कुंभराज तहसील के ग्राम खेजड़ा रामा में गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पारिवारिक अनबन से क्षुब्ध एक महिला गांव में स्थित ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। सुबह करीब 5 बजे भोर के उजाले में महिला को टावर पर देख ग्रामीणों के होश उड़ गए, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी, और पटवारी प्रवीण सिंह राणा अपनी टीमों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी आपातकालीन तैयारियों के साथ बुलाया गया था। महिला अत्यधिक आक्रोश में थी और नीचे आने को तैयार नहीं थी, जिसके मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों ने बल प्रयोग या जल्दबाजी करने के बजाय बेहद संवेदनशील रणनीति अपनाई। उन्होंने लाउडस्पीकर और सीधे संवाद के जरिए महिला से बातचीत की, उसे ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी और प्रशासनिक व कानूनी दायरे में रहकर उसे न्याय दिया जाएगा, बस वह सुरक्षित नीचे आ जाए। प्रशासन के इस मानवीय चेहरे और ठोस आश्वासन का महिला पर सकारात्मक असर हुआ, जिससे उसका गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। करीब तीन घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामा का सुखद अंत होते ही वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। टावर से नीचे आते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। यह घटना सुबह 5 बजे शुरू हुई थी, जिसमें राजस्व, पुलिस, नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर मोर्चा संभाला। प्रशासन ने बिना किसी दबाव के, सिर्फ बातचीत और दिलासे (काउंसलिंग) के दम पर महिला को सुरक्षित नीचे उतारा, जो संवेदनशीलता की मिसाल साबित हुई। महिला को सुरक्षित सौंपने के बाद अब पुलिस इस पारिवारिक मतभेद और विवाद के मूल कारणों की बारीकी से जांच कर रही है। कुंभराज प्रशासन और पुलिस टीम का यह त्वरित और सूझबूझ भरा प्रयास अत्यंत सराहनीय है, जिसने संकट के समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर एक बहुमूल्य जान बचाई।
कुंभराज तहसील के ग्राम खेजड़ा रामा में गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पारिवारिक अनबन से क्षुब्ध एक महिला गांव में स्थित ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। सुबह करीब 5 बजे भोर के उजाले में महिला को टावर पर देख ग्रामीणों के होश उड़ गए, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी, और पटवारी प्रवीण सिंह राणा अपनी टीमों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। स्थिति की
गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी आपातकालीन तैयारियों के साथ बुलाया गया था। महिला अत्यधिक आक्रोश में थी और नीचे आने को तैयार नहीं थी, जिसके मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों ने बल प्रयोग या जल्दबाजी करने के बजाय बेहद संवेदनशील रणनीति अपनाई। उन्होंने लाउडस्पीकर और सीधे संवाद के जरिए महिला से बातचीत की, उसे ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी और प्रशासनिक व कानूनी दायरे में रहकर उसे न्याय दिया जाएगा, बस
वह सुरक्षित नीचे आ जाए। प्रशासन के इस मानवीय चेहरे और ठोस आश्वासन का महिला पर सकारात्मक असर हुआ, जिससे उसका गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। करीब तीन घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामा का सुखद अंत होते ही वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। टावर से नीचे आते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। यह घटना सुबह 5 बजे शुरू हुई थी, जिसमें राजस्व, पुलिस, नगर
परिषद और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर मोर्चा संभाला। प्रशासन ने बिना किसी दबाव के, सिर्फ बातचीत और दिलासे (काउंसलिंग) के दम पर महिला को सुरक्षित नीचे उतारा, जो संवेदनशीलता की मिसाल साबित हुई। महिला को सुरक्षित सौंपने के बाद अब पुलिस इस पारिवारिक मतभेद और विवाद के मूल कारणों की बारीकी से जांच कर रही है। कुंभराज प्रशासन और पुलिस टीम का यह त्वरित और सूझबूझ भरा प्रयास अत्यंत सराहनीय है, जिसने संकट के समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर एक बहुमूल्य जान बचाई।
