*शिल्पकार = सभ्यता के निर्माता | SHILPKAR = FOUNDER OF CIVILIZATION* *इस पेड़ को ध्यान से देखिए।* *जड़: शिल्पकार* *शाखाएं: कुम्हार, लोहार, सुनार, बढ़ई, ठठेरा, कसेरा, दर्जी, नाई...आदि 38 उपजातियां* *मान्यवर @myogiadityanath जी,* *कुम्हार/शिल्पकार कोई "जाति" नहीं है।* ये वो महत्वपूर्ण समूह है जिसने जानवर की तरह जी रहे आदिकाल के इंसानों को *मानव सभ्यता का पाठ पढ़ाया।* *इतिहास क्या कहता है:* 1. *1931 की मूल राष्ट्रीय जनगणना:* सभी उपजातियों को "शिल्पकार समूह" के अंतर्गत एक साथ गिना गया। 2. *1936:* ब्रिटिश हुकूमत ने इनके सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन को देखते हुए "एक्सटीरियर कास्ट" घोषित किया। 3. *1950:* उसी आधार पर *अनुसूचित जाति संविधान 1950* में "शिल्पकार" को स्थायित्व मिला। *यानी संवैधानिक हक 75 साल से मिलना चाहिए।* फिर आज संतकबीरनगर में DM का आदेश क्यों नहीं माना गया ? तहसीलदार क्यों बिना कारण बताए शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत कुम्हारों के जाति प्रमाण पत्र आवेदन को निरस्त कर दिए ? *चेतावनी उन "पार्टीगत सौदागरों" और "इच्छाधारी मठाधीशों" को:* देवी-देवताओं से पूर्वजों को जोड़कर इस विशाल आबादी को गुमराह करना बंद करो। अपना अतीत छोड़कर भ्रम फैलाओगे तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी। *अगर सच में उत्थान चाहते हो तो:* आजाद भारत की पहली जाति जनगणना को *1931 की मूल जनगणना* से जोड़कर संवैधानिक हक की लड़ाई लड़ो। वरना "फूट डालो राज करो" की नीति का हिस्सा बनकर मिट जाओगे। *मैं अनिल प्रजापति* सिर्फ वास्तुस्थिति से अवगत करा रहा हूं। साथ कौन है, विरोध कौन कर रहा - फर्क नहीं पड़ता। तर्क मानकर एकीकरण की ओर बढ़ोगे तो ठीक, वरना परिणाम सबके सामने है। *#ShilpkarEkta #KumharSC #1931Census #Samvidhan1950 #SabhyataKeNirmata #AtipichhdaEkta #AnilKumarPrajapati #FootDaaloRaajKaroBandKaro* @myogiadityanath @PMOIndia @CMOfficeUP @DmSantKabirNgr @socialwelfareup @India_NHRC
*शिल्पकार = सभ्यता के निर्माता | SHILPKAR = FOUNDER OF CIVILIZATION* *इस पेड़ को ध्यान से देखिए।* *जड़: शिल्पकार* *शाखाएं: कुम्हार, लोहार, सुनार, बढ़ई, ठठेरा, कसेरा, दर्जी, नाई...आदि 38 उपजातियां* *मान्यवर @myogiadityanath जी,* *कुम्हार/शिल्पकार कोई "जाति" नहीं है।* ये वो महत्वपूर्ण समूह है जिसने जानवर की तरह जी रहे आदिकाल के इंसानों को *मानव सभ्यता का पाठ पढ़ाया।* *इतिहास क्या कहता है:* 1. *1931 की मूल राष्ट्रीय जनगणना:* सभी उपजातियों को "शिल्पकार समूह" के अंतर्गत एक साथ गिना गया। 2. *1936:* ब्रिटिश हुकूमत ने इनके सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन को देखते हुए "एक्सटीरियर कास्ट" घोषित किया। 3. *1950:* उसी आधार पर *अनुसूचित जाति संविधान 1950* में "शिल्पकार" को स्थायित्व मिला। *यानी संवैधानिक हक 75 साल से मिलना चाहिए।* फिर आज संतकबीरनगर में DM का आदेश क्यों नहीं माना गया ? तहसीलदार क्यों बिना कारण बताए शिल्पकार श्रेणी के अंतर्गत कुम्हारों के जाति प्रमाण पत्र आवेदन को निरस्त कर दिए ? *चेतावनी उन "पार्टीगत सौदागरों" और "इच्छाधारी मठाधीशों" को:* देवी-देवताओं से पूर्वजों को जोड़कर इस विशाल आबादी को गुमराह करना बंद करो। अपना अतीत छोड़कर भ्रम फैलाओगे तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी। *अगर सच में उत्थान चाहते हो तो:* आजाद भारत की पहली जाति जनगणना को *1931 की मूल जनगणना* से जोड़कर संवैधानिक हक की लड़ाई लड़ो। वरना "फूट डालो राज करो" की नीति का हिस्सा बनकर मिट जाओगे। *मैं अनिल प्रजापति* सिर्फ वास्तुस्थिति से अवगत करा रहा हूं। साथ कौन है, विरोध कौन कर रहा - फर्क नहीं पड़ता। तर्क मानकर एकीकरण की ओर बढ़ोगे तो ठीक, वरना परिणाम सबके सामने है। *#ShilpkarEkta #KumharSC #1931Census #Samvidhan1950 #SabhyataKeNirmata #AtipichhdaEkta #AnilKumarPrajapati #FootDaaloRaajKaroBandKaro* @myogiadityanath @PMOIndia @CMOfficeUP @DmSantKabirNgr @socialwelfareup @India_NHRC
