकारी दी गई। मुर्गी पालन इकाई में वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से छोटे स्तर पर अतिरिक्त आय की संभावनाओं को समझाया गया। CARD संस्था की ओर से श्रीमती भावना पवार, सुश्री वंशिका गुप्ता एवं श्री प्रेम चंद्र पाल उपस्थित रहे। AKS विश्वविद्यालय की ओर से डीन डॉ. ए.के. भोमिक, डॉ. चतुर्वेदी, डॉ. डूमर सिंह, सुश्री गरिमा सिंह एवं डॉ. गौरव गुप्ता ने किसानों का मार्गदर्शन किया। भ्रमण के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों
ने कहा कि विभिन्न गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें अपनी खेती और आजीविका में नई तकनीकों को अपनाने के लिए व्यावहारिक जानकारी मिली। ▌एक्सपोजर में क्या-क्या देखा? प्राकृतिक खेती • जैविक खाद • पशुपालन • मुर्गी पालन • वर्मी कम्पोस्ट • अजोला • पॉलीहाउस • ऑफ-सीजन खेती • गुलाब उत्पादन ▌70 किसानों ने देखा खेती का नया मॉडल सतना के AKS विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट में करीब 70 किसानों ने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी हासिल की। ▌120 उन्नत नस्ल की गायें विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की गायों का अवलोकन किया और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी ली। ▌पॉलीहाउस बना आकर्षण का केंद्र संरक्षित वातावरण में ऑफ-सीजन फसल उत्पादन की तकनीक देखकर किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप वैकल्पिक आय की संभावनाओं को समझा।
- AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक। खेत से लैब तक नहीं, किसान पहुंचे ‘मॉडल फार्म’ की जमीन पर! AKS विश्वविद्यालय में 70 किसानों ने देखा खेती का नया चेहरा—प्राकृतिक खेती से पॉलीहाउस तक, शाहीवाल-गिर गायों से अजोला और वर्मी कम्पोस्ट तक सीखी कमाई की तकनीक खेती में बदलाव केवल कागजों और प्रशिक्षण कक्षों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान नई तकनीकों को अपनी आंखों से देखें और उनके व्यावहारिक उपयोग को समझें—इसी उद्देश्य से HDFC Bank Parivartan एवं CARD संस्था द्वारा सतना स्थित AKS विश्वविद्यालय में किसानों के लिए एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट आयोजित किया गया। करीब 70 किसानों ने इस भ्रमण में हिस्सा लेकर आधुनिक, प्राकृतिक एवं कृषि आधारित आयवर्धक गतिविधियों के प्रत्यक्ष मॉडल देखे। भ्रमण के दौरान किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जैविक खाद, पशुपालन, मुर्गी पालन, वर्मी कम्पोस्ट, अजोला, पॉलीहाउस, ऑफ-सीजन खेती और गुलाब उत्पादन जैसी गतिविधियों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर समन्वय से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत भी विकसित किए जा सकते हैं। 120 शाहीवाल-गिर गायों ने खींचा ध्यान विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की उन्नत गायों को देखा। विशेषज्ञों ने नस्ल की विशेषताओं, पोषण, रख-रखाव और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी दी। किसानों ने पशुपालन को खेती के साथ जोड़कर आय का अतिरिक्त माध्यम बनाने की संभावनाओं को समझा। पॉलीहाउस में दिखा मौसम को मात देकर खेती का मॉडल पॉलीहाउस इकाई में किसानों ने संरक्षित वातावरण में फसल उत्पादन की तकनीक देखी। विशेषज्ञों ने ऑफ-सीजन सब्जियों एवं अन्य फसलों के उत्पादन, बाजार की मांग और संरक्षित खेती की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं गुलाब की खेती ने भी किसानों का ध्यान आकर्षित किया। केंचुआ खाद से अजोला तक, कम लागत वाले मॉडल पर जोर वर्मी कम्पोस्ट इकाई में किसानों ने जैविक खाद तैयार करने की प्रक्रिया देखी। अजोला इकाई में इसके उत्पादन और पशुपालन में उपयोग की जानकारी दी गई। मुर्गी पालन इकाई में वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से छोटे स्तर पर अतिरिक्त आय की संभावनाओं को समझाया गया। CARD संस्था की ओर से श्रीमती भावना पवार, सुश्री वंशिका गुप्ता एवं श्री प्रेम चंद्र पाल उपस्थित रहे। AKS विश्वविद्यालय की ओर से डीन डॉ. ए.