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Mahesh Ajnar
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- आलीराजपुर जिले में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के उद्देश्य से शनिवार रात 8 बजे हवाई हमले और ब्लैकआउट की एक सफल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर के निर्देशन और अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदा या आपातकालीन स्थिति में विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता और समन्वय की जांच करना था। ड्रिल के दौरान, शहर की विद्युत आपूर्ति को निर्धारित समय के लिए बंद करके ब्लैकआउट की स्थिति निर्मित की गई और सायरन बजाकर नागरिकों को सतर्क किया गया। इस अभ्यास में पुलिस विभाग, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस सेवा और चिकित्सा दलों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन टीमों ने त्वरित बचाव, राहत और आपदा प्रबंधन से संबंधित कार्यों का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया, जिससे विभिन्न एजेंसियों की तत्परता का परीक्षण हुआ। अपर कलेक्टर श्री सोहन कनास ने बताया कि इस तरह की मॉक ड्रिल से आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और मुस्तैद है। इस सफल आयोजन से जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।1
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र की वरसाला ग्राम पंचायत में स्थित पांच डुंगरी और कर्ण घाटी, महाभारत काल से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रही हैं। अज्ञातवास के समय पांडवों ने इन स्थलों पर घोर तपस्या की थी, जिससे ये स्थान द्वापर युग की घटनाओं के जीवंत साक्षी बन गए हैं, हालांकि सरकारी उपेक्षा के कारण ये अभी भी पूरी तरह अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। प्राइम न्यूज़ राजस्थान के रिपोर्टर धर्मेंद्र कुमार सोनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छल-कपट कर पांडवों को अज्ञातवास दिया गया था, इस शर्त के साथ कि यदि अज्ञातवास भंग हुआ तो उन्हें दोबारा अज्ञातवास भुगतना पड़ेगा। इसी दौरान, पांडवों ने भेस बदलकर माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ बांसवाड़ा जिले के घोटीया आंबा में शरण ली। बांसवाड़ा जिले को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और घोटीया आंबा में आज भी पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जहाँ गोमुख से निर्मल जलधारा बहती है और प्रतिवर्ष मेला लगता है। इसी पवित्र धाम पर पांडवों ने जप-तप, यज्ञ-हवन और विधि-विधान से पूजा अर्चना की, तब भगवान शिव ने असत्य पर सत्य की जीत का आशीर्वाद दिया। किंवदंती के अनुसार, भगवान शिव के बताए विधि-विधान से पांडवों ने अपनी माता कुंती व पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर बैठकर आराधना शुरू की। जब सुत पुत्र कर्ण को पांडवों के पांच डुंगरी पर होने का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर अज्ञातवास भंग करने आया। किंतु ईश्वरीय शक्ति के आगे कर्ण भी नतमस्तक हो गया, वह दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया। यह स्थल आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार, पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी द्वारा तपस्या की गई पांच डुंगरी और उनकी दो अलग डुंगरिया आज भी इस बियाबान जंगल में विद्यमान हैं। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और वरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ महाभारत की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा की अनदेखी का हमेशा से शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार की एक कार्य योजना तैयार की है, जिसमें पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, यहाँ गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इस संदर्भ में, संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार सोनी सहित संघ के सभी सम्मानित पदाधिकारियों ने पांच डुंगरी का अवलोकन किया। उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल जन आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।4
- कानवन क्षेत्र में एक जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जहाँ दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे चले। इस घटना के बाद, कानवन पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।1
- एक व्यक्ति ने शिकायत की है कि उनके घर के पास बिजली की लाइन में लगातार खतरा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इस लाइन के तार दो-तीन बार टूट चुके हैं, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा और एक बच्चा भी सुरक्षित रहा। इस खतरे को देखते हुए जब उन्होंने लाइन को स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की बात की, तो बिजली विभाग के कर्मचारियों (लाइन पी वालों) ने उनसे 50,000 रुपये की मांग की। पीड़ित व्यक्ति ने अपनी मजबूरी बताते हुए सवाल उठाया है कि एक गरीब इंसान इतनी बड़ी रकम कहाँ से लाएगा।1
