स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते दिखे छात्र, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते दिखे छात्र, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल उमरिया तपस गुप्ता जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम देवरी मजरा स्थित सरस्वती स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने कई छात्र खेत में धान की रोपाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर बच्चे पढ़ाई के समय खेत में क्या कर रहे थे। मामले ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों से कराए जा रहे कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि छात्र-छात्राएं स्कूल ड्रेस पहने हुए पानी से भरे खेत में उतरकर धान की पौध लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर साझा होने के बाद लोगों ने इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे बच्चों से खेत में काम कराने का मामला बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यावहारिक शिक्षा से जोड़कर देखा। मामले को लेकर जब विद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि बच्चों से खेत में मजदूरी या कृषि कार्य नहीं कराया गया। उनके अनुसार यह केवल शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा था। प्राचार्य ने बताया कि विद्यालय के समीप स्थित खेत को छात्रों को कृषि संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से दिखाया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक प्रोजेक्ट आधारित गतिविधि थी, जिसके तहत बच्चों को धान की रोपाई की प्रक्रिया समझाई जा रही थी। उनका यह भी कहना है कि संबंधित खेत विद्यालय परिसर से सटा हुआ है और शैक्षणिक गतिविधि के तहत ही छात्र वहां गए थे। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि यह केवल शैक्षणिक प्रदर्शन था तो बच्चों का खेत में उतरकर धान लगाना कितना आवश्यक था। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रायोगिक शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसी गतिविधियों में छात्रों की सुरक्षा, अभिभावकों की सहमति और स्पष्ट शैक्षणिक उद्देश्य का ध्यान रखा जाना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि विभाग इस वायरल वीडियो की जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि गतिविधि पूरी तरह शैक्षणिक थी या फिर बच्चों से वास्तविक कृषि कार्य कराया गया। वायरल वीडियो ने एक बार फिर स्कूलों में कराई जाने वाली प्रायोगिक गतिविधियों की सीमाओं और उनकी निगरानी पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की संभावित जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते दिखे छात्र, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल स्कूल ड्रेस में खेत में धान रोपते दिखे छात्र, वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल उमरिया तपस गुप्ता जिले के करकेली विकासखंड अंतर्गत ग्राम देवरी मजरा स्थित सरस्वती स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म पहने कई छात्र खेत में धान की रोपाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर बच्चे पढ़ाई के समय खेत में क्या कर रहे थे। मामले ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों से कराए जा रहे कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि छात्र-छात्राएं स्कूल ड्रेस पहने हुए पानी से भरे खेत में उतरकर धान की पौध लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर साझा होने के बाद लोगों ने इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे बच्चों से खेत में काम कराने का मामला बताया, जबकि कुछ ने इसे व्यावहारिक शिक्षा से जोड़कर देखा। मामले को लेकर जब विद्यालय के प्राचार्य सुरेंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि बच्चों से खेत में मजदूरी या कृषि कार्य नहीं कराया गया। उनके अनुसार यह केवल शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा था। प्राचार्य ने बताया कि विद्यालय के समीप स्थित खेत को छात्रों को कृषि संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से दिखाया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक प्रोजेक्ट आधारित गतिविधि थी, जिसके तहत बच्चों को धान की रोपाई की प्रक्रिया समझाई जा रही थी। उनका यह भी कहना है कि संबंधित खेत विद्यालय परिसर से सटा हुआ है और शैक्षणिक गतिविधि के तहत ही छात्र वहां गए थे। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि यदि यह केवल शैक्षणिक प्रदर्शन था तो बच्चों का खेत में उतरकर धान लगाना कितना आवश्यक था। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रायोगिक शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसी गतिविधियों में छात्रों की सुरक्षा, अभिभावकों की सहमति और स्पष्ट शैक्षणिक उद्देश्य का ध्यान रखा जाना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि विभाग इस वायरल वीडियो की जांच करता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि गतिविधि पूरी तरह शैक्षणिक थी या फिर बच्चों से वास्तविक कृषि कार्य कराया गया। वायरल वीडियो ने एक बार फिर स्कूलों में कराई जाने वाली प्रायोगिक गतिविधियों की सीमाओं और उनकी निगरानी पर बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की संभावित जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
- नौरोजाबाद थाना तहसील नौरोजाबाद पोस्ट पिनोरा ग्राम पंचायत देवरी माजरा का है करवाही मग किया जाता है अजय राठौर पिता रामसेवक राठौर उनकी पत्नी और बेटी फसल उखल रही कम से कम लगभग 15000से 20000हजार नुकसान किए हैं इस पर अधिकारी कोई सुनवाई नहीं होती मजदूर हु मेरी मम्मी बिकलांग है पापा नही है मृत्यु हो गये है2
- जन विश्वास अभियान का संकल्प हर समस्या का समाधान हर पात्र को योजनाओं का लाभ मिलेगा2
- भीषण गर्मी में स्कूली बच्चों से लगवाया बस को धक्का मानपुर बस स्टैंड पर खराब हुई सांदीपनि विद्यालय की बस, बच्चों की सुरक्षा और फिटनेस पर उठे सवाल भीषण गर्मी में स्कूली बच्चों से लगवाया बस को धक्का मानपुर बस स्टैंड पर खराब हुई सांदीपनि विद्यालय की बस, बच्चों की सुरक्षा और फिटनेस पर उठे सवाल उमरिया। सांदीपनि विद्यालय मानपुर में बच्चों के आवागमन के लिए संचालित बस शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे मानपुर बस स्टैंड पर अचानक खराब हो गई। बस में सवार स्कूली बच्चों को भीषण गर्मी के बीच नीचे उतरकर बस को धक्का लगाना पड़ा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद बच्चों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, सांदीपनि विद्यालय मानपुर में बच्चों के परिवहन का कार्य मंगलानी ट्रैवल्स को दिया गया है। इसी व्यवस्था के तहत संचालित एक बस शनिवार सुबह बस स्टैंड पर खराब हो गई। बस को चालू करने के लिए बच्चों को ही धक्का लगाते देखा गया। बार-बार बस खराब होने की शिकायत अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों के परिवहन में लगी बसों के खराब होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। कुछ अभिभावकों ने बसों की उम्र और उनके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, संबंधित बस की वास्तविक उम्र, तकनीकी स्थिति और फिटनेस की पुष्टि अधिकृत जांच के बाद ही हो सकेगी। बच्चों की सुरक्षा पर सवाल स्कूली बस का रास्ते में खराब होना तकनीकी खराबी का सामान्य मामला हो सकता है, लेकिन भीषण गर्मी के बीच बच्चों का सड़क पर उतरकर बस को धक्का लगाना चिंता का विषय है। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों के परिवहन में लगी बसों की नियमित तकनीकी जांच और सर्विसिंग कितनी गंभीरता से की जा रही है। क्या बस का फिटनेस प्रमाण-पत्र वैध है? क्या वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है? क्या बच्चों के परिवहन के लिए बस की नियमित जांच की जाती है? इन सवालों का जवाब अब परिवहन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। डीईओ बोले- आरटीओ से कराएंगे निरीक्षण मामले में जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और आरटीओ से बस का निरीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के बाद बस की तकनीकी स्थिति और फिटनेस संबंधी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच के बाद सामने आएगी हकीकत मामला केवल बस खराब होने तक सीमित नहीं है। यदि जांच में बस की फिटनेस या रखरखाव में कमी पाई जाती है तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। वहीं यदि बस निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है तो बार-बार खराब होने के कारणों की भी जांच की जानी चाहिए। फिलहाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता के बीच सभी की नजर आरटीओ के निरीक्षण और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर है।1
