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बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल ​बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है। ​बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। ​हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि: ​विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है। ​प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है। ​बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। ​"ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। ​जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी? ​बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी।

18 hrs ago
user_Ali Khan
Ali Khan
बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
18 hrs ago

बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल ​बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है। ​बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। ​हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि: ​विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है। ​प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है। ​बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। ​"ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। ​जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी? ​बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी।

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  • सूरजपुर जिले के बसदेई चौकी क्षेत्र में एक युवक द्वारा तलवार लहराकर लोगों को जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। क्या है पूरा मामला रिमांड फॉर्म के अनुसार, दिनांक 24 मार्च 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि बसदेई क्षेत्र में एक युवक शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर तलवार लेकर लोगों को डरा-धमका रहा है। वह राह चलते लोगों को रोककर गाली-गलौज कर रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां आरोपी हाथ में लोहे की तलवार लहराते हुए मिला। पुलिस को देखते ही वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। आरोपी की पहचान पकड़े गए आरोपी की पहचान दिनेश सोनवानी, उम्र 32 वर्ष, निवासी कुंवरपुर, चौकी बसदेई, थाना सूरजपुर के रूप में हुई है। कार्यवाही पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे 24 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजे गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 06 अप्रैल 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। इलाके में दहशत इस घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस का बयान पुलिस अधिकारियों के अनुसार, “सार्वजनिक स्थान पर हथियार लेकर लोगों को डराने-धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    सूरजपुर जिले के बसदेई चौकी क्षेत्र में एक युवक द्वारा तलवार लहराकर लोगों को जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला
रिमांड फॉर्म के अनुसार, दिनांक 24 मार्च 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि बसदेई क्षेत्र में एक युवक शराब के नशे में सार्वजनिक स्थान पर तलवार लेकर लोगों को डरा-धमका रहा है। वह राह चलते लोगों को रोककर गाली-गलौज कर रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां आरोपी हाथ में लोहे की तलवार लहराते हुए मिला। पुलिस को देखते ही वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया।
आरोपी की पहचान
पकड़े गए आरोपी की पहचान
दिनेश सोनवानी, उम्र 32 वर्ष, निवासी कुंवरपुर, चौकी बसदेई, थाना सूरजपुर के रूप में हुई है।
कार्यवाही 
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उसे 24 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजे गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 06 अप्रैल 2026 तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
इलाके में दहशत
इस घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया था। स्थानीय लोगों ने पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।
पुलिस का बयान
पुलिस अधिकारियों के अनुसार,
“सार्वजनिक स्थान पर हथियार लेकर लोगों को डराने-धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_Vijay Singh
    Vijay Singh
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
  • जिला बलरामपुर रामानुजगंज लोकेशन............. बलरामपुर स्लग...बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल एंकर....​बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है। ​बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। ​हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि: ​विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है। ​प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है। ​बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। ​"ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। ​जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी? ​बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी। बाइट 1.अब्दुला खान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष चान्दों
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    जिला बलरामपुर रामानुजगंज 
लोकेशन............. बलरामपुर 
स्लग...बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल
एंकर....​बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है।
​बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है।
​हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि:
​विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है।
​प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है।
​बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
​"ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं।
​जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी?
​बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के 
लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी।
बाइट 
1.अब्दुला खान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष चान्दों
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • Post by Mr Dayashankar Yadav
    1
    Post by Mr Dayashankar Yadav
    user_Mr Dayashankar Yadav
    Mr Dayashankar Yadav
    Local News Reporter शंकरगढ़, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    18 min ago
  • Post by Sunil singh
    1
    Post by Sunil singh
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    8 hrs ago
  • चिनिया से हेमंत कुमार की रिपोर्ट मंगलवार देर शाम करीब 6 बजे चिनियां मुख्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब जंगल से निकलकर हाथियों का एक बड़ा झुंड अचानक आबादी वाले इलाके में आ धमका। हाथियों ने यादव टोला, सेमराटांड़ और पुनवाडी टोला में पहुंचकर खेतों में लगी फसलों को रौंद डाला, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। हाथियों के प्रवेश से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए टॉर्च की रोशनी और मसाला (आग) जलाकर काफी मशक्कत की। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और वाहन के सायरन की मदद से ग्रामीणों के साथ मिलकर घंटों प्रयास के बाद हाथियों के झुंड को वापस जंगल की ओर खदेड़ दिया गया। वन विभाग के प्रभारी वनपाल अनिमेष कुमार ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि हाथियों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। 👉 घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है,
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    चिनिया से हेमंत कुमार की रिपोर्ट 
मंगलवार देर शाम करीब 6 बजे चिनियां मुख्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब जंगल से निकलकर हाथियों का एक बड़ा झुंड अचानक आबादी वाले इलाके में आ धमका। हाथियों ने यादव टोला, सेमराटांड़ और पुनवाडी टोला में पहुंचकर खेतों में लगी फसलों को रौंद डाला, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ।
हाथियों के प्रवेश से इलाके में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए टॉर्च की रोशनी और मसाला (आग) जलाकर काफी मशक्कत की। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और वाहन के सायरन की मदद से ग्रामीणों के साथ मिलकर घंटों प्रयास के बाद हाथियों के झुंड को वापस जंगल की ओर खदेड़ दिया गया।
वन विभाग के प्रभारी वनपाल अनिमेष कुमार ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि हाथियों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
👉 घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है,
    user_Hemant Kumar
    Hemant Kumar
    चिनिया, गढ़वा, झारखंड•
    10 hrs ago
  • छत पूजा चैत्य का कटरा पंचायत मैं बहुत धूम धाम से मनाया जा रहा हैं जिसमें सभी ग्राम पंचायत के लोग पहुंचे हैं सभी लोग मिल कर मनाया जा रहे है
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    छत पूजा चैत्य का  कटरा पंचायत मैं  बहुत धूम धाम से मनाया जा  रहा हैं जिसमें सभी ग्राम पंचायत के लोग पहुंचे हैं सभी लोग मिल कर मनाया जा रहे  है
    user_Shivmangal kumar Jahrila
    Shivmangal kumar Jahrila
    Singer रंका, गढ़वा, झारखंड•
    12 hrs ago
  • रामप्रवेश गुप्ता *“जल है तो कल है, जल बचाओ, जीवन बचाओ — समान जल, समान अधिकार” विश्व जल दिवस के अवसर पर “जहाँ पानी बहता है, वहाँ समानता बढ़ती है” थीम के अंतर्गत संत जेवियर महाविद्यालय, महुआडांड़ में एक व्यापक जल जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने मिलकर जल संरक्षण और लैंगिक समानता के महत्व को समाज तक पहुँचाने का सराहनीय प्रयास किया। कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय प्रांगण से एक विशाल रैली निकाली गई, जो कॉलेज गेट, आर.पी.एस. स्कूल होते हुए राजडंडा गाँव तक पहुँची। रैली में शामिल विद्यार्थियों ने “जल है तो कल है”, “जल बचाओ, जीवन बचाओ” और “समान जल, समान अधिकार” जैसे प्रभावशाली नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। विद्यार्थियों के हाथों में संदेश लिखे पोस्टर एवं बैनर थे, जो जल संरक्षण के साथ-साथ समाज में समानता की आवश्यकता को भी दर्शा रहे थे। इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. शेफाली प्रकाश, प्रो. रोजी सुष्मिता, प्रो. शालिनी बाड़ा एवं प्रो. अंशु अंकिता ने किया। अपने संबोधन में प्रो. शालिनी बाड़ा ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और ग्रामीण समुदायों पर पड़ता है, इसलिए जल संरक्षण के साथ-साथ इसके समान वितरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। प्रो. अंशु अंकिता ने कहा, “जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि प्रत्येक जीवन का मूल अधिकार है—इसे बचाना और समान रूप से बाँटना हम सभी की जिम्मेदारी है।” वहीं, प्रो. शेफाली प्रकाश ने जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जल केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक विकास का प्रमुख साधन भी है।” महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आज हम जल संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुए, तो भविष्य में गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सभी को जल के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण के लिए प्रेरित किया। रैली के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को जल के सही उपयोग, वर्षा जल संचयन तथा जल स्रोतों की सुरक्षा के विषय में जानकारी दी और जल संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के उपप्राचार्य फादर समीर टोप्पो, फादर लियो, सिस्टर चन्द्रोदया, फादर राजीप, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसति, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। अंततः यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि समाज को यह महत्वपूर्ण संदेश देने में भी प्रभावी सिद्ध हुआ कि जल का समान उपयोग ही सच्चे अर्थों में समानता और समृद्धि की आधारशिला है।