के. भोमिक, डॉ. चतुर्वेदी, डॉ. डूमर सिंह, सुश्री गरिमा सिंह एवं डॉ. गौरव गुप्ता ने किसानों का मार्गदर्शन किया। भ्रमण के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने कहा कि विभिन्न गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने से उन्हें अपनी खेती और आजीविका में नई तकनीकों को अपनाने के लिए व्यावहारिक जानकारी मिली। ▌एक्सपोजर में क्या-क्या देखा? प्राकृतिक खेती • जैविक खाद • पशुपालन • मुर्गी पालन • वर्मी कम्पोस्ट • अजोला • पॉलीहाउस • ऑफ-सीजन खेती • गुलाब उत्पादन ▌70 किसानों ने देखा खेती का नया मॉडल सतना के AKS विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय एक्सपोजर विजिट में करीब 70 किसानों ने कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों की व्यावहारिक जानकारी हासिल की। ▌120 उन्नत नस्ल की गायें विश्वविद्यालय की पशुपालन इकाई में किसानों ने लगभग 120 शाहीवाल एवं गिर नस्ल की गायों का अवलोकन किया और वैज्ञानिक पशुपालन की जानकारी ली। ▌पॉलीहाउस बना आकर्षण का केंद्र संरक्षित वातावरण में ऑफ-सीजन फसल उत्पादन की तकनीक देखकर किसानों ने बाजार की मांग के अनुरूप वैकल्पिक आय की संभावनाओं को समझा।4
- हवाई पट्टी के पास सड़क हादसा, तीन गम्भीर रूप से घायल... *हवाई पट्टी के पास सड़क हादसा, तीन गम्भीर रूप से घायल* मध्य प्रदेश उमरिया मुख्यालय हवाई पट्टी के करीब सड़क हादसे में तीन बाईक सवार के घायल होने की खबर है। हादसे के बाद तीनों घायलों को सिविल चौकी पुलिस की मदद से जिला अस्पताल लाया गया। बताया गया है कि दो बाइक की जोड़दार टक्कर हो गई। जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। खबर है कि सड़क हादसे में एक की पहचान दुब्बार निवासी दिनेश यादव के रूप में हुई है। जो पिपरिया स्थित पेट्रोल पंप टंकी में कर्मी है। बाकी दूसरी बाइक में सवार युवकों की पहचान नहीं हो सकी है। हालांकि बताया जाता है कि ये दोनों खरहटा गांव से उमरिया शहर की ओर आ रहे थे। दरअसल वे तीनों हादसे के बाद गंभीर अवस्था में है। जिस वजह से हादसे के कारण और पहचान वर्तमान में नहीं हो पाई है।1
- मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, असिस्टेंट प्रोफेसर बनकर डॉ. प्रियम विश्वकर्मा ने किया चरितार्थ सफलता की कहानी === === शहडोल 24 सितम्बर 2026- सफलता एक न एक दिन जरूर मिलती है। बस जरूरत है कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण के साथ निरंतर पढ़ाई करने की। मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती, इसलिए अपनी मेहनत पर विश्वास रखें और पूरी ईमानदारी से प्रयास करते रहें। इस कहावत को शहडोल जिले की तहसील ब्यौहारी के ग्राम सकंदी निवासी डॉ. प्रियम विश्वकर्मा, पिता श्री रामनारायण विश्वकर्मा ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में वाणिज्य विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयनित होकर चरितार्थ किया है। डॉ. प्रियम विश्वकर्मा ने बताया कि ग्राम सकंदी उनकी जन्मभूमि है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जिले की तहसील गोहपारू में ग्रहण की। कक्षा 11वीं एवं 12वीं की पढ़ाई मध्यप्रदेश की सुपर-100 योजना के तहत इंदौर से पूर्ण की। इसके बाद बी.