- साइबर ठगी के शिकार पीड़ित को मिली बड़ी राहत, मेहदावल साइबर सेल ने वापस कराए 30 हजार रुपये मोबाइल फोन गुम होने के बाद खाते से निकाले गए थे 51,900 रुपये, त्वरित कार्रवाई से पीड़ित को वापस मिली धनराशि संतकबीरनगर। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में संचालित 'क्रैक साइबर क्राइम' अभियान के तहत साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए जनपद पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में साइबर सेल थाना मेहदावल की टीम ने साइबर ठगी के एक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित को 30,000 रुपये की धनराशि वापस कराकर बड़ी राहत प्रदान की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना मेहदावल क्षेत्र के ग्राम एवं पोस्ट सांडे खुर्द निवासी जयनाथ पुत्र रामायन का मोबाइल फोन गुम हो गया था। मोबाइल फोन गुम होने के बाद अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनके मोबाइल नंबर का दुरुपयोग कर बैंक खाते से 51,900 रुपये की धनराशि धोखाधड़ी कर निकाल ली। घटना की जानकारी होने पर पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसकी शिकायत संख्या 23103260042828 पंजीकृत की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल थाना मेहदावल की टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। आरक्षी संदीप कुमार गौतम एवं आरक्षी सौरभ कुमार ने संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित कर तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से धोखाधड़ी की गई धनराशि को होल्ड कराया। आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत पीड़ित के खाते में 30,000 रुपये की धनराशि सफलतापूर्वक वापस करा दी गई। अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने पर पीड़ित ने संतकबीरनगर पुलिस एवं साइबर सेल टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनकी त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की सराहना की। पीड़ित एवं उनके परिजनों ने थाना मेहदावल पुलिस की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इस सराहनीय कार्यवाही में प्रभारी निरीक्षक थाना मेहदावल राकेश कुमार सिंह, प्रभारी साइबर सेल उपनिरीक्षक संजय कुमार वर्मा, आरक्षी संदीप कुमार गौतम, आरक्षी सौरभ कुमार तथा रिक्रूट आरक्षी अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जनता से अपील : जनपद पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, कॉल अथवा संदेश पर अपनी बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति रिश्तेदार या मित्र बनकर धनराशि की मांग करे तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना पैसे न भेजें। साइबर अपराधी अक्सर आवाज बदलकर अथवा भावनात्मक दबाव बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। किसी भी संदिग्ध साइबर लेनदेन की शिकायत तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 अथवा साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराएं।1
- गोसेवा को जनआंदोलन बना रही योगी सरकार, संतकबीरनगर की 12 गोशालाओं में 1369 निराश्रित गोवंश सुरक्षित-महेश शुक्ला सीसीटीवी निगरानी, गोपालकों को आर्थिक सहायता और पारदर्शी व्यवस्था से मजबूत हो रहा गो-संरक्षण अभियान संतकबीरनगर।। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित गो-संरक्षण अभियान जनपद संतकबीरनगर में लगातार प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निराश्रित एवं असहाय गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर देखभाल के लिए जिले में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जनपद की 12 गो-आश्रय स्थलों में 1369 निराश्रित गोवंश का सुरक्षित संरक्षण किया जा रहा है।जिला प्रशासन के अनुसार गो-आश्रय स्थलों पर गोवंश को नियमित चारा, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सकीय सुविधाएं तथा सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार प्रत्येक निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु की दर से धनराशि उपलब्ध करा रही है। 