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कोटा ,जनाना अस्पताल में मर्दों का दर्द अस्पताल प्रशासन ने उचित व्यवस्था नहीं कर रखी है जेके लोन अस्पताल में पुरुषों को नही रुकने की व्यवस्था रात को कड़ाके की सर्दी में अस्पताल के बाहर फुटपाथ, टीन शेड, पेड़ के नीचे या दुकानों के बाहर एक कम्बल में ओढ़ कर रात काटने को मज़बूर मरीजी के उपचार की चिंता करे या सर्दी दे बचने का उपायलोगो को अस्पताल में रामाश्रय बनने का इंतजार

13 hrs ago
user_VKH NEWS
VKH NEWS
लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
13 hrs ago

कोटा ,जनाना अस्पताल में मर्दों का दर्द अस्पताल प्रशासन ने उचित व्यवस्था नहीं कर रखी है जेके लोन अस्पताल में पुरुषों को नही रुकने की व्यवस्था रात को कड़ाके की सर्दी में अस्पताल के बाहर फुटपाथ, टीन शेड, पेड़ के नीचे या दुकानों के बाहर एक कम्बल में ओढ़ कर रात काटने को मज़बूर मरीजी के उपचार की चिंता करे या सर्दी दे बचने का उपायलोगो को अस्पताल में रामाश्रय बनने का इंतजार

