राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ पंचायत समिति के देवदा साथ गांव, हिम्मतपुरा के निवासी प्रभु डीडोड के जीवन में 15 साल पहले कुष्ठ रोग ने ऐसी बदकिस्मती लाई कि उनके दोनों हाथों और पैरों की उंगलियां व अंगूठे खत्म हो गए। इस बीमारी के कारण, प्रभु को मिलने वाली पेंशन योजना का लाभ तीन साल पहले बंद हो गया, क्योंकि उंगलियां न होने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है। प्राइम न्यूज राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी कुशलगढ़, बांसवाड़ा की रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर जहाँ राजस्थान सरकार गरीबों और निर्धनों के लिए कई योजनाएं बनाकर उन्हें लाभान्वित करने हेतु अपने खजाने से भरपूर राशि देती है, वहीं इस मामले ने उन दावों पर सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में सरकार, उच्च स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस ओर ध्यान देने की अपील की गई है। रिपोर्टर ने सवाल उठाया है कि हाथों और पैरों की उंगलियां न होने से फिंगरप्रिंट सत्यापन नहीं हो पा रहा, इसलिए यह गरीब व्यक्ति पेंशन योजना से वंचित है, तो क्या आँखों की पुतलियों के सहारे सत्यापन करके बंद पेंशन योजना को पुनः शुरू किया जाएगा या नहीं। इसका जवाब भविष्य के गर्भ में है।
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की कुशलगढ़ पंचायत समिति के देवदा साथ गांव, हिम्मतपुरा के निवासी प्रभु डीडोड के जीवन में 15 साल पहले कुष्ठ रोग ने ऐसी बदकिस्मती लाई कि उनके दोनों हाथों और पैरों की उंगलियां व अंगूठे खत्म हो गए। इस बीमारी के कारण, प्रभु को मिलने वाली पेंशन योजना का लाभ तीन साल पहले बंद हो गया, क्योंकि उंगलियां न होने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है। प्राइम न्यूज राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी कुशलगढ़, बांसवाड़ा की रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर जहाँ राजस्थान सरकार गरीबों और निर्धनों के लिए कई योजनाएं
बनाकर उन्हें लाभान्वित करने हेतु अपने खजाने से भरपूर राशि देती है, वहीं इस मामले ने उन दावों पर सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में सरकार, उच्च स्तरीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से इस ओर ध्यान देने की अपील की गई है। रिपोर्टर ने सवाल उठाया है कि हाथों और पैरों की उंगलियां न होने से फिंगरप्रिंट सत्यापन नहीं हो पा रहा, इसलिए यह गरीब व्यक्ति पेंशन योजना से वंचित है, तो क्या आँखों की पुतलियों के सहारे सत्यापन करके बंद पेंशन योजना को पुनः शुरू किया जाएगा या नहीं। इसका जवाब भविष्य के गर्भ में है।
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की वरसाला ग्राम पंचायत में स्थित पांच डुंगरी और कर्ण घाटी, महाभारत काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रही हैं। अज्ञातवास के समय पांडवों ने इन स्थलों पर घोर तपस्या की थी, जिससे ये स्थान द्वापर युग की घटनाओं के जीवंत साक्षी बन गए हैं, हालांकि सरकारी उपेक्षा के कारण ये अभी भी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। प्राइम न्यूज़ राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छल-कपट कर पांडवों को अज्ञातवास दिया गया था, इस शर्त के साथ कि यदि अज्ञातवास भंग हुआ तो उन्हें दोबारा अज्ञातवास भुगतना पड़ेगा। इसी दौरान, पांडवों ने भेस बदलकर माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ बांसवाड़ा जिले के घोटीया आंबा में शरण ली। बांसवाड़ा जिले को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और घोटीया आंबा में आज भी पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जहाँ गोमुख से निर्मल जलधारा बहती है और प्रतिवर्ष मेला लगता है। इसी पवित्र धाम पर पांडवों ने जप-तप, यज्ञ-हवन और विधि-विधान से पूजा अर्चना की, तब भगवान शिव ने असत्य पर सत्य की जीत का आशीर्वाद दिया। किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के बताए विधि-विधान से पांडवों ने अपनी माता कुंती व पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर बैठकर आराधना शुरू की। जब सुत पुत्र कर्ण को पांडवों के पांच डुंगरी पर होने का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर अज्ञातवास भंग करने आया। किंतु ईश्वरीय शक्ति के आगे कर्ण भी नतमस्तक हो गया, वह दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया। यह स्थल आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी द्वारा तपस्या की गई पांच डुंगरी और उनकी दो अलग डुंगरिया आज भी इस बियाबान जंगल में विद्यमान हैं। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और वरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ महाभारत की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा की अनदेखी का हमेशा से शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार की एक कार्य योजना तैयार की है, जिसमें पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, यहाँ गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इस संदर्भ में, संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार सोनी सहित संघ के सभी सम्मानित पदाधिकारियों ने पांच डुंगरी का अवलोकन किया। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।4
