हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन से प्रभावित किसानों ने मुआवज़े में भेदभाव का लगाया आरोप — बिलाल अख्तर खतौली (मुजफ्फरनगर)। जनपद मुजफ्फरनगर के खतौली तहसील सहित दर्जनों गांवों से गुजर रही हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन के कारण किसानों को भारी फसल नुकसान झेलना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने ट्रांसमिशन कंपनी पर मुआवज़े में भेदभाव करने और गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के ठेकेदारों द्वारा लाइन बिछाने के दौरान खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया गया, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। आरोप है कि कंपनी के कुछ प्रतिनिधि किसानों को धमकाने और दबाव बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई किसान मानसिक तनाव में हैं और आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। पीड़ित किसानों ने बताया कि केंद्र सरकार के नियमानुसार हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन से होने वाले नुकसान पर 200 प्रतिशत तक मुआवज़ा दिए जाने का प्रावधान है, जबकि राजस्थान में इसी तरह के मामलों में किसानों को 400 प्रतिशत तक मुआवज़ा दिया जा चुका है। इसके बावजूद एनसीआर क्षेत्र में शामिल मुजफ्फरनगर जनपद की खतौली तहसील के गांव चंदसामंद सहित अन्य गांवों में किसानों को मात्र 85 प्रतिशत मुआवज़ा देने की बात कही जा रही है। किसानों का आरोप है कि संबंधित ट्रांसमिशन कंपनी जानबूझकर गलत जानकारी देकर उन्हें राजस्थान की तर्ज पर मिलने वाले 400 प्रतिशत मुआवज़े से वंचित रख रही है। कंपनी अधिकारियों पर किसानों से झूठ बोलने और भ्रम फैलाने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्थान की तरह यहां भी 400 प्रतिशत मुआवज़ा लागू कराया जाए तथा दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन और कानूनी कार्रवाई करने को मजबूर
हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन से प्रभावित किसानों ने मुआवज़े में भेदभाव का लगाया आरोप — बिलाल अख्तर खतौली (मुजफ्फरनगर)। जनपद मुजफ्फरनगर के खतौली तहसील सहित दर्जनों गांवों से गुजर रही हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन के कारण किसानों को भारी फसल नुकसान झेलना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने ट्रांसमिशन कंपनी पर मुआवज़े में भेदभाव करने और गुमराह करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के ठेकेदारों द्वारा लाइन बिछाने के दौरान खेतों में खड़ी फसलों को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया गया, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। आरोप है कि कंपनी के कुछ प्रतिनिधि किसानों को धमकाने और दबाव बनाने का भी प्रयास कर रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कई किसान मानसिक तनाव में हैं और आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। पीड़ित किसानों ने बताया कि केंद्र सरकार के नियमानुसार हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइन से होने वाले नुकसान पर 200 प्रतिशत तक मुआवज़ा दिए
जाने का प्रावधान है, जबकि राजस्थान में इसी तरह के मामलों में किसानों को 400 प्रतिशत तक मुआवज़ा दिया जा चुका है। इसके बावजूद एनसीआर क्षेत्र में शामिल मुजफ्फरनगर जनपद की खतौली तहसील के गांव चंदसामंद सहित अन्य गांवों में किसानों को मात्र 85 प्रतिशत मुआवज़ा देने की बात कही जा रही है। किसानों का आरोप है कि संबंधित ट्रांसमिशन कंपनी जानबूझकर गलत जानकारी देकर उन्हें राजस्थान की तर्ज पर मिलने वाले 400 प्रतिशत मुआवज़े से वंचित रख रही है। कंपनी अधिकारियों पर किसानों से झूठ बोलने और भ्रम फैलाने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्थान की तरह यहां भी 400 प्रतिशत मुआवज़ा लागू कराया जाए तथा दोषी कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को उनका वैधानिक अधिकार मिल सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन और कानूनी कार्रवाई करने को मजबूर
- मौसम के मिजाज ने बढ़ाई किसानों की चिंता: बुवाई विलंब से खराब हो सकती है सरसों की फसल, फंगस रोग का खतरा मंडराया मुजफ्फरनगर, 04 जनवरी 2026। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। समय पर लेथ (रबी की एक प्रमुख फसल) की बुवाई न हो पाने के कारण अब सरसों की फसल पर फंगस जनित रोगों के हमले का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सतर्कता और उचित प्रबंधन नहीं किया गया, तो इस सीजन में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन और विलंबित बुवाई: एक दोहरी मार इस साल मानसून के देरी से विदा होने और बेमौसम बारिश के चलते जनपद के बड़े हिस्से में लेथ की बुवाई समय पर नहीं हो पाई। इस विलंब का सीधा असर अब सरसों पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञ बताते हैं कि देर से बोई गई फसलें अक्सर कमजोर होती हैं और उनमें रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऊपर से पिछले कुछ दिनों से दिन के तापमान में गिरावट और रात के समय कोहरे में बढ़ोतरी ने परिस्थितियों को और चिंताजनक बना दिया है। बढ़ता खतरा: झुलसा और सफेद रतुआ रोग कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर के एक वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक ने बताया, "वर्तमान में बढ़ी हुई नमी और कम तापमान का मिश्रण 'ऑल्टरनेरिया ब्लाइट' (झुलसा रोग) और 'व्हाइट रस्ट' (सफेद रतुआ) जैसे फंगस रोगों के लिए आदर्श स्थिति है। ये रोग पत्तियों, तनों और फलियों पर हमला करते हैं, जिससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता कम हो जाती है और दाने ठीक से नहीं बन पाते। अगर रोकथाम न की गई, तो पैदावार में 30 से 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।" किसानों की मुश्किलें और विभाग की सलाह जनपद के एक प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया, "पहले ही बुवाई में देरी से चिंता थी, अब यह नया खतरा सामने आ गया है। कीटनाशकों का खर्च बढ़ेगा और मेहनत भी ज्यादा लगेगी।" इस चुनौती को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें फसल की नियमित निगरानी करने, शुरुआती लक्षण दिखते ही कवकनाशी दवाओं (जैसे कि मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव) का उपयोग करने और खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। साथ ही, संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन के प्रयोग पर जोर दिया गया है, क्योंकि अधिक नाइट्रोजन भी फंगस को बढ़ावा दे सकती है। जिले में कृषि संबंधी चुनौतियों का संदर्भ मुजफ्फरनगर जनपद में कृषि संबंधी मुद्दे नए नहीं हैं। इससे पहले भी सिंचाई विभाग द्वारा किए गए घटिया निर्माण कार्यों, जिसमें पांच दिन में उखड़ जाने वाली सड़क भी शामिल है, के कारण किसानों को सिंचाई सुविधाओं को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक समाजसेवी द्वारा इन मुद्दों को उठाने के लिए भूख हड़ताल तक की गई थी। ऐसे में, फसलों पर रोगों का खतरा किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है। क्या है समाधान का रास्ता? विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम करना होगा। शॉर्ट ड्यूरेशन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के बीजों को बढ़ावा देना, जलवायु के अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना और मौसम पूर्वानुमान के आधार पर किसानों को समय पर सलाह देना ही इसका समाधान है। अगर समय रहते सावधानी बरती गई, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।2
- मुजफ्फरनगर के Nh 58 पुलिस चौकी रुड़की चुंगी के पास मैं लगा गंदगी का ढेर आने जाने वाले सभी व्यक्तियों को गंदगी की दुर्गंध वे स्थानीय लोगों को गंदगी का सामना करना पड़ रहा है इस गंदगी से काफी परेशानियां हो रही है आने जाने वाले सभी लोगों को इस दुर्गंध को झेलना पड़ता है प्रशासन इस चीज का ध्यान नहीं रख पा रहा है नगर पालिका द्वारा की यहां खुले में कूड़ा डाल रखा है आने वाली बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है1
- मुज़फ्फरनगर | खबर मुज़फ्फरनगर में पुलिस अधीक्षक यातायात अतुल चौबे के निर्देशानुसार शहर के प्रमुख अटल चौक पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों द्वारा रूटीन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान दोपहिया व चारपहिया वाहनों को रोककर दस्तावेज़ों की जांच, हेलमेट व सीट बेल्ट की अनिवार्यता सहित यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया गया। अचानक हुई चेकिंग से वाहन चालकों में हड़कंप मचा रहा। आपको बता दें कि बढ़ती ठंड और घने कोहरे के चलते सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा देखने को मिल रहा है, जिसे नियंत्रित करने के उद्देश्य से ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह सतर्कता बरत रही है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए इस प्रकार के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। 🚦1
- Post by Ssnews UTTAR PRDESH1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
- राष्ट्रीय महिला एकता संगठन1
