अपडेटेड समाचार (क्रेडिट के साथ): अंबिकापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खलिबा के आंगनबाड़ी क्रमांक-1 में अव्यवस्थाओं का अंबार देखने को मिल रहा है। निरीक्षण के दौरान यहां मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी उजागर हुई। आंगनबाड़ी केंद्र में पेयजल एवं शौचालय व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है। शौचालय केवल नाम मात्र का बना हुआ है, जहां अंदर बोरियां और अन्य सामान रखे पाए गए। शौचालय में पानी की सुविधा नहीं है, जिससे छोटे बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। सहायिका के अनुसार, निर्माण के समय से ही शौचालय अधूरा बना हुआ है और अब तक उसे सुधारने की कोई पहल नहीं की गई है। वहीं नल खराब होने के कारण पानी लाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। केंद्र में बच्चों के बैठने के लिए रखी गई कुर्सियां और बेंच भी टूटी-फूटी हालत में हैं, जिससे व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आती है। किचन के निरीक्षण में चूल्हे का एक बर्नर खराब पाया गया। इसके अलावा राशन पेटी में राशन नहीं मिला, जिस पर सहायिका ने बताया कि राशन समाप्त हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव के उदासीन रवैये के कारण समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर, आंगनबाड़ी केंद्र में व्याप्त अव्यवस्थाएं शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं, जहां छोटे बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। खास ग्राउंड रिपोर्ट: हिमांशु राज, एमडी न्यूज, अंबिकापुर (छ.ग.) 📞 7805838076
अपडेटेड समाचार (क्रेडिट के साथ): अंबिकापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत खलिबा के आंगनबाड़ी क्रमांक-1 में अव्यवस्थाओं का अंबार देखने को मिल रहा है। निरीक्षण के दौरान यहां मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी उजागर हुई। आंगनबाड़ी केंद्र में पेयजल एवं शौचालय व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है। शौचालय केवल नाम मात्र का बना हुआ है, जहां अंदर बोरियां और अन्य सामान रखे पाए गए। शौचालय में पानी
की सुविधा नहीं है, जिससे छोटे बच्चों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। सहायिका के अनुसार, निर्माण के समय से ही शौचालय अधूरा बना हुआ है और अब तक उसे सुधारने की कोई पहल नहीं की गई है। वहीं नल खराब होने के कारण पानी लाने के लिए बाहर जाना पड़ता है। केंद्र में बच्चों के बैठने के लिए रखी गई कुर्सियां
और बेंच भी टूटी-फूटी हालत में हैं, जिससे व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आती है। किचन के निरीक्षण में चूल्हे का एक बर्नर खराब पाया गया। इसके अलावा राशन पेटी में राशन नहीं मिला, जिस पर सहायिका ने बताया कि राशन समाप्त हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच और सचिव के उदासीन रवैये के कारण समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा
है। शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुल मिलाकर, आंगनबाड़ी केंद्र में व्याप्त अव्यवस्थाएं शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं, जहां छोटे बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। खास ग्राउंड रिपोर्ट: हिमांशु राज, एमडी न्यूज, अंबिकापुर (छ.ग.) 📞 7805838076
- Mahendrakumarpandey MahendrakumarpandeyDarima, Surguja😤8 hrs ago
- बलरामपुर शंकरगढ़ लंगडा पाठ1
- Post by Abhijeet Pandey1
- तमनार के आमाघाट से लैलूंगा के नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक लगातार खुलासे, तीन बड़ी कार्रवाई से टूटा गिरोह,ड्रोन सर्वे से प्रशासन की पैनी नजर, जिले के सभी अनुविभागों में सघन निगरानी और लगातार कार्यवाही जारी,रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन ने बीते 72 घंटे में लगातार तीन बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। ♦️राज्य शासन के निर्देशानुसार चलाए जा रहे अभियान के तहत तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक कार्रवाई की गई, जिससे अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।1
- सूरजपुर जिले के बसदेई चौकी क्षेत्र में एक युवक द्वारा तलवार लहराकर लोगों को जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। क्या है पूरा मामला रिमांड फॉर्म के अनुसार, दिनांक 24 मार्च 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि बसदेई क्षेत्र में एक युवक शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर तलवार लेकर लोगों को डरा-धमका रहा है। वह राह चलते लोगों को रोककर गाली-गलौज कर रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां आरोपी हाथ में लोहे की तलवार लहराते हुए मिला। पुलिस को देखते ही वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। आरोपी की पहचान पकड़े गए आरोपी की पहचान दिनेश सोनवानी, उम्र 32 वर्ष, निवासी कुंवरपुर, चौकी बसदेई, थाना सूरजपुर के रूप में हुई है। कार्यवाही पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे 24 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजे गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 06 अप्रैल 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इलाके में दहशत इस घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस का बयान पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “सार्वजनिक स्थान पर हथियार लेकर लोगों को डराने-धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- जिला बलरामपुर रामानुजगंज लोकेशन............. बलरामपुर स्लग...बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल एंकर....बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है। बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि: विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है। बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। "ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी? बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी। बाइट 1.अब्दुला खान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष चान्दों1
- धरमजयगढ़ की जीवनदायिनी मांड नदी के पावन तट पर स्थित अंबेटिकरा की प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित पहाड़ी इन दिनों अद्भुत आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। यहाँ विराजित जगत जननी माँ अंबे का दिव्य दरबार दीपों की उजास से जगमगा रहा है, मानो पूरा क्षेत्र भक्ति रस में डूब गया हो। मंदिर परिसर को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की साज-सज्जा और भव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहा है। वातावरण में गूंजते भजन-कीर्तन और “जय माता दी” के जयकारे हर किसी के मन को भक्तिमय बना रहे हैं। यहाँ प्रतिदिन विशाल भोज-भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। हर दिन हजारों की संख्या में भक्त माँ के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। अंबेटिकरा की यह पहाड़ी न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि इन दिनों आस्था, भक्ति और सामूहिक श्रद्धा का जीवंत संगम भी बन चुकी है।4
- जिला प्रशासन द्वारा पूरे जिले में ड्रोन के माध्यम से सतत निगरानी की जा रही है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इसी कड़ी में नवीन घटगांव क्षेत्र में ड्रोन सर्वे के दौरान एक खेत में अफ़ीम की अवैध खेती होने की पुष्टि हुई,सूचना मिलते ही प्रशासन एवं पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और जांच के दौरान किसान साध राम नाथ के खेत में लगभग 11×22 वर्ग फीट क्षेत्र में अफ़ीम की खेती पाई गई, जिसे जब्त कर लिया गया। इसके अतिरिक्त, ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर में अफ़ीम की सूखी फसल रखे होने की जानकारी मिली। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते रोकते हुए फसल को जब्त किया गया,दोनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने और मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए ड्रोन सर्वे अभियान निरंतर जारी रहेगा।1
- बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है। बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि: विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है। बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। "ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी? बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी।1
- नगर पालिक परिषद सीएमओ और लेखा पाल 33 की घुस लेते रंगे हाथ हुए गिरफ्तार।1