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- हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को लेकर भाजपा की बात सच साबित हुई है। दिसंबर 2024 में पारित और फरवरी 2025 से प्रभावी इस अधिनियम के माध्यम से दिसंबर 2003 या उसके बाद के अनुबंध कर्मचारियों के लिए लाभों को पूर्वव्यापी रूप में सीमित कर दिया गया था। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कर्मचारियों से जुडे़ इस संवेदनशील विषय को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी थी। प्रदेश सरकार ने भले ही भाजपा की इस सलाह को अनसुना किया हो, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस अधिनियम को खारिज कर दिया है। इसे सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम का विभिन्न स्तरों पर विरोध हो रहा था। इस अधिनियम को अनुबंध कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात माना जा रहा था। इसके तहत अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता का लाभ उनकी नियुक्ति के बजाए नियमितीकरण की तिथि से देने का प्रावधान किया गया था। इससे वरिष्ठता के साथ ही उनके वेतनमान और पदोन्नति आदि पर भी असर पड़ रहा था। कर्मचारियों के विरोध के बावजूद प्रदेश सरकार ने इसे मनमाने ढंग से लागू कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट का यह फैसला अनुबंध कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। गौरतलब है कि झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने भी विधानसभा में इस अधिनियम को लेकर सरकार को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के विकास में कर्मचारियों का हमेशा अहम योगदान रहता है। उनके जीवन का एक बड़ा और स्वर्णिम हिस्सा प्रदेश की सेवा करते हुए बीतता है। लिहाजा उन्हें उनके हकों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी जूनियर कर्मचारी को उसके सीनियर से अधिक वेतन व अन्य लाभ नहीं दिए जा सकते। इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र में ऐसे ही एक मामले में अदालत के फैसले का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि हिमाचल में आज भी उस फैसले का अनुसरण किया जाता है। उन्होंने सरकार को इस बारे भी आगाह किया था कि मनमाने ढंग से लागू किए गए इस अधिनियम की वजह से कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा। अदालती मामले बढ़ने से सरकार का कामकाज भी प्रभावित होगा। हाईकोर्ट द्वारा इस एक्ट को खारिज करने से साबित हो गया है कि इस मामले में सरकार गलत थी।1
- रिपोर्ट बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज अटल सदन कुल्लू में प्रदेश भाजपा सचिव एवं कुल्लू जिला भाजपा सह प्रभारी प्रियंता शर्मा ।1
- व्यास चेरीटेबल ट्रस्ट की आम सभा का आयोजन रविवार को सागर व्यू होटल बिलासपुर में किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता समाजसेवी शमशेर गौतम ने की। इस दौरान मुख्य संरक्षक नंद प्रकाश बोहरा विशेष रूप से मौजूद रहे। इस बैठक में ट्रस्ट द्वारा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को लेकर चर्चा की गई। वित्त सचिव अधिवक्ता विजय चंदेल ने साल भर का लेखाजोखा प्रस्तुत किया। इसके अलावा इस दौरान सर्वसम्मति से ट्रस्ट प्रधान का चयन किया गया। जिसमें ई. एनआर शर्मा को प्रधान चुना गया। शेष कार्यकारिणी चुनने का अधिकार भी प्रधान को दिया गया। प्रधान पद के लिए एनआर शर्मा के नाम का प्रस्ताव अधिवक्ता विजय चंदेल ने रखा। इसके साथ ही टीसी सैणी व दिनेश शर्मा ने समर्थन किया और सर्वसम्मति से एनआर शर्मा के नाम पर मुहर लगी। नवनियुक्त प्रधान एनआर शर्मा ने कहा कि सभी ट्रस्टियों के सहयोग से सोसायटी के कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी ट्रस्टियों के सहयोग से एम्स बिलासपुर में लंगर चलाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी निभाई जा रही है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि भविष्य में भी सोसायटी के सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाए रखने के लिए अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें। बता दें कि व्यास चेरीटेबल ट्रस्ट का गठन वर्ष 2019 में 21 सदस्यों द्वारा किया गया। वहीं, एम्स में लंगर लगाने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट द्वारा अन्य सामाजिक गतिविधियों में भूमिका निभाते हुए मंडी माणवां व रघुनाथपुरा में बच्चों को स्वेटर वितरित किए। कोराना महामारी के दौरान रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से दो बार खाने की सामग्री बांटी गई। दयोली वृद्धाश्रम में वित्तिया सहायता के साथ ही अन्य दैनिक वस्तुएं प्रदान की गईं। यही नहीं बिलासपुर के लुहणू मैदान में स्थित पुलिस भर्ती के दौरान करीब 800 बच्चों को एक सप्ताह तक भोजन की व्यवस्था की गई। गरीब बेटियों की शादी में वित्तिया सहायता दी गई। गरीब परिवारों की बेटियों की पढ़ाई को वित्तिया सहायता प्रदान की। एम्स बिलासपुर परिसर में बच्चों के पार्क की स्थापना के लिए वित्तिया सहायता प्रदान की। 