दमोह विकासखंड के हिंडोरिया में सांसद राहुल सिंह लोधी की अध्यक्षता में 'चौपाल प्राकृतिक खेती के नाम एवं मिनीकिट बीज वितरण' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर में 500 से अधिक कृषकों को निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरित किए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद राहुल सिंह लोधी ने किसानों से स्वास्थ्य, पर्यावरण और मृदा उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत एवं घन जीवामृत तैयार कर एक देसी गाय से 30 एकड़ तक प्राकृतिक खेती की जा सकती है, जिससे उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, लागत कम आती है, उत्पादन उच्च गुणवत्ता का होता है और पोषण से भरपूर होता है, जिससे मानव स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण स्वास्थ्य सभी बेहतर रहते हैं। उन्होंने वितरित किए जा रहे मिनीकिट बीज को उन्नत किस्म का बताया, जिसका उपयोग किसान परंपरागत बीजों को बदलने के लिए कर सकते हैं। उपसंचालक कृषि जे.एल. प्रजापति ने कृषकों को डीएपी के स्थान पर नैनो डीएपी और एन.पी.के. (जैसे 20-20-0-13, 12:32:16, 16:16:16) जैसे उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने नैनो डीएपी के उपयोग की विधि बताते हुए कहा कि बीज उपचार के लिए 5 एमएल नैनो डीएपी प्रति 1 किलो बीज की दर से उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक बोतल नैनो डीएपी 100 किलो बीज के उपचार के लिए पर्याप्त होती है। बेहतर परिणामों के लिए खड़ी फसल में 35 दिन बाद 5 एमएल प्रति लीटर पानी के मान से एक बोतल प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से परंपरागत दानेदार डीएपी के बिना अच्छी फसल पैदा की जा सकती है। प्रजापति ने मृदा नमूना कब और कैसे लेना चाहिए तथा मृदा परीक्षण के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी प्रदान की।
दमोह विकासखंड के हिंडोरिया में सांसद राहुल सिंह लोधी की अध्यक्षता में 'चौपाल प्राकृतिक खेती के नाम एवं मिनीकिट बीज वितरण' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर में 500 से अधिक कृषकों को निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरित किए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद राहुल सिंह लोधी ने किसानों से स्वास्थ्य, पर्यावरण और मृदा उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि देसी गाय
के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत एवं घन जीवामृत तैयार कर एक देसी गाय से 30 एकड़ तक प्राकृतिक खेती की जा सकती है, जिससे उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, लागत कम आती है, उत्पादन उच्च गुणवत्ता का होता है और पोषण से भरपूर होता है, जिससे मानव स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण स्वास्थ्य सभी बेहतर रहते हैं। उन्होंने वितरित किए जा रहे मिनीकिट बीज को उन्नत किस्म का बताया,
जिसका उपयोग किसान परंपरागत बीजों को बदलने के लिए कर सकते हैं। उपसंचालक कृषि जे.एल. प्रजापति ने कृषकों को डीएपी के स्थान पर नैनो डीएपी और एन.पी.के. (जैसे 20-20-0-13, 12:32:16, 16:16:16) जैसे उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने नैनो डीएपी के उपयोग की विधि बताते हुए कहा कि बीज उपचार के लिए 5 एमएल नैनो डीएपी प्रति 1 किलो बीज की दर से उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक बोतल नैनो
डीएपी 100 किलो बीज के उपचार के लिए पर्याप्त होती है। बेहतर परिणामों के लिए खड़ी फसल में 35 दिन बाद 5 एमएल प्रति लीटर पानी के मान से एक बोतल प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से परंपरागत दानेदार डीएपी के बिना अच्छी फसल पैदा की जा सकती है। प्रजापति ने मृदा नमूना कब और कैसे लेना चाहिए तथा मृदा परीक्षण के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी प्रदान की।
- दमोह विकासखंड के हिंडोरिया में सांसद राहुल सिंह लोधी की अध्यक्षता में 'चौपाल प्राकृतिक खेती के नाम एवं मिनीकिट बीज वितरण' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर में 500 से अधिक कृषकों को निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरित किए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद राहुल सिंह लोधी ने किसानों से स्वास्थ्य, पर्यावरण और मृदा उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत एवं घन जीवामृत तैयार कर एक देसी गाय से 30 एकड़ तक प्राकृतिक खेती की जा सकती है, जिससे उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, लागत कम आती है, उत्पादन उच्च गुणवत्ता का होता है और पोषण से भरपूर होता है, जिससे मानव स्वास्थ्य, मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण स्वास्थ्य सभी बेहतर रहते हैं। उन्होंने वितरित किए जा रहे मिनीकिट बीज को उन्नत किस्म का बताया, जिसका उपयोग किसान परंपरागत बीजों को बदलने के लिए कर सकते हैं। उपसंचालक कृषि जे.एल. प्रजापति ने कृषकों को डीएपी के स्थान पर नैनो डीएपी और एन.पी.के. (जैसे 20-20-0-13, 12:32:16, 16:16:16) जैसे उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने नैनो डीएपी के उपयोग की विधि बताते हुए कहा कि बीज उपचार के लिए 5 एमएल नैनो डीएपी प्रति 1 किलो बीज की दर से उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक बोतल नैनो डीएपी 100 किलो बीज के उपचार के लिए पर्याप्त होती है। बेहतर परिणामों के लिए खड़ी फसल में 35 दिन बाद 5 एमएल प्रति लीटर पानी के मान से एक बोतल प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से परंपरागत दानेदार डीएपी के बिना अच्छी फसल पैदा की जा सकती है। प्रजापति ने मृदा नमूना कब और कैसे लेना चाहिए तथा मृदा परीक्षण के महत्व पर भी विस्तृत जानकारी प्रदान की।4
