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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक साल तक सोना नहीं खरीदने” की अपील को लेकर सर्राफा व्यापारियों और सोनी समाज में नाराज़गी देखने को मिल रही है। जैसलमेर में व्यापारियों का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक संदेशों का सीधा असर उनकी रोज़ी-रोटी पर पड़ता है। उनका मानना है कि सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विवाह और धार्मिक संस्कारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जब देश के सर्वोच्च पद से सोना नहीं खरीदने की बात कही जाती है, तो ग्राहकों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है और बाजार की मांग घटती है। व्यापारियों ने मनमोहन सरकार के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी सोने के आयात और खरीद पर सख्ती से छोटे कारोबारियों को नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि आज भी सबसे ज्यादा मार छोटे सुनार और कारीगर पर ही पड़ रही है। जैसलमेर के पारंपरिक आभूषण बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि पहले से बिक्री में गिरावट है और ऐसे बयान हालात को और खराब कर देते हैं। #सोनी समाज के युवाओं ने डिजिटल गोल्ड और #गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन योजनाओं से बड़े वित्तीय संस्थानों को फायदा होता है, जबकि स्थानीय सुनार की दुकान पर ग्राहक नहीं पहुंचता। समाज के वरिष्ठ लोगों ने जीएसटी, हॉलमार्किंग और अब सोना खरीदने को लेकर अपील जैसे मुद्दों को छोटे व्यापारियों पर लगातार बढ़ते दबाव के रूप में बताया। इस पूरे मुद्दे पर जब राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी से सवाल किया गया तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।

1 hr ago
user_Dharmendra kumar
Dharmendra kumar
जैसलमेर, जैसलमेर, राजस्थान•
1 hr ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक साल तक सोना नहीं खरीदने” की अपील को लेकर सर्राफा व्यापारियों और सोनी समाज में नाराज़गी देखने को मिल रही है। जैसलमेर में व्यापारियों का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक संदेशों का सीधा असर उनकी रोज़ी-रोटी पर पड़ता है। उनका मानना है कि सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विवाह और धार्मिक संस्कारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जब देश के सर्वोच्च पद से सोना नहीं खरीदने की बात कही जाती है, तो ग्राहकों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है और बाजार की मांग घटती है। व्यापारियों ने मनमोहन सरकार के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी सोने के आयात और खरीद पर सख्ती से छोटे कारोबारियों को नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि आज भी सबसे ज्यादा मार छोटे सुनार और कारीगर पर ही पड़ रही है। जैसलमेर के पारंपरिक आभूषण बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि पहले से बिक्री में गिरावट है और ऐसे बयान हालात को और खराब कर देते हैं। #सोनी समाज के युवाओं ने डिजिटल गोल्ड और #गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन योजनाओं से बड़े वित्तीय संस्थानों को फायदा होता है, जबकि स्थानीय सुनार की दुकान पर ग्राहक नहीं पहुंचता। समाज के वरिष्ठ लोगों ने जीएसटी, हॉलमार्किंग और अब सोना खरीदने को लेकर अपील जैसे मुद्दों को छोटे व्यापारियों पर लगातार बढ़ते दबाव के रूप में बताया। इस पूरे मुद्दे पर जब राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी से सवाल किया गया तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • ,मुख्यमंत्री का पुतला फूंका, डीएनटी समाज का “जेल भरो आंदोलन” शुरू जैसलमेर,राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में जैसलमेर में विशाल आंदोलन आयोजित किया गया। 46 डिग्री तापमान में भी हजारों लोगों ने रैली निकालकर अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। समाज की प्रमुख मांगों में डीएनटी समाज को 10% अलग आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, आवास पट्टे, जमीन एवं शिक्षा सुविधाओं का विस्तार शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो 1 जुलाई को जयपुर में “महा-पड़ाव” किया जाएगा।
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    ,मुख्यमंत्री का पुतला फूंका,
डीएनटी समाज का “जेल भरो आंदोलन” शुरू
जैसलमेर,राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में जैसलमेर में विशाल आंदोलन आयोजित किया गया। 46 डिग्री तापमान में भी हजारों लोगों ने रैली निकालकर अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