- गुना जिले के कुंभराज में इस्लाम धर्म का प्रमुख पर्व ईद-उल-अजहा पूरे उत्साह, आस्था और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ईदगाह में सुबह से ही नमाज अदा करने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मुस्लिम समाज के लोगों ने विशेष नमाज अदा की, जिसके बाद आलिम माजिद नदवी ने ईद का खुत्बा पढ़ाया और देश तथा समाज में अमन-चैन, खुशहाली एवं तरक्की की दुआ मांगी। नमाज के उपरांत लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, लोगों ने अपने मरहूम (स्वर्गीय) रिश्तेदारों की कब्रों पर पहुंचकर फातिहा पढ़ी और उनकी मगफिरत के लिए दुआ की। परंपरा अनुसार, घरों में कुर्बानी की रस्म भी अदा की गई। यह पर्व हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की अल्लाह के प्रति अटूट निष्ठा, सब्र और कुर्बानी की याद दिलाता है, जो त्याग, प्रेम, भाईचारे और मानवता के उच्च मूल्यों का प्रतीक है। कुर्बानी का वास्तविक संदेश यह है कि हम अपने दिलों से नफ़रत, घमंड और स्वार्थ को दूर करें और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं। साथ ही, सब्र हमें कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ते पर बने रहने की प्रेरणा देता है, जबकि भाईचारे का जज़्बा समाज में एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान को मजबूत करता है।4
- मध्य प्रदेश के गुना जिले का भैसाना गांव इन दिनों एक अनूठी गाथा लिख रहा है, जहाँ आयोजित महायज्ञ केवल धर्म-कर्म का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में 'सतयुगी' दौर की वापसी बन गया है। इस महायज्ञ में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुँचे हैं, और आज इसका अंतिम दिन है, जिससे पूरा भैसाना 'राममय' हो गया है। यह आयोजन आधुनिक दौर के वीआईपी कल्चर और राजनीतिक प्रचार से हटकर पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुका है। आयोजकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बिना किसी सरकारी मदद या राजनीतिक संरक्षण के भी, यदि नीयत साफ हो और संगठन में अनुशासन हो, तो ऐसे विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किए जा सकते हैं। यह महायज्ञ गुना जिले की पहचान बन गया है और संदेश दे रहा है कि 'धर्म' का अर्थ दिखावा नहीं, बल्कि 'सेवा' और 'समानता' है। यज्ञ स्थल को प्राचीन भारतीय वास्तुशैली के अनुरूप तैयार किया गया है, जहाँ मिट्टी की सुगंध, वैदिक मंत्रों का गुंजन और पारंपरिक वेशभूषा में स्वयंसेवक ऋषियों की कुटिया जैसा आभास कराते हैं, जो मन को असीम शांति प्रदान करता है। इस महायज्ञ की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता 'समानता' का मंत्र है, जहाँ वीआईपी कल्चर का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया है। बड़े से बड़े रसूखदार, प्रशासनिक अधिकारी या नेता—सभी को आम श्रद्धालुओं की तरह ही लाइन में लगकर दर्शन करने पड़ रहे हैं। भोजन व्यवस्था में भी वीआईपी के लिए कोई अलग कमरा या व्यवस्था नहीं है; हर कोई एक साथ जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहा है, जो समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटा रहा है। पूरे यज्ञ परिसर में किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा, नेता का पोस्टर या फोटो नहीं दिखाई देता, केवल भगवान की भक्ति और सेवा भाव का ही बोलबाला है। श्रद्धालुओं के लिए विशाल और व्यवस्थित निशुल्क पार्किंग, दिन-रात चलने वाला 'अन्नपूर्णा सेवा' का विशाल भंडारा जहाँ गर्म और सात्विक भोजन उपलब्ध है, और भीषण गर्मी में शीतल पेयजल की निरंतर व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम, निजी सुरक्षा गार्ड और हजारों की संख्या में समर्पित स्वयंसेवक दिन-रात निस्वार्थ भाव से सुरक्षा और सेवा में तत्पर हैं, जो साबित करता है कि आज भी समाज में इंसानियत जिंदा है।1
- गुना पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के निर्देश पर जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मानसिंह ठाकुर के मार्गदर्शन और एसडीओपी राघौगढ़ श्रीमती दीपा डोडवे के पर्यवेक्षण में, धरनावदा थाना पुलिस ने अवैध गांजा तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए दो गांजा तस्करों को गिरफ्तार करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। गत 28 मई 2026 की शाम को धरनावदा थाना पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक ग्लेमर मोटर साइकिल क्रमांक MP08 MW 8347 पर दो व्यक्ति बोरखेड़ा, बेरखेड़ी गांव के रास्ते से गुना हाईवे होकर शिवपुरी की तरफ गांजा बेचने जा रहे हैं। इस सूचना पर तत्काल झागर चौकी से पुलिस की एक टीम बेरखेड़ी गांव की पुलिया के पास पहुंची और घात लगाकर संदिग्ध मोटर साइकिल और व्यक्तियों का इंतजार किया। कुछ देर बाद, मुखबिर द्वारा बताए हुलिए की मोटर साइकिल पर दोनों व्यक्तियों के आने पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम श्यामबाबू पुत्र रोड़ेलाल भील (उम्र 50 साल, निवासी ग्राम मेरियाखेड़ी थाना चांचौड़ा) और बहादुर सिंह पुत्र नारायण सिंह