- यह आह्वान किया गया है कि श्री राम की कहानी को सुना जाए। संदेश में बताया गया है कि राम कृष्ण के घर में की गई प्रार्थना ही फलदायी होगी और काम आएगी।1
- सागर जिले की रहली तहसील के अंतर्गत आने वाले जमघट बीट में किसानों की फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गई हैं। यह घटना किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बनी है।1
- सागर जिले के देवरी नगर में पत्रकारिता को एक नई दिशा और पहचान देने के उद्देश्य से रविवार को नगरपालिका चौराहा स्थित साहित्यिक भवन में पत्रकार कल्याण परिषद की विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में देवरी नगर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में पत्रकारों ने भाग लिया, जहाँ पत्रकारों के हितों की रक्षा, सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक और आर्थिक कल्याण, संगठन के विस्तार, और पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य आकर्षण पत्रकार कल्याण परिषद की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन रहा। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बताते हुए समाज और शासन-प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, निर्भीक और तथ्यात्मक समाचारों के माध्यम से समाज को जागरूक करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बैठक में यह भी बताया गया कि पत्रकारिता वर्तमान में कई चुनौतियों का सामना कर रही है, खासकर डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और तकनीकी संसाधनों के बढ़ते उपयोग के कारण। ऐसे में पत्रकारों को नई तकनीकों से जोड़ने और उन्हें नियमित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है ताकि वे आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। इस अवसर पर पत्रकार कल्याण परिषद की नई कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया, जिसमें नितिन ठाकुर को अध्यक्ष, अनुराग विश्वकर्मा को उपाध्यक्ष, प्रवीण पाठक को सचिव, राकेश यादव को सहसचिव और संतोष विश्वकर्मा को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। नवगठित कार्यकारिणी का उपस्थित पत्रकारों ने तालियों से स्वागत किया। नवनियुक्त पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे पत्रकारों के हितों की रक्षा, संगठन के विस्तार और पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से काम करेंगे। बैठक में पत्रकार सहायता कोष के गठन, आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सहायता, सदस्यता अभियान को गति देने, संगठन के विस्तार, युवा पत्रकारों को जोड़ने और समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पत्रकार के साथ अन्याय या कठिनाई होने पर पत्रकार कल्याण परिषद पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी रहेगी और उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने का कार्य करेगी। बैठक में संगठन की एकजुटता पर विशेष जोर दिया गया और सभी पत्रकारों से व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर पत्रकारिता के मूल्यों और समाजहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम के समापन पर, उपस्थित सभी पत्रकारों ने संगठन की मजबूती, पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। देवरी के लाल साहब लोधी, मनोज स्वामी, अभिषेक गुप्ता, दीपक चौरसिया, मुवीन खाँ, संतोष विश्वकर्मा, भूपेंद्र राजपूत, त्रिवेंद्र जाट, मोती गौंड, सौरभ नगरिया, अमित राजपूत, परसुराम साहू, विपिन शर्मा, भरत ठाकुर, सोनू प्रजापति, नीरज जैन, रामबाबू पटेल, आशुतोष दुबे, कुलदीप नामदेव, अमित तिवारी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। इस बैठक ने यह संदेश दिया कि पत्रकारों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, और पत्रकार कल्याण परिषद के गठन से देवरी में पत्रकारिता को एक नई पहचान और ऊर्जा मिली है।3
- देवरी नगर पालिका परिषद के आंबेडकर वार्ड में हुई बारिश ने नगर पालिका की सफाई व्यवस्था की बदहाल हकीकत को सबके सामने ला दिया है। नालियों की समय पर सफाई न होने के कारण उनमें जमा प्लास्टिक, कचरा और गंदगी बारिश के तेज बहाव के साथ सड़कों पर फैल गई है, जिससे पूरा क्षेत्र गंदगी, बदबू और जलभराव से जूझ रहा है। लंबे समय से नालियों की सफाई न होने के कारण स्थिति और भी बिगड़ गई है। सड़कों पर गंदा पानी बहने से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नियमित सफाई नहीं कराई जा रही है, जिसके चलते हर बारिश में यही दयनीय स्थिति उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय लोगों ने गंभीर आशंका जताई है कि यदि जल्द ही नालियों की सफाई नहीं की गई तो गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ेगा और डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। वार्डवासियों ने नगर पालिका परिषद देवरी से तत्काल नालियों की सफाई कराने, सड़क पर फैले कचरे को हटाने और एक नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। निवासियों का कहना है कि "हमारी मांग है कि नगर पालिका तत्काल नालियों की सफाई कराए और आंबेडकर वार्ड में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि लोगों को गंदगी और बदबू से राहत मिल सके।"1
- नगर परिषद पटेरा कुंडलपुर के मुख्य मार्ग पर स्थित विद्यासागर पेट्रोल पंप के सामने सड़क पर तालाब जैसी स्थिति बन गई है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या गंभीर हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सड़क से निकलने में अत्यधिक कठिनाई हो रही है। इतना ही नहीं, यह पानी आसपास के लोगों के घरों में भी भर रहा है, जिससे उनकी मुसीबतें और बढ़ गई हैं। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए, शासन और प्रशासन से लगातार इस ओर ध्यान देने की अपील की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके और नागरिकों को इस समस्या से निजात मिल सके।1