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अंबेडकर नगर के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर कल देर शाम से लंबी लंबी लाइनें देखी जा रही है । लोग अपने बाइक से लेकर बड़े बड़े डिब्बे में पेट्रोल और डीजल स्टोर कर रहे हैं । यह दृश्य देखकर अंबेडकर नगर के जिला अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में फ्यूल उपलब्ध है । अफवाह फैलाने वालों को जेल होगी । किसानों के लिए मड़ाई और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल मौजूद है । कोई जमाखोरी किया तो बक्शा नहीं जाएगा
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अंबेडकर नगर के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर कल देर शाम से लंबी लंबी लाइनें देखी जा रही है । लोग अपने बाइक से लेकर बड़े बड़े डिब्बे में पेट्रोल और डीजल स्टोर कर रहे हैं । यह दृश्य देखकर अंबेडकर नगर के जिला अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में फ्यूल उपलब्ध है । अफवाह फैलाने वालों को जेल होगी । किसानों के लिए मड़ाई और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में डीजल मौजूद है । कोई जमाखोरी किया तो बक्शा नहीं जाएगा
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- आखिर क्यों उठा पुलिस पर सांवरिया निशान, पीड़ित प्रार्थना पत्र लेकर दर दर भटक कर हो रहा परेशान1
- *गैस को छोड़कर अब लोग पेट्रोल टंकियो पर पहुंच रहे डिब्बा ड्रम लेकर भरवाने तेल* *अंबेडकर नगर* जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के इलफातगंज रोड पर चंदयनी के पास स्थित शेखर पेट्रोल पंप पर डीजल पेट्रोल के लिए लगी लंबी लाइन , ड्रम डिब्बा ट्रैक्टर ट्राली में भरकर पहुंच रहे लोग, पेट्रोल टंकी चालक खुले आम दे रहा अधिकारियों को चुनौती। सख्त आदेश के बाद भी नहीं पड़ रहा कोई प्रभाव। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने अफवाह फैलाने व इस तरीके से बड़े-बड़े ड्रम व डिब्बों में तेल देने पर टंकी चालकों पर दिए थे कार्रवाई करने का निर्देश फिर भी नहीं मान रहे पेट्रोल टंकी चालक। अगर इसी तरीके से चलता रहा तो जल्द ही जानता में गलत अफवाह फैलने में देरी नहीं लगेगी , और लोग पेट्रोल टंकियो पर खड़े नजर आएंगे। *ब्यूरो रिपोर्ट वैभव सिंह* ✍️2
- अम्बेडकर नगर में लॉकडाउन की आशंका से पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़, अफरा-तफरी का माहौल अम्बेडकर नगर। जिले में लॉकडाउन लगाए जाने की चर्चाओं के बीच मंगलवार देर शाम अचानक पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के चलते लोगों में घबराहट का माहौल बन गया, जिसके कारण वाहन चालकों ने पेट्रोल-डीजल भरवाने के लिए लंबी कतारें लगा दीं। जिले के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर देर रात तक भीड़ का दबाव बना रहा। कई स्थानों पर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भगदड़ जैसे हालात उत्पन्न हो गए। लोग जल्द से जल्द अपने वाहनों में ईंधन भरवाने की होड़ में नजर आए। इस दौरान यातायात भी प्रभावित हुआ और आसपास के क्षेत्रों में जाम की स्थिति देखने को मिली। स्थानीय लोगों के अनुसार, लॉकडाउन की खबरें तेजी से फैलने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक लॉकडाउन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी। यदि किसी प्रकार का निर्णय लिया जाता है, तो उसे आधिकारिक माध्यमों से ही सार्वजनिक किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त व्यवस्था करने की बात कही जा रही है।1
- अफवाहों का ‘ईंधन’ और खौफ की ‘रफ़्तार’: सिद्धार्थनगर में तेल के लिए त्राहि-त्राहि अजीत मिश्रा (खोजी), ब्यूरो चीफ - बस्ती मंडल सिद्धार्थनगर। सात समंदर पार ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की आहट क्या हुई, सरहदी जिले सिद्धार्थनगर की सड़कों पर पैनिक का ‘विस्फोट’ हो गया। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने की एक अफवाह ने जिले के पेट्रोल पंपों पर वो मंजर पैदा कर दिया, जिसे देखकर लगा कि शायद कल से पहिए थम जाएंगे। आलम यह है कि लोग अपनी गाड़ियों की टंकी ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े गैलनों में भी तेल भरकर घर ले जाने की होड़ में लगे हैं। बढ़नी और शोहरतगढ़ में बिगड़े हालात, पुलिस ने संभाला मोर्चा अफवाह की आग सबसे ज्यादा बढ़नी और शोहरतगढ़ के इलाकों में भड़की। देखते ही देखते पेट्रोल पंपों पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का नतीजा यह हुआ कि कई पंपों पर चंद घंटों में ही 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए, जिससे जनता में डर और गहरा गया। मैदान में उतरे SDM और CO: दी कड़ी चेतावनी हालात की गंभीरता को देखते हुए SDM विवेकानंद मिश्र और CO मयंक द्विवेदी ने खुद मोर्चा संभाला। एसडीएम ने मालगहिया और बढ़नी के पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण किया और सप्लाई चेन की हकीकत जांची। SDM विवेकानंद मिश्र ने दो टूक शब्दों में कहा: "जिले में तेल की रत्ती भर भी कमी नहीं है। स्टॉक पर्याप्त है। तेल की किल्लत की खबरें महज कोरी अफवाह हैं। जो भी सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से भ्रम फैलाएगा, प्रशासन उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई करेगा। लोग अनावश्यक रूप से स्टॉक जमा न करें।" पंपों पर 'पहरा', शांति की अपील क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी ने खुद पंपों पर खड़े होकर व्यवस्था को सुचारू कराया। उन्होंने निर्देश दिया कि लोग कतारबद्ध होकर अपनी जरूरत के मुताबिक ही ईंधन लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस बल को इसलिए तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था और यातायात में कोई बाधा न आए। हकीकत: सप्लाई सुरक्षित, डर बेवजह प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है। युद्ध की खबरों का स्थानीय आपूर्ति पर फिलहाल कोई असर नहीं है। अधिकारियों की सक्रियता के बाद बढ़नी क्षेत्र में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन प्रशासन अभी भी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।1