- बिरसिंहपुर पाली ,जीरो ढाबा के पास 11kb line की केबल जल जाने के कारण दर्जनों गांव अंधेरे में डूबे रहे और मजे की बात यह है कि यह केवल हर साल जलता है इसके बावजूद विभाग कोई स्थाई समाधान की बजाय हमेशा काम चलआऊ समाधान देता है जबकि मेंटेनेंस के नाम पर कई बार दिन दिन भर लाइट बंद कर रखी जाती है लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर होता कुछ नहीं1
- Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार1
- स्वरोजगार योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक सप्ताह में निपटाएं लंबित प्रकरण: सीईओ स्वरोजगार योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक सप्ताह में निपटाएं लंबित प्रकरण: सीईओ डीएलसीसी की बैठक में बैंकर्स और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश, पात्र हितग्राहियों को समय पर मिले ऋण और योजनाओं का लाभ डिंडौरी, जिले में युवाओं, किसानों, महिलाओं एवं अन्य पात्र हितग्राहियों को स्वरोजगार और आर्थिक सहायता योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने को लेकर जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाई है। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैंकर्स समिति (डीएलसीसी) की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों और बैंकों के माध्यम से संचालित ऋण एवं स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, संत रविदास स्वरोजगार योजना, डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना, भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक उद्यम एवं स्वरोजगार योजना, पीएमएफएमई, किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन विभाग की योजनाएं, पीएम स्वनिधि तथा आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की स्थिति पर चर्चा की गई। लंबित प्रकरणों को लेकर सख्त हुए सीईओ समीक्षा के दौरान सामने आए लंबित प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी ने संबंधित अधिकारियों एवं बैंक प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पीएमएफएमई, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और भगवान बिरसा मुंडा आर्थिक कल्याण योजना के लंबित प्रकरणों का आगामी एक सप्ताह में अनिवार्य रूप से निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के लिए पात्र हितग्राही लंबे समय से लाभ की प्रतीक्षा करते हैं। इसलिए फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति समाप्त की जाए और पात्र प्रकरणों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। हर पात्र हितग्राही तक पहुंचे योजना का लाभ सीईओ ने अन्य योजनाओं में लंबित प्रकरणों की भी समीक्षा करते हुए उन्हें निर्धारित समय-सीमा में निराकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और बैंकर्स से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा, ताकि आवेदन से लेकर ऋण स्वीकृति और वितरण तक की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार योजनाएं केवल ऋण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में पात्र हितग्राहियों को समय पर सहायता मिलना बेहद जरूरी है। बैंकर्स और विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी बैठक में योजनावार प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा आवश्यक दस्तावेजों की कमी वाले प्रकरणों में हितग्राहियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक श्री रविशंकर सहित जनजातीय कार्य विभाग, जिला उद्योग केंद्र, कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यानिकी, ग्रामीण आजीविका मिशन, शहरी आजीविका मिशन तथा विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। एक सप्ताह में परिणाम दिखाने पर जोर डीएलसीसी बैठक में प्रशासन का स्पष्ट संदेश रहा कि सरकारी स्वरोजगार और आर्थिक कल्याण योजनाओं में पात्र हितग्राहियों के प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने चाहिए। अब संबंधित विभागों और बैंकर्स के सामने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की जिम्मेदारी है, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।1