कॉम., एम.कॉम. शिक्षा एवं पीएच.डी. की डिग्री बनारस विश्वविद्यालय, वाराणसी से प्राप्त की। वर्ष 2025 में उन्हें पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि इस सफलता में उनके माता-पिता, परिवारजनों एवं गुरुजनों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा, जिसकी बदौलत उन्हें यह सफलता हासिल हुई। डॉ. प्रियम विश्वकर्मा की यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह संदेश देती है कि निरंतर मेहनत, लगन और समर्पण से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।1
- झमाझम बारिश के बीच बांधवगढ़ में पांच दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आगाज, नन्हें 'कृष्णा' की अठखेलियों ने मोहा मन झमाझम बारिश के बीच बांधवगढ़ में पांच दिवसीय 'हाथी महोत्सव' का आगाज, नन्हें 'कृष्णा' की अठखेलियों ने मोहा मन उमरिया। झमाझम बारिश के बीच विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पांच दिवसीय हाथी महोत्सव 2026 की शुरुआत हो गई है। परासी गेट के समीप स्थित धमोखर बफर क्षेत्र में आयोजित उद्घाटन समारोह में कलेक्टर राखी सहाय, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पत्रकार, स्थानीय रहवासी और ईडीसी (पारिस्थितिकी विकास समिति) के पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान बांधवगढ़ के कैंप हाथियों की भूमिका और उनके संरक्षण को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कुल 15 कैंप हाथी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से चार हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन, दो अनुश्रवण (मॉनिटरिंग) कार्य और नौ हाथी पुनर्यौवनीकरण (रेजुवेनेशन) कैंप में शामिल हैं। आकर्षण का केंद्र बना नन्हा 'कृष्णा' महोत्सव के पहले दिन नन्हें नर हाथी 'कृष्णा' ने अपनी अठखेलियों और उछलकूद से वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बता दें कि कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था, जिसका नामकरण प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया गया था। सेहत और सेवा को समर्पित महोत्सव इस पांच दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण करना, उनकी विशेष देखभाल करना और उन्हें उनकी पसंद का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही, इस महोत्सव के माध्यम से स्थानीय लोगों को हाथियों को करीब से जानने, उनके स्वभाव को समझने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक होने का एक अनूठा अवसर मिल रहा है।4
- *विकास" ने डंडी का रास्ता देखा ही नहीं! गड्ढों में सड़क ढूंढ रहे ग्रामीण, बोले: "पंचायत लौटा दो, कम से कम बहाने तो नहीं मिलते थे* *विकास" ने डंडी का रास्ता देखा ही नहीं! गड्ढों में सड़क ढूंढ रहे ग्रामीण, बोले: "पंचायत लौटा दो, कम से कम बहाने तो नहीं मिलते थे* मानपुर।नगर परिषद मानपुर के वार्ड 11 और 12 में डंडी पहुंच मार्ग पर चलना अब सड़क यात्रा नहीं, साहसिक खेल है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि इंजीनियर चाहें तो इनमें "जल संरक्षण परियोजना" का उद्घाटन कर दें। सड़क कहां है, यह खोजने के लिए अब ग्रामीणों को गूगल मैप नहीं, खुदाई विभाग की जरूरत है। *2018 में पंचायत ने सड़क बनवाई, आज सिर्फ यादें बचीं* उक्त सड़क ग्राम पंचायत मानपुर ने वर्ष 2018 में बनवाई थी, तब डंडी गांव खुशी से झूम उठा था। फिर शासन ने डंडी में वेयरहाउस बनाया, पर भारी ट्रकों के लिए अलग सड़क बनाने की "छोटी सी बात" भूल गया। नतीजा यह कि पंचायत की बनवाई सड़क ने ट्रकों का बोझ उठाते-उठाते दम तोड़ दिया। ग्रामीणों की सड़क पर शासन के गोदाम का बोझ लादा गया, और अब बदहाली की जिम्मेदारी लेने कोई आगे नहीं आ रहा। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि गोदाम बनाते वक्त अनाज का हिसाब तो रखा गया, पर उसके रास्ते का हिसाब किसके खाते में गया? *मानपुर में सड़कों का जाल, डंडी में गड्ढों का जाल* नगर परिषद बनी तो ग्रामीणों ने सोचा कि अब अच्छे दिन आएंगे। चुनाव में नेताजी वादों की बारिश करके गए, वह बारिश भी सिर्फ गड्ढों में भरने के काम आई। 4 साल से ज्यादा हो गए, डंडी का रास्ता जस का तस है। उधर मानपुर में गली-मोहल्लों से खेत-खलिहानों तक बीटी और सीसी सड़कों की चमक है। डंडी, बगैहा, कुदरा टोला और गोवर्द को क्या मिला? गड्ढे, कीचड़ और आश्वासन। ग्रामीण पूछते हैं, "यह कैसा विकास है, जो खेतों तक पहुंच गया पर हम तक नहीं पहुंचा?" *साहब, विकास आप रख लो, हमें पुरानी पंचायत लौटा दो!* ग्रामीणों का धैर्य अब व्यंग्य बनकर बह रहा है: "हम इस विकास से ऊब चुके हैं साहब, हमें वही पुरानी अव्यवस्थित ग्राम पंचायत लौटा दी जाए।" आखिर सड़क तो उसी पंचायत ने बनवाई थी, नगर परिषद तो चार साल में एक गड्ढा भी नहीं भर पाई। टैक्स और तरह-तरह के कर वे ईमानदारी से भर रहे हैं, पर बदले में विकास का एक कंकड़ भी नसीब नहीं हुआ। उनकी मांग है कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी एक बार आकर मौका मुआयना करें, एसी गाड़ी से उतरकर पैदल चलें, फिर बताएं कि सड़क कहां है। *राशन भी फंसा, बच्चे-बुजुर्ग भी* इसी रास्ते से बच्चे स्कूल, बुजुर्ग बाजार और मरीज अस्पताल जाते हैं, हर कदम पर हड्डी बचाते हुए। मानपुर जनपद की सभी राशन दुकानों तक पीडीएस का अनाज पहुंचाने वाली अन्दूत की गाड़ियां भी यहीं से गुजरती हैं और गड्ढों-कीचड़ में दिन-दिन भर फंसी रहती हैं। हर महीने की 1 तारीख से पहले राशन पहुंचाना होता है, पर सड़क की हालत देखकर लगता है कि गरीब की थाली तक अनाज पहुंचने से पहले कीचड़ का "प्रसाद" पहुंच रहा है। *आवेदन, निवेदन, प्रतिवेदन… और नगर परिषद की कुंभकर्णी नींद* ग्रामीणों और चालकों ने नगर परिषद को इतने आवेदन, निवेदन और प्रतिवेदन दिए कि अब कागज भी शर्मिंदा है। पर जवाब में मिला सिर्फ सन्नाटा। आरोप है कि परिषद वार्ड 11 और 12 के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है: 4 साल में सड़क बनी नहीं, और अब गड्ढे भरने में भी आनाकानी है। शायद परिषद को डर है कि गड्ढे भर गए तो "विकास" का सबूत मिट जाएगा, या फिर फाइलें भी इन्हीं गड्ढों में गिरकर लापता हैं। *कलेक्टर साहब, अब आपसे ही आस* थक-हारकर रहवासियों ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाई है कि डंडी पहुंच मार्ग का नया आरसीसी या बीटी सड़क निर्माण जल्द कराया जाए, और तत्काल व्यवस्था के तौर पर नगर परिषद को निर्देश देकर गड्ढे भरवाए जाएं। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की कुंभकर्णी नींद पहले टूटती है, या ग्रामीणों का सब्र। सड़क तो वैसे भी कब की टूट चुकी है।1
- कहानी बदलाव की, स्वस्थ्य भारत, स्वस्थ्य समाज आयुष्मान कार्ड योजना से पात्र मरीजों का हो रहा नि: शुल्क उपचार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार #शहडोल #shahdol #SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान कहानी बदलाव की, स्वस्थ्य भारत, स्वस्थ्य समाज आयुष्मान कार्ड योजना से पात्र मरीजों का हो रहा नि: शुल्क उपचार, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार #शहडोल #shahdol #SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान1
