कोटा: अगर ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध नहीं रुका तो तेल गैस के साथ 2 महीने बाद खाद का बहुत बड़ा संकट आने वाला है: गौड़ ईरान v/s अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण पूरी दुनिया में और खास कर भारत में चल रहा तेल-गैस का संकट अब साफ नजर आने लगा है, बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों में भी जहां लकड़ी और उपले आसानी से मिल जाते हैं, गैस एजेंसियों पर अफरा-तफरी का आलम है, सरकार के दावों के उलट जमीन पर हालात काफी बिगड़ चुके हैं, कई छोटे बड़े कारखाने बंद हो रहे हैं और मजदूर 5 साल बाद फिर उसी तरह पलायन को मजबूर हो चुके हैं जैसे कोरोना के समय हुए थे: कई ढाबे और रेस्तरां बंद हो रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन 2 महीने बाद इससे भी बड़ा संकट आने वाला है और वो है खाद का संकट, हमारे यहां पहले ही डीएपी और यूरिया के लिए मारामारी रहती है, सोचिए अगर लड़ाई बंद नहीं हुई तो क्या होगा...
कोटा: अगर ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध नहीं रुका तो तेल गैस के साथ 2 महीने बाद खाद का बहुत बड़ा संकट आने वाला है: गौड़ ईरान v/s अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण पूरी दुनिया में और खास कर भारत में चल रहा तेल-गैस का संकट अब साफ नजर आने लगा है, बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों में भी जहां लकड़ी और उपले आसानी से मिल जाते हैं, गैस एजेंसियों पर अफरा-तफरी का आलम है, सरकार के दावों के उलट जमीन पर हालात काफी बिगड़ चुके हैं, कई छोटे बड़े कारखाने बंद हो रहे हैं और मजदूर 5 साल बाद फिर उसी तरह पलायन को मजबूर हो चुके हैं जैसे कोरोना के समय हुए थे: कई ढाबे और रेस्तरां बंद हो रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन 2 महीने बाद इससे भी बड़ा संकट आने वाला है और वो है खाद का संकट, हमारे यहां पहले ही डीएपी और यूरिया के लिए मारामारी रहती है, सोचिए अगर लड़ाई बंद नहीं हुई तो क्या होगा...
- भवानीमंडी मार्ग पर हरियाली का अनोखा ठिकाना, दंपति के जुनून ने रचा मिसाल 700 पौधे, 15 वर्षों की मेहनत—मसालों से लेकर फलों तक का अद्भुत संगम सुनेल। सुनेल से भवानीमंडी मार्ग पर तहसील के पास स्थित एक घर राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। घर के बाहर और भीतर फैली हरियाली, रंग-बिरंगे फूलों और लहराती बेलों को देखकर हर कोई ठिठकने को मजबूर हो जाता है। यह अनोखी हरियाली पर्यावरण प्रेमी दंपति गोविंद धाकड़ और सोनाली धाकड़ की 15 वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। दंपति ने अपने घर को एक छोटे-से हरित संसार में बदल दिया है, जहां 700 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं। इनमें चंपा, चमेली, गुलाब, गुड़हल जैसे फूलों के पौधों के साथ अंजीर, अनार, अमरूद, शहतूत, आंवला, नारंगी और आम जैसे फलदार वृक्ष भी शामिल हैं। इसके अलावा पान, मनी प्लांट, अंगूर सहित कई प्रकार की बेलें भी इस गार्डन की शोभा बढ़ाती हैं। मसालों से नवग्रह वाटिका तक अनूठा संगम इस गार्डन की खासियत इसकी विविधता है। यहां नवग्रह वाटिका और बारह राशियों से जुड़े पौधों के साथ-साथ लौंग, कालीमिर्च, तेजपत्ता जैसे मसालों के पौधे भी लगाए गए हैं। यह गार्डन केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि औषधीय और धार्मिक महत्व भी समेटे हुए है। गौरैया संरक्षण से शुरू हुआ सफर दंपति ने बताया कि एक बार आंधी में घोंसले से गिरे चिड़ियों के बच्चों को देखकर उनका मन विचलित हो गया। वहीं से उन्होंने गौरैया संरक्षण का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने लकड़ी, नारियल की छाल, मटकी और अन्य सामग्री से 100 से अधिक घोंसले तैयार कर घर के आसपास लगाए, जिससे पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था धाकड़ दंपति मौसम के अनुसार पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं। गर्मी के दिनों में परिंडे बांधकर पानी उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही घास-फूस की छत बनाकर पक्षियों के लिए छाया भी सुनिश्चित की जाती है। पूरी तरह जैविक है यह उपवन इस गार्डन की एक और विशेषता यह है कि यहां पूरी तरह जैविक