- उमरिया: सुशासन का आधार न्याय, हर नागरिक को न्याय दिलाने सरकार प्रतिबद्ध- सीएम उमरिया: सुशासन का आधार न्याय, हर नागरिक को न्याय दिलाने सरकार प्रतिबद्ध- सीएम उमरिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी नागरिकों को सरल, सुलभ और समान न्याय उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इंदौर में आयोजित ‘इंहेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय में देरी भी अन्याय के समान है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से छोटे-छोटे विवादों का समाधान कर न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, ई-जीरो एफआईआर और आधुनिक न्याय व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार न्याय प्रणाली को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य की न्याय परंपरा का उदाहरण देते हुए सुशासन के लिए न्याय को जरूरी बताया।4
- सांदीपनि विद्यालय मानपुर की बस बीच बस स्टैंड पर हुई खराब; भीषण गर्मी में बच्चे उतरे सड़क पर, मंगलानी ट्रैवल्स की बसों की फिटनेस पर उठे सवाल बच्चों से बस को धक्का लगवाया, सिस्टम को किसका इंतजार? सांदीपनि विद्यालय मानपुर की बस बीच बस स्टैंड पर हुई खराब; भीषण गर्मी में बच्चे उतरे सड़क पर, मंगलानी ट्रैवल्स की बसों की फिटनेस पर उठे सवाल आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी-उमरिया मानपुर। स्कूली बच्चों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने के दावों के बीच मानपुर में सामने आई एक तस्वीर ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार सुबह करीब 10:30 बजे मानपुर बस स्टैंड पर सांदीपनि विद्यालय के बच्चों को लेकर जा रही बस अचानक खराब हो गई। भीषण गर्मी के बीच बच्चों को बस से नीचे उतरना पड़ा और इसके बाद बच्चों से ही बस को धक्का लगवाया गया। घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है कि जब बच्चों की सुरक्षा के लिए बसें संचालित की जा रही हैं, तो क्या उनके रखरखाव और तकनीकी फिटनेस की नियमित निगरानी की जा रही है? फिटनेस प्रमाण-पत्र सिर्फ कागज पर तो नहीं? बताया जा रहा है कि सांदीपनि विद्यालय मानपुर में बच्चों के परिवहन का कार्य मंगलानी ट्रैवल्स की बसों के माध्यम से कराया जा रहा है। बस के बीच रास्ते में खराब होने की घटना के बाद अभिभावकों में भी चिंता है। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि बच्चों के परिवहन में पुरानी बसों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, संबंधित बस की उम्र और तकनीकी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अधिकृत जांच के बिना नहीं की जा सकती। यही वजह है कि अब आरटीओ की जांच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है। जांच में बस की फिटनेस, परमिट, बीमा, ब्रेक, टायर, स्टीयरिंग, लाइट्स और अन्य सुरक्षा मानकों की स्थिति स्पष्ट होना चाहिए। बच्चों से धक्का लगवाना बना सबसे बड़ा सवाल बस खराब होना एक तकनीकी समस्या हो सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या आपात स्थिति में बच्चों को बस से उतारकर उनसे भारी वाहन को धक्का लगवाना सुरक्षित व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है? भीषण गर्मी में सड़क पर बच्चों को खड़ा करना और उनसे बस को धक्का लगवाना उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। डीईओ बोले—आरटीओ से कराएंगे निरीक्षण जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा— “आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है। हम आरटीओ से बस का निरीक्षण कर लेंगे।” अब सवाल यह है कि आरटीओ की जांच में क्या सामने आता है और उसके बाद क्या कार्रवाई होती है। जिम्मेदारों से 5 सीधे सवाल 1. बच्चों को लेकर चलने वाली बस की प्रतिदिन तकनीकी जांच कौन करता है? 2. संबंधित बस का फिटनेस प्रमाण-पत्र वैध है या नहीं? 3. बस की नियमित सर्विसिंग और मेंटेनेंस का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं? 4. बस खराब होने की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या है? 5. क्या बच्चों से बस को धक्का लगवाने की घटना की जिम्मेदारी तय होगी? अब जांच सिर्फ बस की नहीं, पूरी व्यवस्था की होनी चाहिए मामला केवल एक बस खराब होने का नहीं है। मामला उन बच्चों की सुरक्षा का है, जिन्हें अभिभावक विश्वास के साथ स्कूल भेजते हैं। यदि बस पूरी तरह फिट थी तो वह अचानक क्यों खराब हुई? और यदि तकनीकी खामी थी तो उसे बच्चों के परिवहन में क्यों लगाया गया? अब आरटीओ की जांच यह तय करेगी कि बस वास्तव में 'फिट' थी या केवल कागजों में।फ्रंट पेज के लिए वैकल्पिक सबसे तीखी हेडलाइन: “बच्चे पढ़ने निकले थे, बस धक्का लगाने लगे!” सांदीपनि विद्यालय की बस खराब होने से परिवहन व्यवस्था पर सवाल, भीषण गर्मी में बच्चों को सड़क पर उतारने की नौबत।1