सो रहा प्रशासन स्वास्थ्य विभाग मौत बांट रहे झोलाछाप डॉक्टर इन्हें नहीं है किसी मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जरूरत इनका घर बना मेडिकल स्टोर मौत बांट रहे झोलाछाप: किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध क्लीनिकों का धंधा? बिरसिंहपुर पाली--उमरिया। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मौत का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शहर से लेकर गांव-गांव तक गली-मोहल्लों में अवैध क्लीनिक और डिस्पेंसरी कुकुरमुत्ते की तरह खुल गई हैं। बिना डिग्री, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना लाइसेंस के तथाकथित डॉक्टर ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक सबको इसकी पूरी जानकारी है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। सवाल उठता है कि आखिर इन अवैध क्लीनिकों को संरक्षण कौन दे रहा है? जिले के पाली, मानपुर, करकेली, नौरोजाबाद, चंदिया और मझौली ब्लॉक में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। ये लोग बंगाली डॉक्टर, आयुर्वेदाचार्य या आरएमपी के नाम पर एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाने का काम कर रहे हैं। कई जगह तो मेडिकल स्टोर की अंदर में मिनी नर्सिंग होम तक संचालित हो रहे हैं, जहां डिलीवरी और छोटे ऑपरेशन तक किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। एक लाइसेंस पर दो-दो मेडिकल स्टोर चल रहे हैं और वहीं मरीजों के इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध संचालकों को स्वास्थ्य विभाग के निचले अमले का खुला संरक्षण प्राप्त है। हर महीने बंधी-बधाई वसूली की चर्चा पूरे जिले में आम है। यही कारण है कि छापामार कार्रवाई की भनक पहले ही संचालकों को लग जाती है और टीम के पहुंचने से पहले शटर गिर जाते हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए 4-5 क्लीनिक सील कर फोटो सेशन करा लिया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही क्लीनिक नए बोर्ड के साथ फिर खुल जाते हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना दस्तावेज के चल रही क्लीनिकों को सील करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। उमरिया कलेक्टर द्वारा इसके लिए टीम भी गठित की गई थी। इसके बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली। पाली में हुई कार्रवाई में 5 क्लीनिक सील होने की खबर आई थी, मझौली में भी संजीवनी मेडिकल सहित दो क्लीनिकों पर छापा पड़ा था। लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। जिले में संचालित सैकड़ों अवैध प्रतिष्ठानों की तुलना में यह संख्या नगण्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन झोलाछापों के गलत इलाज से कई मरीजों की जान जा चुकी है, लेकिन गरीबी और अज्ञानता के कारण मामले दबा दिए जाते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली का फायदा ये माफिया उठा रहे हैं। ग्रामीणों को सस्ते और सुलभ इलाज के नाम पर ठगा जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों को नाम, पता और स्थान सब मालूम है तो स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का सुनियोजित तंत्र? जनता मांग कर रही है कि कलेक्टर उमरिया स्वयं संज्ञान लेकर पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाएं और पूरे जिले में एक साथ सघन अभियान चलाकर इन मौत के सौदागरों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए। साथ ही संरक्षण देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी चाहिए। नहीं तो यह अवैध धंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा और गरीब जनता की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।
सो रहा प्रशासन स्वास्थ्य विभाग मौत बांट रहे झोलाछाप डॉक्टर इन्हें नहीं है किसी मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जरूरत इनका घर बना मेडिकल स्टोर मौत बांट रहे झोलाछाप: किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध क्लीनिकों का धंधा? बिरसिंहपुर पाली--उमरिया। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मौत का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शहर से लेकर गांव-गांव तक गली-मोहल्लों में अवैध क्लीनिक और डिस्पेंसरी कुकुरमुत्ते की तरह खुल गई हैं। बिना डिग्री, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना लाइसेंस के तथाकथित डॉक्टर ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक सबको इसकी पूरी जानकारी है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। सवाल उठता है कि आखिर इन अवैध क्लीनिकों को संरक्षण कौन दे रहा है? जिले के पाली, मानपुर, करकेली, नौरोजाबाद, चंदिया और मझौली ब्लॉक में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। ये लोग बंगाली डॉक्टर, आयुर्वेदाचार्य या आरएमपी के नाम पर एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाने का काम कर रहे हैं। कई जगह तो मेडिकल स्टोर की अंदर में मिनी नर्सिंग होम तक संचालित हो रहे हैं, जहां डिलीवरी और छोटे ऑपरेशन तक किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। एक लाइसेंस पर दो-दो मेडिकल स्टोर चल रहे हैं और वहीं मरीजों के इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध संचालकों को स्वास्थ्य विभाग के निचले अमले का खुला संरक्षण प्राप्त है। हर महीने बंधी-बधाई वसूली की चर्चा पूरे जिले में आम है। यही कारण है कि छापामार कार्रवाई की भनक पहले ही संचालकों को लग जाती है और टीम के पहुंचने से पहले शटर गिर जाते हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए 4-5 क्लीनिक सील कर फोटो सेशन करा लिया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही क्लीनिक नए बोर्ड के साथ फिर खुल जाते हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना दस्तावेज के चल रही क्लीनिकों को सील करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। उमरिया कलेक्टर द्वारा इसके लिए टीम भी गठित की गई थी। इसके बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली। पाली में हुई कार्रवाई में 5 क्लीनिक सील होने की खबर आई थी, मझौली में भी संजीवनी मेडिकल सहित दो क्लीनिकों पर छापा पड़ा था। लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। जिले में संचालित सैकड़ों अवैध प्रतिष्ठानों की तुलना में यह संख्या नगण्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन झोलाछापों के गलत इलाज से कई मरीजों की जान जा चुकी है, लेकिन गरीबी और अज्ञानता के कारण मामले दबा दिए जाते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली का फायदा ये माफिया उठा रहे हैं। ग्रामीणों को सस्ते और सुलभ इलाज के नाम पर ठगा जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों को नाम, पता और स्थान सब मालूम है तो स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का सुनियोजित तंत्र? जनता मांग कर रही है कि कलेक्टर उमरिया स्वयं संज्ञान लेकर पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाएं और पूरे जिले में एक साथ सघन अभियान चलाकर इन मौत के सौदागरों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए। साथ ही संरक्षण देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी चाहिए। नहीं तो यह अवैध धंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा और गरीब जनता की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।
- उमरिया जिले में झोलाछाप डॉक्टर मेडिकल खोल कर रहे इलाज एवं ऑपरेशन। कई डॉक्टरों के यहां भारी मात्रा में दवाइयां बतल का स्टॉक मौत बांट रहे झोलाछाप: किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध क्लीनिकों का धंधा? बिरसिंहपुर पाली--उमरिया। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मौत का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शहर से लेकर गांव-गांव तक गली-मोहल्लों में अवैध क्लीनिक और डिस्पेंसरी कुकुरमुत्ते की तरह खुल गई हैं। बिना डिग्री, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना लाइसेंस के तथाकथित डॉक्टर ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक सबको इसकी पूरी जानकारी है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। सवाल उठता है कि आखिर इन अवैध क्लीनिकों को संरक्षण कौन दे रहा है? जिले के पाली, मानपुर, करकेली, नौरोजाबाद, चंदिया और मझौली ब्लॉक में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। ये लोग बंगाली डॉक्टर, आयुर्वेदाचार्य या आरएमपी के नाम पर एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाने का काम कर रहे हैं। कई जगह तो मेडिकल स्टोर की अंदर में मिनी नर्सिंग होम तक संचालित हो रहे हैं, जहां डिलीवरी और छोटे ऑपरेशन तक किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। एक लाइसेंस पर दो-दो मेडिकल स्टोर चल रहे हैं और वहीं मरीजों के इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध संचालकों को स्वास्थ्य विभाग के निचले अमले का खुला संरक्षण प्राप्त है। हर महीने बंधी-बधाई वसूली की चर्चा पूरे जिले में आम है। यही कारण है कि छापामार कार्रवाई की भनक पहले ही संचालकों को लग जाती है और टीम के पहुंचने से पहले शटर गिर जाते हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए 4-5 क्लीनिक सील कर फोटो सेशन करा