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लगातार बारिश होने से किसानों की चिंता बड़ी धान की खेती को होगा नुकसान

10 hrs ago
user_Umesh chandra patrkar
Umesh chandra patrkar
Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
10 hrs ago

लगातार बारिश होने से किसानों की चिंता बड़ी धान की खेती को होगा नुकसान

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  • पहली ही बारिश में डूबी शिक्षा की राह, सेमरी तरहार में दलदल से जूझ रहा बचपन आज ये हाल है, लगातार बारिश हुई तो कैसे पहुंचेगा नौनिहाल? जिम्मेदारों की खामोशी पर उठे तीखे सवाल सेमरी तरहार,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम सभा सेमरी तरहार से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की परतें खोलने के लिए काफी हैं। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल में बदल चुकी है। बरसात का मौसम अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है, लेकिन विद्यालय तक जाने वाली डामर सड़क पहले ही जलभराव और कीचड़ में डूब चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है और उस पर भरा पानी किसी तालाब का आभास करा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश होने पर इस मार्ग की क्या दशा होगी और मासूम बच्चे विद्यालय तक आखिर कैसे पहुंचेंगे? यह खबर विद्यालय की नहीं, बल्कि विद्यालय तक पहुंचने वाले बदहाल मार्ग की हकीकत बयान कर रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी कीचड़, फिसलन और जलभराव से होकर शिक्षा का दीप जलाने निकलते हैं। हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बदहाल हो जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश हुई, तो यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है और विद्यालय तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में सबसे अधिक प्रभावित वे मासूम होंगे, जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है। अब निगाहें जिलाधिकारी प्रयागराज, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। आवश्यकता केवल निरीक्षण की नहीं, बल्कि तत्काल सड़क के पुनर्निर्माण और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। क्योंकि विकास के दावों की असली परीक्षा राजधानी के मंचों पर नहीं, बल्कि सेमरी तरहार जैसे गांवों की उन्हीं सड़कों पर होती है, जहां आज भी मासूम बच्चों का भविष्य बारिश के पानी और दलदल के बीच फंसकर रह गया है।
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    पहली ही बारिश में डूबी शिक्षा की राह, सेमरी तरहार में दलदल से जूझ रहा बचपन
आज ये हाल है, लगातार बारिश हुई तो कैसे पहुंचेगा नौनिहाल? जिम्मेदारों की खामोशी पर उठे तीखे सवाल
सेमरी तरहार,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम सभा सेमरी तरहार से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों की परतें खोलने के लिए काफी हैं। यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए शिक्षा की राह अब सड़क नहीं, बल्कि दलदल में बदल चुकी है। बरसात का मौसम अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है, लेकिन विद्यालय तक जाने वाली डामर सड़क पहले ही जलभराव और कीचड़ में डूब चुकी है। सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है और उस पर भरा पानी किसी तालाब का आभास करा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार कई दिनों तक मूसलाधार बारिश होने पर इस मार्ग की क्या दशा होगी और मासूम बच्चे विद्यालय तक आखिर कैसे पहुंचेंगे? यह खबर विद्यालय की नहीं, बल्कि विद्यालय तक पहुंचने वाले बदहाल मार्ग की हकीकत बयान कर रही है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी कीचड़, फिसलन और जलभराव से होकर शिक्षा का दीप जलाने निकलते हैं। हर कदम पर फिसलने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी मासूम के घायल होने के बाद ही इस सड़क की सुध ली जाएगी? ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बदहाल हो जाता है। जलनिकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सड़क पर पानी जमा रहता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। यदि आने वाले दिनों में लगातार बारिश हुई, तो यह सड़क पूरी तरह जलमग्न हो सकती है और विद्यालय तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा। ऐसे में सबसे अधिक प्रभावित वे मासूम होंगे, जिनके कंधों पर देश का भविष्य टिका है। अब निगाहें जिलाधिकारी प्रयागराज, मुख्य विकास अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं। आवश्यकता केवल निरीक्षण की नहीं, बल्कि तत्काल सड़क के पुनर्निर्माण और प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की है। क्योंकि विकास के दावों की असली परीक्षा राजधानी के मंचों पर नहीं, बल्कि सेमरी तरहार जैसे गांवों की उन्हीं सड़कों पर होती है, जहां आज भी मासूम बच्चों का भविष्य बारिश के पानी और दलदल के बीच फंसकर रह गया है।
