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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। बसपा सरकार के समय बनी मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के मकानों पर जहां-जहां अवैध कब्जा है, उन्हें खाली कराकर अब आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को देने का आदेश दिया गया है। यह फैसला 15 मार्च को कांशीराम जयंती से पहले लिया गया है, जिससे प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। बसपा सरकार में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को सस्ती दरों पर पक्के घर देना था। लेकिन कई जगहों पर इन मकानों पर अवैध कब्जे हो गए थे। अब योगी सरकार ने इन्हें खाली कराकर पात्र लोगों को देने के निर्देश दिए हैं। क्या इससे दलित वोट बैंक की राजनीति बदलेगी? पूरी खबर जानिए इस वीडियो में।
Ankit Speaks News
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। बसपा सरकार के समय बनी मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के मकानों पर जहां-जहां अवैध कब्जा है, उन्हें खाली कराकर अब आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को देने का आदेश दिया गया है। यह फैसला 15 मार्च को कांशीराम जयंती से पहले लिया गया है, जिससे प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। बसपा सरकार में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को सस्ती दरों पर पक्के घर देना था। लेकिन कई जगहों पर इन मकानों पर अवैध कब्जे हो गए थे। अब योगी सरकार ने इन्हें खाली कराकर पात्र लोगों को देने के निर्देश दिए हैं। क्या इससे दलित वोट बैंक की राजनीति बदलेगी? पूरी खबर जानिए इस वीडियो में।
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- छतरपुर बस स्टैंड पर बस पकड़ने आए किसान की अचानक मौत.? खजुराहो जाने वाली बस के पास पहुंचते ही गिर पड़े 60 वर्षीय गणेश कुशवाहा; गर्मी और हार्ट अटैक की आशंका, पुलिस ने परिजनों को दी सूचना. छतरपुर के श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतर्राजीय बस स्टैंड पर गुरुवार को एक व्यक्ति की अचानक मौत का मामला सामने आया है। बस स्टैंड पर बस में बैठने पहुंचे 65 वर्षीय व्रद्ध अचानक बस के बाहर ही गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें उठाकर छाया में किया और पानी पिलाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। लोगों के बीच भीषण गर्मी और हार्ट अटैक को मौत की संभावित वजह माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान खजुराहो थाना क्षेत्र के करियाबीजा गांव निवासी 60 वर्षीय किसान गणेश कुशवाहा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि गणेश कुशवाहा किसी काम से छतरपुर आए हुए थे। गुरुवार सुबह करीब 11 बजे वह वापस अपने गांव जाने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतर्राजीय बस स्टैंड पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह खजुराहो जाने वाली बस के पास पहुंचे ही थे और जैसे ही उसमें बैठने को चढ़ने वाले थे वहः अचानक बस के बाहर ही चक्कर खाकर गिर पड़े। और उनकी मौत हो गई। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें धूप से उठाकर छाया में लिटाया और पानी पिलाने की कोशिश की। उनके चेहरे पर पानी भी डाला गया, लेकिन वह अचेत ही रहे। कुछ ही देर में लोगों को समझ आ गया कि उनकी मौत हो चुकी है। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर अपर ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस बुलवाई गई। इसी दौरान मृतक के मोबाइल पर आए एक फोन कॉल के जरिए उनकी पहचान हो सकी। फोन करने वाले व्यक्ति से बात करने पर पता चला कि मृतक गणेश कुशवाहा खजुराहो के पास स्थित करियाबीजा गांव के निवासी हैं। इसके बाद पुलिस ने परिजनों को घटना की सूचना दीबताया कि गणेश कुशवाहा किसी काम से छतरपुर आए थे और काम खत्म होने के बाद वापस अपने गांव लौट रहे थे। घटना के दौरान बस स्टैंड के सामने स्थित एक होटल में काम करने वाले युवक आदर्श वर्मा ने भी मानवता दिखाते हुए मदद की। उन्होंने गणेश कुशवाहा को गिरता हुआ देखा तो तुरंत उन्हें उठाकर छाया में लिटाया और पानी पिलाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और शव को आगे की कार्रवाई के लिए अस्पताल भिजवाया गया है।1
- लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। लोग एक-एक घंटे से लाइन में खड़े हैं और अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और बुजुर्ग भी गैस सिलेंडर के लिए परेशान नजर आ रहे हैं। आखिर इस समस्या का समाधान कब होगा?1
