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मोहन कैबिनेट में कई बड़े फैसले ......
Abdul Rasid
मोहन कैबिनेट में कई बड़े फैसले ......
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
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- श्रीराम कथा के चतुर्थ दिवस पर महाराष्ट्र कैबिनेट मंत्री संजय भाऊ राठौड़ का आगमन, संत समागम से भक्तिमय हुआ वातावरण1
- survey pr bhot kuch pta chalta hai ki actually me kya need hai gaon me🙏💯♥️1
- अहीरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम पाडल्या गवली के लाल नैतिक अशोक यादव ने कक्षा 9वीं की परीक्षा में 94% अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस गौरवशाली अवसर पर विद्यालय की अध्यक्षा श्रीमती उषा राव जी, प्राचार्य श्री भास्कर राव जी एवं H.O.D. कुमारी रितु गुप्ता जी ने बालक के निवास पर पहुँचकर उसे सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यालय परिवार एवं समस्त क्षेत्रवासियों की ओर से नैतिक को हार्दिक शुभकामनाएं!1
- भीमपुर में जयस संगठन का अनोखा आंदोलन भैंसदेही जयस संगठन भीमपुर ने जनपद कार्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नन्हसिंग चौहान को एक ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना 2026-27 में जोड़ों की संख्या बढ़ाने और आदिवासी जोड़ों के विवाह को आदिवासी संस्कृति के अनुरूप संपन्न कराने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई तो सामाजिक आंदोलन छेड़ा जाएगा। योजना में जोड़ों की सीमित संख्या पर नाराजगी मध्य प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इस बार भीमपुर और भैंसदेही में 29 अप्रैल को इसका आयोजन प्रस्तावित है, लेकिन मात्र 200 जोड़ों को ही शामिल करने का निर्णय लिया गया है। संगठन का कहना है कि यह संख्या क्षेत्र की आबादी और आवश्यकता के अनुरूप बिल्कुल अपर्याप्त है। भीमपुर-भैंसदेही एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जो पांच अनुसूचित क्षेत्रों (244/1) के अंतर्गत आता है। यहां विवाह समारोहों में बड़ी संख्या में दंपतियों के शामिल होने की परंपरा रही है। पिछले वर्ष ब्लॉक मुख्यालय पर 700 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, लेकिन इस बार दो ब्लॉकों को मिलाकर भी संख्या घटाकर 200 कर दी गई है। संगठन ने मध्य प्रदेश शासन से तत्काल जोड़ों की संख्या बढ़ाने का निवेदन किया है। आदिवासी संस्कृति का सम्मान: विशेष मांग ग्रामीणों और संगठन ने यह भी मांग उठाई है कि आदिवासी जोड़ों के विवाह आदिवासी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए जाएं। उन्होंने बताया कि भारत में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 सीधे तौर पर अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) पर लागू नहीं होता। इसलिए योजना में आदिवासी संस्कृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय परंपराओं का सम्मान हो। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा, "क्षेत्र की जरूरतों को नजरअंदाज कर योजना का आयोजन करना अन्यायपूर्ण है। यदि मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन की जिम्मेदारी शासन की होगी।"2
- क्या नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव लड़ेंगे .......,...1