- डूंगरपुर के गेजी घाटा स्थित टंट्या भील खेल मैदान में आदिवासी प्रतिभा एवं वरिष्ठजन सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जहाँ भंवरलाल परमार ने एक जोरदार संबोधन दिया। अपने भाषण में परमार ने युवाओं, शिक्षा, समाज की एकता और अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी, जिसे एक दमदार भाषण बताया गया।1
- कुशलगढ़ में उपखंड अधिकारी श्रद्धा सिंह ने नगर क्षेत्र के थांदला मार्ग समेत विभिन्न मोहल्लों का औचक निरीक्षण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। शनिवार सुबह 9 बजे मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को हल्की बारिश होने के बावजूद कई स्थानों पर नालियों में जलभराव और जाम की स्थिति मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। निरीक्षण के दौरान थांदला मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में सफाई कार्य, नालियों की स्थिति और कचरा प्रबंधन व्यवस्था का अवलोकन किया गया। कई जगहों पर नालियों में कचरा जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित मिली। इस पर, उपखंड अधिकारी ने नगर पालिका अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल सुधार करने, नियमित सफाई अभियान चलाने और बरसात को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर पालिका निरीक्षक संजय पिठाया और जमादार मनोज समेत सफाई कर्मचारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि नगर की स्वच्छता और आमजन की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों को नियमित मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी से कार्य करने पर ज़ोर दिया। श्रद्धा सिंह ने नगरवासियों से भी अपील की कि वे कचरा निर्धारित पात्रों में और नगर पालिका के कचरा संग्रहण वाहनों में ही डालें, क्योंकि स्वच्छ और सुंदर कुशलगढ़ के निर्माण में प्रशासन और आमजन दोनों की समान भागीदारी आवश्यक है। निरीक्षण के बाद, नगर पालिका प्रशासन ने सफाई एवं कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने का आश्वासन दिया है।2
- नागणेश्वरी माताजी मंदिर, रावला परिसर कुआं में 15वां पाटोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। मंदिर के संरक्षक महिपाल सिंह राठौर ने बताया कि इस पाटोत्सव के तहत मुख्य यजमान प्रह्लाद सिंह और लोकेंद्र सिंह राठौर द्वारा पंडित जलज दवे एवं राज दवे की देखरेख में विशेष पूजा-अर्चना और हवन कार्य संपन्न किया गया। इसके पश्चात, ठाकुर महिपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, लोकेन्द्रसिंह सहित सभी क्षत्रिय समाजजनों ने मिलकर माताजी की आरती उतारी। कार्यक्रम के मुख्य यजमानों द्वारा महाप्रसाद का भी भव्य आयोजन किया गया। इस पाटोत्सव कार्यक्रम की एक खास विशेषता यह रही कि सभी क्षत्रिय समाज के पुरुषों ने सफेद पजामा-कुर्ता और साफा पहनकर एक समान वेशभूषा धारण की, जबकि क्षत्रिय महिलाएं पारंपरिक राजपूती वेशभूषा में उपस्थित थीं। इस पाटोत्सव में ठाकुर महिपाल सिंह, प्रह्लाद सिंह, हिम्मत सिंह, कुआं थानाधिकारी रघुवीरसिंह, नरपत सिंह, संग्राम सिंह, नागेंद्र सिंह, दिग्विजय सिंह, हनुमान सिंह, त्रिलोकेश्वर सिंह, गुणवंत सिंह, राजेन्द्र सिंह मांडव, जितेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, रविन्द्र सिंह, गजेंद्र सिंह दाड़ोदिया, भारत सिंह मटूवोट, भीम सिंह पाडली, चंद्रवीर सिंह वखतपुरा, प्रदीप सिंह गडा नाथजी, कमल प्रताप सिंह टेकला, महेन्द्र सिंह देवला, उदय सिंह गरीयता, हितेंद्र पाल सिंह, वीरेंद्र पाल सिंह, वीर बहादुर सिंह, निरंजन सिंह, भूपेंद्र पाल सिंह, हेमेंद्र सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, तेज बहादुर सिंह, जयवर्धन सिंह, पोपट सिंह, जयवीर सिंह, लोकेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरेंद्र पाल सिंह, दीनदयाल सिंह मेड़ी, वैदिक पाल सिंह, टमर, धर्मवीर सिंह सहित अनेक क्षत्रिय महिलाएं और समाज के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।3
- डूंगरपुर जिले के चिखली पंचायत समिति क्षेत्र के ढेबरा गांव में दूषित भोजन के कारण एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहाँ एक ही परिवार के आठ सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए। शनिवार को भोजन करने के बाद परिवार के सदस्यों को अचानक तेज उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी, जिसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। इस दौरान, एक 15 वर्षीय किशोरी की हालत अत्यधिक गंभीर होने से उसकी मौत हो गई, जबकि परिवार के सात अन्य सदस्य, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं, अस्पताल में भर्ती हैं। घटना की सूचना मिलने पर परिवार के मुखिया रामा गुजरात तत्काल गांव पहुंचे और बीमार परिजनों को