समाज की प्रमुख मांगों में डीएनटी समाज को 10% अलग आरक्षण, राजनीतिक भागीदारी, आवास पट्टे, जमीन एवं शिक्षा सुविधाओं का विस्तार शामिल है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो 1 जुलाई को जयपुर में “महा-पड़ाव” किया जाएगा।
    user_Dharmendra kumar
    Dharmendra kumar
    जैसलमेर, जैसलमेर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजस्थान के काणोद गांव में ग्रामीणों ने विकास रथ का विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी गंभीर पानी की समस्या को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और तत्काल समाधान की मांग की।
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    राजस्थान के काणोद गांव में ग्रामीणों ने विकास रथ का विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी गंभीर पानी की समस्या को लेकर एक ज्ञापन सौंपा और तत्काल समाधान की मांग की।
    user_Swaroop Singh
    Swaroop Singh
    Taxi Driver फतेहगढ़, जैसलमेर, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र के गंगापुरा गांव के ग्रामीणों ने भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने गिराब से गंगापुरा तक सड़क निर्माण की मुख्य समस्या से अवगत कराया। खारा ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द समाधान का हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया है।
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    बाड़मेर के शिव विधानसभा क्षेत्र के गंगापुरा गांव के ग्रामीणों ने भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। उन्होंने गिराब से गंगापुरा तक सड़क निर्माण की मुख्य समस्या से अवगत कराया। खारा ने ग्रामीणों को जल्द से जल्द समाधान का हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया है।
    user_पत्रकार खेत सिंह राजपुरोहित
    पत्रकार खेत सिंह राजपुरोहित
    शेओ, बाड़मेर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • पोकरण में हुए परमाणु परीक्षण को आज 28 वर्ष पूर्ण विधायक महंत प्रताप पूरी हुए मीडिया से रूबरू पोकरण परमाणु परीक्षण के 28 वर्ष पूर्ण, विधायक महंत प्रताप पुरी बोले — भाजपा सरकारों ने लिए ऐतिहासिक निर्णय 11 मई 1998 को Pokhran-II के तहत पोकरण में हुए परमाणु परीक्षण को 28 वर्ष पूर्ण होने पर पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने इसे देश के गौरव और सामरिक शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देश में जब भी भाजपा की सरकार बनी है तब ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 11 मई 1998 को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह किए बिना स्वनिर्णय लेते हुए पोकरण की धरती पर परमाणु परीक्षण कर भारत को विश्व शक्ति के रूप में स्थापित किया। विधायक ने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी देश ने मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया गया, जो देश की सैन्य क्षमता और दृढ़ नेतृत्व का परिचायक है। महंत प्रताप पुरी ने कहा कि पोकरण वास्तव में “शक्ति स्थल” कहलाने योग्य है, जिसने अपने गर्भ में पांच परमाणु परीक्षण झेले और देश की सुरक्षा एवं स्वाभिमान को नई पहचान दिलाई।
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    पोकरण में हुए परमाणु परीक्षण को आज 28 वर्ष पूर्ण विधायक महंत प्रताप पूरी हुए मीडिया से रूबरू
पोकरण परमाणु परीक्षण के 28 वर्ष पूर्ण, विधायक महंत प्रताप पुरी बोले — भाजपा सरकारों ने लिए ऐतिहासिक निर्णय
11 मई 1998 को Pokhran-II के तहत पोकरण में हुए परमाणु परीक्षण को 28 वर्ष पूर्ण होने पर पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी ने इसे देश के गौरव और सामरिक शक्ति का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि देश में जब भी भाजपा की सरकार बनी है तब ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 11 मई 1998 को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव की परवाह किए बिना स्वनिर्णय लेते हुए पोकरण की धरती पर परमाणु परीक्षण कर भारत को विश्व शक्ति के रूप में स्थापित किया।
विधायक ने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी देश ने मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया गया, जो देश की सैन्य क्षमता और दृढ़ नेतृत्व का परिचायक है।
महंत प्रताप पुरी ने कहा कि पोकरण वास्तव में “शक्ति स्थल” कहलाने योग्य है, जिसने अपने गर्भ में पांच परमाणु परीक्षण झेले और देश की सुरक्षा एवं स्वाभिमान को नई पहचान दिलाई।
