नाबालिक से दुष्कर्म का फरार आरोपी गिरफ्तार,पुलिस ने किया न्यायालय मे पेश,सौपा 2 दिन के रिमांड पर.... पीसांगन पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक माह से फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी शक्तिसिंह (21) को मंगलवार को पकड़ा गया। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। यह मामला 4 जुलाई 2026 को सामने आया था, जब पीसांगन थाने में एक नाबालिग के पिता ने अपनी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, थानाधिकारी पारुल यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम में सउनि गणेशराम, हैडकानि बाबूलाल, कानि भोमाराम, सुखाराम और जोराराम शामिल थे। टीम ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण किया और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। गहन तलाश के बाद, पुलिस ने नाबालिग पीड़िता को बरामद कर लिया। पीड़िता के बयानों और प्रारंभिक अनुसंधान से पता चला कि आरोपी शक्तिसिंह ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर अपने साथ रखा और कई बार उसके साथ गलत काम किया। आरोपी शक्तिसिंह, उम्र 21 वर्ष एक माह से फरार चल रहे आरोपी को टीम ने अथक प्रयासों से दस्तयाब कर गिरफ्तार किया। मामले में आगे की जांच जारी है।
नाबालिक से दुष्कर्म का फरार आरोपी गिरफ्तार,पुलिस ने किया न्यायालय मे पेश,सौपा 2 दिन के रिमांड पर.... पीसांगन पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक माह से फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी शक्तिसिंह (21) को मंगलवार को पकड़ा गया। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। यह मामला 4 जुलाई 2026 को सामने आया था, जब पीसांगन थाने में एक नाबालिग के पिता ने अपनी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, थानाधिकारी पारुल यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम में सउनि गणेशराम, हैडकानि बाबूलाल, कानि भोमाराम, सुखाराम और जोराराम शामिल थे। टीम ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का विश्लेषण किया और घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। गहन तलाश के बाद, पुलिस ने नाबालिग पीड़िता को बरामद कर लिया। पीड़िता के बयानों और प्रारंभिक अनुसंधान से पता चला कि आरोपी शक्तिसिंह ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर अपने साथ रखा और कई बार उसके साथ गलत काम किया। आरोपी शक्तिसिंह, उम्र 21 वर्ष एक माह से फरार चल रहे आरोपी को टीम ने अथक प्रयासों से दस्तयाब कर गिरफ्तार किया। मामले में आगे की जांच जारी है।
- ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है। घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है। ग्राम बड़ायली में शैतान सिंह की होटल के पास सोमवार को 11 हजार केवी विद्युत लाइन में फॉल्ट आ गया। इस फॉल्ट के कारण क्षेत्र में करंट फैलने की आशंका है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब आधे घंटे से करंट फैल रहा है। फॉल्ट वाले स्थान पर बिजली के तार तारबंदी (फेंसिंग) के तारों से सटे हुए हैं, जिससे पूरी तारबंदी में करंट फैलने का खतरा बढ़ गया है। घटना के समय क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही थी, जिससे जमीन गीली होने के कारण करंट फैलने का खतरा और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तारबंदी के संपर्क में आता है, तो बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को देखते हुए, ग्रामीणों ने आसपास के लोगों और बच्चों को घटनास्थल से दूर रहने की सलाह दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि घटना की सूचना तुरंत विद्युत विभाग के अधिकारियों को फोन पर दी गई थी। हालांकि, काफी समय बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बंद नहीं की गई। इस देरी पर ग्रामीणों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों ने विद्युत विभाग और प्रशासन से तत्काल बिजली आपूर्ति बंद करने की मांग की है। उन्होंने तकनीकी टीम को मौके पर भेजकर फॉल्ट को शीघ्र ठीक कराने का भी आग्रह किया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो जनहानि या पशुहानि जैसी गंभीर घटना हो सकती है।1
- अजमेर को मिली बड़ी सौगात आयुर्वेद रसायनशाला का हुआ ऑटोमेशन विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा हुए कार्यक्रम में शामिल1
- राजसमंद जिले में ₹491 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। यह सौगात क्षेत्र की आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जन-जन की सुविधाओं का विस्तार करेगी।1
- फॉरवर्ड जीनियस स्कूल में किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी ने किया वृक्षारोपण गोविंदगढ़ (नरेन्द्र चौहान) गोविंदगढ़ में रविवार को कांग्रेस ने कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन के जरिए आगामी चुनावों का बिगुल फूंक दिया। अजमेर देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष एवं किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी की मौजूदगी में हुए सम्मेलन में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का आह्वान किया गया। सम्मेलन के बाद फॉरवर्ड जीनियस स्कूल में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए विधायक ने कार्यकर्ताओं के साथ वृक्षारोपण भी किया। स्कूल संचालक मोहम्मद आरिफ कुरैशी ने बताया पर्यावरण संरक्षण दिशा में कदम उठाते हुवे 250 पौधे रोपण का लक्ष्य है जिसमें से रविवार को 40 वृक्षारोपण किया गया कार्यक्रम में लोकसभा प्रत्याशी रामचंद्र चौधरी, पूर्व विधायक रामनारायण गुर्जर, कांग्रेस प्रत्याशी शिव प्रकाश गुर्जर, युवा नेता सुनील गुर्जर, ओबीसी प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष यूनुस खान, पूर्व देहात महासचिव गुलाम मुस्तफा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद रहे।1
- तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन तृतीयश्रेणीअध्यापक,पीटीआई,प्रयोगशाला स्थानांतरण किए जाएं, नहीं तो होगा महा-आंदोलन तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति बैनर पीसांगन उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन मांगलियावास : तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले पीसांगन उपखंड अधिकारी को तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में कार्मिक विभाग ने तृतीय श्रेणी शिक्षक लेवल । व लेवल ॥, PTI, प्रबोधक व प्रयोगशाला सहायक छोड़कर सभी कार्मिकों के स्थानांतरणों से प्रतिबन्ध हटाकर तबादले किए गए हैं। जो कि पूर्णतः अन्यायपूर्ण और अतार्किक है। तृतीय श्रेणी संवर्ग पिछले 8 वर्षों से इस अन्याय का शिकार हो रहा है। 2008 से नियुक्त शिक्षक तबादलों का इंतजार कर रहे हैं। हम सभी 18 वर्षों से गृह जिले जाने के लम्बे इंतजार में है।2
- तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।1
- अजमेर में खोला जाएगा नया आयुर्वेद विश्वविद्यालय. चैनल को लाइक करें सब्सक्राइब करें अजमेर में खोला जाएगा नया आयुर्वेद विश्वविद्यालय.1
- पुष्कर में वृद्ध महिला के जेवरात लूटे गए. लाइक करें सब्सक्राइब करें चैनल को पुष्कर में वृद्ध महिला के जेवरात लूटे गए. shorts #shorts1