Shuru
Apke Nagar Ki App…
पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास को लेकर एक सीधा सवाल उठाया गया है। लोगों से पूछा गया है कि क्या वाकई इस क्षेत्र का विकास हुआ है, और इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएँ और टिप्पणियाँ साझा करने का आह्वान किया गया है।
Talk On Chair
पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र में हुए विकास को लेकर एक सीधा सवाल उठाया गया है। लोगों से पूछा गया है कि क्या वाकई इस क्षेत्र का विकास हुआ है, और इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएँ और टिप्पणियाँ साझा करने का आह्वान किया गया है।
More news from बिहार and nearby areas
- बिहार के सिरहा पंचायत भवन परिसर में आयोजित जीविका दीदीयों की बैठक में अनुशासनहीनता का गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ जीविका के अधिकारी और कर्मचारियों पर दीदियों को अनुशासन का ज्ञान न सिखाने का आरोप लगा है। 'दैनिक सिरहा टाइम्स' के संपादक रवि कुमार भार्गव की रिपोर्ट के अनुसार, बुककीपर से लेकर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी संविदाकर्मी तक, सभी सरकार की महत्वाकांक्षी जीविका योजनाओं से 'खिलवाड़' कर रहे हैं। सिरहा पंचायत में जीविका भवन परिसर के पीपल के पेड़ के नीचे आयोजित मासिक बैठक में जीविका कर्मी बली नारायण साह संबंधित कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान, जब संपादक रवि कुमार भार्गव उनसे बातचीत करने पहुँचे, तो जीविका दीदियाँ बैठक से उठकर चली गईं। बली नारायण साह ने बताया कि इस समूह की सीएम गीता देवी के उकसाने पर अन्य सदस्य भी उठ गईं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेस के आने और फोटो-वीडियो बनाने के डर से महिलाएँ बैठक छोड़कर भागी हैं। इस घटना के दौरान, एक व्यक्ति ने मोटरसाइकिल से आकर आरोप लगाया कि समूह की सीएम गीता देवी कहती हैं कि उनके ग्रुप में पैसा ही नहीं है। उस व्यक्ति ने यह भी बताया कि गीता देवी अपनी मनमर्जी से इस समूह का संचालन करती हैं। यह भी गौरतलब है कि बैठक 11 बजे दिन से आयोजित होनी थी, जबकि बुककीपर भरत प्रसाद कुशवाहा स्वयं लगभग 1:30 बजे बैठक में पहुँचे। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि बिहार सरकार जीविका दीदियों के माध्यम से विकास कार्य पर भारी धन खर्च कर रही है, लेकिन जिन दीदियों को बैठक के अनुशासन का भी ज्ञान नहीं, वे पंचायत के विकास में अग्रणी भूमिका कैसे निभा पाएंगी। यह स्थिति जीविका कर्मियों और अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण की 'पोल खोलती' है। गंभीर आरोप यह भी है कि जीविका सीएम द्वारा सदस्यों के नाम पर स्वयं राशि निकालकर रख ली जाती है। कटास में एक मुस्लिम महिला के साथ माधुरी देवी नामक जीविका सीएम द्वारा ऐसी ही एक घटना किए जाने की बात भी सुनने को मिली थी, जिसमें माधुरी देवी जानकारी देने में असमर्थ रही थीं। इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जांच की आवश्यकता पर बल दिया गया है।1
- मझौलिया थाना क्षेत्र के परसा डुमरिया निवासी और पूर्व कर्नल मो. मंजर साहब के पुत्र अत्ताउल हक़ ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 71वीं रैंक हासिल कर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) पद पर अपना चयन सुनिश्चित किया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल जिला बल्कि मझौलिया प्रखंड का नाम भी रोशन हुआ है और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। इस शानदार सफलता के लिए अत्ताउल हक़ को सम्मानित भी किया गया। कांग्रेस के बेतिया विधानसभा पूर्व विधायक प्रत्याशी वशी अहमद, पूर्व मंत्री डॉ. शमीम अहमद और रामनगर बनकट पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि अरुण यादव ने उन्हें अंगवस्त्र, गुलदस्ता और माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मौजूद सभी लोगों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूर्व कर्नल मो. मंजर साहब ने इस दौरान कहा कि सच्ची लगन, अनुशासन और कठिन परिश्रम से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनका पुत्र ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा करेगा। नवचयनित डीएसपी अत्ताउल हक़ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और सभी शुभचिंतकों को दिया। उन्होंने विशेष रूप से अपने पिता के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया। अत्ताउल हक़ ने युवाओं से अपील की कि वे अपने लक्ष्य निर्धारित करें और मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। अत्ताउल हक़ की यह सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा मानी जा रही है। उनकी उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश से आने वाले छात्र भी कड़ी मेहनत, लगन और समर्पण के बल पर उच्च प्रशासनिक पद प्राप्त कर सकते हैं। इस सम्मान समारोह में मुखिया शिवशंकर ठाकुर उर्फ पुतुल ठाकुर, मोहम्मद नसीम, पप्पू अजीज, मुन्ना मियां, जावेद आलम, इकरामुल हक़, रागिब हसन, प्रो. कलीमुल्लाह और तारीख जमाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।4
- पश्चिम चंपारण के अमवा मझार पंचायत में एक मिनी सचिवालय का उद्घाटन किया गया है। इस अवसर पर, प्रभारी मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि एक विकसित पंचायत के माध्यम से ही एक विकसित बिहार का निर्माण संभव हो पाएगा।1
