तेज आंधी-बारिश ने किसानों की कमर तोड़ी, अमरपुर में सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद अमरपुर (बांका): बांका जिले के अमरपुर प्रखंड क्षेत्र में बीते दिनों आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने गेहूं, मक्का सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड के बेदाचक गांव में ही करीब 200 बीघा फसल बर्बाद होने की बात सामने आ रही है, जबकि पूरे क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन पर लगी फसल को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनके लिए अब कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसानों के बयान: नाथन मंडल (4 बीघा): “हमने कर्ज लेकर मक्का और गेहूं की बुवाई की थी। आंधी-बारिश में पूरी फसल गिर गई। अब समझ नहीं आ रहा कि कर्ज कैसे चुकाएंगे।” जामुन चौहान (6 बीघा): “फसल तैयार थी, बस कटनी बाकी थी। एक ही रात में सब बर्बाद हो गया। महाजन अब पैसा मांगने लगे हैं, हम लोग बहुत परेशानी में हैं।” मदन मंडल (5 बीघा): “पूरे साल की मेहनत खत्म हो गई। सरकार से मुआवजे की उम्मीद है, नहीं तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।” इसके अलावा पवन कुमार (6 बीघा), जितेन्द्र चौहान (4 बीघा), झारु मंडल (6 बीघा), शंभू गाय (6 बीघा) और दमोली चौहान (6 बीघा) समेत कई किसानों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। तेज आंधी-बारिश ने किसानों की कमर तोड़ी, अमरपुर में सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद अमरपुर (बांका): बांका जिले के अमरपुर प्रखंड क्षेत्र में बीते दिनों आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने गेहूं, मक्का सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड के बेदाचक गांव में ही करीब 200 बीघा फसल बर्बाद होने की बात सामने आ रही है, जबकि पूरे क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन पर लगी फसल को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनके लिए अब कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसानों के बयान: नाथन मंडल (4 बीघा): “हमने कर्ज लेकर मक्का और गेहूं की बुवाई की थी। आंधी-बारिश में पूरी फसल गिर गई। अब समझ नहीं आ रहा कि कर्ज कैसे चुकाएंगे।” जामुन चौहान (6 बीघा): “फसल तैयार थी, बस कटनी बाकी थी। एक ही रात में सब बर्बाद हो गया। महाजन अब पैसा मांगने लगे हैं, हम लोग बहुत परेशानी में हैं।” मदन मंडल (5 बीघा): “पूरे साल की मेहनत खत्म हो गई। सरकार से मुआवजे की उम्मीद है, नहीं तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।” इसके अलावा पवन कुमार (6 बीघा), जितेन्द्र चौहान (4 बीघा), झारु मंडल (6 बीघा), शंभू गाय (6 बीघा) और दमोली चौहान (6 बीघा) समेत कई किसानों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
तेज आंधी-बारिश ने किसानों की कमर तोड़ी, अमरपुर में सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद अमरपुर (बांका): बांका जिले के अमरपुर प्रखंड क्षेत्र में बीते दिनों आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने गेहूं, मक्का सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड के बेदाचक गांव में ही करीब 200 बीघा फसल बर्बाद होने की बात सामने आ रही है, जबकि पूरे क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन पर लगी फसल को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनके लिए अब कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसानों के बयान: नाथन मंडल (4 बीघा): “हमने कर्ज लेकर मक्का और गेहूं की बुवाई की थी। आंधी-बारिश में पूरी फसल गिर गई। अब समझ नहीं आ रहा कि कर्ज कैसे चुकाएंगे।” जामुन चौहान (6 बीघा): “फसल तैयार थी, बस कटनी बाकी थी। एक ही रात में सब बर्बाद हो गया। महाजन अब पैसा मांगने लगे हैं, हम लोग बहुत परेशानी में हैं।” मदन मंडल (5 बीघा): “पूरे साल की मेहनत खत्म हो गई। सरकार से मुआवजे की उम्मीद है, नहीं तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।” इसके अलावा पवन कुमार (6 बीघा), जितेन्द्र चौहान (4 बीघा), झारु मंडल (6 बीघा), शंभू गाय (6 बीघा) और दमोली चौहान (6 बीघा) समेत कई किसानों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। तेज आंधी-बारिश ने किसानों की कमर तोड़ी, अमरपुर में सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद अमरपुर (बांका): बांका जिले के अमरपुर प्रखंड क्षेत्र में बीते दिनों आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने गेहूं, मक्का सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड के बेदाचक गांव में ही करीब 200 बीघा फसल बर्बाद होने की बात सामने आ रही है, जबकि