लिया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही क्लीनिक नए बोर्ड के साथ फिर खुल जाते हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना दस्तावेज के चल रही क्लीनिकों को सील करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। उमरिया कलेक्टर द्वारा इसके लिए टीम भी गठित की गई थी। इसके बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली। पाली में हुई कार्रवाई में 5 क्लीनिक सील होने की खबर आई थी, मझौली में भी संजीवनी मेडिकल सहित दो क्लीनिकों पर छापा पड़ा था। लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। जिले में संचालित सैकड़ों अवैध प्रतिष्ठानों की तुलना में यह संख्या नगण्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन झोलाछापों के गलत इलाज से कई मरीजों की जान जा चुकी है, लेकिन गरीबी और अज्ञानता के कारण मामले दबा दिए जाते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली का फायदा ये माफिया उठा रहे हैं। ग्रामीणों को सस्ते और सुलभ इलाज के नाम पर ठगा जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों को नाम, पता और स्थान सब मालूम है तो स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का सुनियोजित तंत्र? जनता मांग कर रही है कि कलेक्टर उमरिया स्वयं संज्ञान लेकर पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाएं और पूरे जिले में एक साथ सघन अभियान चलाकर इन मौत के सौदागरों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए। साथ ही संरक्षण देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी चाहिए। नहीं तो यह अवैध धंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा और गरीब जनता की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।4
- 21 साल से गणेश भक्ति की परंपरा, नंदिनी परिवार ने धूमधाम से मनाई गणेश जी की छठी बिरसिंहपुर पाली के पाली प्रोजेक्ट क्षेत्र में नंदिनी परिवार द्वारा भगवान श्रीगणेश की भक्ति और धार्मिक परंपरा का सिलसिला लगातार 21 वर्षों से जारी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी परिवार ने अपने निज निवास में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धा और उत्साह के साथ गणेश उत्सव मनाया। उत्सव के दौरान प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। इसी धार्मिक श्रृंखला में गणेश जी की छठी का पर्व विशेष श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि गणेश उत्सव में छठी का दिन उनके लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर भगवान श्रीगणेश की विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। छठी के अवसर पर घर में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा। परिवार के सदस्यों ने भगवान गणेश का पूजन कर आरती की और धार्मिक विधियों के साथ छठी उत्सव संपन्न कराया। इस दौरान परिवार के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूजा के बाद प्रसाद का वितरण भी किया गया। नंदिनी परिवार के सदस्य के अनुसार, भगवान गणेश की स्थापना उनके परिवार में केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 21 वर्षों से चली आ रही आस्था और पारिवारिक परंपरा का हिस्सा है। हर साल गणेश उत्सव के दौरान परिवार के सदस्य मिल-जुलकर पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। यही वजह है कि गणेश उत्सव के दिनों में नंदिनी परिवार का घर भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आता है। गणेश जी की छठी के अवसर पर भी परिवार में विशेष उत्साह देखने को मिला। पूजा-पाठ और ii आरती के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। परिवार का कहना है कि इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक आगे बढ़ाना ही उनका उद्देश्य है। इस तरह नंदिनी परिवार की 21 वर्ष पुरानी गणेश भक्ति की परंपरा इस वर्ष भी जारी रही और छठी के अवसर पर घर में भक्ति, उल्लास और पारिवारिक एकजुटता का अनूठा संगम देखने को मिला।4
- सो रहा प्रशासन स्वास्थ्य विभाग मौत बांट रहे झोलाछाप डॉक्टर इन्हें नहीं है किसी मेडिकल स्टोर के लाइसेंस की जरूरत इनका घर बना मेडिकल स्टोर मौत बांट रहे झोलाछाप: किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध क्लीनिकों का धंधा? बिरसिंहपुर पाली--उमरिया। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर मौत का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शहर से लेकर गांव-गांव तक गली-मोहल्लों में अवैध क्लीनिक और डिस्पेंसरी कुकुरमुत्ते की तरह खुल गई हैं। बिना डिग्री, बिना रजिस्ट्रेशन और बिना लाइसेंस के तथाकथित डॉक्टर ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक सबको इसकी पूरी जानकारी है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। सवाल उठता है कि आखिर इन अवैध क्लीनिकों को संरक्षण कौन दे रहा है? जिले के पाली, मानपुर, करकेली, नौरोजाबाद, चंदिया और मझौली ब्लॉक में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं। ये लोग बंगाली डॉक्टर, आयुर्वेदाचार्य या आरएमपी के नाम पर एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ाने का काम कर रहे हैं। कई जगह तो मेडिकल स्टोर की अंदर में मिनी नर्सिंग होम तक संचालित हो रहे हैं, जहां डिलीवरी और छोटे ऑपरेशन तक किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। एक लाइसेंस पर दो-दो मेडिकल स्टोर चल रहे हैं और वहीं मरीजों के इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध संचालकों को स्वास्थ्य विभाग के निचले अमले का खुला संरक्षण प्राप्त है। हर महीने बंधी-बधाई वसूली की चर्चा पूरे जिले में आम है। यही कारण है कि छापामार कार्रवाई की भनक पहले ही संचालकों को लग जाती है और टीम के पहुंचने से पहले शटर गिर जाते हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए 4-5 क्लीनिक सील कर फोटो सेशन करा लिया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वही क्लीनिक नए बोर्ड के साथ फिर खुल जाते हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिना दस्तावेज के चल रही क्लीनिकों को सील करने के स्पष्ट आदेश दिए थे। उमरिया कलेक्टर द्वारा इसके लिए टीम भी गठित की गई थी। इसके बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली। पाली में हुई कार्रवाई में 5 क्लीनिक सील होने की खबर आई थी, मझौली में भी संजीवनी मेडिकल सहित दो क्लीनिकों पर छापा पड़ा था। लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई। जिले में संचालित सैकड़ों अवैध प्रतिष्ठानों की तुलना में यह संख्या नगण्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन झोलाछापों के गलत इलाज से कई मरीजों की जान जा चुकी है, लेकिन गरीबी और अज्ञानता के कारण मामले दबा दिए जाते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली का फायदा ये माफिया उठा रहे हैं। ग्रामीणों को सस्ते और सुलभ इलाज के नाम पर ठगा जा रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों को नाम, पता और स्थान सब मालूम है तो स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर भ्रष्टाचार का सुनियोजित तंत्र? जनता मांग कर रही है कि कलेक्टर उमरिया स्वयं संज्ञान लेकर पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की संयुक्त टास्क फोर्स बनाएं और पूरे जिले में एक साथ सघन अभियान चलाकर इन मौत के सौदागरों पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए। साथ ही संरक्षण देने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी चाहिए। नहीं तो यह अवैध धंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा और गरीब जनता की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।1
- आकाशीय बिजली की धमक से पंचायत की बैटरी फटी, 4 घायल मानपुर | हिरौली ⚡ आकाशीय बिजली की धमक से पंचायत की बैटरी फटी, 4 घायल उमरिया | मानपुर | हिरौली उमरिया जिले के मानपुर जनपद की हिरौली ग्राम पंचायत में रविवार शाम आकाशीय बिजली गिरने के बाद पंचायत भवन में लगी बैटरी तेज धमाके के साथ फट गई। घटना के समय पंचायत भवन में ग्रामीणों की ई-केवाईसी का काम चल रहा था और कई ग्रामीण मौके पर मौजूद थे। अचानक हुए तेज धमाके से पंचायत परिसर में भगदड़ मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। हादसे में चार ग्रामीण घायल हो गए। घायलों को ग्रामीणों की मदद से तत्काल मानपुर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। हाथ-पैर में आई चोटें घायलों में हेमराज (करीब 40 वर्ष), बबिया बाई, फुलबतिया और अजय शुक्ला शामिल बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार चारों के हाथ-पैर में चोटें आई हैं। इनमें दो महिलाओं को अधिक चोटें बताई गई हैं, जबकि अन्य घायलों की हालत सामान्य बताई गई है। कुछ देर रुका ई-केवाईसी का काम घटना के बाद पंचायत परिसर में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल रहा। बैटरी फटने के कारण ई-केवाईसी का काम भी रोकना पड़ा। बाद में ग्रामीणों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। पंचायत सचिव रामभुवन गुप्ता के अनुसार, आकाशीय बिजली की धमक के कारण बैटरी फटने की घटना हुई। उन्होंने बताया कि हादसे में दो महिलाओं को ज्यादा चोटें आई हैं और उनका मानपुर अस्पताल में इलाज चल रहा है।1