- धमोखर में हाथियों की ‘पांच दिन की छुट्टी’, नन्हा कृष्णा बना आकर्षण उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गुरुवार को झमाझम बारिश के बीच पांच दिवसीय हाथी महोत्सव एवं पुनर्यौवनीकरण कैंप 2026 का शुभारंभ हुआ। धमोखर बफर क्षेत्र के परासी गेट के समीप आयोजित यह महोत्सव 28 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान जंगल की सुरक्षा, गश्त और रेस्क्यू अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कैम्प हाथियों की विशेष देखभाल की जाएगी। उद्घाटन कार्यक्रम में उमरिया कलेक्टर राखी सहाय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में DFO विवेक सिंह, जिला पंचायत CEO अभय सिंह ओहरिया, संभागीय प्रबंधक अमित पटौदी, BTR उप संचालक योहान कटारा सहित वन विभाग के अधिकारी, पत्रकार, EDC अध्यक्ष और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। 15 हाथियों में 9 की महोत्सव में मौजूदगी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 15 कैम्प हाथी हैं। इनमें चार हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन और दो अनुश्रवण कार्य में लगे हुए हैं। शेष नौ हाथियों को पुनर्यौवनीकरण कैंप में शामिल किया गया है। पांच दिनों के दौरान इनका स्वास्थ्य परीक्षण, स्नान, मालिश और विशेष देखभाल की जाएगी। पसंदीदा भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस आयोजन में नन्हा कृष्णा खास आकर्षण बना हुआ है। अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में जन्मे कृष्णा का नामकरण 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बांधवगढ़ प्रवास के दौरान किया गया था। अपनी अठखेलियों और उछलकूद से वह महोत्सव में मौजूद लोगों का ध्यान खींच रहा है। गौतम सबसे उम्रदराज, कृष्णा सबसे छोटा बांधवगढ़ के हाथी परिवार में 10 नर और पांच मादा हाथी हैं। नर हाथियों में 80 वर्षीय गौतम सबसे उम्रदराज हैं, जबकि मादा हाथियों में 62 वर्षीय अनारकली सबसे बुजुर्ग है। दूसरी ओर करीब एक वर्ष का कृष्णा इस परिवार की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है। रेस्क्यू में व्यस्त हाथी नहीं हो सके शामिल मैहर वन मंडल के गोरसरी क्षेत्र में जंगली हाथी के रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते बांधवगढ़ के कुछ कैम्प हाथी और रेस्क्यू दल महोत्सव में शामिल नहीं हो सके। विभागीय टीम वहां रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई है। क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार, हाथी महोत्सव का उद्देश्य हाथियों को आराम और विशेष देखभाल देने के साथ उनके स्वास्थ्य की निगरानी करना तथा स्थानीय समुदाय को हाथियों और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस बार परासी गेट को आयोजन स्थल बनाए जाने से धमोखर बफर क्षेत्र में पर्यटन और ग्रामीण सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।1
