गलत प्लास्टर के चलते काटना पड़ा 5 साल की मासूम का पैर पिता ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार बांदा । जनपद के ग्राम पडुई थाना कोतवाली नगर निवासी अनिल कुमार ने मेडिकल कॉलेज बांदा के एक चिकित्सक पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। आरोप है कि इलाज में हुई लापरवाही के चलते उनकी 5 वर्षीय पुत्री मानवी को अपना पैर गंवाना पड़ा, जिससे वह जीवन भर के लिए विकलांग हो गई। पीड़ित के अनुसार, 23 दिसंबर 2025 को मानवी छत से गिर गई थी, जिससे उसके बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूट गई। परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज बांदा में भर्ती कराए। आरोप है कि वहां तैनात डॉक्टर विनीत सिंह ने इलाज के दौरान पैर को नीचे से अत्यधिक कसकर खींचकर बांध दिया और समय पर उचित उपचार नहीं किया। इससे बच्ची के पैर की नसों ने काम करना बंद कर दिया। बताया गया कि 29 दिसंबर 2025 को जब बच्ची को ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया तो हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। परिजन बच्ची को केजीएमयू लखनऊ ले गए, जहां पैर काटने की बात कही गई। इसके बाद ओएमआई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में इलाज कराया गया। वहां हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन किया गया, लेकिन पहले से फैले संक्रमण के कारण अंततः बच्ची का पैर काटना पड़ा। पीड़ित पिता का कहना है कि यह पूरी घटना गंभीर चिकित्सीय एवं आपराधिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने जिलाधिकारी से डॉक्टर विनीत सिंह के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
गलत प्लास्टर के चलते काटना पड़ा 5 साल की मासूम का पैर पिता ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार बांदा । जनपद के ग्राम पडुई थाना कोतवाली नगर निवासी अनिल कुमार ने मेडिकल कॉलेज बांदा के एक चिकित्सक पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। आरोप है कि इलाज में हुई लापरवाही के चलते उनकी 5 वर्षीय पुत्री मानवी को अपना पैर गंवाना पड़ा, जिससे वह जीवन भर के लिए विकलांग हो गई। पीड़ित के अनुसार, 23 दिसंबर 2025 को मानवी छत से गिर गई थी, जिससे उसके बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूट गई। परिजन उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज बांदा में भर्ती कराए। आरोप है कि वहां तैनात डॉक्टर विनीत सिंह ने इलाज के दौरान पैर को नीचे से अत्यधिक कसकर खींचकर बांध दिया और समय पर उचित उपचार नहीं किया। इससे बच्ची के पैर की नसों ने काम करना बंद कर दिया। बताया गया कि 29 दिसंबर 2025 को जब बच्ची को ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया तो हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। परिजन बच्ची को केजीएमयू लखनऊ ले गए, जहां पैर काटने की बात कही गई। इसके बाद ओएमआई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ में इलाज कराया गया। वहां हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन किया गया, लेकिन पहले से फैले संक्रमण के कारण अंततः बच्ची का पैर काटना पड़ा। पीड़ित पिता का कहना है कि यह पूरी घटना गंभीर चिकित्सीय एवं आपराधिक लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने जिलाधिकारी से डॉक्टर विनीत सिंह के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
- #Apkiawajdigital विशेष राजनीतिक रिपोर्ट: नई दिल्ली नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'झूठ का पुलिंदा' करार दिया है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (US-India Trade Deal) को लेकर राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए गोयल ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भारतीय किसानों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया है। किसानों के हितों की 'लोहे की दीवार' पीयूष गोयल ने आंकड़ों के साथ जवाब देते हुए कहा कि ट्रेड डील में भारतीय किसानों के हितों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। उन्होंने बताया कि: "डेयरी, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, सोयाबीन, मक्का और दालों समेत लगभग 90-95% कृषि उत्पाद इस डील के दायरे से बाहर हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि विदेशी उत्पादों से हमारे स्थानीय किसानों को कोई नुकसान न हो।" विपक्ष पर 'विकास विरोधी' होने का आरोप राहुल गांधी के साथ-साथ पीयूष गोयल ने विपक्षी गठबंधन (DMK, सपा, TMC और वामदल) को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ये सभी दल विकास विरोधी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की तीव्र प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं। गोयल के मुताबिक, राहुल गांधी संसद की गरिमा का उल्लंघन करते हुए बिना किसी प्रमाण के गलत बातें फैला रहे हैं। गोयल के बयान के मुख्य बिंदु: तथ्य: 90-95% भारतीय कृषि उत्पाद US ट्रेड डील से बाहर रखे गए हैं। आरोप: राहुल गांधी संसद में झूठ फैलाते हैं और उसे 'ऑथेंटिकेट' (प्रमाणित) नहीं करते। हमला: कांग्रेस और उसके सहयोगी दल देश की प्रगति और किसानों की बढ़ती आय को देख नहीं पा रहे हैं। 1
