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सवाई माधोपुर के वजीरपुर स्थित कुंशाय रायपुर पंचायत में सफाई व्यवस्था की भारी अनदेखी देखने को मिल रही है। पंचायत क्षेत्र में सरपंच द्वारा सफाई का कार्य नहीं कराया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में बदहाली के हालात बने हुए हैं। कुंशाय रायपुर पंचायत में सफाई न होने से यह स्थिति बनी हुई है और सरपंच पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
Jadeja singh jat
सवाई माधोपुर के वजीरपुर स्थित कुंशाय रायपुर पंचायत में सफाई व्यवस्था की भारी अनदेखी देखने को मिल रही है। पंचायत क्षेत्र में सरपंच द्वारा सफाई का कार्य नहीं कराया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में बदहाली के हालात बने हुए हैं। कुंशाय रायपुर पंचायत में सफाई न होने से यह स्थिति बनी हुई है और सरपंच पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।
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- सवाई माधोपुर के वजीरपुर स्थित कुंशाय रायपुर पंचायत में सफाई व्यवस्था की भारी अनदेखी देखने को मिल रही है। पंचायत क्षेत्र में सरपंच द्वारा सफाई का कार्य नहीं कराया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में बदहाली के हालात बने हुए हैं। कुंशाय रायपुर पंचायत में सफाई न होने से यह स्थिति बनी हुई है और सरपंच पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।1
- राजस्थान में पंचायती राज आम चुनाव 2026 की तैयारियां तेज हो गई हैं और सरकार ने इस संबंध में चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सरकार ने जिला कलेक्टरों और एसडीएम (SDM) को चुनाव की आरक्षण लॉटरी निकालने के लिए अधिकृत करते हुए चुनाव तैयारी शुरू करने के अधिकार सौंप दिए हैं।1
- हिंडौन मंडावर रोड की गंभीर जनसमस्याओं, जलभराव, टूटी सड़कों, पेयजल संकट और अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ नगर परिषद आयुक्त कार्यालय में समाजसेवी विष्णु प्रजापति ने अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दिया। विष्णु प्रजापति के धरने पर बैठते ही नगर परिषद प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया और मंडावरा रोड पर मशीन भेजकर पानी की निकासी के प्रयास तेज कर दिए। इसके बाद समाजसेवी विष्णु प्रजापति ने शुक्रवार शाम 4:00 बजे जानकारी दी कि प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई के लिए 2 दिन का समय लिया गया है और जलभराव की समस्या के स्थाई समाधान के लिए 7 दिन का आश्वासन मिला है। प्रशासन से मिले इस आश्वासन के बाद धरना और भूख हड़ताल समाप्त कर दी गई।1
- कोटा मंडल में मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (URDCC) की 150वीं बैठक संपन्न हुई है। मंडल रेल प्रबंधक श्री अनिल कालरा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक के दौरान यात्री सुविधाओं, रेल विकास तथा जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।1
- मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से चोरी हुई करीब 400 वर्ष पुरानी सिंधियाकालीन तोप की तलाश अब राजस्थान के करौली जिले तक पहुंच गई है। खुफिया सूचना मिलने के बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाते हुए हिंडौन क्षेत्र के गांवड़ा मीणा गांव में व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। हिंडौन सदर थाना प्रभारी गिर्राज प्रसाद के अनुसार, शिवपुरी पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर पूरे गांव में पुलिस की तैनाती की गई है। इस अभियान में 50 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल हैं जो मेटल डिटेक्टर और जेसीबी मशीनों की मदद से संभावित स्थानों पर खुदाई और तलाशी ले रहे हैं। पुलिस को सूचना मिली है कि 3,500 किलो वजनी इस तोप को चोर लोडिंग गाड़ी से यहां लेकर आए हैं। दरअसल, 15 जुलाई की रात को बदमाशों ने नरवर किले की ओपन कचहरी से 16वीं शताब्दी की यह दुर्लभ तोप चुरा ली