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हमारे यहां पर पानी का निकास नहीं हो रहा है इसके लिए वीडियो यह वीडियो है महालक्ष्मी नगर कॉलोनी की वार्ड नंबर 38 गली नंबर 2 यह 8 साल से रोड भी नहीं डाला ओर नली भी नहीं बनी जिसके कारण आने जाने में असुविधा होती है श्री मान जी से निवेदन है कि मेरे यह कार्य जल्द से जल्द कराया जाय क्योंकि इधर पर लोग परेशान होते है एक नली है मगर पानी नहीं निकल रहा है रोड पहले मालवा ओर गिट्टी डाल के चले गए थे फिर 5 साल से नहीं आय बोलते है कि इधर अभी मकान नहीं है मकान भी बन गए ओर अभी तक कोई सुविधा नहीं दी
ROHIT RAJPOOT
हमारे यहां पर पानी का निकास नहीं हो रहा है इसके लिए वीडियो यह वीडियो है महालक्ष्मी नगर कॉलोनी की वार्ड नंबर 38 गली नंबर 2 यह 8 साल से रोड भी नहीं डाला ओर नली भी नहीं बनी जिसके कारण आने जाने में असुविधा होती है श्री मान जी से निवेदन है कि मेरे यह कार्य जल्द से जल्द कराया जाय क्योंकि इधर पर लोग परेशान होते है एक नली है मगर पानी नहीं निकल रहा है रोड पहले मालवा ओर गिट्टी डाल के चले गए थे फिर 5 साल से नहीं आय बोलते है कि इधर अभी मकान नहीं है मकान भी बन गए ओर अभी तक कोई सुविधा नहीं दी
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- टीकमगढ़ जिले के नगर बल्देवगढ़ के पास स्थित कैलपुरा में 7 मार्च को गोवंश हत्या की घटना का अब तक खुलासा नहीं होने से लोगों में भारी आक्रोश है। नाराज नगरवासियों और हिंदू संगठनों ने बाजार बंद कर बल्देवगढ़ बस स्टैंड मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। #baldevgarh #tikamgarh #mppolice1
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- छतरपुर जिले से लगे हुए पन्ना जिले से खबर आ रही है निकालकर केन–बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना और रूँझ मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों द्वारा जय किसान संगठन के बैनर तले चलाया जा रहा “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन दूसरे दिन कई उतार-चढ़ावों के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा। दिन भर चले तनावपूर्ण घटनाक्रम, ताला बंदी, गिरफ्तारी और हल्के लाठीचार्ज जैसे घटनाक्रमों के बीच अंततः प्रशासन को किसानों के साथ वार्ता करनी पड़ी और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा “यदि प्रशासन अपने वादे से मुकरा या तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन पहले से ज्यादा व्यापक और तेज होगा। आंदोलन का दूसरा दिन रहा बेहद तनावपूर्ण दूसरे दिन भी हजारों किसान और आदिवासी महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर में डटी रहीं। प्रशासन द्वारा पानी की सप्लाई रोक दिए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ बल्कि लोगों की संख्या और बढ़ती गई। भीड़ बढ़ने और आंदोलन मजबूत होने से जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ता गया। इसी बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के कुछ हिस्सों को बंद कर दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। जब प्रशासन ने आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर को चर्चा के लिए बुलाया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी प्राथमिक मांग है कि परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज प्रभावित ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे पूरी जानकारी के साथ आगे की प्रक्रिया तय कर सकें। बताया जाता है कि प्रशासन ने उन्हें दस्तावेज दिखाने के नाम पर अंदर बुलाया, लेकिन उसी दौरान परिसर में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी गई और अमित भटनागर को उससे संबंधित नोटिस थमा दिया गया। इस कार्रवाई को आंदोलनकारियों ने प्रशासन की तानाशाही और अमानवीय रवैया बताते हुए विरोध किया। इसी दौरान एसडीएम और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। गिरफ्तारी की घोषणा, महिलाओं का आक्रोश स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमित भटनागर ने अपनी गिरफ्तारी देने की घोषणा कर दी। उनकी घोषणा के बाद पन्ना एसडीएम ने उनको गिरफ्तार कर अंदर ले जाने लगे। उनके समर्थन में बड़ी संख्या में मौजूद महिलाओं और किसानों ने भी गिरफ्तारी देने का ऐलान कर दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी और हल्का लाठीचार्ज भी हुआ, इसी दौरान अमित भटनागर और एसडीएम पन्ना के बीच में तीखी नोकझोंक भी हुई। जय किसान संगठन के कार्यकर्ता मंगल यादव को भी इस दौरान चोट लगने की जानकारी सामने आई है। स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया, लेकिन हजारों किसानों और महिलाओं ने आंदोलन स्थल छोड़ने से साफ इनकार कर दिया और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। दबाव में प्रशासन को करनी पड़ी वार्ता बड़ी संख्या में महिलाओं और किसानों के गिरफ्तारी देने की घोषणा के बाद प्रशासन के सामने स्थिति जटिल हो गई। अंततः प्रशासन ने आंदोलनकारियों को वार्ता के लिए बुलाया और कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद जय किसान संगठन ने निम्नलिखित शर्तों पर “न्याय