नेपुरा राजकीय हाई स्कूल में अव्यवस्था उजागर: 60 छात्र पंजीकृत, विद्यालय में नहीं मिला एक भी छात्र, शिक्षक ड्यूटी पर रिपब्लिक रैनैसां ब्यूरो हरी सिंह वर्मा महोबा जनपद के विकासखंड पनवाड़ी अंतर्गत राजकीय हाई स्कूल नेपुरा में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। विद्यालय के निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर सुनसान मिला, जबकि विद्यालय में लगभग 60 छात्र पंजीकृत बताए जा रहे हैं। मौके पर एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला और सभी कक्षाएं खाली पड़ी दिखाई दीं। विद्यालय परिसर के चारों ओर झाड़ियां और जंगल फैला हुआ है, वहीं बाउंड्रीवाल भी अधूरी पड़ी है, जिससे विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिसर की स्थिति देखकर साफ प्रतीत होता है कि लंबे समय से रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रदीप कुमार और आशीष कुमार उपस्थित मिले। उन्होंने बताया कि प्रधानाचार्य और सहायक अध्यापक सहित तीनों शिक्षकों की ड्यूटी पुलिस एसआई परीक्षा में लगाई गई है, जिसके कारण शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सके। इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य इंद्रपाल ने भी बताया कि परीक्षा ड्यूटी के कारण शिक्षकों की अनुपस्थिति हुई है। हालांकि संबंधित इंटर कॉलेज से जानकारी करने पर बताया गया कि वार्षिक परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन विद्यालय अभी पूर्ण रूप से बंद नहीं हुए हैं और अन्य विद्यालयों में छात्र आ रहे हैं। ऐसे में नेपुरा हाई स्कूल में छात्रों की पूर्ण अनुपस्थिति और शिक्षकों के न मिलने से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं इस मामले में जब जिला विद्यालय निरीक्षक महोबा से मोबाइल पर संपर्क किया गया तो उन्होंने चित्रकूट में मीटिंग होने की बात कही और बिना विस्तृत जवाब दिए फोन काट दिया।
नेपुरा राजकीय हाई स्कूल में अव्यवस्था उजागर: 60 छात्र पंजीकृत, विद्यालय में नहीं मिला एक भी छात्र, शिक्षक ड्यूटी पर रिपब्लिक रैनैसां ब्यूरो हरी सिंह वर्मा महोबा जनपद के विकासखंड पनवाड़ी अंतर्गत राजकीय हाई स्कूल नेपुरा में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। विद्यालय के निरीक्षण के दौरान स्कूल परिसर सुनसान मिला, जबकि विद्यालय में लगभग 60 छात्र पंजीकृत बताए जा रहे हैं। मौके पर एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला और सभी कक्षाएं खाली पड़ी दिखाई दीं। विद्यालय परिसर के चारों ओर झाड़ियां और जंगल फैला हुआ है, वहीं बाउंड्रीवाल भी अधूरी पड़ी है, जिससे विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिसर की स्थिति देखकर साफ प्रतीत होता है कि लंबे समय से रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्रदीप कुमार और आशीष कुमार उपस्थित मिले। उन्होंने बताया कि प्रधानाचार्य और सहायक अध्यापक सहित तीनों शिक्षकों की ड्यूटी पुलिस एसआई परीक्षा में लगाई गई है, जिसके कारण शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं हो सके। इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य इंद्रपाल ने भी बताया कि परीक्षा ड्यूटी के कारण शिक्षकों की अनुपस्थिति हुई है। हालांकि संबंधित इंटर कॉलेज से जानकारी करने पर बताया गया कि वार्षिक परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन विद्यालय अभी पूर्ण रूप से बंद नहीं हुए हैं और अन्य विद्यालयों में छात्र आ रहे हैं। ऐसे में नेपुरा हाई स्कूल में छात्रों की पूर्ण अनुपस्थिति और शिक्षकों के न मिलने से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं इस मामले में जब जिला विद्यालय निरीक्षक महोबा से मोबाइल पर संपर्क किया गया तो उन्होंने चित्रकूट में मीटिंग होने की बात कही और बिना विस्तृत जवाब दिए फोन काट दिया।
- आगरा में गैस की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। जिलाधिकारी आगरा और जिला आपूर्ति विभाग ने कहा कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें। डीएम ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि गैस की सप्लाई सुचारू रूप से जारी है।1
- बांदा । जिले के नरैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बिजली न होने के कारण मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में घायल मरीज का इलाज किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में अस्पताल कर्मी अंधेरे के बीच मोबाइल की रोशनी में घायल की मरहम-पट्टी करते नजर आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि घटना 10 मार्च की है। बिजली आपूर्ति बाधित होने के दौरान अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने मोबाइल टॉर्च की मदद से घायल का इलाज किया। जबकि अस्पतालों में इनवर्टर और पावर बैकअप की व्यवस्था होने का दावा किया जाता है।मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि वीडियो उनके संज्ञान में आया है। यदि बिजली बैकअप होने के बावजूद ऐसी स्थिति बनी है तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- बांदा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण झांसी मंडल के डीआरएम अनिरुद्ध कुमार ने किया।1
- उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। बसपा सरकार के समय बनी मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के मकानों पर जहां-जहां अवैध कब्जा है, उन्हें खाली कराकर अब आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को देने का आदेश दिया गया है। यह फैसला 15 मार्च को कांशीराम जयंती से पहले लिया गया है, जिससे प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। बसपा सरकार में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को सस्ती दरों पर पक्के घर देना था। लेकिन कई जगहों पर इन मकानों पर अवैध कब्जे हो गए थे। अब योगी सरकार ने इन्हें खाली कराकर पात्र लोगों को देने के निर्देश दिए हैं। क्या इससे दलित वोट बैंक की राजनीति बदलेगी? पूरी खबर जानिए इस वीडियो में।1
- 📍बांदा के अंडौली गाँव में सरकारी योजनाओं में लूट,धरातल पर दम तोडती योजनाएं ☀️विकास के नाम पर गरीबों से लूट,चीखते चिल्लाते लोग 🔥पीएम आवास, शौचालय में लूट,गरीबों को नहीं मिली प्रधानमंत्री आवास की मजदूरी 🛑शिकायतों के बाद भी नहीं हो रही सुनवाई, कार्यवाही की मांग #बांदा1
- बाँदा। उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था के चमकते दावों के बीच जिला महिला अस्पताल बाँदा से एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जो व्यवस्था की सच्चाई को बिना बोले ही बयान कर देता है।मामला ओपीडी कक्ष नंबर 26 का है। 13 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 12:12 बजे एक महिला मरीज विनीता डॉक्टर को दिखाने पहुंची। मरीज के साथ आए तीमारदार को गार्ड ने तुरंत रोक दिया—कहा गया कि “पुरुषों का अंदर जाना मना है।” नियमों की दुहाई इतनी सख्ती से दी गई मानो अस्पताल अनुशासन का आदर्श मंदिर हो।लेकिन इसी बीच एक दवा कंपनी का एमआर (Medical Representative) पूरे आत्मविश्वास के साथ ओपीडी कक्ष के अंदर प्रवेश कर गया। न कोई रोक, न कोई टोक। अब सवाल उठता है— अगर तीमारदार का अंदर जाना नियम के खिलाफ है, तो एमआर का अंदर जाना किस नियम की किताब में लिखा है? जब इस पूरे मामले को लेकर फोन पर महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह से बात की गई, तो उनका जवाब भी कम दिलचस्प नहीं था। उन्होंने कहा कि “पुरुषों का अंदर जाना मना है।”लेकिन जब उनसे पूछा गया कि फिर एमआर अंदर कैसे पहुंच गए, तो जवाब देने के बजाय उन्होंने “ओटी में हूँ” कहकर फोन ही काट दिया।अब अस्पताल के गलियारों में लोग तंज कसते हुए पूछ रहे हैं—क्या मरीज और उसके तीमारदार से ज्यादा जरूरी एमआर की मुलाकात होती है? क्या अस्पतालों में इलाज से पहले दवा कंपनियों का ‘प्रोटोकॉल’ पूरा करना जरूरी हो गया है?बाँदा के महिला अस्पताल की यह तस्वीर एक बार फिर वही पुराना सवाल खड़ा कर रही है—क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं, और ‘खास मेहमानों’ के लिए दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं?क्योंकि यहाँ लगता है कि मरीज इंतजार कर सकता है, तीमारदार बाहर खड़ा रह सकता है…लेकिन एमआर का प्रवेश किसी वीआईपी पास से कम नहीं!1
- पवित्र माह रमजान के अलविदा जुमा पर कस्बा पनवाड़ी1
- उत्तर प्रदेश में परिषदीय अनुदेशकों ने जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद के आवास में उनके जन्मदिन के अवसर पर आभार पत्र सौंपकर धन्यवाद ज्ञापित किया।1
- 13 साल से कोमा में पड़े 32 साल के हरीश राणा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और भावुक कर देने वाला फैसला सुनाया है। साल 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद हरीश राणा को गंभीर चोट आई थी और तब से वह कोमा में थे। उनकी जिंदगी मशीनों और मेडिकल ट्यूब के सहारे चल रही थी। लंबे समय तक उम्मीद लगाए बैठे माता-पिता ने आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि उनके बेटे के ठीक होने की अब कोई संभावना नहीं है, इसलिए उसे इस पीड़ा से मुक्ति दी जाए। मामले की गंभीरता को समझते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दी। बताया जा रहा है कि फैसला सुनाते समय अदालत का माहौल भी भावुक हो गया। कभी-कभी इंसानियत सिर्फ जिंदगी बचाने में नहीं, बल्कि किसी को सम्मान के साथ विदा करने में भी होती है।1