समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'सहयोग शिविर' के सफल और प्रभावी आयोजन की तैयारियों का जायजा लेना था। जिलाधिकारी ने इस शिविर को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहित को प्राथमिकता देते हुए आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिल सके। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सभी संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधनों और कर्मियों के साथ उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने यह भी जोर दिया कि शिविर में आने वाले प्रत्येक आवेदक के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, और उनकी समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तैयारियों को समय पर पूरा करने और सहयोग शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें। इस बैठक में जिला स्तरीय पदाधिकारी समाहरणालय सभाकक्ष में भौतिक रूप से उपस्थित थे, जबकि सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े, और जिलाधिकारी द्वारा जारी निर्देशों से अवगत हुए।
समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'सहयोग शिविर' के सफल और प्रभावी आयोजन की तैयारियों का जायजा लेना था। जिलाधिकारी ने इस शिविर को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहित को प्राथमिकता देते हुए आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिल सके। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सभी संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधनों और कर्मियों के साथ उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने यह भी जोर दिया कि शिविर में आने वाले प्रत्येक आवेदक के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, और उनकी समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तैयारियों को समय पर पूरा करने और सहयोग शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें। इस बैठक में जिला स्तरीय पदाधिकारी समाहरणालय सभाकक्ष में भौतिक रूप से उपस्थित थे, जबकि सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े, और जिलाधिकारी द्वारा जारी निर्देशों से अवगत हुए।
- समस्तीपुर और वैशाली के सीमावर्ती क्षेत्र लेओढ़न से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ होने की सूचना मिली है। इस मुठभेड़ के परिणामस्वरूप, जानकारी के अनुसार एक अपराधी के पैर में गोली मारी गई है। वहीं, एक अन्य अपराधी के बारे में यह चर्चा है कि वह घटनास्थल से भागने के दौरान अपना पैर तुड़वा बैठा है।1
- समस्तीपुर और वैशाली जिले की सीमा पर पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में एक कुख्यात बदमाश पुलिस की जवाबी फायरिंग में घायल हो गया, जबकि उसका एक साथी भागने के दौरान घायल हो गया। दोनों को पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सदर एसडीपीओ संजय कुमार पांडे ने जानकारी दी कि घायल बदमाश अमन एक सक्रिय अपराधी गिरोह का सदस्य है। वह हत्या और लूट के मामलों में जमानत पर बाहर आने के बाद लगातार आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहा था। पुलिस के अनुसार, अमन पर समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर जिलों में लूट की कई घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। एसडीपीओ ने बताया कि गिरोह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार सूचनाएं एकत्रित कर रही थी और निगरानी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि अपराधी किसी घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं। जब पुलिस ने उनका पीछा किया, तो बदमाशों ने पुलिस बल पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें अमन के पैर में गोली लगी। पुलिस के मुताबिक, अमन के साथ मौजूद लक्ष्मी कुमार भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इसी दौरान वह गिरकर घायल हो गया। घटनास्थल से दोनों के पास से एक-एक पिस्तौल बरामद की गई है, और पुलिस ने हथियार सहित अन्य साक्ष्यों को जब्त कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए एफएसएल टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र कर रही है। एसडीपीओ ने यह भी बताया कि दोनों के परिजनों को इस घटना की सूचना दे दी गई है, और मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद इस संबंध में और जानकारी साझा की जाएगी।1
- जनसुराज दरभंगा कर्पूरी मंच के जिलाध्यक्ष ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक, बिहार सरकार का खजाना खाली हो गया है और राज्य में मनरेगा योजना को भी बंद कर दिया गया है। जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि बिहार में बेरोजगारी अपने चरम पर पहुँच चुकी है।1
- समस्तीपुर जिले में एक जिला स्तरीय प्रशासनिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत, जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से समाचारों का संकलन किया गया।4
- दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहाँ ओझौल पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सूरज कुमार पर वाहन छीनने और रंगदारी मांगने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है, क्योंकि खुद ओझौल पंचायत की मुखिया निक्की कुमारी इन आरोपों के खिलाफ मैदान में उतर आई हैं। उन्होंने बहादुरपुर थाने में एक लिखित आवेदन देकर विरोधी पक्ष के सभी दावों को झूठा, बेबुनियाद और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया है, आरोप लगाया है कि पंचायत चुनाव नजदीक आने के कारण उनके पति की छवि खराब करने और उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है। मुखिया निक्की कुमारी ने पुलिस को दिए आवेदन में अपनी तरफ से पूरी कहानी बताई है। उनके अनुसार, हकीकत यह है कि आरोप लगाने वाले आनंद कुमार ने मुखिया प्रतिनिधि सूरज कुमार से ₹7 लाख का कर्ज लिया था। आनंद कुमार ने फोनपे और अन्य डिजिटल माध्यमों से किस्तों में कुछ पैसे तो लौटाए, लेकिन पूरी रकम वापस नहीं की। जब बचे हुए पैसों की मांग की गई, तो आनंद कुमार ने अपनी चार पहिया गाड़ी खुद मुखिया के घर भिजवाई और कहा कि पैसे लौटाकर वह गाड़ी वापस ले जाएंगे। मुखिया निक्की कुमारी का तर्क है कि गाड़ी घर पर खड़ी होने के बाद भी आनंद कुमार ने सूरज कुमार के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए। उनका सवाल है कि अगर गाड़ी छीनी गई होती, तो कोई खाते में पैसे क्यों भेजता? इसी सबूत के आधार पर मुखिया का कहना है कि यह मामला 'वाहन छीनने' या 'रंगदारी' का नहीं, बल्कि आपसी लेन-देन का है, जिसे अब राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। मुखिया ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके। फिलहाल, बहादुरपुर थाना पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है, जिसमें दोनों पक्षों के दावों और बैंक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिसिया जांच के नतीजे का इंतजार है।1
- बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड अंतर्गत अरवा चौड़ में भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण नीलगायों का बड़ा जमावड़ा देखा जा रहा है। ये वन्यजीव रिहायशी इलाकों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे स्थानीय किसान भारी संकट का सामना कर रहे हैं। नीलगायों का झुंड न केवल पानी की तलाश में भटक रहा है, बल्कि रात-दिन किसानों की खड़ी फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा रहा है। किसानों का कहना है कि नीलगायों के लगातार आतंक से उनकी मेहनत पर पानी फिर रहा है और फसलों की बर्बादी ने उनकी कमर तोड़ दी है। स्थानीय ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए तत्काल पहल करने की मांग की है। यह समस्या केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते द्वंद्व का भी संकेत देती है। इस स्थिति से निपटने के लिए वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को कई कदम उठाने का सुझाव दिया गया है। इनमें जंगल और आसपास के क्षेत्रों में कृत्रिम जल स्रोतों या 'वॉटर होल्स' का निर्माण करना शामिल है, ताकि नीलगायों को पानी की तलाश में बस्तियों की ओर न आना पड़े। साथ ही, फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावित किसानों को सोलर फेंसिंग या अन्य सुरक्षित तरीकों के लिए अनुदान या सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ग्रामीणों को नीलगायों के स्वभाव और उन्हें बिना नुकसान पहुँचाए खेतों से दूर रखने के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की भी सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, प्रशासन को उन किसानों की पहचान कर उन्हें उचित मुआवजा देना चाहिए जिनकी फसलें नीलगायों के कारण नष्ट हुई हैं, ताकि वे अपनी खेती दोबारा शुरू कर सकें।4
- समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'सहयोग शिविर' के सफल और प्रभावी आयोजन की तैयारियों का जायजा लेना था। जिलाधिकारी ने इस शिविर को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहित को प्राथमिकता देते हुए आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिल सके। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, सभी संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधनों और कर्मियों के साथ उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने को कहा गया। जिलाधिकारी ने यह भी जोर दिया कि शिविर में आने वाले प्रत्येक आवेदक के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, और उनकी समस्याओं का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तैयारियों को समय पर पूरा करने और सहयोग शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थी इसका लाभ उठा सकें। इस बैठक में जिला स्तरीय पदाधिकारी समाहरणालय सभाकक्ष में भौतिक रूप से उपस्थित थे, जबकि सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी और अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े, और जिलाधिकारी द्वारा जारी निर्देशों से अवगत हुए।1
- दस पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इन अनुसंधानकर्ता पुलिसकर्मियों पर दलाल रखकर डायरी लिखवाने और अनुसंधान को प्रभावित करने जैसे गंभीर मामले में कार्रवाई की गई है। इसी संदर्भ में, यह भी उजागर किया गया है कि बहेरी में थाना अध्यक्ष द्वारा चौकीदार से सिरिस्ता का कार्य करवाया जाता है और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए भी पैसे की वसूली की जाती है। इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए, यह पुरजोर मांग की गई है कि दलाल रखकर काम करवाने वाले इन पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के बजाय उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए।1
- दरभंगा के लहेरियासराय चट्टी चौक के पास बिजली विभाग की लापरवाही उम्मीद से कहीं ज़्यादा बढ़कर सामने आई है। यहाँ सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें तो लगी हैं, लेकिन उनके इर्द-गिर्द पेड़-पौधे, लताएँ और झाड़ियाँ इतनी बढ़ गई हैं कि रोशनी सड़क पर पड़ने के बजाय घने जंगलों के झुरमुट को ही जालनुमा दिखा रही है। इस स्थिति पर गहरी हैरत जताई गई है, क्योंकि बारिश होने पर इन्हीं बढ़े हुए जंगल के साथ बिजली का करंट भी नीचे तक पहुँचने का ख़तरा बना रहता है। आरोप है कि लापरवाह बिजली विभाग किसी बड़ी घटना के बाद ही इस समस्या को ठीक करने के लिए सक्रिय होगा। बिजली विभाग के कर्मियों पर भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया गया है, जिसके कारण वे बेख़ौफ़ होकर जनता के लिए नुकसान का न्योता दे रहे हैं।1