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गढ़ा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग का वीडियो वायरल आम जनता से मनमाने चालान वसूलने के गंभीर आरोप

6 hrs ago
user_Rishi Rajak
Rishi Rajak
जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
6 hrs ago

गढ़ा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग का वीडियो वायरल आम जनता से मनमाने चालान वसूलने के गंभीर आरोप

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • वायरल वीडियो पर पुलिस का शिकंजा! ‘गोलू आर्मो’ की पहचान की जांच, भड़काऊ बयान पर होगी कड़ी कार्रवाई
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    वायरल वीडियो पर पुलिस का शिकंजा! ‘गोलू आर्मो’ की पहचान की जांच, भड़काऊ बयान पर होगी कड़ी कार्रवाई
    user_Rishi Rajak
    Rishi Rajak
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • जबलपुर: सिंधी कॉलोनी के लोग 10 वर्षों से नाली सड़क के लिए संघर्षरत जबलपुर: रानी लक्ष्मीबाई वार्ड 66 की सिंधी कॉलोनी के निवासी नाली सड़क की समस्या से लगभग 10 वर्षों से जूझ रहे हैं। यह कॉलोनी पूर्व विधायक द्वारा बनाई गई है, लेकिन आज भी यहां सड़क की हालत खराब है। तीन-चार फीट गहरे गड्ढों में पानी जमा हो जाता है, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नाली सड़क की मरम्मत के लिए बार-बार अधिकारियों और पार्षदों से मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पार्षद भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे समस्या बनी हुई है।
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    जबलपुर: सिंधी कॉलोनी के लोग 10 वर्षों से नाली सड़क के लिए संघर्षरत
जबलपुर: रानी लक्ष्मीबाई वार्ड 66 की सिंधी कॉलोनी के निवासी नाली सड़क की समस्या से लगभग 10 वर्षों से जूझ रहे हैं। यह कॉलोनी पूर्व विधायक द्वारा बनाई गई है, लेकिन आज भी यहां सड़क की हालत खराब है। तीन-चार फीट गहरे गड्ढों में पानी जमा हो जाता है, जिससे इलाके में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे नाली सड़क की मरम्मत के लिए बार-बार अधिकारियों और पार्षदों से मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पार्षद भी इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे समस्या बनी हुई है।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer पनागर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें 70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी जबलपुर। जिस पिता ने कभी अपनी औलाद की जरूरतों के लिए मजदूरी की होगी, जिसने अपनी संतान को पालने के लिए जिंदगी के तमाम संघर्ष सहे होंगे, उसी पिता की जिंदगी का आखिरी पड़ाव रानीताल के एक डिवाइडर पर खत्म हो गया। 70 वर्षीय अशोक कुमार जैन का शव रानीताल बजरंग बली मंदिर के सामने डिवाइडर पर मिला। उनके पास उनकी बेटी अनीता कुमार जैन बैठी थी। आंखों में आंसू थे, सामने पिता का शव था और दिल में सिर्फ एक सवाल—काश, मैं अपने पिता के लिए कुछ कर पाती... अशोक कुमार की जिंदगी गरीबी और अभावों से घिरी रही। मजदूरी कर किसी तरह जीवन चलाया। पत्नी का साथ पहले ही छूट चुका था। बच्चे बड़े हुए तो अपने-अपने संसार में चले गए। बुढ़ापे में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आर्थिक तंगी ने उन्हें रानीताल में मांगकर जीवन गुजारने को मजबूर कर दिया। आखिरकार जिस सड़क किनारे वे जिंदगी के दिन काट रहे थे, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी सांस भी थम गई। राहगीरों ने देखा शव... पास बैठी थी बेटी रानीताल में डिवाइडर पर बुजुर्ग का शव देखकर राहगीरों ने सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जानकारी जुटाई तो शव की पहचान अशोक कुमार जैन के रूप में हुई। शव के पास उनकी बेटी अनीता बैठी थी। पिता को इस हालत में देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। सूचना मिलने पर गरीब नवाज कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद कमेटी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। तीन बेटियां थीं... मगर अंतिम सफर में एक ही बेटी साथ थी अनीता ने बताया कि परिवार में बेटियां और बेटे हैं, लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने परिवारों में चले गए। उसकी दो बहनों की शादी संपन्न परिवारों में हुई। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पिता से उनका संपर्क कम हो गया। अनीता ने खुद अपनी पसंद से मध्यमवर्गीय बर्मन परिवार में विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने पिता से रिश्ता नहीं तोड़ा। शायद यही वजह थी कि पिता की मौत की खबर मिलते ही वह दौड़ी चली आई। लेकिन इस बार वह बेटी अपने पिता को बचाने नहीं, उन्हें आखिरी बार विदा करने आई थी। "जिस पिता ने मेरी हर जरूरत पूरी करने के लिए मेहनत की... आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही" पिता के शव के पास बैठी अनीता की यह बात वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गई। पिता की मौत का दुख तो था ही, लेकिन उससे बड़ा दर्द अपनी बेबसी का था। पिता के लिए बेटी की आंखों में आंसू थे, मगर जेब में अंतिम संस्कार का खर्च नहीं। डेढ़ साल की उम्र से शुरू हुआ था अनीता का संघर्ष अनीता ने बताया कि जब वह महज डेढ़ वर्ष की थी, तब गरीबी के कारण उसके मामा के परिवार ने उसे अपने घर से बाहर कर दिया था। बचपन से ही उसने अभाव देखे और संघर्ष के बीच जिंदगी गुजारी। शायद गरीबी ने दोनों—पिता और बेटी—को अलग-अलग उम्र में एक ही दर्द दिया था। फर्क सिर्फ इतना था कि पिता जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर थे और बेटी चाहकर भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर पा रही थी। जब अपने कमजोर पड़े, समाज ने थामा हाथ अशोक कुमार के अंतिम संस्कार के लिए जब आर्थिक संकट सामने आया तो गरीब नवाज कमेटी आगे आई। कमेटी के सदस्यों ने शव को रानीताल मुक्ति धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बेटी अनीता ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी। जिस पिता की जिंदगी अकेलेपन में गुजर गई, उनके अंतिम सफर में समाज का एक हाथ सहारा बन गया। एक डिवाइडर पर खत्म हुई जिंदगी... लेकिन कहानी छोड़ गई कई सवाल रानीताल का वह डिवाइडर अब सिर्फ सड़क का हिस्सा नहीं रह गया। वह एक ऐसे पिता की आखिरी कहानी का गवाह बन गया, जिसने गरीबी में जिंदगी काटी, बुढ़ापे में मांगकर गुजारा किया और आखिरकार सड़क किनारे दम तोड़ दिया। अशोक कुमार की मौत कई सवाल छोड़ गई है— क्या बुजुर्ग माता-पिता का सहारा उनकी आर्थिक स्थिति देखकर तय होगा? क्या गरीबी रिश्तों के बीच भी दीवार खड़ी कर देती है? और क्या ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की पहचान समय रहते नहीं होनी चाहिए, ताकि उनका आखिरी वक्त सड़क किनारे अकेलेपन में न बीते? अशोक कुमार चले गए। बेटी ने अंतिम विदाई दे दी। गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया। लेकिन रानीताल का वह डिवाइडर पीछे छोड़ गया एक ऐसा दर्द, जिसका जवाब शायद सिर्फ परिवार नहीं, पूरे समाज को तलाशना होगा।
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    पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें

70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी
पहले बेटियां अपने-अपने संसार में चली गईं... पिता मांगकर खाते रहे, आखिर डिवाइडर पर थम गईं सांसें
70 साल की जिंदगी का दर्दनाक अंत: रानीताल में सड़क किनारे मिला अशोक कुमार जैन का शव, अंतिम विदाई देने पहुंची बेबस बेटी
जबलपुर।
जिस पिता ने कभी अपनी औलाद की जरूरतों के लिए मजदूरी की होगी, जिसने अपनी संतान को पालने के लिए जिंदगी के तमाम संघर्ष सहे होंगे, उसी पिता की जिंदगी का आखिरी पड़ाव रानीताल के एक डिवाइडर पर खत्म हो गया। 70 वर्षीय अशोक कुमार जैन का शव रानीताल बजरंग बली मंदिर के सामने डिवाइडर पर मिला। उनके पास उनकी बेटी अनीता कुमार जैन बैठी थी। आंखों में आंसू थे, सामने पिता का शव था और दिल में सिर्फ एक सवाल—काश, मैं अपने पिता के लिए कुछ कर पाती...