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    रामप्रवेश गुप्ता 
*“जल है तो कल है, जल बचाओ, जीवन बचाओ — समान जल, समान अधिकार”
विश्व जल दिवस के अवसर पर “जहाँ पानी बहता है, वहाँ समानता बढ़ती है” थीम के अंतर्गत संत जेवियर महाविद्यालय, महुआडांड़ में एक व्यापक जल जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने मिलकर जल संरक्षण और लैंगिक समानता के महत्व को समाज तक पहुँचाने का सराहनीय प्रयास किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय प्रांगण से एक विशाल रैली निकाली गई, जो कॉलेज गेट, आर.पी.एस. स्कूल होते हुए राजडंडा गाँव तक पहुँची। रैली में शामिल विद्यार्थियों ने “जल है तो कल है”, “जल बचाओ, जीवन बचाओ” और “समान जल, समान अधिकार” जैसे प्रभावशाली नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। विद्यार्थियों के हाथों में संदेश लिखे पोस्टर एवं बैनर थे, जो जल संरक्षण के साथ-साथ समाज में समानता की आवश्यकता को भी दर्शा रहे थे।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. शेफाली प्रकाश, प्रो. रोजी सुष्मिता, प्रो. शालिनी बाड़ा एवं प्रो. अंशु अंकिता ने किया। अपने संबोधन में प्रो. शालिनी बाड़ा ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और ग्रामीण समुदायों पर पड़ता है, इसलिए जल संरक्षण के साथ-साथ इसके समान वितरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
प्रो. अंशु अंकिता ने कहा, “जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि प्रत्येक जीवन का मूल अधिकार है—इसे बचाना और समान रूप से बाँटना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
वहीं, प्रो. शेफाली प्रकाश ने जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जल केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक विकास का प्रमुख साधन भी है।”
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आज हम जल संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुए, तो भविष्य में गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सभी को जल के विवेकपूर्ण उपयोग और संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
रैली के दौरान विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को जल के सही उपयोग, वर्षा जल संचयन तथा जल स्रोतों की सुरक्षा के विषय में जानकारी दी और जल संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के उपप्राचार्य फादर समीर टोप्पो, फादर लियो, सिस्टर चन्द्रोदया, फादर राजीप, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसति, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश, प्रो. मोनिका सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।
अंततः यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि समाज को यह महत्वपूर्ण संदेश देने में भी प्रभावी सिद्ध हुआ कि जल का समान उपयोग ही सच्चे अर्थों में समानता और समृद्धि की आधारशिला है।
    user_आदर्श मोबाइल एण्ड रेलवे टिकट
    आदर्श मोबाइल एण्ड रेलवे टिकट
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    14 hrs ago
  • बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल ​बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है। ​बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है। ​हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि: ​विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है। ​प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है। ​बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। ​"ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। ​जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी? ​बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी।
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    बलरामपुर पंचयात कागजों पर विकास की 'गंगा', धरातल पर बलरामपुर की 476 पंचायतें बदहाल
​बलरामपुर: छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विकास की 'गंगा' बहाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। जिले के ग्रामीण अंचलों में स्थिति यह है कि पंचायत चुनाव हुए लगभग ढाई साल बीत चुके हैं, मगर विकास के नाम पर अब भी 'शून्य' ही हाथ लगा है।
​बलरामपुर जिले की कुल 476 ग्राम पंचायतों की स्थिति आज दयनीय बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादे ठंडे बस्ते में चले गए हैं। मूलभूत सुविधाओं जैसे—सड़क, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट के लिए ग्रामीण आज भी तरस रहे हैं। ढाई साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी गांवों की तस्वीर नहीं बदली है।
​हैरानी की बात यह है कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि गांवों के जनप्रतिनिधि (सरपंच) और सचिव भी सिस्टम की बेरुखी से त्रस्त हैं। सरपंचों का कहना है कि:
​विकास कार्यों के लिए फंड (राशि) का अभाव है।
​प्रशासनिक स्तर पर फाइलों को मंजूरी मिलने में भारी देरी हो रही है।
​बिना बजट के वे ग्रामीणों की उम्मीदों पर खरा उतरने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।
​"ढाई साल बीत गए, लेकिन पंचायतों को वह गति नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी। हम जनता को जवाब देते-देते थक चुके हैं, लेकिन ऊपर से फंड और स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं।
​जिले की 476 पंचायतों में विकास कार्य ठप होने के कारण ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सवाल यह उठता है कि अगर यही रफ्तार रही, तो क्या अगले ढाई सालों में इन पंचायतों की तस्वीर बदल पाएगी?
​बलरामपुर की यह स्थिति सरकार के उन दावों पर सवालिया निशान लगाती है, जिनमें 'गढ़बो नवा छत्तीसगढ़' की बात कही जाती है। अब देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन पंचायतों की सुध लेती है या यहाँ की जनता विकास के लिए ऐसे ही 'रस्ता' तकती रहेगी।
    user_Ali Khan
    Ali Khan
    बलरामपुर, बलरामपुर, छत्तीसगढ़•
    18 hrs ago
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