- नगर परिषद मानपुर के डंडी पहुंच मार्ग पर ‘विकास’ के गड्ढे! जनचिंगारी एक्सक्लूसिव | डंडी पहुंच मार्ग पर ‘विकास’ के गड्ढे! 2018 में पंचायत ने बनाई थी सड़क, नगर परिषद बनने के चार साल बाद भी नहीं सुधरी हालत; भारी वाहनों ने सड़क को बनाया गड्ढों का रास्ता मानपुर। नगर परिषद मानपुर के वार्ड क्रमांक 11 और 12 से डंडी गांव को जोड़ने वाला पहुंच मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और उखड़ी हुई सतह ने ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क अब सड़क कम और गड्ढों की श्रृंखला अधिक नजर आती है। 2018 में पंचायत ने बनाई थी सड़क, अब सिर्फ अवशेष ग्रामीणों के मुताबिक उक्त सड़क का निर्माण वर्ष 2018 में तत्कालीन ग्राम पंचायत मानपुर द्वारा कराया गया था। इसके बाद डंडी क्षेत्र में वेयरहाउस बनने से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि गोदाम तक पहुंचने के लिए भारी ट्रकों की नियमित आवाजाही के बावजूद सड़क की क्षमता और रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन वर्षों से भारी वाहनों का दबाव झेल रही सड़क अब जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब वेयरहाउस के लिए व्यवस्था की गई, तब उसके आवागमन वाले मार्ग की मजबूती और रखरखाव की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई? नगर परिषद बनी, लेकिन सड़क की हालत नहीं बदली ग्रामीणों का कहना है कि नगर परिषद बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा, लेकिन डंडी पहुंच मार्ग की स्थिति वर्षों बाद भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार डंडी के साथ बगैहा, कुदरा टोला और गोवर्द क्षेत्र के लोगों को भी इसी मार्ग की खराब हालत का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का सवाल है—जब शहर और आसपास के अन्य क्षेत्रों में बीटी एवं सीसी सड़कें बनाई जा रही हैं, तो डंडी पहुंच मार्ग विकास की प्राथमिकता से बाहर क्यों है? राशन परिवहन से लेकर स्कूल-अस्पताल तक परेशानी यह मार्ग केवल ग्रामीणों की सामान्य आवाजाही का रास्ता नहीं है। इसी मार्ग से विद्यार्थी स्कूल जाते हैं, बुजुर्ग बाजार पहुंचते हैं और मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक मानपुर जनपद क्षेत्र की राशन दुकानों तक पीडीएस खाद्यान्न पहुंचाने वाले वाहनों की आवाजाही भी इस मार्ग से होती है। खराब सड़क के कारण भारी वाहन कई बार कीचड़ और गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती है। आवेदन-निवेदन के बाद भी समाधान नहीं ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि सड़क की मरम्मत एवं निर्माण को लेकर नगर परिषद के जिम्मेदारों को कई बार आवेदन और मौखिक रूप से शिकायतें की गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वार्ड 11 और 12 के इस मार्ग की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि तत्काल गड्ढों की मरम्मत के साथ-साथ स्थायी रूप से आरसीसी अथवा बीटी सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए। कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग लगातार खराब होती सड़क से परेशान ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वरिष्ठ अधिकारी मौके का निरीक्षण करें और वस्तुस्थिति देखने के बाद संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत तथा स्थायी सड़क निर्माण के निर्देश दें। ग्रामीणों का कहना है कि “हमें आश्वासन नहीं, चलने लायक सड़क चाहिए।” अब जिम्मेदारों की बारी डंडी पहुंच मार्ग की बदहाली ने नगर परिषद की सड़क निर्माण और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि वर्ष 2018 में बनी सड़क यदि भारी वाहनों के दबाव से क्षतिग्रस्त हुई तो उसके बाद स्थायी समाधान के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई? अब निगाह इस बात पर है कि जिला प्रशासन और नगर परिषद इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और वर्षों से बदहाल इस मार्ग को कब तक राहत मिलती है।1