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • गांव की पीड़ा कैमरे में कैद, अब प्रशासन की परीक्षा — प्रधान, सचिव और जिम्मेदार व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल* *पहली ही बारिश में डूबा विकास! जगदीशपुर का रास्ता बना दलदल, वीडियो ने खोली ज़मीनी हकीकत* *गांव की पीड़ा कैमरे में कैद, अब प्रशासन की परीक्षा — प्रधान, सचिव और जिम्मेदार व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल* जगदीशपुर,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत ग्राम सभा जगदीशपुर से सामने आई तस्वीरें किसी प्राकृतिक आपदा की नहीं, बल्कि विकास के उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं जो पहली ही बरसात में पानी- पानी होते दिखाई दे रहे हैं। हल्की बारिश के बाद गांव का प्रमुख आवागमन मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया। सड़क की पहचान तक मिट गई। चारों ओर कीचड़, पानी और फिसलन का ऐसा आलम है कि पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं। बच्चे स्कूल जाएं तो कैसे, बुजुर्ग निकलें तो किस सहारे और रोजमर्रा के कामकाज के लिए ग्रामीण आखिर किस रास्ते से जाएं? यह सवाल अब पूरे गांव की जुबान पर है। मौके से सामने आया वीडियो स्वयं इस बात की गवाही दे रहा है कि बरसात की शुरुआत में ही हालात इतने भयावह हैं तो यदि लगातार मूसलाधार वर्षा हुई, तब इस गांव की तस्वीर कैसी होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि रास्ता जलभराव की चपेट में है और ग्रामीणों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका है। यह केवल पानी भरने की घटना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्या की जीवंत तस्वीर है, जो हर बारिश में गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ा देती है। जब यह मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उपजिलाधिकारी बारा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी कारणवश उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसके बाद तहसीलदार बारा से वार्ता की गई। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शुक्रवार को स्वयं मौके का निरीक्षण कराया जाएगा और जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, वह नियमानुसार सुनिश्चित की जाएगी। इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर भी समाधान की दिशा में कदम बढ़ेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्राम पंचायत व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि यह समस्या वर्षों से चली आ रही है तो क्या ग्राम प्रधान ने समय रहते इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाई? यदि किसी स्तर पर चूक हुई तो ग्राम पंचायत सचिव ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन क्यों नहीं किया। क्या विकास योजनाओं की समीक्षा केवल कागजों तक सीमित रह गई? आखिर वह कौन-सी कड़ी है जहां से व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है और उसका खामियाजा हर साल ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है? अब गांव के लोगों की निगाहें शुक्रवार पर टिकी हैं। सभी को इंतजार है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें, जिम्मेदारी तय करें और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। मीडिया भी इस पूरे प्रकरण की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को मौके पर जो दिखाई देगा, जो सुना जाएगा और जिस स्तर पर कार्रवाई होगी, वही बिना किसी लाग-लपेट के जनता के सामने रखा जाएगा। क्योंकि कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता और पहली ही बरसात में सामने आई यह तस्वीरें अपने आप में बहुत कुछ कह रही हैं।
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    गांव की पीड़ा कैमरे में कैद, अब प्रशासन की परीक्षा — प्रधान, सचिव और जिम्मेदार व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल*
*पहली ही बारिश में डूबा विकास! जगदीशपुर का रास्ता बना दलदल, वीडियो ने खोली ज़मीनी हकीकत*
*गांव की पीड़ा कैमरे में कैद, अब प्रशासन की परीक्षा — प्रधान, सचिव और जिम्मेदार व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल*