2025 में आई आपदा के दौरान ट्रस्ट द्वारा प्रभावित लोगों की मदद के लिए 175 तिरपाल बांटे गए। आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की। 2024 में गठित कार्यकारिणी के कार्यों को लेकर चर्चा की गई। जिसमें एम्स प्रशासन से अधिकारिक तौर पर लंगर लगाने के लिए एम्स प्रशासन से फूड प्लाजा में बूथ लिए गए। वर्तमान में यहां पर लंगर वितरण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। इस दौरान पूर्व प्रधान पवन चंदेल, चेयरमैन विजय कुमार, सचिव सुरेश कुमार चौधरी, अतिरिक्त सचिव टीसी सैणी, सलाहकार अशोक सैणी, उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।2
- Post by न्यूज रिपोर्टर1
- हमीरपुर नगर परिषद और नगर पंचायत के चावन को लेकर हमीरपुर जिला प्रशासन ने तैयारियां मुकम्मल कर ली है । उपायुक्त हमीरपुर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गंधर्व राठौर ने बताया कि 17 मई को नगर पंचायत भोटा और नगर परिषद सुजानपुर में चुनाव करवाए जाएंगे और उसी दिन ही चुनाव का परिणाम घोषित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आदर्श चुनाव आचार संहिता केवल नगर पंचायत भोटा और नगर परिषद सुजानपुर के क्षेत्र में ही लागू हुई है। वहीं उपायुक्त हमीरपुर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गन्धर्वा राठौर ने बताया कि सुजानपुर नगर परिषद में 5600 से अधिक मतदाता चुनाव में मतदान करेंगे इसके अतिरिक्त नगर पंचायत भोटा में 1150 मतदाता चुनाव में अपने मत का उपयोग करेंगे। वहीं जिला निर्वाचन अधिकारी गन्धर्वा राठौर ने बताया कि नगर पंचायत भोटा और नगर परिषद सुजानपुर में चुनाव को लेकर तैयारियां पुरी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि दोनों क्षेत्र में ईवीएम के माध्यम से चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे। इसके लिए ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग प्रोसेसिंग शुरू कर दी गई है। वहीं जिला निर्वाचन अधिकारी गन्धर्वा राठौर ने बताया कि पंचायत में बेल्ट पेपर के माध्यम से चुनाव संपन्न करवाए जाएंगे। जिसके लिए सामग्री तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि चुनाव तिथि घोषित होने के बाद आगामी प्रकिया अपनाई जाएगी। गन्धर्वा राठौर ने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि जब तक चुनाव की तिथि घोषित नहीं होती। उससे पहले मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवा लें। जिला निर्वाचन अधिकारी गंधर्व राठौर ने लोगों से आह्वान करते हुए कहा कि नाम दर्ज करवाने के लिए प्रारूप 2 के साथ मतदाता या परिवार के सदस्य स्वयं का शफ्थ पत्र अवश्य लायें। उन्होंने कहा कि अधिक संख्या में मतदाता सूची के लिए पत्र न लाएं, उन्हें जिला प्रशासन द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।2
- कुटलैहड़ की पंचायत लमलेहडी के बडला गांव में कम बोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान पौने दो वर्षों में कुटलैहड़ में लगाए गए 67 बड़े ट्रांसफार्मर, विधायक विवेक शर्मा बोले, हर समस्या का समाधान हमारा संकल्प बंगाणा, कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पंचायत लमलेहडी के गांव बडला में लंबे समय से चली आ रही कम बोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान हो गया है। क्षेत्र के विधायक विवेक शर्मा के अथक प्रयासों से गांव में पुराने 25 केवी ट्रांसफार्मर की जगह 63 केवी का बड़ा ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया है, जिससे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। गांव बडला के लोगों को लंबे समय से कम वोल्टेज की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। कम वोल्टेज के कारण घरेलू उपकरण सही ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे और किसानों को भी अपने कृषि कार्यों में परेशानी उठानी पड़ रही थी। कई बार विभाग को शिकायत देने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा था। ऐसे में स्थानीय जनता ने विधायक विवेक शर्मा से इस समस्या के समाधान की मांग की थी। विधायक विवेक शर्मा ने जनता की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और जल्द ही कार्यवाही सुनिश्चित की। इसके परिणामस्वरूप गांव बडला में 25 केवी की क्षमता वाले पुराने ट्रांसफार्मर को हटाकर 63 केवी का नया और बड़ा ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया। इस ट्रांसफार्मर के लगने से गांव में बिजली की सप्लाई सुचारू हो गई है और कम बोल्टेज की समस्या से लोगों को राहत मिली है।