22 सीसीटीवी कैमरों से हो रही 24 घंटे निगरानी गोशालाओं के संचालन को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए जिले की 12 गोशालाओं में 22 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जा रही है, जिससे गोवंश की सुरक्षा, देखभाल और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। गोपालकों को भी मिल रहा आर्थिक सहयोग मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत जिले में 229 गोवंश को 139 इच्छुक एवं जिम्मेदार गोपालकों को सुपुर्द किया गया है। सरकार इन गोवंशों के भरण-पोषण के लिए 50 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु की सहायता राशि सीधे गोपालकों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेज रही है। इससे गोपालकों की आय बढ़ने के साथ-साथ गो-संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है। गोवंश की सुरक्षा को लेकर सरकार सख्त जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोवंश की सुरक्षा के प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गो-तस्करी और गोवंश से जुड़े अपराधों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही अफवाह फैलाकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि गो-संरक्षण से जुड़ी भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें तथा किसी भी प्रकार की सूचना मिलने पर प्रशासन को अवगत कराएं। सरकार गोसेवा को सामाजिक सहभागिता और सुशासन का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए निरंतर कार्य कर रही है।1
- अम्बेडकरनगर। आगामी कांवड़ यात्रा को सकुशल एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक प्राची सिंह ने शनिवार को थाना आलापुर क्षेत्र स्थित चौहड़ा घाट का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग, साफ-सफाई तथा श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए सभी व्यवस्थाओं को समय से पूर्ण करने तथा कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट : बलराम सोनी आलापुर1
- बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहजनवा में पैदल मार्च, 90 दिनों में दोषियों को फांसी देने की उठाई मांग बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहजनवा में पैदल मार्च, 90 दिनों में दोषियों को फांसी देने की उठाई मांग सहजनवा, गोरखपुर। बहन-बेटियों और मासूम बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे हत्या एवं दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के विरोध में शनिवार को दलित शोषित कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में सहजनवा में जनजागरण पैदल मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लेकर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई। पैदल मार्च भीटी चौराहे से प्रारंभ होकर सहजनवा थाना होते हुए पूरे सहजनवा बाजार में निकाला गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर महिला सुरक्षा के समर्थन में नारे लगाए तथा लोगों को जागरूक किया। मार्च के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि बहन-बेटियों और बच्चों के साथ हत्या, दुष्कर्म तथा अन्य जघन्य अपराध करने वाले दोषियों को 90 दिनों के भीतर फांसी की सजा सुनिश्चित की जाए, ताकि अपराधियों में कानून का भय पैदा हो और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सहजनवा, खजनी, चित्रकूट सहित देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगातार सामने आ रही घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई से ही समाज में न्याय का विश्वास मजबूत होगा। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने एक स्वर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अपराधियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने की मांग दोहराई।4
- सूर्यांश न्यूज़ 24 हर खबर पर नजर आपका अपना लोकप्रिय चैनल1
- w20 क्या है 😂🤣 कॉमेडी वायरल वीडियो ! एकदम नई कॉमेडी वीडियो1
- नील गाय का बढ़ता आतंक, किसान परेशान निगरानी करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है। नेवास गोरखपुर। पाली क्षेत्र में नीलगायों का बढ़ता आतंक किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हासपार्टी, सजनापार, नेवास, गोविंदपुर, तिवरान, पनिका और इटार समेत कई गांवों में नीलगायों के झुंड खेतों में घुसकर धान और अन्य फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही रात होती है, नीलगायों के झुंड खेतों में पहुंच जाते हैं। फसल बचाने के लिए किसान टॉर्च, डंडे और शोर-शराबे के सहारे पूरी रात खेतों की निगरानी करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद फसलों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है। किसान विनोद, महेश, रामलखन, कन्हैया, गोविंद, कमल और बिनय कपूर सहित कई किसानों ने बताया कि नीलगायों के कारण आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि नीलगायों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और उनकी मेहनत बर्बाद होने से बच सके।1