जगदीशपुर,बारा/प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र की बारा तहसील अंतर्गत ग्राम सभा जगदीशपुर से सामने आई तस्वीरें किसी प्राकृतिक आपदा की नहीं, बल्कि विकास के उन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं जो पहली ही बरसात में पानी- पानी होते दिखाई दे रहे हैं। हल्की बारिश के बाद गांव का प्रमुख आवागमन मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया। सड़क की पहचान तक मिट गई। चारों ओर कीचड़, पानी और फिसलन का ऐसा आलम है कि पैदल चलना भी किसी जोखिम से कम नहीं। बच्चे स्कूल जाएं तो कैसे, बुजुर्ग निकलें तो किस सहारे और रोजमर्रा के कामकाज के लिए ग्रामीण आखिर किस रास्ते से जाएं? यह सवाल अब पूरे गांव की जुबान पर है। मौके से सामने आया वीडियो स्वयं इस बात की गवाही दे रहा है कि बरसात की शुरुआत में ही हालात इतने भयावह हैं तो यदि लगातार मूसलाधार वर्षा हुई, तब इस गांव की तस्वीर कैसी होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि रास्ता जलभराव की चपेट में है और ग्रामीणों का आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका है। यह केवल पानी भरने की घटना नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्या की जीवंत तस्वीर है, जो हर बारिश में गांव के लोगों की मुश्किलें बढ़ा देती है। जब यह मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उपजिलाधिकारी बारा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी कारणवश उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसके बाद तहसीलदार बारा से वार्ता की गई। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शुक्रवार को स्वयं मौके का निरीक्षण कराया जाएगा और जो भी आवश्यक कार्रवाई होगी, वह नियमानुसार सुनिश्चित की जाएगी। इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब उनकी वर्षों पुरानी समस्या केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर भी समाधान की दिशा में कदम बढ़ेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने ग्राम पंचायत व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि यह समस्या वर्षों से चली आ रही है तो क्या ग्राम प्रधान ने समय रहते इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाई? यदि किसी स्तर पर चूक हुई तो ग्राम पंचायत सचिव ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन क्यों नहीं किया। क्या विकास योजनाओं की समीक्षा केवल कागजों तक सीमित रह गई? आखिर वह कौन-सी कड़ी है जहां से व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है और उसका खामियाजा हर साल ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है? अब गांव के लोगों की निगाहें शुक्रवार पर टिकी हैं। सभी को इंतजार है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें, जिम्मेदारी तय करें और वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। मीडिया भी इस पूरे प्रकरण की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को मौके पर जो दिखाई देगा, जो सुना जाएगा और जिस स्तर पर कार्रवाई होगी, वही बिना किसी लाग-लपेट के जनता के सामने रखा जाएगा। क्योंकि कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता और पहली ही बरसात में सामने आई यह तस्वीरें अपने आप में बहुत कुछ कह रही हैं।
    user_BST news prayagraj
    BST news prayagraj
    मंडी एजेंट बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    23 min ago
  • Gandi nali sadak
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    Gandi nali sadak
    user_Rk singh
    Rk singh
    बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद समेत दो लोगों की सड़क हादसे में मौत। झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हाईवे पर कार डिवाइडर से टकराई। हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती। सभी प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे। टक्कर इतनी भीषण कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मृतकों में आबान अहमद और अहजम (प्रयागराज) की पुष्टि। घायलों में मोहम्मद जैद, उमर समेत अन्य शामिल। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, घायलों को अस्पताल भेजा। अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी जेल से झांसी जेल शिफ्ट किया गया था। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
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    अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद समेत दो लोगों की सड़क हादसे में मौत।
झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में हाईवे पर कार डिवाइडर से टकराई।
हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती।
सभी प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे।
टक्कर इतनी भीषण कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
मृतकों में आबान अहमद और अहजम (प्रयागराज) की पुष्टि।
घायलों में मोहम्मद जैद, उमर समेत अन्य शामिल।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, घायलों को अस्पताल भेजा।
अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी जेल से झांसी जेल शिफ्ट किया गया था।
पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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