ONGC से सेवानिवृत्त बुजुर्ग के 15 लाख पार, भतीजे और नौकरानी पर साजिश का आरोप मथुरा। थाना गोविंद नगर क्षेत्र की महाविद्या कॉलोनी (मकान नंबर-एम आई 62) में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक बड़ी वारदात सामने आई है। यहाँ ONGC से रिटायर्ड अधिकारी सरदार अमर सिंह बड़गुजर के साथ उनके ही अपनों ने विश्वासघात करते हुए लाखों रुपये की चपत लगा दी। नहाने गए पीड़ित, पीछे से साफ हुई पासवर्ड वाली अटैची पीड़ित ने बताया कि उनकी अटैची में 500-500 रुपये के नोटों की करीब 30 गड्डियां (कुल 15 लाख रुपये) रखी थीं। वे जमीन के सौदे के लिए 10 लाख रुपये पहले ही दे चुके थे और बाकी रकम लेकर जाने वाले थे। इसी बीच जब वे नहाने गए, तभी उनके सगे भतीजे इंद्रजीत और घरेलू सहायिका सोनी उर्फ बबीता ने पासवर्ड वाली अटैची से पूरी नकदी पार कर दी। आगे बताते हुए कहा कि अटैची को पीछे का से पीछे से लॉक खोल कर तोड़ा है जबकि पासवर्ड वाला लॉक तो बरकरा लगा हुआ था। इसका खुलासा तब हुआ जब पीड़ित प्रॉपर्टी डीलर के पास पहुंचे और अटैची खाली मिली। घटना को एक महीना बीत चुका है, लेकिन जांच अधिकारी ऊ नि रिंकेश शर्मा के हाथ अब भी खाली हैं। नामजद शिकायत के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अकेले रह रहे बुजुर्ग पीड़ित अब न्याय के लिए उच्चाधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं।
ONGC से सेवानिवृत्त बुजुर्ग के 15 लाख पार, भतीजे और नौकरानी पर साजिश का आरोप मथुरा। थाना गोविंद नगर क्षेत्र की महाविद्या कॉलोनी (मकान नंबर-एम आई 62) में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक बड़ी वारदात सामने आई है। यहाँ ONGC से रिटायर्ड अधिकारी सरदार अमर सिंह बड़गुजर के साथ उनके ही अपनों ने विश्वासघात करते हुए लाखों रुपये की
चपत लगा दी। नहाने गए पीड़ित, पीछे से साफ हुई पासवर्ड वाली अटैची पीड़ित ने बताया कि उनकी अटैची में 500-500 रुपये के नोटों की करीब 30 गड्डियां (कुल 15 लाख रुपये) रखी थीं। वे जमीन के सौदे के लिए 10 लाख रुपये पहले ही दे चुके थे और बाकी रकम लेकर जाने वाले थे। इसी बीच जब वे नहाने गए,
तभी उनके सगे भतीजे इंद्रजीत और घरेलू सहायिका सोनी उर्फ बबीता ने पासवर्ड वाली अटैची से पूरी नकदी पार कर दी। आगे बताते हुए कहा कि अटैची को पीछे का से पीछे से लॉक खोल कर तोड़ा है जबकि पासवर्ड वाला लॉक तो बरकरा लगा हुआ था। इसका खुलासा तब हुआ जब पीड़ित प्रॉपर्टी डीलर के पास पहुंचे और
अटैची खाली मिली। घटना को एक महीना बीत चुका है, लेकिन जांच अधिकारी ऊ नि रिंकेश शर्मा के हाथ अब भी खाली हैं। नामजद शिकायत के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अकेले रह रहे बुजुर्ग पीड़ित अब न्याय के लिए उच्चाधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहे हैं।