थी, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में 3 से 5 करोड़ रुपये तक मानी जा रही है। चोरों ने पूरी प्लानिंग के तहत तोप को पहले गद्दों में लपेटा, फिर बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3,000 फीट नीचे उतारा और लोडिंग गाड़ी में लादकर फरार हो गए। किले में सुरक्षाकर्मियों के ड्यूटी पर न होने का फायदा उठाते हुए इस वारदात को अंजाम दिया गया। किले के बाहर भारी गाड़ियों के टायर के निशान भी मिले हैं और आशंका है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट से जुड़े लोग शामिल हैं। जिस नरवर किले से तोप चोरी हुई है, उसकी ओपन कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं ने कराया था। इसके बाद 1925 में तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया था। ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ तोपें रखी थीं, जिनमें से अब केवल 13 बची हैं। ये सभी तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से बनी हैं और इन पर फारसी तथा देवनागरी लिपि में शिलालेख अंकित हैं। पुलिस फिलहाल आरोपियों का सुराग लगाने के साथ यह जांच कर रही है कि इस तोप को गांवड़ा मीणा गांव में कब और कैसे लाया गया।2
- करौली के हिंडौन सिटी में मंडावरा रोड़ पर जलभराव, टूटी सड़कों और पेयजल समस्या के समाधान की माँग को लेकर समाजसेवी विष्णु प्रजापति ने शुक्रवार को नगर परिषद आयुक्त कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी। भूख हड़ताल की सूचना पर नगर परिषद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और मंडावरा रोड़ पर पानी निकासी का काम तेज कर दिया गया। शाम को समाजसेवी प्रजापति ने बताया कि प्रशासन ने समस्याओं के तत्काल समाधान के लिए दो दिन और जलभराव की समस्या के स्थाई समाधान के लिए सात दिन का समय देने का आश्वासन दिया है। प्रशासन द्वारा दिए गए इस आश्वासन के बाद उन्होंने फिलहाल भूख हड़ताल समाप्त कर दी है।2
- करौली के हिंडौन स्थित मंडावर रोड की गंभीर जनसमस्याओं, जलभराव, टूटी सड़कों, पेयजल संकट और अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ समाजसेवी विष्णु प्रजापति ने नगर परिषद आयुक्त कार्यालय में अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दिया। धरने पर बैठते ही नगर परिषद प्रशासन तुरंत हरकत में आया और मंडावरा रोड पर मशीनों के जरिए जलभराव की निकासी के प्रयास तेज कर दिए। शुक्रवार शाम समाजसेवी विष्णु प्रजापति ने बताया कि प्रशासन द्वारा 2 दिन का समय दिया गया है और जलभराव की समस्या के स्थाई समाधान के लिए 7 दिन का आश्वासन मिला है, जिसके बाद धरना और भूख हड़ताल समाप्त कर दी गई।4
- राजस्थान के करौली जिला अंतर्गत सूरौठ में प्रस्तावित नहर परियोजना से प्रभावित किसानों ने अपनी उपजाऊ भूमि और आजीविका की रक्षा के लिए मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने सूरौठ तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखी हैं। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव रिंकू खेड़ी हैवत ने शुक्रवार दोपहर 2 बजे इस संबंध में जानकारी साझा की। किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से उनकी आजीविका और फसल उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि नहर का सर्वे और निर्माण कार्य पहाड़ों की तलहटी, सरकारी चारागाह, सिवायचक या अन्य उपलब्ध सरकारी जमीन से कराया जाए, जिससे किसानों की उपजाऊ जमीन सुरक्षित रह सके। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कारणवश निजी भूमि का अधिग्रहण करना अनिवार्य हो, तो प्रत्येक प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी दी जाए। यदि सरकार इस मांग को नहीं मानती है, तो अधिग्रहित भूमि का कम से कम 10 गुना मुआवजा दिया जाए और किसानों को खेती योग्य वैकल्पिक सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा, पुनर्वास, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की लिखित गारंटी देने की भी मांग रखी गई है।1