- छतरपुर। पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कानून बनाए जाने की मांग के समर्थन में AISNA (ऑल इंडिया स्मॉल न्यूजपेपर्स एसोसिएशन) द्वारा आज कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस संबंध में संगठन के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष मुकेश मिश्रा ने जिले के सभी पत्रकारों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम में शामिल होने का निवेदन किया है। वहीं AISNA संगठन के प्रदेश सदस्य नवनीत जैन ‘बंटी भैया’ ने ज्ञापन कार्यक्रम की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए लंबे समय से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग उठाई जा रही है। इसी मांग को लेकर संगठन के पदाधिकारी और पत्रकार कलेक्टर महोदय के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपेंगे। उन्होंने सभी पत्रकार साथियों से एकजुट होकर कार्यक्रम में शामिल होने की अपील भी की है।1
- यह वीडियो है महालक्ष्मी नगर कॉलोनी की वार्ड नंबर 38 गली नंबर 2 यह 8 साल से रोड भी नहीं डाला ओर नली भी नहीं बनी जिसके कारण आने जाने में असुविधा होती है श्री मान जी से निवेदन है कि मेरे यह कार्य जल्द से जल्द कराया जाय क्योंकि इधर पर लोग परेशान होते है एक नली है मगर पानी नहीं निकल रहा है रोड पहले मालवा ओर गिट्टी डाल के चले गए थे फिर 5 साल से नहीं आय बोलते है कि इधर अभी मकान नहीं है मकान भी बन गए ओर अभी तक कोई सुविधा नहीं दी1
- नगरपालिका बनी अखाड़ा #nagarpalika #tikamgarh #baithak टीकमगढ़ नगर पालिका बैठक में खतरनाक गरजे वार्ड 18 पार्षद अजय यादव... हम पागल नहीं है जो यहाँ आप नास्ता चाय कर रहें और टेंडर नहीं खुल रहा। हम पार्षद है, हमें जनता ने चुना है, अगर हमारे वार्ड के काम नहीं होंगे तो इस नगर पालिका का कोई औचित्य नहीं.... #NagarPalikaParishadTikamgarhNagarPalikaTikamgarh1
- Post by राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़1
- छतरपुर जिले से लगे हुए पन्ना जिले से खबर आ रही है निकालकर केन–बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूँझ मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों द्वारा जय किसान संगठन के बैनर तले चलाया जा रहा “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन दूसरे दिन कई उतार-चढ़ावों के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा। दिन भर चले तनावपूर्ण घटनाक्रम, ताला बंदी, गिरफ्तारी और हल्के लाठीचार्ज जैसे घटनाक्रमों के बीच अंततः प्रशासन को किसानों के साथ वार्ता करनी पड़ी और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा “यदि प्रशासन अपने वादे से मुकरा या तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन पहले से ज्यादा व्यापक और तेज होगा। आंदोलन का दूसरा दिन रहा बेहद तनावपूर्ण दूसरे दिन भी हजारों किसान और आदिवासी महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं। प्रशासन द्वारा पानी की सप्लाई रोक दिए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि लोगों की संख्या और बढ़ती गई। भीड़ बढ़ने और आंदोलन मजबूत होने से जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ता गया। इसी बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। जब प्रशासन ने आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर को चर्चा के लिए बुलाया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी प्राथमिक मांग है कि परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज प्रभावित ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे पूरी जानकारी के साथ आगे की प्रक्रिया तय कर सकें। बताया जाता है कि प्रशासन ने उन्हें दस्तावेज दिखाने के नाम पर अंदर बुलाया, लेकिन उसी दौरान परिसर में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी गई और अमित भटनागर को उससे संबंधित नोटिस थमा दिया गया। इस कार्रवाई को आंदोलनकारियों ने प्रशासन की तानाशाही और अमानवीय रवैया बताते हुए विरोध किया। इसी दौरान एसडीएम और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। गिरफ्तारी की घोषणा, महिलाओं का आक्रोश स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमित भटनागर ने अपनी गिरफ्तारी देने की घोषणा कर दी। उनकी घोषणा के बाद पन्ना एसडीएम ने उनको गिरफ्तार कर अंदर ले जाने लगे। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं और किसानों ने भी गिरफ्तारी देने का ऐलान कर दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और हल्का लाठीचार्ज भी हुआ, इसी दौरान अमित भटनागर और एसडीएम पन्ना के बीच में तीखी नोकझोंक भी हुई। जय किसान संगठन के कार्यकर्ता मंगल यादव को भी इस दौरान चोट लगने की जानकारी सामने आई है। स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया, लेकिन हजारों किसानों और महिलाओं ने आंदोलन स्थल छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। दबाव में प्रशासन को करनी पड़ी वार्ता बड़ी संख्या में महिलाओं और किसानों के गिरफ्तारी देने की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने स्थिति जटिल हो गई। अंततः प्रशासन ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए बुलाया और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद जय किसान संगठन ने निम्नलिखित शर्तों पर “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की। सहमति के मुख्य बिंदु परियोजना प्रभावित प्रत्येक गांव में ग्रामीण प्रशासन द्वारा दिए गए प्रारूप में परियोजना से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करेंगे। इन समस्याओं को जिला प्रशासन को सौंपने के बाद 7 दिन के भीतर उनके निराकरण की प्रक्रिया कर दी जाएगी। जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक प्रभावित गांवों में किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रूँझ परियोजना से संबंधित प्रशासनिक आदेश, धारा 11 की कार्यवाही, ग्राम सभा की कार्यवाही, अवार्ड तथा अन्य सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि 5 दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन के माध्यम से सरकार को भेजी जाएंगी ये मांगें प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से उनके बसे-बसाए गांव जबरन न छीने जाएं। यदि विस्थापन आवश्यक हो तो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास किया जाए। प्रभावित परिवारों को गांव के बदले गांव बसाकर और कृषि भूमि देकर पुनर्वास किया जाए। प्रभावित महिलाओं के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाए। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन आंदोलन की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मामले का संज्ञान लिया और अपने प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव को आंदोलन स्थल भेजा। मनोज यादव ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अखिलेश यादव का संदेश पढ़कर सुनाया और किसानों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों और आदिवासी परिवारों को अपनी मांगों के लिए दो-दो दिन तक आंदोलन करना पड़ रहा है, जिससे सरकार की संवेदनहीनता उजागर होती है। व्यापक जनसमर्थन के साथ हुआ आंदोलन इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, आदिवासी महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पन्ना जिले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होते दिखाई दिए इसमें प्रमुख रूप से अमित भटनागर के साथ, बब्लू यादव, महेश आदिवासी, दिव्या अहिरवार, चिरौनिया आदिवासी,सारनिया आदिवासी, कमलाबाई मंगल यादव, पप्पू आदिवासी, राजू आदिवासी, केदार आदिवासी, लेखराम यादव, लक्ष्मी प्रसाद विश्वकर्मा, कल्लू आदिवासी गनपत, आदिवासी राजाबेटी आदिवासी, अभू आदिवासी, हल्कुश यादव, रवि आदिवासी,रामकिशोर यादव, राजकुमार तिवारी, शंकर आदिवासी, मुकुंदे आदिवासी, वंश गोपाल सोनी, कमलारानी आदिवासी, शिवरतन दयाराम आदिवासी, महेश आदिवासी, जगदीश आदिवासी, यादव, विद्या रानी, आदिवासी राजू आदिवासी सहित हजारों आदिवासी किसान सहभागी हुये। मीडिया सेल जय किसान संगठन ✊ जय किसान4
- उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। बसपा सरकार के समय बनी मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के मकानों पर जहां-जहां अवैध कब्जा है, उन्हें खाली कराकर अब आर्थिक रूप से कमजोर दलित परिवारों को देने का आदेश दिया गया है। यह फैसला 15 मार्च को कांशीराम जयंती से पहले लिया गया है, जिससे प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। बसपा सरकार में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को सस्ती दरों पर पक्के घर देना था। लेकिन कई जगहों पर इन मकानों पर अवैध कब्जे हो गए थे। अब योगी सरकार ने इन्हें खाली कराकर पात्र लोगों को देने के निर्देश दिए हैं। क्या इससे दलित वोट बैंक की राजनीति बदलेगी? पूरी खबर जानिए इस वीडियो में।1