    user_गिरिराज
    गिरिराज
    पोकरण, जैसलमेर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • रेगिस्तान प्यासा, मंच पर भाषणों की बरसात… पानी पर राजनीति कब होगी बंद?” जैसलमेर के फलसूंड की रात्रि चौपाल में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बेहद आक्रामक अंदाज देखने को मिला। मंच से भ्रष्टाचार पर गरजते हुए उन्होंने साफ कहा कि “जो पानी के पैसे में चोरी करेगा, उसका हाल महेश जोशी जैसा होगा।” बयान जोरदार था, तालियां भी खूब बजीं, लेकिन रेगिस्तान की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर इतने सालों से पानी की इस लूट का जिम्मेदार कौन है? क्योंकि सच यह है कि जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर के हजारों गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कहीं जल जीवन मिशन की पाइपलाइन अधूरी पड़ी है, कहीं नल लगे हैं लेकिन पानी नहीं आता, कहीं टंकियां बनकर खड़ी हैं लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो कहीं पूरा सिस्टम सिर्फ टैंकरों के भरोसे चल रहा है। गांवों में आज भी तपती गर्मी में कई किलोमीटर दूर से महंगे दामों में टैंकरों से पानी आ रहा हैं और दूसरी तरफ मंचों पर करोड़ों की योजनाओं के भाषण दिए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कटाक्ष तो यही है कि हर सरकार आते ही पिछली सरकार को पानी चोर बता देती है, लेकिन जनता की प्यास कभी खत्म नहीं होती। एक सरकार कहती है पिछली सरकार ने लूट की… दूसरी कहती है पहले वालों ने फाइलों में विकास कर दिया… लेकिन गांव का आदमी आज भी पूछ रहा है — “साहब, हमारे घर पानी कब आएगा?” रात्रि चौपाल में मंत्री ने PHED व्यवस्था को “पूरी तरह कोलैप्स” बताया। सवाल यह है कि अगर सिस्टम इतना ही ध्वस्त है तो वर्षों से बैठे अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या किसी बड़े अफसर पर कार्रवाई हुई? क्या किसी बड़े ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया? या फिर हमेशा की तरह छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामला शांत कर दिया जाएगा? जनता यह भी पूछ रही है कि जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी आखिर टैंकर माफिया इतने ताकतवर कैसे हो गए? अगर हर घर तक पानी पहुंच चुका है जैसा रिपोर्टों में दिखाया गया, तो फिर हर गर्मी में टैंकरों की राजनीति क्यों शुरू हो जाती है? क्यों हर गांव में पानी “किसकी सिफारिश है” देखकर बांटा जाता है? असल में रेगिस्तान की सबसे बड़ी त्रासदी सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि पानी पर राजनीति है। यहां हर चुनाव में पानी मुद्दा बनता है, हर नेता पानी पर भाषण देता है, हर अधिकारी मीटिंग करता है, हर योजना का उद्घाटन होता है… लेकिन गर्मी आते ही वही पुरानी तस्वीर सामने आ जाती है — सूखी टंकियां, खाली नल और परेशान जनता। बिजली को लेकर भी मंच से बड़े दावे किए गए। कांग्रेस पर झूठे आंकड़े भेजने के आरोप लगे। मगर गांवों में लोग आज भी घंटों बिजली कटौती झेल रहे हैं। जनता कह रही है कि सरकारें बदलती रहीं, बयान बदलते रहे, लेकिन हालात ज्यादा नहीं बदले। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब जनता सवाल पूछती है तो नेता कहते हैं “पिछली सरकार जिम्मेदार है”… और जब वही नेता सत्ता में आ जाते हैं तो अधिकारी जिम्मेदार हो जाते हैं। लेकिन कभी किसी ने यह नहीं बताया कि आखिर जनता की बदहाली की जिम्मेदारी लेने वाला कौन है? आज जरूरत भाषणों की नहीं, ईमानदार कार्रवाई की है। जरूरत उन फाइलों को खोलने की है जिनमें “हर घर जल” का सपना पूरा दिखाया गया। जरूरत उन ठेकेदारों पर कार्रवाई की है जिन्होंने रेगिस्तान की प्यास पर करोड़ों कमाए। और जरूरत उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है जिनकी रिपोर्टों में सबकुछ “संतोषजनक” चलता रहता है। क्योंकि रेगिस्तान की जनता अब सिर्फ भाषण नहीं सुनना चाहती… उसे अपने घर के नल में पानी चाहिए।
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    रेगिस्तान प्यासा, मंच पर भाषणों की बरसात… पानी पर राजनीति कब होगी बंद?”
जैसलमेर के फलसूंड की रात्रि चौपाल में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का बेहद आक्रामक अंदाज देखने को मिला। मंच से भ्रष्टाचार पर गरजते हुए उन्होंने साफ कहा कि “जो पानी के पैसे में चोरी करेगा, उसका हाल महेश जोशी जैसा होगा।”
बयान जोरदार था, तालियां भी खूब बजीं, लेकिन रेगिस्तान की जनता अब सवाल पूछ रही है कि आखिर इतने सालों से पानी की इस लूट का जिम्मेदार कौन है?