तरीके अपनाए जाते हैं। दंपति पौधों के लिए खाद और कीटनाशक खुद ही तैयार करते हैं। गिरे हुए पत्तों, फल-फूल और जैविक अपशिष्ट से खाद बनाकर उसका उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। रोजाना दो घंटे की सेवा गोविंद धाकड़ बताते हैं कि वे रोजाना करीब दो घंटे गार्डन की देखभाल में लगाते हैं। सुबह की शुरुआत भी गार्डन की देखरेख से होती है, जिसमें पौधों को खाद देना, कटाई-छंटाई करना और पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना शामिल है। युवाओं के लिए संदेश दंपति का कहना है कि जिस दिन वे गार्डन में समय नहीं देते, उस दिन उनका मन नहीं लगता। वे युवाओं से अपील करते हैं कि वे भी पर्यावरण संरक्षण और गौरैया बचाने के लिए आगे आएं तथा अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करें। यह हरित पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जुनून और समर्पण से कोई भी अपने घर को प्रकृति का सुंदर आशियाना बना सकता है।1
- ईरान v/s अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण पूरी दुनिया में और खास कर भारत में चल रहा तेल-गैस का संकट अब साफ नजर आने लगा है, बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों में भी जहां लकड़ी और उपले आसानी से मिल जाते हैं, गैस एजेंसियों पर अफरा-तफरी का आलम है, सरकार के दावों के उलट जमीन पर हालात काफी बिगड़ चुके हैं, कई छोटे बड़े कारखाने बंद हो रहे हैं और मजदूर 5 साल बाद फिर उसी तरह पलायन को मजबूर हो चुके हैं जैसे कोरोना के समय हुए थे: कई ढाबे और रेस्तरां बंद हो रहे हैं या बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन 2 महीने बाद इससे भी बड़ा संकट आने वाला है और वो है खाद का संकट, हमारे यहां पहले ही डीएपी और यूरिया के लिए मारामारी रहती है, सोचिए अगर लड़ाई बंद नहीं हुई तो क्या होगा...1
- कोटा | भारतीय रेलवे द्वारा कोटा के डकनिया तालाब रेलवे स्टेशन को एक विश्वस्तरीय पहचान देने के लिए चल रहा पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रहा है। 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत हो रहे इस बदलाव से न केवल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह स्टेशन शहर के गौरव में भी चार चांद लगाएगा। प्रमुख विकास कार्य और बदलाव स्टेशन के सौंदर्यीकरण और प्रगतिशील कार्यों की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं: भव्य प्रवेश द्वार और भवन: स्टेशन के पुराने ढांचे की जगह अब एक आधुनिक और आकर्षक बिल्डिंग ले रही है, जिसमें हाड़ौती की वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी। प्लेटफॉर्म का विस्तार: यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्लेटफॉर्मों की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाई गई है। साथ ही, बेहतर शेल्टर और बैठने की व्यवस्था की जा रही है। सौंदर्यीकरण: स्टेशन परिसर में लाइटिंग, पेंटिंग और ग्रीन बेल्ट (बागवानी) का काम किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को एक सुखद अनुभव मिले। आधुनिक सुविधाएं: फुटओवर ब्रिज (FOB), लिफ्ट, एस्केलेटर और डिजिटल सूचना बोर्ड जैसी सुविधाएं यहाँ स्थापित की जा रही हैं। यात्रियों के लिए क्या होगा खास? प्रगतिशील कार्यों के पूरा होने के बाद, डकनिया स्टेशन केवल एक स्टॉपेज नहीं बल्कि एक 'अर्बन सेंटर' की तरह कार्य करेगा। स्टेशन के बाहर पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया है ताकि जाम की स्थिति न बने। साथ ही, स्टेशन के भीतर साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। विशेष नोट: इस सौंदर्यीकरण परियोजना का उद्देश्य डकनिया स्टेशन पर यात्री दबाव को कम करना और इसे मुख्य कोटा जंक्शन के विकल्प के रूप में मजबूती से तैयार करना है।2
- ब्रेकिंग KEDL का बड़ा कदम—बिजली बिल बकाया पर लगेगा समाधान कैंप संजय गांधी नगर में मंशापूर्ण हनुमान मंदिर पर होगा आयोजन पेनल्टी वाले बिलों में मिलेगी राहत, मौके पर होगा निस्तारण गाड़ियों से अनाउंसमेंट कर लोगों को दी जा रही जानकारी2
