किसान मजदूर ने अपने पैसे और परिश्रम से पेयजल की व्यवस्था की।आवश्यकता आविष्कार की जननी: दावत के किसानों ने अपने खर्चे से लगवाया चापाकल 'आवश्यकता आविष्कार की जननी: दावत के किसानों ने अपने खर्चे से लगवाया चापाकल" विक्रमगंज (रोहतास) कहावत है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, इसे सच कर दिखाया है, दावथ के छोटे किसानों के एक समूह ने, जिन्होंने अपने परिश्रम और पैसे के सहयोग से पेयजल की व्यवस्था खुद कर ली। जानकारी के अनुसार, दो-चार गांवों के बीच पड़ने वाले एक बगीचे भोला के बाग के पास लंबे समय से चापाकल की मांग की जा रही थी, क्योंकि खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों और राहगीरों को प्यास बुझाने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता था। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से इसकी गुहार लगाई ,लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अंत में थक-हार कर यहां के मेहनती किसानों ने किसी का इंतजार किए बिना आपस में चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान कर सोमवार को चापाकल गड़वाने का कार्य पूरा कर दिया। इस पहल से अब बगीचे के आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों को पानी के लिए दूर-दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और राहगीरों को भी बड़ी राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने किसान समूह के इस सराहनीय कार्य की खूब प्रशंसा की है, वहीं यह घटना जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर भी सवाल खड़ा करती है।
किसान मजदूर ने अपने पैसे और परिश्रम से पेयजल की व्यवस्था की।आवश्यकता आविष्कार की जननी: दावत के किसानों ने अपने खर्चे से लगवाया चापाकल 'आवश्यकता आविष्कार की जननी: दावत के किसानों ने अपने खर्चे से लगवाया चापाकल" विक्रमगंज (रोहतास) कहावत है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, इसे सच कर दिखाया है, दावथ के छोटे किसानों के एक समूह ने, जिन्होंने अपने परिश्रम और पैसे के सहयोग से पेयजल की व्यवस्था खुद कर ली। जानकारी के अनुसार, दो-चार गांवों के बीच पड़ने वाले एक बगीचे भोला के बाग के पास लंबे समय से चापाकल की मांग की जा रही थी, क्योंकि खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों और राहगीरों को प्यास बुझाने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता था। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से इसकी गुहार लगाई ,लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अंत में थक-हार कर यहां के मेहनती किसानों ने किसी का इंतजार किए बिना आपस में चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान कर सोमवार को चापाकल गड़वाने का कार्य पूरा कर दिया। इस पहल से अब बगीचे के आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों को पानी के लिए दूर-दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और राहगीरों को भी बड़ी राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने किसान समूह के इस सराहनीय कार्य की खूब प्रशंसा की है, वहीं यह घटना जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर भी सवाल खड़ा करती है।
- सोन नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर सुरक्षा व्यवस्था हेतू इंद्रपुरी डैम का निरीक्षण किया रोहतास जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने सोन नदी में बढ़ते जलस्तर को लेकर सुरक्षा व्यवस्था हेतू इंद्रपुरी डैम का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने विभागीय पदाधिकारी को बढ़ते जलस्तर के बीच लगातार मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि मध्य प्रदेश इलाके में लगातार बारिश एवं जल स्तर बढ़ने से बाणसागर डैम से 3277 क्यूमेक्स पानी सोन नदी में छोड़ा गया। सम्भावना है कि जलस्तर में और भी वृद्धि होने की।बाणसागर डैम से छोड़ा गया पानी सोन नदी के माध्यम से रोहतास जिले के इंद्रपुरी डैम तक पहुंचेगा। संभावित जल वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन रोहतास ने सोन नदी के आसपास क्षेत्र में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की। बारिश से पहाड़ी झरनों भी भयावह रूप ले लिया है। जिससे गुप्ता धाम चेनारी मार्ग में प्रवेश रोक लगा दिया गया है। पहाड़ी पानी पहुंचने से पर्यटकों को प्रभावित इलाके में जाने के लिए वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर रोक लगाया है। वहीं जिले के नौहट्टा प्रखंड के अंतर्गत तियरा खुर्द पंचायत सहित पूरे प्रखंड में बाढ़ से प्रभावित लोगों को सड़क पर पानी आने से लोग परेशान हैं। सोन डिला इलाके पड़रिया में उनके लिए भी नाव को भेजा गया है। नावाडीह खुर्द पुल पर पानी होने के कारण सामान्य आवागमन बाधित है। रोहतास जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने लोगों से सोन नदी एवं उसके आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से नहीं जाने, नदी से पर्याप्त दूरी बनाए रखने तथा बच्चों एवं अन्य लोगों को नदी के पास जाने से रोकने की अपील की है। साथ ही पशुपालकों से अपने मवेशियों को नदी के किनारे अथवा टीलों पर नहीं ले जाने की अपील की।जिला प्रशासन द्वारा आमजन से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन करें और संभावित जल वृद्धि को देखते हुए सतर्क एवं सुरक्षित रहें।4
- किसान मजदूर ने अपने पैसे और परिश्रम से पेयजल की व्यवस्था की।आवश्यकता आविष्कार की जननी: दावत के किसानों ने अपने खर्चे से लगवाया चापाकल 'आवश्यकता आविष्कार की जननी: दावत के किसानों ने अपने खर्चे से लगवाया चापाकल" विक्रमगंज (रोहतास) कहावत है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, इसे सच कर दिखाया है, दावथ के छोटे किसानों के एक समूह ने, जिन्होंने अपने परिश्रम और पैसे के सहयोग से पेयजल की व्यवस्था खुद कर ली। जानकारी के अनुसार, दो-चार गांवों के बीच पड़ने वाले एक बगीचे भोला के बाग के पास लंबे समय से चापाकल की मांग की जा रही थी, क्योंकि खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों और राहगीरों को प्यास बुझाने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता था। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से इसकी गुहार लगाई ,लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अंत में थक-हार कर यहां के मेहनती किसानों ने किसी का इंतजार किए बिना आपस में चंदा इकट्ठा कर और श्रमदान कर सोमवार को चापाकल गड़वाने का कार्य पूरा कर दिया। इस पहल से अब बगीचे के आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों को पानी के लिए दूर-दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और राहगीरों को भी बड़ी राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने किसान समूह के इस सराहनीय कार्य की खूब प्रशंसा की है, वहीं यह घटना जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर भी सवाल खड़ा करती है।1
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