ट्रांसफार्मर लगने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है,ग्रामीणों ने विधायक विवेक शर्मा का आभार प्रकट करते हुए कहा कि विधायक के आदर्शवादी दृष्टिकोण जनता के प्रति समर्पण के कारण ही उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि विधायक हमेशा क्षेत्र की जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देते हैं और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। इस अवसर पर विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि उनका संकल्प है कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र की हर समस्या का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान करना उनकी पहली प्राथमिकता है और वे इसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। विधायक विवेक शर्मा ने बताया कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में कम बोल्टेज की समस्या को दूर करने के लिए पिछले पौने दो वर्षों के दौरान लगातार प्रयास किए गए हैं। इसी का परिणाम है कि इस अवधि में क्षेत्र के विभिन्न गांवों में कुल 67 बड़े ट्रांसफार्मर लगाए जा चुके हैं, जिससे हजारों लोगों को बेहतर बिजली सुविधा मिल रही है। उन्होंने आगे कहा कि बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आने वाले समय में भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि क्षेत्र के किसी भी गांव में कम बोल्टेज या बिजली से संबंधित समस्या न रहे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे समय-समय पर बिजली व्यवस्था की जांच करते रहें और जहां भी आवश्यकता हो, वहां आवश्यक सुधार कार्य तुरंत किए जाएं। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी इस कार्य के लिए विधायक का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस बड़े ट्रांसफार्मर के लगने से न केवल बिजली की समस्या दूर हुई है, बल्कि भविष्य में भी गांव में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इसी तरह क्षेत्र में अन्य विकास कार्य भी निरंतर जारी रहेंगे और कुटलैहड़ क्षेत्र विकास की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।1
- 👉 घट्टा दंगल 2026 🔥 Ankush बना विजेता | MLA Inder Singh Gandhi का बड़ा संदेश | Himachal Kushti 👉 Ghatta Dangal 2026 Full Highlights 🔥 Winner Ankush | Inder Singh Gandhi Speech | Himachal News 👉 हिमाचल का जबरदस्त दंगल 💪 घट्टा में गूंजा जोश | अंकुश विजेता | नशे पर MLA का बड़ा बयान1
- हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को लेकर भाजपा की बात सच साबित हुई है। दिसंबर 2024 में पारित और फरवरी 2025 से प्रभावी इस अधिनियम के माध्यम से दिसंबर 2003 या उसके बाद के अनुबंध कर्मचारियों के लिए लाभों को पूर्वव्यापी रूप में सीमित कर दिया गया था। झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने कर्मचारियों से जुडे़ इस संवेदनशील विषय को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी थी। प्रदेश सरकार ने भले ही भाजपा की इस सलाह को अनसुना किया हो, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस अधिनियम को खारिज कर दिया है। इसे सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम का विभिन्न स्तरों पर विरोध हो रहा था। इस अधिनियम को अनुबंध कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात माना जा रहा था। इसके तहत अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता का लाभ उनकी नियुक्ति के बजाए नियमितीकरण की तिथि से देने का प्रावधान किया गया था। इससे वरिष्ठता के साथ ही उनके वेतनमान और पदोन्नति आदि पर भी असर पड़ रहा था। कर्मचारियों के विरोध के बावजूद प्रदेश सरकार ने इसे मनमाने ढंग से लागू कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट का यह फैसला अनुबंध कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। गौरतलब है कि झंडूता के विधायक जीतराम कटवाल ने भी विधानसभा में इस