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  • बकाया भुगतान की मांग को लेकर 18 फरवरी से कोटा कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे जेके फैक्ट्री के मजदूरों के आंदोलन को गुरूवार को को 353 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच 13 मजदूरों की मौत हो चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रही...मंगलवार को धरने के 351 वें दिन तीनों संचालकों से बातचीत...
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    बकाया भुगतान की मांग को लेकर 18 फरवरी से कोटा कलेक्ट्रेट पर धरने पर बैठे जेके फैक्ट्री के मजदूरों के आंदोलन को गुरूवार को को 353 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच 13 मजदूरों की मौत हो चुकी है। लेकिन सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हो रही...मंगलवार को धरने के 351 वें दिन तीनों संचालकों से बातचीत...
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    23 min ago
  • सोशल मीडिया फ्रेंड ने जन्मदिन का बहाना बनाकर सूरत बुलाया, नशा देकर दुष्कर्म का आरोप, दो गिरफ्तार जिले की 21 वर्षीय युवती के साथ गुजरात के सूरत में दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि उसे जन्मदिन मनाने के बहाने सूरत बुलाया गया और करीब 20 दिनों तक अलग-अलग होटलों में रखकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। इस दौरान उसके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और नशे के इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका पुलिस रिमांड लिया है।
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    सोशल मीडिया फ्रेंड ने जन्मदिन का बहाना बनाकर सूरत बुलाया, नशा देकर दुष्कर्म का आरोप, दो गिरफ्तार
जिले की 21 वर्षीय युवती के साथ गुजरात के सूरत में दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता का आरोप है कि उसे जन्मदिन मनाने के बहाने सूरत बुलाया गया और करीब 20 दिनों तक अलग-अलग होटलों में रखकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। इस दौरान उसके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और नशे के इंजेक्शन लगाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका पुलिस रिमांड लिया है।
    user_बलदेव सिंह
    बलदेव सिंह
    Ladpura, Kota•
    54 min ago
  • आज हम बात कर रहे हैं UGC के नए नियमों की, जिन्हें कई संगठन और छात्र “काला कानून” बता रहे हैं। आखिर इन नियमों में ऐसा क्या है, जिससे विरोध हो रहा है? और क्या ये नियम छात्रों के हित में हैं या नुकसानदायक? इन्हीं सवालों पर आज हम विशेषज्ञ से खास बातचीत कर रहे हैं।
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    आज हम बात कर रहे हैं UGC के नए नियमों की, जिन्हें कई संगठन और छात्र “काला कानून” बता रहे हैं।
आखिर इन नियमों में ऐसा क्या है, जिससे विरोध हो रहा है?
और क्या ये नियम छात्रों के हित में हैं या नुकसानदायक?
इन्हीं सवालों पर आज हम विशेषज्ञ से खास बातचीत कर रहे हैं।
    user_Mayur times news
    Mayur times news
    पत्रकार Ladpura, Kota•
    3 hrs ago
  • राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था। लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें शुरू ऐप (Shuru App) 👇🏻
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    राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था।
लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है
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    user_MHR News
    MHR News
    Media house लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by VKH NEWS
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    Post by VKH NEWS
    user_VKH NEWS
    VKH NEWS
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • कोटा जिले के थेकड़ा गांव में स्थित रकत्या का भैरुजी महाराज का प्राचीन मंदिर क्षेत्र की गहरी आस्था और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नारियल, ध्वजा और प्रसाद अर्पित करते हैं। रविवार को यहां बडी भीड़ पडती है। निसंतान यहा मुरादें लेकर आते हैं। भैरुजी के शराब की धार भी लगाई जाती है। यह आस्था का हिस्सा है। ग्रामीणों के अनुसार, भैरुजी महाराज गांव के रक्षक देवता माने जाते हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले यहां पूजा करने की परंपरा है। विवाह, नव निर्माण या नई फसल की शुरुआत हर अवसर पर लोग मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं। भैरव अष्टमी और अन्य धार्मिक पर्वों पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। इन दिनों आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फल देती है। यही वजह है कि भैरुजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है। भीड़भाड़ वाले दिनों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए ग्रामीण स्वयंसेवक सक्रिय रहते हैं। साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे। थेकड़ा के भैरुजी मंदिर की यह आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकता की कहानी आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है।
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    कोटा जिले के थेकड़ा गांव में स्थित रकत्या का भैरुजी महाराज का प्राचीन मंदिर क्षेत्र की गहरी आस्था और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नारियल, ध्वजा और प्रसाद अर्पित करते हैं। रविवार को यहां बडी भीड़ पडती है। निसंतान यहा मुरादें लेकर आते हैं। भैरुजी के शराब की धार भी लगाई जाती है। यह आस्था का हिस्सा है। 
ग्रामीणों के अनुसार, भैरुजी महाराज गांव के रक्षक देवता माने जाते हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले यहां पूजा करने की परंपरा है। विवाह, नव निर्माण या नई फसल की शुरुआत हर अवसर पर लोग मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं।
भैरव अष्टमी और अन्य धार्मिक पर्वों पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। इन दिनों आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फल देती है। यही वजह है कि भैरुजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है। भीड़भाड़ वाले दिनों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए ग्रामीण स्वयंसेवक सक्रिय रहते हैं। साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाता है, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
थेकड़ा के भैरुजी मंदिर की यह आस्था, परंपरा और सामुदायिक एकता की कहानी आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े हुए है।
    user_Ravi Samariya
    Ravi Samariya
    Media house लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by Sadbhavna sandesh news
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    user_Sadbhavna sandesh news
    Sadbhavna sandesh news
    जनता की आवाज़ लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है।
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    राजस्थान के हाड़ौती अंचल की धरती पर बसे कोटा शहर के इतिहास में राजपूत शासकों से पहले एक ऐसा नाम आता है जिसे लोककथाएं आज भी गर्व से याद करती हैं वह नाम है वीर कोटिया भील का जिन्हें कई इतिहासकार और स्थानीय परंपराएं कोटा का पहला शासक मानती हैं कहा जाता है कि जब यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ियों और नदी घाटियों से घिरा हुआ था तब भील समुदाय यहां स्वतंत्र रूप से रहता था और उसी समुदाय से उभरे कोटिया भील ने अपनी वीरता, नेतृत्व क्षमता और युद्ध कौशल के दम पर आसपास के क्षेत्रों को संगठित कर एक मजबूत गणराज्य जैसा शासन स्थापित किया था लोककथाओं के अनुसार कोटिया भील न केवल योद्धा थे बल्कि न्यायप्रिय और प्रजा के रक्षक भी माने जाते थे वे शिकार, जंगल और जल स्रोतों की रक्षा को अपना धर्म समझते थे और बाहरी आक्रमणकारियों से अपने क्षेत्र को बचाने के लिए सदैव तैयार रहते थे कहा जाता है कि बाद में जब बूंदी के हाड़ा राजपूतों का विस्तार इस क्षेत्र तक हुआ तब संघर्ष की स्थिति बनी और अंततः युद्ध में कोटिया भील वीरगति को प्राप्त हुए किंतु उनकी स्मृति इस भूमि से कभी मिट नहीं सकी माना जाता है कि कोटा नाम भी कहीं न कहीं कोटिया भील के नाम से जुड़ा हुआ है और आज भी स्थानीय लोग उन्हें इस क्षेत्र का मूल स्वामी मानकर सम्मान देते हैं इतिहास की पुस्तकों में भले उनका उल्लेख सीमित हो लेकिन लोकगीतों, कथाओं और जनश्रुतियों में कोटिया भील आज भी जीवित हैं और उनकी कहानी आदिवासी शौर्य, स्वाभिमान और अपने भूभाग से अटूट जुड़ाव की मिसाल बनकर पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है।
    user_MHR News
    MHR News
    Media house लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    9 hrs ago
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