अशोक कुमार की जिंदगी गरीबी और अभावों से घिरी रही। मजदूरी कर किसी तरह जीवन चलाया। पत्नी का साथ पहले ही छूट चुका था। बच्चे बड़े हुए तो अपने-अपने संसार में चले गए। बुढ़ापे में जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब आर्थिक तंगी ने उन्हें रानीताल में मांगकर जीवन गुजारने को मजबूर कर दिया। आखिरकार जिस सड़क किनारे वे जिंदगी के दिन काट रहे थे, वहीं उनकी जिंदगी की आखिरी सांस भी थम गई।
राहगीरों ने देखा शव... पास बैठी थी बेटी
रानीताल में डिवाइडर पर बुजुर्ग का शव देखकर राहगीरों ने सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जानकारी जुटाई तो शव की पहचान अशोक कुमार जैन के रूप में हुई। शव के पास उनकी बेटी अनीता बैठी थी। पिता को इस हालत में देखकर वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी।
सूचना मिलने पर गरीब नवाज कमेटी के सदस्य भी मौके पर पहुंचे। परिवार की आर्थिक स्थिति सामने आने के बाद कमेटी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।
तीन बेटियां थीं... मगर अंतिम सफर में एक ही बेटी साथ थी
अनीता ने बताया कि परिवार में बेटियां और बेटे हैं, लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने परिवारों में चले गए। उसकी दो बहनों की शादी संपन्न परिवारों में हुई। आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण पिता से उनका संपर्क कम हो गया।
अनीता ने खुद अपनी पसंद से मध्यमवर्गीय बर्मन परिवार में विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने पिता से रिश्ता नहीं तोड़ा। शायद यही वजह थी कि पिता की मौत की खबर मिलते ही वह दौड़ी चली आई।
लेकिन इस बार वह बेटी अपने पिता को बचाने नहीं, उन्हें आखिरी बार विदा करने आई थी।
"जिस पिता ने मेरी हर जरूरत पूरी करने के लिए मेहनत की... आज मैं उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही"
पिता के शव के पास बैठी अनीता की यह बात वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर गई। पिता की मौत का दुख तो था ही, लेकिन उससे बड़ा दर्द अपनी बेबसी का था।
पिता के लिए बेटी की आंखों में आंसू थे, मगर जेब में अंतिम संस्कार का खर्च नहीं।
डेढ़ साल की उम्र से शुरू हुआ था अनीता का संघर्ष
अनीता ने बताया कि जब वह महज डेढ़ वर्ष की थी, तब गरीबी के कारण उसके मामा के परिवार ने उसे अपने घर से बाहर कर दिया था। बचपन से ही उसने अभाव देखे और संघर्ष के बीच जिंदगी गुजारी।
शायद गरीबी ने दोनों—पिता और बेटी—को अलग-अलग उम्र में एक ही दर्द दिया था। फर्क सिर्फ इतना था कि पिता जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर थे और बेटी चाहकर भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं कर पा रही थी।
जब अपने कमजोर पड़े, समाज ने थामा हाथ
अशोक कुमार के अंतिम संस्कार के लिए जब आर्थिक संकट सामने आया तो गरीब नवाज कमेटी आगे आई। कमेटी के सदस्यों ने शव को रानीताल मुक्ति धाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। बेटी अनीता ने नम आंखों से पिता को अंतिम विदाई दी।
जिस पिता की जिंदगी अकेलेपन में गुजर गई, उनके अंतिम सफर में समाज का एक हाथ सहारा बन गया।
एक डिवाइडर पर खत्म हुई जिंदगी... लेकिन कहानी छोड़ गई कई सवाल
रानीताल का वह डिवाइडर अब सिर्फ सड़क का हिस्सा नहीं रह गया। वह एक ऐसे पिता की आखिरी कहानी का गवाह बन गया, जिसने गरीबी में जिंदगी काटी, बुढ़ापे में मांगकर गुजारा किया और आखिरकार सड़क किनारे दम तोड़ दिया।
अशोक कुमार की मौत कई सवाल छोड़ गई है—
क्या बुजुर्ग माता-पिता का सहारा उनकी आर्थिक स्थिति देखकर तय होगा?
क्या गरीबी रिश्तों के बीच भी दीवार खड़ी कर देती है?
और क्या ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की पहचान समय रहते नहीं होनी चाहिए, ताकि उनका आखिरी वक्त सड़क किनारे अकेलेपन में न बीते?