- थाना धनघटा का वार्षिक निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश महिला हेल्प डेस्क की टीम को उत्कृष्ट कार्य पर सम्मानित संतकबीरनगरब। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना द्वारा बुधवार को थाना धनघटा का वार्षिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान थाने की साफ-सफाई, बैरक व्यवस्था तथा शौचालयों की स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने थाना परिसर, कार्यालय, हवालात, मिशन शक्ति केंद्र, महिला हेल्प डेस्क व साइबर हेल्प डेस्क के अभिलेखों का गहन निरीक्षण किया। महिला हेल्प डेस्क व मिशन शक्ति केंद्र पर दर्ज मामलों की समीक्षा करते हुए रजिस्टरों का रखरखाव संतोषजनक पाए जाने पर पिंक बूथ प्रभारी उपनिरीक्षक अंजली सरोज तथा महिला आरक्षी दामिनी सिंह व सीता यादव को 500 रुपये नकद पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि महिला फरियादियों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनकर त्वरित निस्तारण किया जाए तथा बीट क्षेत्र में जाकर महिलाओं को हेल्पलाइन नंबरों के प्रति जागरूक किया जाए। निरीक्षण के दौरान एफआईआर रजिस्टर, विवेचना अभिलेख, मालखाना रजिस्टर एवं लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए विवेचनाओं को गुणवत्तापूर्ण व समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। महिला एवं बाल अपराधों में विशेष संवेदनशीलता बरतने तथा निर्धारित एसओपी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। इसके अलावा पुलिसकर्मियों से शस्त्रों के रखरखाव एवं संचालन का अभ्यास कराया गया। पुलिस अधीक्षक ने जनता के साथ संवाद, शालीन व्यवहार, त्वरित कार्रवाई एवं निष्पक्ष पुलिसिंग पर विशेष जोर देते हुए रात्रि गश्त बढ़ाने और अपराधियों के विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर गोपनीय निरीक्षक अविनाश प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक दिलीप कुमार सिंह, रीडर एसपी रामआशीष यादव, पीआरओ पी.के. गुप्ता सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।1
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- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- पहले देश बंद फिर गैस क्या अब डीजल पेट्रोल भी आइए जानते हैं1
- अजीत मिश्रा (खोजी) ब्यूरो, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश। बस्ती जिले की सड़कों पर इन दिनों वाहनों का शोर नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों पर चीख-पुकार सुनाई दे रही है। जिले में डीजल-पेट्रोल का ऐसा 'कृत्रिम' संकट खड़ा किया गया है कि आम आदमी की जिंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। छोटे पंपों पर ताले लटके हैं, और जो बड़े पंप खुले हैं, वहाँ मंजर किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आ रहा है। सवाल यह है कि क्या वाकई तेल खत्म हो गया है, या फिर यह आने वाली कीमतों में उछाल से पहले का कोई बड़ा 'खेलो' (म्युचुअल गेम) है? पंपों पर 'नो स्टॉक' का बोर्ड, जनता के सब्र का बांध टूटा जिले के अधिकांश पंपों पर कर्मचारी एक ही रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं— "तेल नहीं है।" घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब उपभोक्ता नोजल के पास पहुँचता है, तो उसे खाली हाथ लौटा दिया जाता है। इस बेरुखी ने जनता के गुस्से में घी डालने का काम किया है। पंप कर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज अब आम बात हो गई है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कभी भी बड़ी हिंसा भड़क सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। सप्लाई की कमी या मुनाफाखोरी की साजिश? एक तरफ कर्मचारी दावा कर रहे हैं कि सप्लाई पूरी तरह बाधित है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में चर्चा आम है कि यह 'आर्टिफिशियल स्कैरसिटी' (कृत्रिम कमी) पैदा की जा रही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का फायदा उठाने के लिए स्टॉक को डंप किया जा रहा है। बड़ा सवाल: अगर सप्लाई नहीं है, तो क्या प्रशासन ने इसकी जांच की? क्या डिपो से आने वाले टैंकरों का मिलान सेल रजिस्टर से किया गया? आखिर 'सस्पेंस' की यह चादर क्यों तानी गई है? गायब प्रशासन और ठप होता जनजीवन हैरानी की बात यह है कि जिले में हाहाकार मचा है, जरूरी काम ठप हो गए हैं, किसान खेतों में परेशान है और एम्बुलेंस तक को तेल के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है, लेकिन जिला प्रशासन पूरी तरह से नदारद है। रसद विभाग (Supply Department) की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है। क्या अधिकारियों को इस कालाबाजारी की भनक नहीं है, या फिर 'साहब' मौन रहकर इस खेल को शह दे रहे हैं? हालात बेकाबू, कभी भी फूट सकता है जनाक्रोश बस्ती की जनता अब सड़कों पर उतरने को मजबूर है। लोगों का कहना है कि अगर अगले 24 घंटों में स्थिति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उग्र आंदोलन तय है। जब तेल की कोई आधिकारिक कमी नहीं है, तो फिर यह किल्लत क्यों? सच्चाई पर से पर्दा उठना जरूरी है, वरना बस्ती की ये लंबी कतारें किसी बड़े बवाल की वजह बन सकती हैं।1