- पेपर मिल का जहरीला पानी सिंचाई नाले में छोड़ा जा रहा, सूख गए राष्ट्रीय राजमार्ग के पेड़ मुजफ्फरनगर। जनपद में पर्यावरण और स्वास्थ्य से खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सिंचाई विभाग के एक नाले में पेपर मिल का जहरीला औद्योगिक अपशिष्ट बेरोकटोक छोड़ा जा रहा है। इस प्रदूषित पानी के सिंचाई में इस्तेमाल का असर अब राजमार्ग पर लगे हजारों हरे-भरे पेड़ों को सुखा कर साफ दिखाई देने लगा है। विषैला पानी, सूखते पेड़ और चिंतित नागरिक स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पाया है कि एक निजी पेपर मिल की गंदगी को सिंचाई नाले में डाला जा रहा है। यह नाला स्थानीय किसानों द्वारा खेतों की सिंचाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जहरीले रसायन सीधे फसलों और मिट्टी में जा रहे हैं। इसी पानी को, जानकारी के अभाव या विकल्पहीनता में, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे हरियाली बनाए रखने के लिए भी उपयोग किया जा रहा है। अब उसी राजमार्ग के किनारे लगे पेड़ तेजी से मुरझाने और सूखने लगे हैं। बड़ी संख्या में पेड़ों का सूखना साफ इशारा कर रहा है कि पानी में मौजूद भारी रसायन और केमिकल्स पौधों की जड़ों को मार रहे हैं। पर्यावरणीय खतरा और स्वास्थ्य संकट पेपर मिलों के अपशिष्ट में क्लोरीन, डाइऑक्सिन, फरफ्यूरल और भारी धातु जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं। जब यह पानी खेतों में जाता है, तो यह मिट्टी की सेहत को बर्बाद कर देता है, भूजल को जहरीला बना देता है और अंतत: फसलों के जरिए मानव शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। पेड़ों का सूखना तो इस गंभीर समस्या का सिर्फ दृश्यमान हिस्सा है। पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह एक बड़ा संकट है। विभागीय लापरवाही और जिम्मेदारों पर सवाल यह घटना मुजफ्फरनगर में सिंचाई विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ समय में विभाग अपने काम की घटिया गुणवत्ता के कारण विवादों में रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, सिंचाई विभाग द्वारा बनाई गई एक सड़क महज पांच दिन में ही उखड़ गई थी और उसमें घास उग आई थी। इस मामले में समाजसेवी सुमित मलिक ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल तक की थी। ऐसे में, सवाल उठता है कि क्या उसी विभाग द्वारा संचालित नाले में जहरीला पानी छोड़ने की अनदेखी की जा रही है? क्या मिल मालिकों और निगरानी न करने वाले अधिकारियों के बीच कोई सांठगांठ है? किसान नेता और स्थानीय लोग पहले भी विभाग के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं। नए साल के पहले दिन से ही एक कार्यकर्ता ने विभाग के 'घटिया खेल' के खिलाफ भूख हड़ताल जारी रखी हुई है। प्रशासन से मांग और भविष्य की चुनौती स्थानीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं: 1. सबसे पहले पेपर मिल द्वारा नाले में अपशिष्ट छोड़ने पर तुरंत रोक लगाई जाए। 2. प्रदूषित नाले के पानी और आसपास की मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। 3. सूखे पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाएं, लेकिन शुद्ध पानी की व्यवस्था के साथ। 4. पिछले मामलों की तरह इस मामले में भी भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूखते हजारों पेड़ सिर्फ पेड़ नहीं मर रहे, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और कृषि के लिए खतरे की घंटी है। प्रशासन की ओर से तुरंत और ठोस कार्रवाई ही इस संकट से निपट सकती है और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण दे सकती है।1
- मुजफ्फरनगर के ग्राम पीनना NHAI हाईवे पर किसानों ने दे रखा था 3 साल से धरना किसने की मांग थी कि यहां पर अंडर पास ना बनाएं किसने की मांग थी यहां पर पुल का निर्माण ही कराया जाए ताकि यहां से चार-पांच गांव के लिए रास्ता जाता है अंडर पास बनने पर जल भराव की समस्या ज्यादा रहती है इसी वजह से यहां पर पुल का निर्माण कराया जाएगा किसानों का 3 साल से धरना देखते हुए सरकार इस बात को मान गई है कि यहां पर अब पल का ही निर्माण कराया जाएगा फूल निर्माण के लिए जो रसूल से कम शुरू कर दिया गया1
- मुज़फ्फरनगर जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में नव निर्माण कार्य को लेकर अब स्पष्ट रूप से तेजी देखने को मिल रही है। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के सख्त निर्देशों के बाद निर्माण कार्य में आई रफ्तार ने प्रशासनिक सक्रियता का संकेत दिया है। वीडियो में दिखाई दे रही तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जिलाधिकारी कार्यालय के नव निर्माण को लेकर कार्य प्रगति पर है। लंबे समय से प्रस्तावित इस निर्माण को लेकर अब ज़मीनी स्तर पर काम तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। निर्माण स्थल पर श्रमिकों की संख्या बढ़ाई गई है और आवश्यक संसाधन भी मौके पर मौजूद हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी उमेश मिश्रा स्वयं निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा कर रहे हैं और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य है कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया जिलाधिकारी कार्यालय जल्द से जल्द तैयार हो सके, जिससे आम जनता और अधिकारियों दोनों को बेहतर व्यवस्था मिल सके। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि निर्माण कार्य में आई यह तेजी भविष्य में प्रशासनिक कार्यों को और अधिक सुचारू बनाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तय समयसीमा में यह नव निर्माण कार्य किस हद तक पूरा हो पाता है।1