- बड़वानी जिला मुख्यालय पर 21 जून को आयोजित होने वाली नीट (NEET) परीक्षा को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी क्रम में, कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने शनिवार को बड़वानी शहर में बनाए गए विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने केंद्रों पर प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग, बैठक व्यवस्था और कंट्रोल रूम का जायजा लिया और सुरक्षा के मद्देनजर एसडीएम को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के समय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री धीरज बब्बर, एसडीएम श्री भूपेन्द्र रावत, नोडल व डिप्टी कलेक्टर श्री शक्तिसिंह चौहान और सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर भी उपस्थित थे। इस वर्ष जिले के कुल 3,845 अभ्यर्थी नीट परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं, जिनके लिए शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस बार एनटीए (NTA) द्वारा सभी सामान्य अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, जबकि प्रमाणित दिव्यांग अभ्यर्थियों को एक घंटे का अतिरिक्त समय मिलेगा। सिटी को-ऑर्डिनेटर कुन्दन राठौर ने बताया कि अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड का प्रिंट-आउट, पोस्ट कार्ड साइज फोटो और वैध पहचान पत्र (जैसे पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या आधार कार्ड) साथ लाना अनिवार्य है। परीक्षा हॉल में एनटीए द्वारा ही काला बॉल पॉइंट पेन प्रदान किया जाएगा। परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिसके तहत केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच की जाएगी। फ्रिस्किंग प्रक्रिया के दौरान छात्र का फिंगरप्रिंट और लाइव फोटो के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक फेल होता है, तो छात्र अंडरटेकिंग फॉर्म भरकर परीक्षा दे सकेंगे। तलाशी में समय बचाने के लिए कड़ा ड्रेस कोड भी लागू रहेगा, जिसके तहत परीक्षार्थियों को हल्के रंग के, आधी बाजू वाले कपड़े पहनने होंगे। बंद जूते पहनना पूरी तरह प्रतिबंधित है, केवल चप्पल या सैंडल ही मान्य होंगे। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए केंद्रों पर सामान रखने हेतु क्लॉक रूम और अभिभावकों के लिए प्रतीक्षा कक्ष भी बनाए गए हैं।3
- राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखंड क्षेत्र में स्थित खेड़ा धरती घाटा के बरसाला ग्राम पंचायत में पांच डुंगरी और कर्ण घाटी जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो द्वापर युग में महाभारत काल के पांडवों के अज्ञातवास और तपस्या से जुड़े हैं। इन स्थानों का महत्व बताते हुए, प्राइम न्यूज राजस्थान के धर्मेंद्र कुमार सोनी की रिपोर्ट बताती है कि कौरवों द्वारा मामा शकुनि की चाल से छलपूर्वक दिए गए अज्ञातवास के दौरान, पांडवों ने वेश बदलकर बांसवाड़ा के घोटीया आंबा में प्रवेश किया था, जहाँ उनके साथ माता कुंती और पांचाली द्रौपदी भी थीं। बांसवाड़ा को लोड़ी काशी या लघु काशी भी कहा जाता है, और आज भी घोटीया आंबा में पांचों पांडवों की प्रतिमाएं तथा दो छल कुंड मौजूद हैं, जिनसे गोमुख से निर्मल जल बहता है। यहाँ हर साल मेला लगता है और देश भर से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। पांडवों ने इसी पवित्र धाम पर जप, तप, यज्ञ, हवन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की थी, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें असत्य पर सत्य की विजय का आशीर्वाद दिया था। किंवदंती के अनुसार, पांडव अपनी माता कुंती और पांचाली द्रौपदी के साथ पांच डुंगरी पर आए और भगवान शिव द्वारा बताई गई विधि से तपस्या में लीन हो गए। जब सूत पुत्र कर्ण को पांडवों की तपस्या का पता चला, तो वह अपनी विशाल सेना लेकर उनके अज्ञातवास को भंग करने आया, लेकिन ईश्वरीय शक्ति के आगे उसे नतमस्तक होना पड़ा। कर्ण दिग्भ्रमित होकर पांडवों को पहचान नहीं पाया और उल्टे पांव वापस लौट गया, जिसे आज कर्ण घाटी के नाम से जाना जाता है। पांडवों, माता कुंती और द्रौपदी द्वारा इन सुनसान डुंगरीयों पर की गई तपस्या से जुड़ी ये पांच डुंगरीयां और माता कुंती व द्रौपदी की दो अलग डुंगरीयां महाभारत काल से ही विद्यमान हैं। जनश्रुति के अनुसार, यह प्राचीन स्थल सरकारी प्रशासन और पुरा संपदा संरक्षण की अनदेखी का शिकार रहा है। राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ के संघ प्रमुख संत नरसिंह गिरी महाराज, जांबुखंड के औघड़ संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ और बरसाला के वर्तमान सरपंच भुरसिंह खराडी ने बताया कि पांच डुंगरी जन आस्था का केंद्र बिंदु है, जहाँ श्रद्धा, भक्ति और आस्था का संचार होता है और लोगों को महाभारत की यादें ताजा महसूस होती हैं। इस पवित्र स्थल के जीर्णोद्धार के लिए राष्ट्रीय मानव धर्म सक्षा संघ ने एक कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत पांचों पांडवों, माता कुंती और पांचाली द्रौपदी की लघु प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, साथ ही गुरुकुल, गौशाला, साधु-संतों के लिए आश्रम और सुंदर बगीचे का भी निर्माण किया जाएगा। इसी संदर्भ में, संत नरसिंह गिरी महाराज, संत प्रेमनाथ ईश्वर नाथ, राजस्थान मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र कुमार सोनी और संघ के अन्य पदाधिकारी पांच डुंगरी पहुंचे और स्थल का अवलोकन किया, जिससे उम्मीद है कि आने वाले समय में यह पवित्र स्थल आस्था का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।4
- यूट्यूब पर 'dk Mahesh vlogs 117' नामक चैनल को सब्सक्राइब करने का आग्रह किया गया है। साथ ही, यह भी अनुरोध किया गया है कि इस चैनल को सभी दोस्तों के साथ शेयर करें।1