- आज के समय में किसी भी गाड़ी की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है, खासकर चोरी होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए, अपनी गाड़ी को स्मार्ट सुरक्षा प्रदान करना अब आसान हो गया है। GPS ट्रैकर के माध्यम से मिलने वाली यह स्मार्ट सुरक्षा कई उन्नत सुविधाएँ देती है। इन सुविधाओं में लाइव लोकेशन ट्रैकिंग शामिल है, जिससे आप अपनी गाड़ी की वर्तमान स्थिति को वास्तविक समय में ट्रैक कर सकते हैं। इसके साथ ही, यह डिवाइस रूट हिस्ट्री भी प्रदान करता है, जिससे गाड़ी के पिछले रास्तों की जानकारी मिल सके। सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इसमें ओवरस्पीड अलर्ट और इंजन कट फीचर भी है, जो किसी भी आपात स्थिति में गाड़ी के इंजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह सेवा 24x7 मॉनिटरिंग की सुविधा भी देती है, जिससे हर समय आपकी गाड़ी पर नज़र रखी जा सके। Search Point Technology द्वारा 2018 से दी जा रही यह GPS समाधान सेवा उपलब्ध है। अपनी गाड़ी में GPS लगवाने और स्मार्ट सुरक्षा पाने के लिए आप 9931495415 पर कॉल या WhatsApp कर सकते हैं, क्योंकि सुरक्षा को बाद में नहीं, पहले प्राथमिकता देना ज़रूरी है।1
- सहयोग पोर्टल को लेकर आम जनता के विचारों पर चर्चा की जा रही है, विशेष रूप से इस बात पर कि क्या यह पोर्टल वाक़ई में लोगों के लिए सहयोगी साबित होगा। यह सवाल उठाया जा रहा है कि इस मंच के संबंध में लोगों की क्या राय है और इसकी प्रभावशीलता कितनी होगी।1
- पूर्वी चंपारण के सिरहा पंचायत में पंचायत सचिव अमित कुमार पर ग्राम सभा की सूचना जनता को न देने और सिर्फ कोरम पूरा करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार सरकार के निर्देशानुसार, जिलाधिकारी पूर्वी चंपारण ने हर ग्राम पंचायत में सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। इस संबंध में, पंचायत सचिव अमित कुमार ने दावा किया कि वे सुबह 10 बजे से ही पंचायत भवन में मौजूद थे और वार्ड सदस्यों की बैठक हुई थी। हालांकि, सुबह से ही पंचायत भवन में मौजूद ग्रामीण जैसे जय गोविंद प्रसाद कुशवाहा और जय लाल सहनी सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें ग्राम सभा की कोई जानकारी नहीं दी गई और वहां कोई मौजूद नहीं था। दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक रवि कुमार भार्गव ने भी पुष्टि की कि समाचार संकलन के लिए उन्होंने तीन बार पंचायत भवन का दौरा किया – पहली बार कोई नहीं मिला, 12 बजे दोबारा जाने पर भी कोई नहीं दिखा, और 1:19 बजे पहुंचने पर पंचायत भवन में ताला लगा पाया। ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि पंचायत भवन में कोई नहीं आया था, जिससे पंचायत सचिव के दावे पर सवाल उठते हैं। जनता के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पंचायत सचिव अमित कुमार ने अपने कर्तव्य में लापरवाही बरती है और जनता को ग्राम सभा की सूचना नहीं दी गई। संपादक रवि कुमार भार्गव ने पंचायत सचिव से अनुरोध किया कि वे किसी राजनीतिक दबाव या लालच में न आकर जनता को सरकार की योजनाओं और ग्राम सभा की सूचना समय पर दें, क्योंकि सरकार उन्हें जनता की सेवा के लिए वेतन देती है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत सरकार भवन में आरपीएस (राइट टू पब्लिक सर्विसेज) काउंटर खोला गया है ताकि लोगों को जाति, आवासीय और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज बनवाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, लेकिन यहां भी कोई कर्मी मौजूद नहीं रहता। पंचायत सचिव द्वारा बैठक की जो तस्वीरें उपलब्ध कराई गईं, उन सभी पर 11:46 बजे का समय दर्शाया गया था। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बाद में जो तस्वीरें भेजीं, उनमें 11:30 और 11:47 जैसे अलग-अलग समय दिखे, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। संपादक के अनुसार, बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को विफल करने में पंचायत स्तर के कर्मचारी, पंचायत सचिव और आरपीएस कर्मी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन कर्मचारियों को केवल अपने वेतन से मतलब होता है और वे पंचायत के विकास कार्यों में कोई रुचि नहीं लेते। आरोप है कि ये कर्मचारी अपने दलाल पाल रखे हैं और केवल हाजिरी लगाने के लिए आते हैं, जिसके बाद वे वापस चले जाते हैं और पंचायत भवन की ओर उनका रुख नहीं होता। यह सभी गंभीर जांच का विषय है, जिस पर उच्च अधिकारियों का ध्यान केंद्रित होना आवश्यक है। ऐसा प्रतीत होता है कि सिरहा पंचायत के पंचायत सचिव अमित कुमार को अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।1
- Post by Vinod Singh Rajput, shivhar News1
- गोपालगंज पुलिस ने विशम्भरपुर थाना क्षेत्र में हुए एक खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले 'ब्लाइंड मर्डर केस' का खुलासा मात्र 15 दिनों में कर दिया है। यह घटना किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं है, जहाँ दूसरों की मौत की सुपारी देने वाला शख्स ही अंततः उन्हीं हत्यारों का शिकार बन गया। इस 'खूनी खेल' में पुलिस ने गन्ने के खेत से एक कटा सिर बरामद किया था। मामले की जाँच में सामने आया कि जिस व्यक्ति ने दो लोगों की हत्या की सुपारी दी थी, वह खुद ही अपने बुने जाल में फँसकर शिकार बन गया।1