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कानपुर ब्रेकिंग न्यूज सनसनी खबर राजू गौड़ रिपोर्टर बिंदासबोल न्यूज़ *माधुरी दीक्षित अपने परिवार के साथ दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की दैनिक आरती दर्शन को पहुंची।* *काशी में दशाश्वमेध घाट जो कि अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है,माधुरी दीक्षित के आगमन पर श्रद्धालुओं ओर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।* *आस पास के नावों में सवार श्रद्धालु माधुरी दीक्षित को देख अचंभित रह गए* *दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी समेत दशाश्वमेध चौकी प्रभारी अनुज तिवारी समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रही।* *माधुरी दीक्षित दशाश्वमेध घाट पर लगभग एक घंटे तक मौजूद थी फिर नमो घाट को तरफ लौट गई।*
Kartikey Bajpai
कानपुर ब्रेकिंग न्यूज सनसनी खबर राजू गौड़ रिपोर्टर बिंदासबोल न्यूज़ *माधुरी दीक्षित अपने परिवार के साथ दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली विश्व प्रसिद्ध मां गंगा की दैनिक आरती दर्शन को पहुंची।* *काशी में दशाश्वमेध घाट जो कि अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है,माधुरी दीक्षित के आगमन पर श्रद्धालुओं ओर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है।* *आस पास के नावों में सवार श्रद्धालु माधुरी दीक्षित को देख अचंभित रह गए* *दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी समेत दशाश्वमेध चौकी प्रभारी अनुज तिवारी समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रही।* *माधुरी दीक्षित दशाश्वमेध घाट पर लगभग एक घंटे तक मौजूद थी फिर नमो घाट को तरफ लौट गई।*
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- कानपुर बर्रा मे में दुर्गा अष्टमी पर निकली जावरा यात्रा जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल वही जवारा के दौरान बर्रा चौकी पुलिस रही तैनात चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर जावरा यात्रा निकाली गई यह यात्रा प्रतिवर्ष की भांति आयोजित की गई जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए यात्रा के दौरान महिलाएं, पुरुष और बच्चे भक्ति गीतों और 'जय माता दी' के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे थे पूरे रास्ते में स्थानीय लोगों ने यात्रा का स्वागत किया जिससे माहौल भक्तिमय हो गया1
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- खैनी थूकने की लापरवाही पड़ी भारी—प्लेटफॉर्म पर वंदे भारत की चपेट में आए यात्री की मौत, वीडियो वायरल पटना/बाढ़ (दानापुर रेल मंडल)। मंगलवार सुबह बाढ़ रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-2 पर एक दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई। पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस (जिसका बाढ़ में ठहराव नहीं है) तेज रफ्तार से डाउन लाइन पर गुजर रही थी, तभी प्लेटफॉर्म के पश्चिमी छोर के पास पोल संख्या-480 के नजदीक खड़ा युवक खैनी थूकने के लिए ट्रैक की ओर झुका और ट्रेन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मृतक की पहचान भदौर थाना क्षेत्र के लालपुर गांव निवासी मिथिलेश यादव के रूप में हुई है। वह ट्रेन पकड़ने स्टेशन आया था। हादसा उस वक्त हुआ जब वह प्लेटफॉर्म से ट्रैक के किनारे खैनी थूकने लगा; उसी दौरान तेज गति से आ रही वंदे भारत ट्रेन पर उसका ध्यान नहीं गया और सिर टकरा गया। गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पूरी घटना स्टेशन पर लगे कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वंदे भारत एक्सप्रेस का बाढ़ स्टेशन पर ठहराव नहीं है, इसलिए ट्रेन बिना रुके तेज गति से प्लेटफॉर्म पार कर रही थी। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे परिसर में यात्रियों की सुरक्षा और छोटी-सी लापरवाही के घातक परिणामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।1
- महादलित महिला के शव को श्मशान में नहीं मिली जगह, “भाईचारे” के दावों पर खड़े हुए सवाल नारे बड़े-बड़े, लेकिन ज़मीन पर जातिवाद कायम—परिजन घंटों भटकते रहे एक ओर समाज में “सब बराबर हैं” और “भाईचारा” जैसे बड़े-बड़े नारे गूंजते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। ताजा मामला एक महादलित महिला के अंतिम संस्कार से जुड़ा है, जहां उसके परिजनों को श्मशान घाट में जगह तक नहीं दी गई। बताया जा रहा है कि महिला के निधन के बाद जब परिवार अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचा, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने जाति का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। “भाईचारा” शायद वहीं खत्म हो गया, जहां इंसान की पहचान उसकी जाति से शुरू होती है। परिजन घंटों तक शव को लेकर भटकते रहे, लेकिन कहीं भी उन्हें अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं मिली। अंततः उन्हें मजबूरी में गांव के बाहर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा—शायद यही है “समानता” का असली रूप। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जैसा कि अक्सर ऐसे मामलों में होता है। जब मंचों पर “हिंदू-हिंदू भाई-भाई” के नारे लगाए जाते हैं, तब शायद यह बताना भूल जाते हैं कि यह भाईचारा किस-किस के लिए है। क्योंकि जमीन पर तो हालात यह हैं कि मरने के बाद भी इंसान को उसकी जाति से आज़ादी नहीं मिलती। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के आईने में दिखती सच्चाई है—जहां शब्दों में एकता है, लेकिन व्यवहार में गहरी खाई अब भी मौजूद है। #justice #equality #humanity #stopdiscrimination #dalitrights1
- Post by Kartikey Bajpai1