क्योंकि सच यह है कि जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर के हजारों गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। कहीं जल जीवन मिशन की पाइपलाइन अधूरी पड़ी है, कहीं नल लगे हैं लेकिन पानी नहीं आता, कहीं टंकियां बनकर खड़ी हैं लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो कहीं पूरा सिस्टम सिर्फ टैंकरों के भरोसे चल रहा है।
गांवों में आज भी तपती गर्मी में कई किलोमीटर दूर से महंगे दामों में टैंकरों से पानी आ रहा हैं और दूसरी तरफ मंचों पर करोड़ों की योजनाओं के भाषण दिए जा रहे हैं।
सबसे बड़ा कटाक्ष तो यही है कि हर सरकार आते ही पिछली सरकार को पानी चोर बता देती है, लेकिन जनता की प्यास कभी खत्म नहीं होती।
एक सरकार कहती है पिछली सरकार ने लूट की… दूसरी कहती है पहले वालों ने फाइलों में विकास कर दिया… लेकिन गांव का आदमी आज भी पूछ रहा है — “साहब, हमारे घर पानी कब आएगा?”
रात्रि चौपाल में मंत्री ने PHED व्यवस्था को “पूरी तरह कोलैप्स” बताया। सवाल यह है कि अगर सिस्टम इतना ही ध्वस्त है तो वर्षों से बैठे अधिकारी क्या कर रहे थे?
क्या किसी बड़े अफसर पर कार्रवाई हुई?
क्या किसी बड़े ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया?
या फिर हमेशा की तरह छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामला शांत कर दिया जाएगा?
जनता यह भी पूछ रही है कि जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी आखिर टैंकर माफिया इतने ताकतवर कैसे हो गए?
अगर हर घर तक पानी पहुंच चुका है जैसा रिपोर्टों में दिखाया गया, तो फिर हर गर्मी में टैंकरों की राजनीति क्यों शुरू हो जाती है?
क्यों हर गांव में पानी “किसकी सिफारिश है” देखकर बांटा जाता है?
असल में रेगिस्तान की सबसे बड़ी त्रासदी सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि पानी पर राजनीति है।
यहां हर चुनाव में पानी मुद्दा बनता है, हर नेता पानी पर भाषण देता है, हर अधिकारी मीटिंग करता है, हर योजना का उद्घाटन होता है… लेकिन गर्मी आते ही वही पुरानी तस्वीर सामने आ जाती है — सूखी टंकियां, खाली नल और परेशान जनता।
बिजली को लेकर भी मंच से बड़े दावे किए गए। कांग्रेस पर झूठे आंकड़े भेजने के आरोप लगे। मगर गांवों में लोग आज भी घंटों बिजली कटौती झेल रहे हैं।
जनता कह रही है कि सरकारें बदलती रहीं, बयान बदलते रहे, लेकिन हालात ज्यादा नहीं बदले।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब जनता सवाल पूछती है तो नेता कहते हैं “पिछली सरकार जिम्मेदार है”… और जब वही नेता सत्ता में आ जाते हैं तो अधिकारी जिम्मेदार हो जाते हैं।
लेकिन कभी किसी ने यह नहीं बताया कि आखिर जनता की बदहाली की जिम्मेदारी लेने वाला कौन है?