- महाशिवरात्रि से पहले अलर्ट मोड में पुलिस — बामदेवेश्वर मन्दिर की सुरक्षा व्यवस्था का ASP ने लिया जायजा बांदा — आगामी महाशिवरात्रि पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने नगर मजिस्ट्रेट संदीप केला, क्षेत्राधिकारी नगर मेविस टॉक व क्षेत्राधिकारी यातायात प्रतिज्ञा सिंह के साथ बामदेवेश्वर मन्दिर परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, रोशनी, सीसीटीवी, महिला-पुरुष अलग कतार, अग्निशमन उपकरण व आपात निकास मार्गों की व्यवस्थाओं को परखा गया। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आवागमन मार्ग निर्धारण के निर्देश दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने महाशिवरात्रि पर पर्याप्त पुलिस बल तैनाती, ड्रोन व सीसीटीवी निगरानी, महिला सुरक्षा और सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, वहीं आमजन से प्रशासनिक गाइडलाइन पालन की अपील की गई।1
- आपको बता दें कि पूरा मामला जिलाधिकारी कार्यालय बांदा से सामने आया है जहां पर आज उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियो के मानदेय भुगतान में हो रही लगातार देरी के खिलाफ बांदा जिला अधिकारी को संविदा कर्मचारियों ने दिया लिखित शिकायत पत्र ,जिसमें जिला अध्यक्ष डॉ. मिलेन्द्र सिंह और जिला महामंत्री शोभित गुप्ता के हस्ताक्षर हैं। ज्ञापन जिलाधिकारी बांदा के माध्यम से भेजा गया है। प्रदेश भर में करीब 1.50 लाख संविदा कर्मचारी जुलाई 2025 से मासिक मानदेय समय पर नहीं पा रहे हैं। एक माह का भुगतान 2 माह या अधिक समय बाद मिल रहा है। SNA Sparsh पोर्टल के बाद 'लिमिट शून्य', 'बिल फेल' या 'बजट अनुपलब्धता' जैसे कारण बताए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक व मानसिक संकट का सामना करना पड़ रहा है; कुछ मामलों में आत्महत्या के प्रयास भी सामने आए हैं। संघ की प्रमुख मांगें: सभी संविदा कर्मचारियों का मानदेय हर माह की 7 तारीख तक अनिवार्य भुगतान हो। तकनीकी/प्रशासनिक समस्याओं (बिल फेल, लिमिट आदि) का स्थायी समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों। सभी लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान हो। भविष्य में विलंब न हो, इसके लिए समयबद्ध भुगतान की SOP जारी की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 7 तारीख तक भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ, तो बांदा जिले के सभी संविदा कर्मचारी 'नो पे - नो वर्क' (No Pay - No Work) का रास्ता अपनाएंगे। यह समस्या पूरे उत्तर प्रदेश में व्याप्त है, जहां विभिन्न जिलों (जैसे बलिया, कुशीनगर, सोनभद्र, सुल्तानपुर, हरदोई आदि) में इसी तरह के प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। प्रांतीय स्तर पर भी संगठन ने कई बार वार्ता और पत्राचार किया, लेकिन कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।1
- हालात ऐसे हैं कि योगी सरकार, NGT और सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी यहां बेअसर नजर आ रहे हैं। अवैध खनन माफिया खुलेआम नियमों को दरकिनार कर काम कर रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारियों की सह पर आदेशों को पैरों तले कुचला जा रहा है। मुख्यमंत्री पोर्टल IGRS पर लगातार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर दिखाई नहीं दे रही। खनिज विभाग के खनिज अधिकारी राज रंजन और खान निरीक्षक गौरव गुप्ता द्वारा लगाई जा रही आख्या सवालों के घेरे में है। ग्राउंड जीरो की तस्वीरें हालात की गंभीरता खुद बयान कर रही हैं और प्रशासनिक दावों और जमीनी सच्चाई के बीच फर्क साफ दिखा रही हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि साड़ी खंड 77 में चल रहे अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई कब होती है और IGRS पर भ्रामक आख्या लगाने के मामलों पर कब जवाबदेही तय होती है। ग्राउंड जीरो से आशीष शुक्ला की रिपोर्ट, बांदा।1
- बांदा। जन समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के उद्देश्य से चित्रांश टीवी पर एक विशेष कार्यक्रम “रविवार जन संवाद – जनता की आवाज़” की शुरुआत होने जा रही है। कार्यक्रम का संचालन श्रीकांत श्रीवास्तव द्वारा किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव, कस्बे और शहरों की आम जनता की समस्याओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित किसी भी प्रकार की जन समस्या को इस मंच के माध्यम से उठाया जाएगा, ताकि संबंधित प्रशासन तक जनता की आवाज़ पहुंचाई जा सके। कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि इसमें ना पक्ष होगा, ना विपक्ष — केवल जनता का पक्ष रखा जाएगा।1
- रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा प्रकरण बांदा। जिले में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 5 वर्षीय मासूम बच्ची को अपना पैर गंवाना पड़ा। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। क्या है पूरा मामला? पीड़ित परिवार: ग्राम पडुई (थाना कोतवाली नगर), जनपद बांदा निवासी अनिल कुमार घटना की तारीख: 23 दिसंबर 2025 घटना: छत से गिरने के कारण बच्ची मानवी की बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूट गई। प्रारंभिक इलाज: रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा में भर्ती कराया गया। आरोप क्या हैं? पिता का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर विनीत सिंह ने पैर को अत्यधिक कसकर बांध दिया। कथित रूप से रक्त संचार रुकने से नसें प्रभावित हुईं। समय पर उचित उपचार न मिलने से स्थिति बिगड़ती गई। 29 दिसंबर को ऑपरेशन के दौरान बच्ची को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ (केजीएमयू) रेफर किया गया। वहां पैर काटने की सलाह दी गई। बाद में परिवार ने ओएमआई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज कराया। हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन हुआ, लेकिन संक्रमण बढ़ने के कारण अंततः बच्ची का पैर काटना पड़ा। प्रशासनिक कार्रवाई 12 फरवरी 2026 को पीड़ित पिता ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी। डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक लापरवाही में एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं। परिवार का आरोप है कि 15 दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी गई है। यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सकीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।2
- सुमेरपुर हाईवे पर दो ट्रकों की आमने-सामने भिड़ंत, चालक गंभीर घायल सुमेरपुर थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर देर रात करीब 10:30 बजे पेट्रोल पंप के पास दो ट्रकों की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दोनों ट्रकों के चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस की मदद से तत्काल अस्पताल भिजवाया। क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात सुचारु कराया गया। मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई जारी है।1
- #Apkiawajdigital विशेष संसदीय रिपोर्ट: लखनऊ विधानसभा से लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज उस वक्त एक बेहद दुर्लभ और सनसनीखेज स्थिति पैदा हो गई, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सदन की अव्यवस्था से नाराज होकर अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए। अमूमन शांत रहने वाले महाना ने न केवल नाराजगी जताई, बल्कि अपना हेडफोन उतारकर रख दिया और सदन की कार्यवाही बीच में ही छोड़कर बाहर चले गए। कैसे शुरू हुआ विवाद? सदन में प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा था। जब वित्त मंत्री सुरेश खन्ना इस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे, तभी रागिनी सोनकर ने एक पूरक सवाल (Supplementary Question) पूछने की कोशिश की। इसी दौरान सत्ता पक्ष के कुछ विधायक अपनी सीटों पर खड़े हो गए और बीच में हस्तक्षेप करने लगे। अध्यक्ष की सख्त टिप्पणी विधायकों के इस व्यवहार और बार-बार होने वाले हस्तक्षेप पर अध्यक्ष सतीश महाना का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने सत्ता पक्ष की ओर इशारा करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा— "क्या आप हाउस चलाएंगी?" इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की और सदन की मर्यादा का हवाला देते हुए सीट छोड़ दी। सदन में पसरा सन्नाटा अध्यक्ष के अचानक सदन से बाहर जाने के बाद कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही पूरी तरह ठप हो गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सदस्य इस अप्रत्याशित कदम से सन्न रह गए। संसदीय इतिहास में अध्यक्ष का इस तरह सदन छोड़ना एक बड़ी घटना मानी जा रही है, जो सदन के भीतर अनुशासन की कमी की ओर इशारा करती है। घटना के मुख्य बिंदु: पात्र: सतीश महाना (स्पीकर), डॉ. रागिनी सोनकर (सपा विधायक), सुरेश खन्ना (वित्त मंत्री)। कारण: पूरक प्रश्न के दौरान सत्ता पक्ष का बार-बार हस्तक्षेप। एक्शन: स्पीकर ने हेडफोन उतारा और नाराजगी में सदन से बाहर चले गए। असर: सदन की गरिमा और अनुशासन पर उठा बड़ा सवाल।1