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चैनपुर: सदियों पुरानी परंपरा सेंदरा पर्व आज भी जीवित, ग्रामीण सामूहिक शिकार में शामिल चैनपुर: आदिवासी संस्कृति की प्राचीन परंपरा सेंदरा पर्व या फागु शिकार आज भी चैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जीवित है। होली पर्व से पूर्व अलग-अलग गांवों के ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ झुंड बनाकर जंगलों की ओर निकल रहे हैं और सामूहिक रूप से इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
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चैनपुर: सदियों पुरानी परंपरा सेंदरा पर्व आज भी जीवित, ग्रामीण सामूहिक शिकार में शामिल चैनपुर: आदिवासी संस्कृति की प्राचीन परंपरा सेंदरा पर्व या फागु शिकार आज भी चैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जीवित है। होली पर्व से पूर्व अलग-अलग गांवों के ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ झुंड बनाकर जंगलों की ओर निकल रहे हैं और सामूहिक रूप से इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
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- चैनपुर: आदिवासी संस्कृति की प्राचीन परंपरा सेंदरा पर्व या फागु शिकार आज भी चैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जीवित है। होली पर्व से पूर्व अलग-अलग गांवों के ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ झुंड बनाकर जंगलों की ओर निकल रहे हैं और सामूहिक रूप से इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।1
- मरियानुस तिग्गा ने किया चेक डैम निर्माण का औचक निरीक्षण, गुणवत्ता पर जताई संतुष्टि डुमरी (गुमला) – जिला परिषद सदस्य मरियानुस तिग्गा ने रविवार को डुमरी प्रखंड के विभिन्न पंचायतों का सघन दौरा कर विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस क्रम में उन्होंने करनी गांव में ‘ड्रीम कंस्ट्रक्शन’ द्वारा निर्माणाधीन चेक डैम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और प्रगति की बारीकी से समीक्षा की तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मजदूरों से सीधा संवाद, समय पर भुगतान की सख्त हिदायत निरीक्षण के दौरान श्री तिग्गा ने मौके पर उपस्थित कनीय अभियंता (जेई) राजू और कार्यरत मजदूरों से सीधे बातचीत की। उन्होंने श्रमिकों से उनके पारिश्रमिक एवं कार्य परिस्थितियों की जानकारी ली। संवेदक को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि मजदूरों का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया, लेकिन साथ ही गुणवत्ता मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता न करने की चेतावनी भी दी। किसानों को मिलेगा स्थायी लाभ, सिंचाई व्यवस्था होगी सुदृढ़ ग्रामीणों को संबोधित करते हुए मरियानुस तिग्गा ने कहा कि चेक डैम के निर्माण से क्षेत्र में जल संचयन की समस्या का समाधान होगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और खेती की उत्पादकता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के इस प्रयास से स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, “जनता ने मुझे सेवा का जो अवसर दिया है, उसके प्रति मैं पूरी तरह जवाबदेह हूं। गांव-गांव तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना ही मेरा मुख्य लक्ष्य है।” क्षेत्रीय विकास के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई दौरे के दौरान उन्होंने क्षेत्र के समग्र विकास का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वे लगातार विकास योजनाओं की निगरानी करेंगे, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से भी अपील की कि वे योजनाओं की गुणवत्ता पर नजर रखें और किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत जनप्रतिनिधियों या प्रशासन को दें। निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, प्रबुद्ध जन एवं कार्य से जुड़े कर्मी उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने क्षेत्र में विकास कार्यों के प्रति सक्रिय पहल के लिए जिला परिषद सदस्य का आभार व्यक्त किया।1
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- विकास चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल बिशुनपुर का वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ अशोक भगत ने कार्यक्रम को उद्घाटन किया वहीं बच्चों के द्वारा एक से बढ़कर एक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए साथी बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया2
- बिक्री के लिए रखा था 24.840 किलो ग्राम गांजा, पुलिस को सुराग मिलते ही तत्काल गिरफ्तार किया,जानकारी के मुताबिक जशपुर में सिटी कोतवाली थाना के पुलिस टीम ने 28 फरवरी को शहर के बीचों बीच तेलीटोली आइडिया टॉवर के पास से एक किराए के घर में लगभग 24.840 किलो ग्राम गांजा बरामद किया गया बताया जा रहा है,दबिश देकर सुनील भगत उर्फ गोविंदा और रवि विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया।1
- ‘जलावन’ की आड़ में सखुआ का कत्लेआम! कुरूमगाड़ वन क्षेत्र में हरियाली पर खुला हमला चैनपुर (गुमला): एक ओर सरकार ‘जल-जंगल-जमीन’ संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर चैनपुर प्रखंड के कुरूमगाड़ वन क्षेत्र में सखुआ के हरे-भरे पेड़ों पर बेरहमी से कुल्हाड़ियाँ चल रही हैं। ताजा मामला चित्तरपुर और कोरवा टोली का है, जहाँ जलावन के नाम पर बेशकीमती सखुआ (साल) के पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है। जानकारी देते हुए शाम छह बजे बताया गया कि क्षेत्र में अवैध कटाई की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं और बिना अनुमति हरे पेड़ों को गिराया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसकी शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो वन क्षेत्र को अपूरणीय क्षति होगी। क्षेत्र में लकड़ी कटाई का खेल बड़े शातिर तरीके से खेला जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लकड़ी काटने वाले अक्सर जमीन को ‘रैयती’ बताकर वन विभाग की कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं। जबकि सरकारी नियमों के मुताबिक निजी जमीन पर भी सखुआ जैसे कीमती पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना परमिट के हो रही यह कटाई सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। चित्तरपुर निवासी हेनरी तिग्गा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने बड़ी संख्या में सखुआ के छोटे पेड़ों की कटाई की है। उन्होंने बताया कि लकड़ियां बारिश के मौसम में जलावन के लिए स्टॉक की जा रही थीं। साथ ही यह भी स्वीकार किया कि उनके पास पेड़ काटने का कोई आधिकारिक सरकारी परमिट या लिखित अनुमति पत्र नहीं है। जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि वे इसकी मालगुजारी भरते हैं, इसलिए पेड़ काटने का अधिकार समझते हैं। यह पहली बार नहीं है जब कुरूमगाड़ क्षेत्र में वन संपदा को नुकसान पहुंचाया गया हो। पूर्व में छतरपुर में भी सड़क किनारे पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया था, लेकिन कार्रवाई केवल जांच तक सीमित रह गई। प्रशासन और वन विभाग की कथित शिथिलता से लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि इसी रफ्तार से सखुआ के पेड़ कटते रहे तो हरियाली समाप्त हो जाएगी और जंगली जानवरों का पलायन बस्तियों की ओर शुरू हो सकता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होगी। अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग हेनरी तिग्गा और अन्य जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेगा या यह मामला भी पूर्व मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। #चैनपुर #कुरूमगाड़ #गुमला #वन_विभाग #सखुआ #जल_जंगल_जमीन #झारखंड_समाचार1