अशोक कुमार चले गए। बेटी ने अंतिम विदाई दे दी। गरीब नवाज कमेटी ने अंतिम सफर में साथ दिया। लेकिन रानीताल का वह डिवाइडर पीछे छोड़ गया एक ऐसा दर्द, जिसका जवाब शायद सिर्फ परिवार नहीं, पूरे समाज को तलाशना होगा।
    user_मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    सिहोरा, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • गाडाघाट के किसानों के द्वारा बिजली की शिकायतों को लेकर एसडीएम मैडम को विज्ञापन दिया बिजली की समस्याओं को लेकर गाडाघाट के किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन गोटेगांव। गाडाघाट क्षेत्र के किसानों ने बिजली से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर गुरुवार को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गोटेगांव को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने बताया कि विद्युत आपूर्ति में आ रही परेशानियों के कारण खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों ने बिजली व्यवस्था में सुधार, नियमित विद्युत आपूर्ति तथा अन्य समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की। किसानों का कहना है कि समय पर बिजली नहीं मिलने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान किसानों ने एसडीएम मैडम से समस्याओं का जल्द निराकरण कराने का आग्रह किया। :::
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    गाडाघाट के किसानों के द्वारा बिजली की शिकायतों को लेकर एसडीएम मैडम को विज्ञापन दिया
बिजली की समस्याओं को लेकर गाडाघाट के किसानों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
गोटेगांव। गाडाघाट क्षेत्र के किसानों ने बिजली से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर गुरुवार को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गोटेगांव को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने बताया कि विद्युत आपूर्ति में आ रही परेशानियों के कारण खेती-किसानी के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
किसानों ने बिजली व्यवस्था में सुधार, नियमित विद्युत आपूर्ति तथा अन्य समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की। किसानों का कहना है कि समय पर बिजली नहीं मिलने से फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस दौरान किसानों ने एसडीएम मैडम से समस्याओं का जल्द निराकरण कराने का आग्रह किया। :::
    user_Raghunath Rai
    Raghunath Rai
    Local News Reporter गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता अभियान में पूर्व राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटेल ने स्वच्छता के महत्व का संदेश देते हुए नागरिकों से अपने शहर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने की अपील की।
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    सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित स्वच्छता अभियान में पूर्व राज्य मंत्री श्री जालम सिंह पटेल ने स्वच्छता के महत्व का संदेश देते हुए नागरिकों से अपने शहर और आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखने की अपील की।
    user_Shrikant Dubay पत्रकार
    Shrikant Dubay पत्रकार
    TV News Anchor Gotegaon, Narsinghpur•
    1 hr ago
  • नरसिंहपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत युवाओं ने किया रक्तदान व पूर्व राज्य मंत्री ने स्वच्छता के महत्व का दिया संदेश नरसिंहपुर में भी सेवा संकल्प अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन आयोजित हुआ जिसमें बताया गया है कि आज सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम, नरसिंहपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी रामसनेही पाठक, महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी सहित अन्य एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र सिंह नागेश ने किया।
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    नरसिंहपुर में सेवा संकल्प अभियान के तहत युवाओं ने किया रक्तदान व पूर्व राज्य मंत्री ने स्वच्छता के महत्व का दिया संदेश 
नरसिंहपुर में भी सेवा संकल्प अभियान के तहत विविध कार्यक्रमों का आयोजन आयोजित हुआ जिसमें बताया गया है कि आज सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम, नरसिंहपुर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ पूर्व राज्य मंत्री जालम सिंह पटेल, वरिष्ठ समाजसेवी रामसनेही पाठक, महंत प्रीतम पुरी गोस्वामी सहित अन्य एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र सिंह नागेश ने किया।
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • हमारी तो बस एक ही परेशानी है वह जो सबकी जिंदगानी है सबके पास पानी है मगर हमारे पास कहां पानी है
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    हमारी तो बस एक ही परेशानी है वह जो सबकी जिंदगानी है सबके पास पानी है मगर हमारे पास कहां पानी है
    user_Mahendra Barman
    Mahendra Barman
    Farmer स्लीमनाबाद, कटनी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • गढ़ा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग का वीडियो वायरल आम जनता से मनमाने चालान वसूलने के गंभीर आरोप
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    गढ़ा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग का वीडियो वायरल आम जनता से मनमाने चालान वसूलने के गंभीर आरोप
    user_Rishi Rajak
    Rishi Rajak
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
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