लेकर सागवाड़ा स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय गए। सागवाड़ा अस्पताल में भर्ती सात मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए, चिकित्सकों की विशेष टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और प्राथमिक उपचार के बाद सभी को डूंगरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। एक ही परिवार के इतने लोगों के एक साथ गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने से चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग और चिकित्सा अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है, जहाँ अधिकारियों ने बताया कि फूड पॉइजनिंग के वास्तविक कारणों का खुलासा भोजन के नमूनों की जांच के बाद ही हो पाएगा। इस दुखद घटना के बाद गांव में शोक, भय और चिंता का माहौल है, और प्रशासन ने लोगों से भोजन की गुणवत्ता व स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।1
- आज, दिनांक 19 जून 2026 को आसपुर विधानसभा के साबला होटल नक्षत्र में, अमित सरकार के तत्वाधान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जन्मदिन बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर, युवा दिलों की धड़कन, देश के करोड़ों लोगों की धड़कन, प्रतिपक्ष नेता, आदरणीय, सम्माननीय, लाखों करोड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज और हिंदुस्तान कहे जाने वाले राहुल गांधी के जन्मदिवस पर कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं एवं वरिष्ठ जनों ने केक काटकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण जानी, समाजसेवी 84 दिनेश आहारी, आसपुर के युवा नेता मुस्तफा हुसैन, कांग्रेस के राकेश जी बामणिया, नेता भरत त्रिवेदी, कांग्रेस नेता गंगाधर प्रकोट, यूथ कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रत्याशी प्रवीण बरगोट, भेरवजी, दिनेश खेमोत, बहादुरमल जैन, भूपेंद्र जी, राजू गांधी, भरत उपाध्याय, आसिफ हुसैन, 84 विधानसभा से युवा नेता प्रीतम कैलाश जी, अभीषेक और विजय सहित कई युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कई नए युवा कांग्रेस पार्टी से जुड़े, और कार्यकर्ताओं में जन्मदिन को लेकर काफी उत्साह देखने को मिला।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र में स्थित खेड़ा धरती घाटा के बरसाला ग्राम पंचायत में पांच डुंगरी और कर्ण घाटी जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो द्वापर युग में महाभारत काल के पांडवों के अज्ञातवास और तपस्या से जुड़े हैं। इन स्थानों का महत्व बताते हुए, प्राइम न्यूज राजस्थान के धर्मेंद्र कुमार सोनी की रिपोर्ट बताती है कि कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छलपूर्वक दिए गए अज्ञातवास के दौरान, पांडवों ने वेश बदलकर बांसवाड़ा के घोटीया आंबा में प्रवेश किया था, जहाँ उनके साथ माता कुंती और पांचाली द्रौपदी भी थीं। बांसवाड़ा को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और आज भी घोटीया आंबा में पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जिनसे गोमुख से निर्मल जल बहता है। यहाँ हर साल मेला लगता है और देश भर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। पांडवों ने इसी पवित्र धाम पर जप, तप, यज्ञ, हवन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें असत्य पर सत्य की विजय का आशीर्वाद दिया था। किंवदंती के अनुसार, पांडव अपनी माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर आए और भगवान शिव द्वारा बताई गई विधि से तपस्या में लीन हो गए। जब सूत पुत्र कर्ण को पांडवों की तपस्या का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर उनके अज्ञातवास को भंग करने आया, लेकिन ईश्वरीय शक्ति के आगे उसे नतमस्तक होना पड़ा। कर्ण दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया, जिसे आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। पांडवों, माता कुंती और द्रौपदी द्वारा इन सुनसान डुंगरीयों पर की गई तपस्या से जुड़ी ये पांच डुंगरीयां और माता कुंती व द्रौपदी की दो अलग डुंगरीयां महाभारत काल से ही विद्यमान हैं। जनश्रुति के अनुसार, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा संरक्षण की अनदेखी का शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और बरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संचार होता है और लोगों को महाभारत की यादें ताजा महसूस होती हैं। इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार के लिए राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने एक कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, साथ ही गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इसी संदर्भ में, संत नरसिंह गिरी महाराज, संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र कुमार सोनी और संघ के अन्य पदाधिकारी पांच डुंगरी पहुंचे और स्थल का अवलोकन किया, जिससे उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।4
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