पूरे क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन पर लगी फसल को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनके लिए अब कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसानों के बयान: नाथन मंडल (4 बीघा): “हमने कर्ज लेकर मक्का और गेहूं की बुवाई की थी। आंधी-बारिश में पूरी फसल गिर गई। अब समझ नहीं आ रहा कि कर्ज कैसे चुकाएंगे।” जामुन चौहान (6 बीघा): “फसल तैयार थी, बस कटनी बाकी थी। एक ही रात में सब बर्बाद हो गया। महाजन अब पैसा मांगने लगे हैं, हम लोग बहुत परेशानी में हैं।” मदन मंडल (5 बीघा): “पूरे साल की मेहनत खत्म हो गई। सरकार से मुआवजे की उम्मीद है, नहीं तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।” इसके अलावा पवन कुमार (6 बीघा), जितेन्द्र चौहान (4 बीघा), झारु मंडल (6 बीघा), शंभू गाय (6 बीघा) और दमोली चौहान (6 बीघा) समेत कई किसानों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
- अमरपुर प्रखंड क्षेत्र के बड़ी जानकीपुर गांव में एक बार फिर चोरी की घटना सामने आई, जहां ग्रामीणों की सतर्कता से एक चोर को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने संदिग्ध गतिविधि देख तत्काल उसे दबोच लिया और मौके पर ही पुलिस को सूचना दी।1
- बिहार बांका में ओबीसी जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर भारत मुक्ति मोर्चा एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय में जोरदार प्रदर्शन किया। देशभर के 725 जिलों में चल रहे चरणबद्ध आंदोलन के तहत यह प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर वादा निभाने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए ओबीसी के लिए जनगणना में अलग जाति कॉलम जोड़ने की मांग की और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।1
- चांदन थाना क्षेत्र के बिरनियां पंचायत अंतर्गत गोपडीह गांव में रविवार सुबह महुआ चुनने गए दो लोगों पर मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोपडीह निवासी नंदू यादव (69 वर्ष), पिता द्वारिका यादव एवं रोहित यादव (40 वर्ष), पिता रामदेव यादव हड़नी जंगल में महुआ चुनने गए थे। इसी दौरान पास के पेड़ पर बने मधुमक्खी के छत्ते से छेड़छाड़ होने के कारण मधुमक्खियां भड़क उठीं और दोनों पर हमला कर दिया।घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर सुनकर मौके पर पहुंचकर किसी तरह दोनों को मधुमक्खियों के झुंड से बाहर निकाला और इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) चांदन पहुंचाया।सीएचसी में तैनात चिकित्सक डॉ. रमेश कुमार ने प्राथमिक उपचार के बाद नंदू यादव की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल देवघर रेफर कर दिया, जबकि रोहित यादव का इलाज स्थानीय स्तर पर जारी है।ग्रामीणों के अनुसार, घटना स्थल के समीप पेड़ पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता लगा हुआ है, जिससे छेड़छाड़ होने के कारण यह हादसा हुआ। रिपोर्ट: उमाकांत पोद्दार1
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- तेज आंधी-बारिश ने किसानों की कमर तोड़ी, अमरपुर में सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद अमरपुर (बांका): बांका जिले के अमरपुर प्रखंड क्षेत्र में बीते दिनों आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने गेहूं, मक्का सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगहों पर फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड के बेदाचक गांव में ही करीब 200 बीघा फसल बर्बाद होने की बात सामने आ रही है, जबकि पूरे क्षेत्र में हजारों एकड़ जमीन पर लगी फसल को नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, उनके लिए अब कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। किसानों के बयान: नाथन मंडल (4 बीघा): “हमने कर्ज लेकर मक्का और गेहूं की बुवाई की थी। आंधी-बारिश में पूरी फसल गिर गई। अब समझ नहीं आ रहा कि कर्ज कैसे चुकाएंगे।” जामुन चौहान (6 बीघा): “फसल तैयार थी, बस कटनी बाकी थी। एक ही रात में सब बर्बाद हो गया। महाजन अब पैसा मांगने लगे हैं, हम लोग बहुत परेशानी में हैं।” मदन मंडल (5 बीघा): “पूरे साल की मेहनत खत्म हो गई। सरकार से मुआवजे की उम्मीद है, नहीं तो परिवार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।” इसके अलावा पवन कुमार (6 बीघा), जितेन्द्र चौहान (4 बीघा), झारु मंडल (6 बीघा), शंभू गाय (6 बीघा) और दमोली चौहान (6 बीघा) समेत कई किसानों की फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर जल्द मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सहायता नहीं मिली तो किसानों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।1