एटा के न्यू रेवाड़ी मोहल्ले में नगर पालिका परिषद द्वारा हाल ही में बनवाई गई एक नई इंटरलॉकिंग सड़क अचानक धंस गई, जिससे सड़क के बीच में एक बड़ा गड्ढा बन गया। योगेश कुमार के मकान के पास बनी इस सड़क के नीचे की मिट्टी बैठने और बेस कमजोर पड़ने के कारण इंटरलॉकिंग ईंटें भी जमीन में समा गईं, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। इस घटना ने क्षेत्र के लोगों में भारी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है, और वे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया और पर्याप्त गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जबकि कार्य पूरा हुए अभी अधिक समय भी नहीं बीता है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क का बेस मजबूत होता और मिट्टी का उचित सघनीकरण (कम्पैक्शन) किया गया होता तो इतनी जल्दी सड़क के बैठने की नौबत नहीं आती। मोहल्लेवासियों के अनुसार, इस गड्ढे के कारण राहगीरों, बुजुर्गों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है, जो रात के समय और बरसात में और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। न तो गड्ढे की मरम्मत कराई गई है और न ही घटिया सामग्री के प्रयोग की जांच की गई है। लोगों का सवाल है कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि नई सड़कें कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त होने लगें तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है और आम जनता का विकास कार्यों पर से भरोसा कमजोर पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने नगर पालिका परिषद से यह भी अपील की है कि गड्ढे की तत्काल मरम्मत कराई जाए, सड़क के नीचे धंसी मिट्टी को तकनीकी मानकों के अनुरूप दोबारा भरकर सुदृढ़ किया जाए और पूरी सड़क का निरीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।
एटा के न्यू रेवाड़ी मोहल्ले में नगर पालिका परिषद द्वारा हाल ही में बनवाई गई एक नई इंटरलॉकिंग सड़क अचानक धंस गई, जिससे सड़क के बीच में एक बड़ा गड्ढा बन गया। योगेश कुमार के मकान के पास बनी इस सड़क के नीचे की मिट्टी बैठने और बेस कमजोर पड़ने के कारण इंटरलॉकिंग ईंटें भी जमीन में समा गईं, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। इस घटना ने क्षेत्र के लोगों में भारी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है, और वे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया और पर्याप्त गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जबकि कार्य पूरा हुए अभी अधिक समय भी नहीं बीता है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क का बेस मजबूत होता और मिट्टी का उचित सघनीकरण (कम्पैक्शन) किया गया होता तो इतनी जल्दी सड़क के बैठने की नौबत नहीं आती। मोहल्लेवासियों के अनुसार, इस गड्ढे के कारण राहगीरों, बुजुर्गों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है, जो रात के समय और बरसात में और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। न तो गड्ढे की मरम्मत कराई गई है और न ही घटिया सामग्री के प्रयोग की जांच की गई है। लोगों का सवाल है कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि नई सड़कें कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त होने लगें तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है और आम जनता का विकास कार्यों पर से भरोसा कमजोर पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने नगर पालिका परिषद से यह भी अपील की है कि गड्ढे की तत्काल मरम्मत कराई जाए, सड़क के नीचे धंसी मिट्टी को तकनीकी मानकों के अनुरूप दोबारा भरकर सुदृढ़ किया जाए और पूरी सड़क का निरीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।
- एटा के न्यू रेवाड़ी मोहल्ले में नगर पालिका परिषद द्वारा हाल ही में बनवाई गई एक नई इंटरलॉकिंग सड़क अचानक धंस गई, जिससे सड़क के बीच में एक बड़ा गड्ढा बन गया। योगेश कुमार के मकान के पास बनी इस सड़क के नीचे की मिट्टी बैठने और बेस कमजोर पड़ने के कारण इंटरलॉकिंग ईंटें भी जमीन में समा गईं, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। इस घटना ने क्षेत्र के लोगों में भारी चिंता और नाराजगी पैदा कर दी है, और वे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया और पर्याप्त गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया, जबकि कार्य पूरा हुए अभी अधिक समय भी नहीं बीता है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क का बेस मजबूत होता और मिट्टी का उचित सघनीकरण (कम्पैक्शन) किया गया होता तो इतनी जल्दी सड़क के बैठने की नौबत नहीं आती। मोहल्लेवासियों के अनुसार, इस गड्ढे के कारण राहगीरों, बुजुर्गों, बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है, जो रात के समय और बरसात में और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन को इस संबंध में जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। न तो गड्ढे की मरम्मत कराई गई है और न ही घटिया सामग्री के प्रयोग की जांच की गई है। लोगों का सवाल है कि लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी यदि नई सड़कें कुछ ही समय में क्षतिग्रस्त होने लगें तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को जन्म देता है और आम जनता का विकास कार्यों पर से भरोसा कमजोर पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाए। उन्होंने नगर पालिका परिषद से यह भी अपील की है कि गड्ढे की तत्काल मरम्मत कराई जाए, सड़क के नीचे धंसी मिट्टी को तकनीकी मानकों के अनुरूप दोबारा भरकर सुदृढ़ किया जाए और पूरी सड़क का निरीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।1
- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से पुलिस विभाग की छवि को प्रभावित करने वाला एक मामला सामने आया है, जहाँ न्यायालय सुरक्षा में तैनात दरोगा गिरीश मिश्रा पर एक ट्रक चालक के 20 हजार रुपये चोरी करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दरोगा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जानकारी के अनुसार, दरोगा गिरीश मिश्रा अपनी वर्दी में घाटमपुर से हमीरपुर जाने के लिए एक ट्रक में सवार हुए थे। आरोप है कि यात्रा के दौरान उन्होंने ट्रक चालक के 20 हजार रुपये चुरा लिए थे। जब चालक को अपने पैसे गायब होने का पता चला, तो उसने तुरंत दरोगा का पीछा किया। बताया जा रहा है कि ट्रक से उतरकर भागने की कोशिश कर रहे दरोगा को चालक ने पकड़ लिया, जिसके बाद मौके पर दोनों के बीच हाथापाई भी हुई। तलाशी लेने पर कथित तौर पर दरोगा के पास से ट्रक चालक के 20 हजार रुपये बरामद हुए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दरोगा गिरीश मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और उसकी छवि पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए समान है और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। यह जानकारी पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और प्रारंभिक उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है, और मामले की अंतिम पुष्टि न्यायालय में सुनवाई व साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।2
- एटा जिले की अवागढ़ देहात क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश ने साफ-सफाई और जल निकासी व्यवस्था की खराब हालत उजागर कर दी है। मेवाती नगला और बा नगला ब्लॉक जैसे इलाकों में जगह-जगह गंदा पानी जमा हो गया है और सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लग गए हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा जारी तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि नालियों की सफाई न होने के कारण बारिश का पानी निकल नहीं पा रहा है, जिससे जमा पानी में प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य कचरा तैर रहा है। इसके चलते पूरे क्षेत्र में दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत और स्वास्थ्य विभाग ने मानसून से पहले सफाई के जो दावे किए थे, वे जमीनी स्तर पर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस जमा गंदे पानी के कारण अब डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, जिससे स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या के मद्देनजर, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, उपजिलाधिकारी अवागढ़, खंड विकास अधिकारी और एटा के स्वास्थ्य विभाग से तत्काल अवागढ़ देहात क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चलाने, सभी नालियों की सफाई कराकर जल निकासी सुनिश्चित करने और मच्छरों से बचाव के लिए फॉगिंग व कीटनाशक का छिड़काव करने की मांग की है। ग्रामवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 7 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे तहसील अवागढ़ पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। यह प्रेस विज्ञप्ति 8 जुलाई 2026 को ग्रामवासी, मेवाती नगला, बा नगला ब्लॉक, तहसील जलेसर अवागढ़, जिला एटा द्वारा जारी की गई है।1
- सेना के प्रशिक्षण सत्रों के दौरान जवानों को हथियारों के सही और सुरक्षित उपयोग का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि कोई जवान इन नियमों की अवहेलना करते हुए, लापरवाही के साथ या नियमों का उल्लंघन करके हथियारों का गलत प्रयोग करता है, तो इससे न केवल स्वयं उसकी, बल्कि अन्य साथी कर्मियों की जान को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसी गंभीर स्थिति में सेना के आंतरिक अनुशासनात्मक तंत्र के तहत गहन जांच की जाती है, और यदि किसी जवान को दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इसी कारण, प्रत्येक सैनिक का यह परम कर्तव्य है कि वह सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करे, अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का सम्मान करे, और हथियारों का उपयोग केवल उन्हीं निर्धारित प्रशिक्षण या वैध उद्देश्यों के लिए करे जिनके लिए उन्हें अधिकृत किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में मानसून की बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। सहपऊ क्षेत्र के पचावारी गांव में हालात ऐसे हो गए हैं कि गलियां तालाब में तब्दील हो चुकी हैं और कई घरों तक पानी घुस गया है। इंडिया टाइम रिपोर्ट टीवी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बारिश के चलते गांव के कई हिस्सों में गंभीर जलभराव हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया है। सबसे चिंताजनक दृश्य तब सामने आया जब पैर में प्लास्टर बंधा एक व्यक्ति भी घुटनों तक भरे पानी को पार करने के लिए मजबूर दिखाई दिया। स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़ा तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने इस जलभराव की समस्या को लेकर पहले भी अधिकारियों से शिकायत की थी। उनके अनुसार, पहले अस्थायी तौर पर पानी निकालने की कोशिश की गई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। इंडिया टाइम रिपोर्ट टीवी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। राष्ट्रवादी पार्टी के मंडल प्रभारी सनी भारत ने इस मुद्दे पर कहा है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो उनकी पार्टी ग्रामीणों की आवाज बनकर प्रशासन तक स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग पहुंचाएगी। समाचार लिखे जाने तक संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बताया गया है कि प्रतिक्रिया मिलने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।1
- हाथरस के थाना चन्दपा क्षेत्र के ग्राम कछपुरा में संपत्ति के बंटवारे को लेकर हुए विवाद के दौरान हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया एक .315 बोर का तमंचा और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ है। पुलिस के अनुसार, यह घटना 3 जुलाई 2026 को हुई थी, जब कछपुरा गांव में एक ही परिवार के दो पक्षों के बीच संपत्ति के बंटवारे पर बातचीत चल रही थी। इस दौरान कहासुनी बढ़ने पर फायरिंग हो गई, जिसमें महेश और गिरीश पुत्र भूप सिंह गोली लगने से घायल हो गए। इस घटना के संबंध में थाना चन्दपा में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देश पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा था। इसी क्रम में 4 जुलाई को एक आरोपी राजाबाबू को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। बुधवार को थाना चन्दपा पुलिस ने दो अन्य नामजद आरोपियों अंशु पुत्र जयप्रकाश निवासी ग्राम कछपुरा और धर्मेन्द्र कुमार पुत्र हरिशंकर निवासी नगला ओझा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। गिरफ्तार किए गए आरोपी धर्मेन्द्र कुमार के खिलाफ पूर्व में भी मारपीट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस पूरी कार्रवाई को थाना चन्दपा के थानाध्यक्ष योगेश कुमार ने अपनी टीम के साथ मिलकर अंजाम दिया।1
- देहरादून के मसूरी में देर रात मॉल रोड से लाइब्रेरी पुलिस चौकी तक एक युवती ने शराब के नशे में धुत होकर जमकर हंगामा किया। यह घटना बीती रात करीब 3 बजे हुई, जब युवती के साथ मौजूद युवकों ने स्थिति बिगड़ते देख पुलिस से मदद मांगी। पुलिस युवती को लाइब्रेरी चौकी ले गई, जहाँ उसने काफी देर तक उत्पात मचाया। बाद में, पुलिस ने उसे समझा-बुझाकर सुरक्षित घर भेज दिया।1
- भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा है। यह ज्ञापन मथुरा रोड स्थित सादाबाद विधायक कार्यालय पहुंचकर विधायक प्रदीप चौधरी उर्फ गुड्डू भैया के माध्यम से बुधवार सुबह प्रेषित किया गया। यूनियन ने प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों, जिनमें आगरा, अलीगढ़, मेरठ और कानपुर मंडल शामिल हैं, के किसानों की गंभीर आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। इन चारों मंडलों से 106 विधायक आलू उत्पादक किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और पिछले वर्ष से आलू की लगातार गिरती कीमतों के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे गहरे आर्थिक संकट में हैं। ज्ञापन सौंपने से पहले, भाकियू के पदाधिकारियों और किसानों ने आलू के गिरते दामों और किसानों की दयनीय स्थिति के विरोध में एक सांकेतिक 'आलू की शवयात्रा' निकाली। यह शवयात्रा सादाबाद के मथुरा अड्डा स्थित चौधरी चरण सिंह प्रतिमा स्थल से शुरू होकर विधायक सादाबाद के कार्यालय तक गई। किसानों ने अपने हाथों में आलू और अपनी मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण आलू की खेती अब घाटे का सौदा बन गई है। इस प्रदर्शन के माध्यम से किसानों ने सरकार का ध्यान आलू उत्पादकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए सरकारी खरीद शुरू करने, निर्यात बढ़ाने, कोल्ड स्टोरेज का किराया माफ करने और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग उठाई। भारतीय किसान यूनियन ने सरकार के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें किसानों का कोल्ड स्टोरेज किराया माफ करना, सरकार द्वारा आलू की 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद सुनिश्चित करना और भारत से पड़ोसी देशों को सरकारी स्तर पर आलू का निर्यात कराना शामिल है। इसके अतिरिक्त, यूनियन ने आलू उत्पादक क्षेत्रों में दो-दो आलू प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने, किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने, किसान रजिस्ट्री की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद करने तथा उर्वरकों की उपलब्धता आधार कार्ड और खतौनी के आधार पर सुनिश्चित करने की भी मांग की है। ज्ञापन में यूरिया की 50 किलोग्राम वाली बोरी को पुनः उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है। भाकियू पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो संगठन किसानों के हित में एक व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद, विधायक प्रदीप चौधरी ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को मुख्यमंत्री तक गंभीरता से पहुंचाया जाएगा और सरकार से किसानों के हित में सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया जाएगा।1