राजपूत (उम्र 55 साल, निवासी ग्राम बरवटपुरा थाना चांचौड़ा, जिला गुना) बताए। मुखबिर की सूचना के आधार पर विधिवत तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद प्लास्टिक के कट्टे से कुल 2.988 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ। पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से बरामद गांजा, जिसकी कीमत 60 हजार रुपये है, और तस्करी में प्रयुक्त मोटर साइकिल, जिसकी कीमत 50 हजार रुपये है, सहित कुल 1.10 लाख रुपये का मशरूका विधिवत जब्त किया गया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर धरनावदा थाने में अपराध क्रमांक 104/26 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। नशे के खिलाफ धरनावदा थाना पुलिस की इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक रुहिल शर्मा के नेतृत्व में झागर चौकी प्रभारी सउनि अनिल कदम, प्रधान आरक्षक जोगेश शर्मा, प्रधान आरक्षक अजय कुमार, आरक्षक राघवेन्द्र बुन्देला, आरक्षक राजेश परिहार, आरक्षक रविन्द्र सोलंकी और आरक्षक पवन शर्मा का विशेष योगदान रहा।2
- गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के मार्गदर्शन में आज जिला कलेक्ट्रेट सभागार में “दिव्यांगजन जागरूकता, संवेदनशीलता एवं समावेशी अभिसरण योजना” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाना है, साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर समावेशी और अधिकार-आधारित सेवाओं को सुदृढ़ करना है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि समाजहित में काम करने वाली संस्थाओं और फाउंडेशन के प्रयासों का सम्मान किया जाना चाहिए, और प्रशासन को ऐसे सकारात्मक कार्यों में हरसंभव सहयोग देना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय कार्यशाला का लाभ सभी प्रतिभागियों को मिलेगा, विशेष रूप से उन दिव्यांगजन भाई-बहनों को, जिनके कल्याण और सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कलेक्टर कन्याल ने समृद्धि केंद्र के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि देश में स्थापित केवल तीन समृद्धि केंद्रों में से एक गुना जिले में संचालित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना की शुरुआत केंद्रीय मंत्री एवं सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। समृद्धि केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजन को डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रमों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर ने आगे कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, आजीविका, लोक निर्माण, आपदा प्रबंधन, जल एवं स्वच्छता जैसे विभागों के मध्य समन्वित और समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करना भी है, जिससे दिव्यांगजन हेतु प्रभावी सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। कार्यशाला के दौरान, प्रतिभागियों को अनुभवात्मक गतिविधियों, संवाद और समूह अभ्यासों के माध्यम से दिव्यांगजन से जुड़े सामाजिक, व्यवहारिक एवं प्रशासनिक पहलुओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा। इसमें समावेशी संचार, विभागीय भूमिकाएं, आपदा प्रबंधन में दिव्यांगजन की आवश्यकताएं और रिजल्ट बेस्ड मैनेजमेंट जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। आज आयोजित कार्यशाला में डॉ. प्रवीक वशिष्ठ (प्रॉस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटिस्ट तथा पुनर्वास विशेषज्ञ, दिल्ली) और सुश्री कृपाली बिदाये (समावेशन एवं इंटरसेक्शनैलिटी विषय की विशेषज्ञ परामर्शदाता, मुंबई) द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों का संचालन किया गया। इस कार्यशाला के माध्यम से जिला स्तर पर ऐसी समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भविष्य में योजनाओं, सेवाओं और संसाधनों तक दिव्यांगजन की पहुंच और भागीदारी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। कार्यशाला में सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग श्री दिनेश चंदेल सहित संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- छबड़ा कस्बे से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित भुवाखेड़ी ग्राम के ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र पर वीर सावरकर जयंती अत्यंत उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर देश के शहीदों की स्मृति में विभिन्न प्रजातियों के कुल 51 छायादार और फलदार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में केंद्र से जुड़े अनेक श्रद्धालु और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर एस.