- सेवा । समर्पण । संकल्प। सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ अवसर पर वाराणसी से वडनगर तक प्रारंभ हुई "जन सेवा संकल्प यात्रा" का जिले के ब्यौहारी आगमन पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। #viral #news #न्यूज #newsupdate #newsupdate1
- सेवा संकल्प- 2026 सांसद डॉ. राजेश मिश्रा विधायक श्री शरद कोल ने आज जन सेवा संकल्प यात्रा के ब्यौहारी आगमन पर यात्रा में शामिल लोगों को भोजन परोसा। #shshdol #सेवा_संकल्प_अभियान सेवा संकल्प- 2026 सांसद डॉ. राजेश मिश्रा विधायक श्री शरद कोल ने आज जन सेवा संकल्प यात्रा के ब्यौहारी आगमन पर यात्रा में शामिल लोगों को भोजन परोसा। #shshdol #सेवा_संकल्प_अभियान1
- गणेश जी की छठी पर पुरानी शंकर मंदिर संजय नगर में हुआ धार्मिक आयोजन अनूपपुर। गणेश उत्सव के अवसर पर पूरा अनूपपुर जिला इन दिनों गणपति भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। जिले के अलग-अलग नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित गणेश पंडालों में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। संजय नगर स्थित पुरानी शंकर मंदिर सहित जिले के विभिन्न गणेश पंडालों में भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना के साथ भक्ति गीत, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कई पंडालों में रामायण पाठ, भक्ति संगीत, गाना-बाजा एवं आर्केस्ट्रा जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल हुए। शाम होते ही गणेश पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ रही है। आकर्षक विद्युत सजावट और भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। अलग-अलग पंडालों में अपनी-अपनी परंपरा और आयोजन के अनुसार धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। गणेश उत्सव के दौरान बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्ति गीतों और जयकारों से पंडालों का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। वहीं, कुछ स्थानों पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ धार्मिक आस्था का भी माध्यम बने हुए हैं। जिलेभर में गणेश भक्त “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों के साथ भगवान श्री गणेश की आराधना कर रहे हैं। गणेश उत्सव के चलते अनूपपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में श्रद्धा, भक्ति और उत्सव का माहौल बना हुआ है।1
- शहडोल के हीरा कॉलोनी मे डॉ गुप्ता और अभय राज क्लिनिक पर छापा *शहडोल जिले में स्वास्थ्य महकमे ने अवैध क्लीनिकों और नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। कलेकटर शहडोल के कड़े निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हीरा कॉलोनी और सराईकापा में अचानक दबिश देकर हड़कंप मचा दिया।* *1. हीरा कॉलोनी: रिटायर्ड डॉ. के.एम. गुप्ता के ठिकाने पर पहला छापा* *स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पहला छापा हीरा कॉलोनी स्थित रिटायर्ड डॉ. के.एम. गुप्ता की क्लीनिक पर मारा। मौके पर कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं:* *👉परामर्श की जगह इलाज: डॉक्टर साहब को केवल कंसल्टेंसी (परामर्श) देने की अनुमति थी, लेकिन क्लीनिक के अंदर मरीजों को बेधड़क ड्रिप/बोतल चढ़ाई जा रही थी और इंजेक्शन लगाए जा रहे थे।* *👉भर-भरकर मिलीं एक्सपायर्ड दवाएं: जांच के दौरान जब क्लीनिक में खंगाला गया, तो 3 से 4 महीने पहले एक्सपायर्ड हो चुकी दवाओं और इंजेक्शन की वायल भरी मिलीं।* *👉शासकीय कार्य में बाधा: कार्रवाई के दौरान डॉ. गुप्ता बिलबिला उठे और उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के शासकीय कार्य में रुकावट डालने का प्रयास किया।* *2. सराईकापा: 'अभय राज डे केयर क्लीनिक' पर दूसरा छापा* *इसके तुरंत बाद स्वास्थ्य अमले ने दूसरा छापा सराईकापा स्थित 'अभय राज डे केयर क्लीनिक' पर मारा।* *👉फिजियोथेरेपी के लाइसेंस पर एलोपैथी: डॉक्टर अभय राज के पास फिजियोथेरेपी का लाइसेंस था, लेकिन वे धड़ल्ले से एलोपैथिक दवाएं लिखकर मरीजों का इलाज कर रहे थे।* *👉रजिस्टर में फर्जीवाड़ा: मौके पर कई मरीज भर्ती और इलाज कराते मिले। जब एंट्री रजिस्टर की जांच की गई, तो मरीजों का कोई सही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।* *घोर लापरवाही और मरीजों की जान से खिलवाड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर अभय राज की क्लीनिक को मौके पर ही सील (Seal) कर दिया।* *शहडोल कलेक्टर महोदय के नेतृत्व में स्वास्थ्य अमले की कार्रवाई से जनता में भरोसा* *स्वास्थ्य विभाग द्वारा हीरा कॉलोनी और सराईकापा में की गई इस त्वरित व सख्त कार्रवाई से फर्जीवाड़ा करने वाले डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है।* *👉वहीं, स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए राहत की सांस ली है।*2