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- कोटा। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना कोटा द्वारा समाज में एकजुटता का संदेश देते हुए घर-घर जाकर “पीले चावल” बांटकर महिलाओं को जयपुर में आयोजित महापड़ाव में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया। जिला अध्यक्ष नीरू चौहान एवं अन्य पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि समय पर सुरक्षा नहीं मिलने के कारण सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की जान गई। उन्होंने कहा कि करणी सेना देश के 24 राज्यों में सक्रिय है और न्याय की मांग को लेकर राजस्थान के प्रत्येक जिले से कार्यकर्ता 29 मार्च को जयपुर पहुंचेंगे तथा मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। शहर अध्यक्ष हेमलता सिंह गहलोत ने कहा कि घटना को तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद दोषियों के खिलाफ अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व आज भी गोगामेड़ी के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को धमकाने और रंगदारी मांगने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले में एसआईटी जांच की मांग को दोहराते हुए सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। प्रदेश उपाध्यक्ष मनजीत सिंह एवं जिला अध्यक्ष निर्भय सिंह ने कहा कि 29 मार्च को जयपुर शहर में दादा सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को न्याय नहीं मिलने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। शहर अध्यक्ष संदीप सिंह बिट्टू बना ने कहा कि श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए गोगामेड़ी हत्याकांड में जल्द न्याय की मांग की पर सरकार के कान में क्यों तक नहीं रहेंगे छोटे अपराधियों को पकड़ लिया जो बड़े अपराधी है वह अभी तक पुलिस गिरफ्तार से दूर है उन्हें भी जल्द से जल्द पकड़ा जाए और जांच की जाए प्रदेश मीडिया प्रवक्ता दुष्यंत सिंह गहलोत ने जानकारी देते हुए बताया कि कोटा सहित जयपुर और पूरे राजस्थान में पीले चावल बांटकर समाज को एकजुट होने का संदेश दिया जा रहा है। यह अभियान गोगामेड़ी हत्याकांड में त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। 29 मार्च को देशभर से बड़ी संख्या में राजपूत समाज एवं सर्व समाज के लोग जयपुर कूच करेंगे। इस दौरान पीले चावल वितरण कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष नीरू चौहान, शहर अध्यक्ष हेमलता सिंह गहलोत, शहर सचिव हेमलता हाड़ा, कोटा जिला महासचिव रेनू चौहान, मीनू कंवर, शहर मीडिया प्रभारी मनीषा कंवर सहित कई महिलाएं एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। कोटा में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की बैठक सम्पन्न, 29 मार्च को जयपुर में सीएम आवास घेराव की बनाई रूपरेखा श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना कार्यालय, कोटा में आज 29 मार्च को जयपुर में प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर महिला पदाधिकारियों एवं संगठन पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वर्गीय ठाकुर सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को न्याय दिलाने के लिए जयपुर में होने वाले सीएम आवास घेराव की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक में कोटा से जयपुर के लिए जाने वाले करणी सैनिकों एवं क्षत्राणियों की संख्या, यात्रा व्यवस्था तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही सभी पदाधिकारियों को अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं को साथ लेकर जयपुर पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश उपाध्यक्ष मंजीत सिंह नाथावत, जिला अध्यक्ष निर्भय सिंह शक्तावत, शहर अध्यक्ष संदीप सिंह गौड़, जिला अध्यक्ष महिला इकाई नीरू चौहान, शहर अध्यक्ष महिला इकाई हेमलता सिंह ,रेनू चौहान जिला सचिव, रितु राठौड़ जिला उपाध्यक्ष , मनीषा कँवर राठौड़ जिला मीडिया प्रभारी महिला इकाई एव प्रदेश मीडिया प्रवक्ता दुष्यंत सिंह गहलोत सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में स्वर्गीय ठाकुर सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को न्याय दिलाने के लिए 29 मार्च को जयपुर में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया तथा कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया।1