एल. नागर ने की, जबकि स्वामी ध्यान गगन मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने इस अवसर पर आमजन को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है और भारत के कई राज्य भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। स्वामी ध्यान गगन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज का युवा वर्ग 'खाओ, पियो और मौज करो' की मानसिकता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों को उन शहीदों को याद करने का आह्वान किया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई। मुख्य वक्ता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में देश को बाहरी खतरों से कहीं अधिक बढ़ते तापमान और पर्यावरण संकट से गंभीर खतरा है। स्वामी ध्यान गगन ने सभी से यह भी आह्वान किया कि प्रत्येक तीज-त्योहार, उत्सव, जयंती, जन्म एवं पुण्यतिथि पर पौधरोपण अवश्य करें, क्योंकि उनके अनुसार "धरती का वास्तविक श्रृंगार पेड़ ही हैं।"3
- कुंभराज तहसील के ग्राम खेजड़ा रामा में गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पारिवारिक अनबन से क्षुब्ध एक महिला गांव में स्थित ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। सुबह करीब 5 बजे भोर के उजाले में महिला को टावर पर देख ग्रामीणों के होश उड़ गए, जिसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी, और पटवारी प्रवीण सिंह राणा अपनी टीमों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी आपातकालीन तैयारियों के साथ बुलाया गया था। महिला अत्यधिक आक्रोश में थी और नीचे आने को तैयार नहीं थी, जिसके मद्देनजर प्रशासनिक अधिकारियों ने बल प्रयोग या जल्दबाजी करने के बजाय बेहद संवेदनशील रणनीति अपनाई। उन्होंने लाउडस्पीकर और सीधे संवाद के जरिए महिला से बातचीत की, उसे ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी और प्रशासनिक व कानूनी दायरे में रहकर उसे न्याय दिया जाएगा, बस वह सुरक्षित नीचे आ जाए। प्रशासन के इस मानवीय चेहरे और ठोस आश्वासन का महिला पर सकारात्मक असर हुआ, जिससे उसका गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। करीब तीन घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामा का सुखद अंत होते ही वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। टावर से नीचे आते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तत्काल महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। यह घटना सुबह 5 बजे शुरू हुई थी, जिसमें राजस्व, पुलिस, नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर मोर्चा संभाला। प्रशासन ने बिना किसी दबाव के, सिर्फ बातचीत और दिलासे (काउंसलिंग) के दम पर महिला को सुरक्षित नीचे उतारा, जो संवेदनशीलता की मिसाल साबित हुई। महिला को सुरक्षित सौंपने के बाद अब पुलिस इस पारिवारिक मतभेद और विवाद के मूल कारणों की बारीकी से जांच कर रही है। कुंभराज प्रशासन और पुलिस टीम का यह त्वरित और सूझबूझ भरा प्रयास अत्यंत सराहनीय है, जिसने संकट के समय मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर एक बहुमूल्य जान बचाई।4
- गुरुवार को हरनावदाशाहजी कस्बे के मनोहरथाना मार्ग पर गणेशपुरा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दो बाइक और एक बस की भिड़ंत में पांच लोग घायल हो गए, जबकि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, इस हादसे में गंगोहणी, मनोहरथाना निवासी 25 वर्षीय बाइक सवार अर्जुन पुत्र नाथूलाल की मौके पर ही मौत हो गई। अर्जुन की शादी करीब दो वर्ष पहले गणेशपुरा में हुई थी और वह किसी कार्यक्रम में ससुराल आया था, बाइक से हरनावदाशाहजी से गणेशपुरा की ओर जा रहा था। घायलों में बस चालक राजेश पुत्र घासीलाल भील (40) निवासी कुम्भाखेड़ी, परिचालक नंदकिशोर पुत्र बालचंद राव (42) निवासी गणेशपुरा काकोणी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बाइक सवार छोटूलाल पुत्र मांगीलाल राठौर (65), उनके पुत्र लोकेश राठौर (36) निवासी हरनावदाशाहजी और दूसरी बाइक पर सवार दिनेश पुत्र बंशीलाल लोधा (24) निवासी खेड़ी जागीर भी घायल हुए हैं। घटना स्थल पर दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं, जबकि बस चंदीपुर की ओर जा रही थी और उसमें केवल चालक और परिचालक ही सवार थे। पुलिस ने बताया कि मनोहरथाना रोड पर यह दुर्घटना अचानक हुई, हालांकि हादसे के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। सभी घायलों को तत्काल हरनावदाशाहजी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें झालावाड़ रेफर कर दिया गया। मृतक अर्जुन के शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।3