अधिनियम को लेकर सरकार को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के विकास में कर्मचारियों का हमेशा अहम योगदान रहता है। उनके जीवन का एक बड़ा और स्वर्णिम हिस्सा प्रदेश की सेवा करते हुए बीतता है। लिहाजा उन्हें उनके हकों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग का हवाला देते हुए कहा था कि किसी भी जूनियर कर्मचारी को उसके सीनियर से अधिक वेतन व अन्य लाभ नहीं दिए जा सकते। इतना ही नहीं, उन्होंने महाराष्ट्र में ऐसे ही एक मामले में अदालत के फैसले का हवाला देते हुए यह भी कहा था कि हिमाचल में आज भी उस फैसले का अनुसरण किया जाता है। उन्होंने सरकार को इस बारे भी आगाह किया था कि मनमाने ढंग से लागू किए गए इस अधिनियम की वजह से कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ेगा। अदालती मामले बढ़ने से सरकार का कामकाज भी प्रभावित होगा। हाईकोर्ट द्वारा इस एक्ट को खारिज करने से साबित हो गया है कि इस मामले में सरकार गलत थी।1
- हमीरपुर सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने नई दिल्ली में आयोजित चौथे विकासशील अर्थव्यवस्था सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए जल प्रबंधन, दक्षता और सुशासन की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर ठोस बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सम्मेलन 24 अप्रैल 2026 को एरोसिटी स्थित पुलमैन होटल में केपीटी पाइप्स और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका विषय पानी: जीवन का अमृत – ऊर्जा, संसाधन और प्रौद्योगिकी था। अपने संबोधन की शुरुआत में अनुराग सिंह ठाकुर ने इतिहास और वर्तमान भारत के बीच समानता स्थापित करते हुए कहा कि कोई भी सभ्यता जल के कुप्रबंधन के कारण लंबे समय तक टिक नहीं सकी। सिंधु घाटी, मेसोपोटामिया और रोमन साम्राज्य जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जल केवल एक सरकारी विषय नहीं, बल्कि सभ्यतागत और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा जल सुरक्षा के लिए अपनाए गए चार प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया। जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2019 में जहां केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक पाइप जल पहुंचता था, वहीं आज 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया जा चुका है और 15 राज्यों ने शत-प्रतिशत कवरेज हासिल कर लिया है। इसे उन्होंने जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों महिलाओं को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करने से मुक्ति मिली है। अनुराग सिंह ठाकुर ने पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए कहा कि केवल जल संरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि अब जल दक्षता को भी अपनाना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संरक्षण का अर्थ पानी कम उपयोग करना है, जबकि दक्षता का अर्थ है पानी का समझदारी से उपयोग करना। उन्होंने पहले से शुद्ध किए गए नगर निगम के पानी पर रिवर्स ऑस्मोसिस प्रणाली के अनावश्यक उपयोग को जल की बर्बादी का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में 40 से 60 प्रतिशत पानी व्यर्थ चला जाता है, जिसे बदलना आवश्यक है। उद्योग जगत और संबंधित संस्थानों के सदस्यों से आह्वान करते हुए उन्होंने चार महत्वपूर्ण उपाय सुझाए। इसमें हर भवन में जल मीटरिंग और उप-मीटरिंग को अनिवार्य बनाना, जल दक्ष ताप, वेंटिलेशन और वातानुकूलन तथा प्लंबिंग प्रणाली अपनाना, वर्षा जल संचयन और ग्रे वाटर पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना तथा जल जागरूकता के लिए प्रशिक्षण और मानक विकसित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि जल केवल एक क्षेत्रीय या सरकारी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। सरकार अपनी भूमिका निभा रही है, नीतियां लागू हैं और निवेश हो रहा है, लेकिन हर स्तर पर समाज और उद्योग की भागीदारी आवश्यक है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि बूँद-बूँद से घड़ा भरता है और हर जल संरक्षण का प्रयास भारत के भविष्य को सुरक्षित बनाने में योगदान देगा। उन्होंने जोर दिया कि आज लिए गए निर्णय आने वाले 50 वर्षों के जल प्रबंधन की दिशा तय करेंगे। इस अवसर पर देशभर से आए उद्योग विशेषज्ञों, इंजीनियरों, वास्तुकारों और संबंधित संस्थानों के सदस्यों ने भाग लिया तथा जल प्रबंधन के संदर्भ में ऊर्जा, संसाधन और प्रौद्योगिकी पर विस्तृत चर्चा की गई।1