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यह संदेश एल्डरमैन के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की पुरजोर वकालत करता है, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ध्यान केवल इस पर नहीं होना चाहिए कि एल्डरमैन कौन बनेगा, बल्कि इस पर होना चाहिए कि कौन बनना चाहिए और क्यों। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एल्डरमैन का नाम किसी पार्टी दफ़्तर में तय होने की बजाय समाज की चौपाल में तय होना चाहिए। यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि लोकतंत्र केवल दर्शक बनकर रहने की अपेक्षा लोगों से सक्रिय भागीदारी की मांग करता है।
तीसरी आंख 👁️
यह संदेश एल्डरमैन के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की पुरजोर वकालत करता है, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ध्यान केवल इस पर नहीं होना चाहिए कि एल्डरमैन कौन बनेगा, बल्कि इस पर होना चाहिए कि कौन बनना चाहिए और क्यों। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एल्डरमैन का नाम किसी पार्टी दफ़्तर में तय होने की बजाय समाज की चौपाल में तय होना चाहिए। यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि लोकतंत्र केवल दर्शक बनकर रहने की अपेक्षा लोगों से सक्रिय भागीदारी की मांग करता है।
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- यह संदेश एल्डरमैन के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की पुरजोर वकालत करता है, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ध्यान केवल इस पर नहीं होना चाहिए कि एल्डरमैन कौन बनेगा, बल्कि इस पर होना चाहिए कि कौन बनना चाहिए और क्यों। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एल्डरमैन का नाम किसी पार्टी दफ़्तर में तय होने की बजाय समाज की चौपाल में तय होना चाहिए। यह टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि लोकतंत्र केवल दर्शक बनकर रहने की अपेक्षा लोगों से सक्रिय भागीदारी की मांग करता है।1
- बस्तर के सुकमा जिले में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट का घेराव किया। राष्ट्रीय किसान महासंघ और समान विचारधारा वाले किसान संगठनों के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता में किसानों ने मक्का के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने, कृषि ऋण माफी, किसान हितों की सुरक्षा और बोधघाट परियोजना को रद्द करने जैसी प्रमुख मांगें उठाईं। किसानों ने जोर देकर कहा कि बस्तर में मक्का एक मुख्य फसल है, लेकिन उचित मूल्य न मिलने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मक्का की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित की जाए और इसकी कीमत ₹2400 प्रति क्विंटल से कम न हो। इसके साथ ही, किसानों ने बोधघाट परियोजना का भी कड़ा विरोध किया। उनका तर्क है कि यह परियोजना बड़ी संख्या में आदिवासी और किसान परिवारों के विस्थापन का कारण बनेगी, साथ ही क्षेत्र के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालेगी। किसान संगठनों ने इस परियोजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की। प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत ऋणग्रस्त किसान की मृत्यु होने पर पूर्ण ऋण माफी और परिजनों को कम से कम दो लाख रुपये की बीमा सहायता प्रदान करने की भी मांग की। उन्होंने प्रशासन से खाद, बीज और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, यूरिया की कालाबाजारी पर रोक लगाने और कृषि संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान करने का आह्वान किया। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी भी की।2
- कोंडागांव जिले के जुगानी कलार स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में सहकारिता सप्ताह के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सहकारी ध्वज फहराकर विशेष आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें जुगानी कलार, सिरपुर और सोडमा पंचायतों के बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि और लेम्प्स कर्मचारी शामिल हुए। सभी उपस्थित लोगों ने सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाने और किसानों के हितों के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।1
- बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ थाना में एक प्रार्थिया की शिकायत पर, शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में मारपीट कर घर से निकालने के मामले में कमिल यादव सहित उसके माता-पिता और भाई को गिरफ्तार किया गया है। प्रार्थिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2025 में उसकी पहचान कमिल यादव से इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी, जिसके बाद दोनों में प्रेम संबंध स्थापित हो गया। कमिल यादव ने शादी करने का वादा कर प्रार्थिया से शारीरिक संबंध बनाए। दिसंबर 2025 में कमिल के माता-पिता को इस संबंध की जानकारी मिलने पर, उसके पिता, भाई और अन्य रिश्तेदार प्रार्थिया के गाँव आए और यह कहकर उसे अपने साथ ले गए कि उनका बेटा उससे शादी करना चाहता है। वे सब एक साथ रहने लगे। हालांकि, मार्च 2026 के बाद कमिल, उसकी माँ, पिता और भाई ने प्रार्थिया के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया और उसे घर से निकाल दिया। प्रार्थिया की रिपोर्ट पर शंकरगढ़ थाना में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। विवेचना के दौरान, आरोपी कमिल यादव के विरुद्ध अपराध के पर्याप्त सबूत पाए जाने पर, उसे 12 जून 2026 को हिरासत में लेकर जुर्म स्वीकार करने पर विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। मामले की आगे की विवेचना में, कमिल के पिता राजकुमार यादव, माता श्रीमती सविता उर्फ सरिता यादव, और भाई गनेश्वर यादव को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उनके द्वारा भी अपराध घटित करना स्वीकार करने पर, इन तीनों आरोपियों को आज दिनांक 29 जून 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर रिमांड पर भेजा गया है।2
- बलरामपुर में कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय के पास स्थित एक मकान में आग लगने की सूचना स्थानीय निवासियों ने फायर ब्रिगेड को दी थी। सूचना मिलने पर अग्निशमन वाहन घटनास्थल पर विलंब से पहुँचा और वाहन में पर्याप्त पानी भी उपलब्ध नहीं था। मौके पर पहुँचने के बाद ही वाहन में पानी भरने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके कारण आग बुझाने के काम में अनावश्यक देरी हुई और आग पर काबू पाने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने तत्काल संज्ञान लिया और जिला सेनानी नगर सेना को दोषी कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देशों के पालन में, अनुशासनहीनता और अपने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में फायर इंचार्ज श्री संजय पटेल, सैनिक क्रमांक 91 राजेंद्र प्रसाद, सैनिक क्रमांक 65 बुद्धिनारायण दुबे, पंप ऑपरेटर सह वाहन चालक श्री फासिस जेवियर और फायरमैन श्री सुनीन एक्का को होमगार्ड अधिनियम की धारा 13 नियम 12 में दिए गए प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।1
- कांकेर शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली दूध नदी की सफाई के लिए सामाजिक संस्था "जन सहयोग" का अभियान लगातार जारी है। संस्था के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने अपने साथियों के साथ आज सुबह एक बार फिर दूध नदी के पुराने पुल के आसपास सफाई अभियान चलाया। इस दौरान कोई गाड़ी, ट्रॉली या ट्रैक्टर उपलब्ध नहीं था, लेकिन संसाधनों की कमी के बावजूद समाजसेवियों का उत्साह कम नहीं हुआ और उन्होंने पूरी लगन से सफाई कार्य जारी रखा। अभियान में अजय पप्पू मोटवानी के साथ धर्मेंद्र देव, डॉ. श्याम देव, शैलेंद्र देहारी, पप्पू साहू, अभिषेक सोनी, बहादुर निषाद और ऋतिक सोनी सहित अन्य युवाओं ने घंटों मेहनत कर भारी मात्रा में कचरा एकत्र किया और उसे उचित स्थान पर पहुंचाया। "जन सहयोग" का मुख्य उद्देश्य बारिश के तेज होने से पहले अधिकतम कचरा हटाना है, क्योंकि संस्था का मानना है कि नदी में जमा कचरा जल प्रवाह को बाधित करता है, जिससे बाढ़ का पानी आसपास की बस्तियों में घुसकर लोगों के लिए परेशानी खड़ी करता है। कचरा हटने से पानी के बहाव को रास्ता मिलता है और बाढ़ की आशंका कम होती है। अभियान का समापन "भारत माता की जय" के नारों के साथ हुआ, जिसमें आम नागरिकों से भी नदी और आसपास के क्षेत्रों में कचरा न फैलाने तथा स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। उम्मीद है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले दूध नदी की व्यापक सफाई पूरी कर ली जाएगी।4
- कोतवाली थाना के ठीक पीछे स्थित एक दुकान में अचानक मॉनिटर लिज़र्ड घुस गया। इस अप्रत्याशित घटना से दुकान के अंदर मौजूद लोगों और आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।1
- कबीर जयंती के अवसर पर एक कड़वा और मार्मिक सवाल उठाया गया है कि अगर कबीर आज जीवित होते, तो वे निश्चित रूप से जेल में होते। पोस्ट में इस बात पर गहरा अफसोस जताया गया है कि 500 साल पहले का 'जग बौराना' समाज आज भी वैसा ही है। आज हम भले ही कबीर का नाम लेते हैं, लेकिन उनके विचारों और शिक्षाओं को पूरी तरह से भूल चुके हैं।1