आज जरूरत भाषणों की नहीं, ईमानदार कार्रवाई की है।
जरूरत उन फाइलों को खोलने की है जिनमें “हर घर जल” का सपना पूरा दिखाया गया।
जरूरत उन ठेकेदारों पर कार्रवाई की है जिन्होंने रेगिस्तान की प्यास पर करोड़ों कमाए।
और जरूरत उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की है जिनकी रिपोर्टों में सबकुछ “संतोषजनक” चलता रहता है।
क्योंकि रेगिस्तान की जनता अब सिर्फ भाषण नहीं सुनना चाहती…
उसे अपने घर के नल में पानी चाहिए।
    user_Gopal singh jodha
    Gopal singh jodha
    Local News Reporter फलसूंड, जैसलमेर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • बूठिया होद जो की रामसर तहसील मे आता है जो की पिछले कई महीनों से पानी ना आना बुढ़िया हो जो की रामसर तहसील के अंदर में आता है पिछले कई महीनो से पशु इस गर्मी में प्यास मार रहे हैं कोई ड्यूटी पर ना आना और कोई ना ही प्रशासन ध्यान दे रहा है हमने कई बार 181 पर शिकायत की वह पुराना फोटो अपलोड कर देते हैं कोई कार्रवाई नहीं होती है
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    बूठिया होद जो की रामसर तहसील मे आता है जो की पिछले कई महीनों से पानी ना आना 
बुढ़िया हो जो की रामसर तहसील के अंदर में आता है पिछले कई महीनो से पशु इस गर्मी में प्यास मार रहे हैं कोई ड्यूटी पर ना आना और कोई ना ही प्रशासन ध्यान दे रहा है हमने कई बार 181 पर शिकायत की वह पुराना फोटो अपलोड कर देते हैं कोई कार्रवाई नहीं होती है
    user_Sikander khan
    Sikander khan
    Farmer Ramsar, Barmer•
    2 hrs ago
  • बाड़मेर के इंदिरा नगर में होमगार्ड के लिए एक नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माण से होमगार्ड कर्मियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकेंगी और उनके कामकाज में सुधार आएगा।
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    बाड़मेर के इंदिरा नगर में होमगार्ड के लिए एक नए भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। इस निर्माण से होमगार्ड कर्मियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकेंगी और उनके कामकाज में सुधार आएगा।
    user_@sawai parihar 🆔 youtub chena
    @sawai parihar 🆔 youtub chena
    Taxi Driver बाड़मेर ग्रामीण, बाड़मेर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक साल तक सोना नहीं खरीदने” की अपील को लेकर सर्राफा व्यापारियों और सोनी समाज में नाराज़गी देखने को मिल रही है। जैसलमेर में व्यापारियों का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक संदेशों का सीधा असर उनकी रोज़ी-रोटी पर पड़ता है। उनका मानना है कि सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विवाह और धार्मिक संस्कारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जब देश के सर्वोच्च पद से सोना नहीं खरीदने की बात कही जाती है, तो ग्राहकों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है और बाजार की मांग घटती है। व्यापारियों ने मनमोहन सरकार के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी सोने के आयात और खरीद पर सख्ती से छोटे कारोबारियों को नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि आज भी सबसे ज्यादा मार छोटे सुनार और कारीगर पर ही पड़ रही है। जैसलमेर के पारंपरिक आभूषण बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि पहले से बिक्री में गिरावट है और ऐसे बयान हालात को और खराब कर देते हैं। #सोनी समाज के युवाओं ने डिजिटल गोल्ड और #गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन योजनाओं से बड़े वित्तीय संस्थानों को फायदा होता है, जबकि स्थानीय सुनार की दुकान पर ग्राहक नहीं पहुंचता। समाज के वरिष्ठ लोगों ने जीएसटी, हॉलमार्किंग और अब सोना खरीदने को लेकर अपील जैसे मुद्दों को छोटे व्यापारियों पर लगातार बढ़ते दबाव के रूप में बताया। इस पूरे मुद्दे पर जब राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी से सवाल किया गया तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “एक साल तक सोना नहीं खरीदने” की अपील को लेकर सर्राफा व्यापारियों और सोनी समाज में नाराज़गी देखने को मिल रही है।
जैसलमेर में व्यापारियों का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक संदेशों का सीधा असर उनकी रोज़ी-रोटी पर पड़ता है। उनका मानना है कि सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, विवाह और धार्मिक संस्कारों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जब देश के सर्वोच्च पद से सोना नहीं खरीदने की बात कही जाती है, तो ग्राहकों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है और बाजार की मांग घटती है।
व्यापारियों ने मनमोहन सरकार के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भी सोने के आयात और खरीद पर सख्ती से छोटे कारोबारियों को नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि आज भी सबसे ज्यादा मार छोटे सुनार और कारीगर पर ही पड़ रही है। जैसलमेर के पारंपरिक आभूषण बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि पहले से बिक्री में गिरावट है और ऐसे बयान हालात को और खराब कर देते हैं।
#सोनी समाज के युवाओं ने डिजिटल गोल्ड और #गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन योजनाओं से बड़े वित्तीय संस्थानों को फायदा होता है, जबकि स्थानीय सुनार की दुकान पर ग्राहक नहीं पहुंचता। समाज के वरिष्ठ लोगों ने जीएसटी, हॉलमार्किंग और अब सोना खरीदने को लेकर अपील जैसे मुद्दों को छोटे व्यापारियों पर लगातार बढ़ते दबाव के रूप में बताया।
इस पूरे मुद्दे पर जब राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी से सवाल किया गया तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए।
    user_Dharmendra kumar
    Dharmendra kumar
    जैसलमेर, जैसलमेर, राजस्थान•
    1 hr ago
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