सत्याग्रह” आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की। सहमति के मुख्य बिंदु परियोजना प्रभावित प्रत्येक गांव में ग्रामीण प्रशासन द्वारा दिए गए प्रारूप में परियोजना से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख करेंगे। इन समस्याओं को जिला प्रशासन को सौंपने के बाद 7 दिन के भीतर उनके निराकरण की प्रक्रिया कर दी जाएगी। जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक प्रभावित गांवों में किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रूँझ परियोजना से संबंधित प्रशासनिक आदेश, धारा 11 की कार्यवाही, ग्राम सभा की कार्यवाही, अवार्ड तथा अन्य सभी दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि 5 दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन के माध्यम से सरकार को भेजी जाएंगी ये मांगें प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों से उनके बसे-बसाए गांव जबरन न छीने जाएं। यदि विस्थापन आवश्यक हो तो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास किया जाए। प्रभावित परिवारों को गांव के बदले गांव बसाकर और कृषि भूमि देकर पुनर्वास किया जाए। प्रभावित महिलाओं के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाए। आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन आंदोलन की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मामले का संज्ञान लिया और अपने प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव को आंदोलन स्थल भेजा। मनोज यादव ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अखिलेश यादव का संदेश पढ़कर सुनाया और किसानों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों और आदिवासी परिवारों को अपनी मांगों के लिए दो-दो दिन तक आंदोलन करना पड़ रहा है, जिससे सरकार की संवेदनहीनता उजागर होती है। व्यापक जनसमर्थन के साथ हुआ आंदोलन इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, आदिवासी महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। पन्ना जिले में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए एकजुट होते दिखाई दिए इसमें प्रमुख रूप से अमित भटनागर के साथ, बब्लू यादव, महेश आदिवासी, दिव्या अहिरवार, चिरौनिया आदिवासी,सारनिया आदिवासी, कमलाबाई मंगल यादव, पप्पू आदिवासी, राजू आदिवासी, केदार आदिवासी, लेखराम यादव, लक्ष्मी प्रसाद विश्वकर्मा, कल्लू आदिवासी गनपत, आदिवासी राजाबेटी आदिवासी, अभू आदिवासी, हल्कुश यादव, रवि आदिवासी,रामकिशोर यादव, राजकुमार तिवारी, शंकर आदिवासी, मुकुंदे आदिवासी, वंश गोपाल सोनी, कमलारानी आदिवासी, शिवरतन दयाराम आदिवासी, महेश आदिवासी, जगदीश आदिवासी, यादव, विद्या रानी, आदिवासी राजू आदिवासी सहित हजारों आदिवासी किसान सहभागी हुये। मीडिया सेल जय किसान संगठन ✊ जय किसान4
- पवित्र माह रमजान के अलविदा जुमा पर कस्बा पनवाड़ी1
- Post by Ramlakhan Namdev1
- रसोई गैस सिलेंडर को लेकर लोगों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। कई जगह महिलाएं भी लाइन में खड़ी दिखाई दे रही हैं और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सिलेंडर की उपलब्धता कम होने के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है। यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आम लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। अब देखना यह होगा कि इस समस्या को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।1
- टीकमगढ़ के कोतवाली थाना क्षेत्र के राधापुर गांव में 28 वर्षीय बहादुर लोधी पर दो अज्ञात बाइक सवारों ने चाकू से जानलेवा हमला कर दिया, जब वह मेला देखने जा रहा था। हमले में चाकू युवक की गर्दन के पास धंस गया। बहादुर ने पुलिस को बताया कि वह पैदल मेला देखने निकला था, तभी बाइक से आए दो लोगों ने उसे रोका और अचानक चाकू से हमला कर दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। गर्दन में चाकू लगा देख आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और अस्पताल में भर्ती कराया। राहगीरों ने डायल 112 को फोन किया, पुलिस की मदद से बहादुर को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। फिलहाल वह अस्पताल में भर्ती है और पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।1
- ग्राम डीडल, थाना ईशानगर जिला छतरपुर निवासी रचना कुशवाहा के यहाँ 3 फरवरी 2026 को जिला चिकित्सालय छतरपुर के लेबर रूम में एक बच्ची का जन्म हुआ। जन्म के समय बच्ची अत्यंत गंभीर अवस्था में थी, इसलिए उसे तुरंत जिला चिकित्सालय के एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) में भर्ती किया गया। बच्ची का जन्म 28 सप्ताह में ही हो गया था और उसका वजन मात्र 1 किलोग्राम था। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने बच्ची को सीपीएपी मशीन पर रखा और एफबीएनसी गाइडलाइन के अनुसार उपचार एवं प्रबंधन शुरू किया। शुरुआती 11 दिनों तक बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया तथा इलाज के दौरान एक बार रक्त भी चढ़ाया गया। चिकित्सकों की देखरेख में बच्ची को नियमित रूप से माँ का दूध और केएमसी (कंगारू मदर केयर) दिया गया। लगातार 36 दिनों तक एसएनसीयू में चले उपचार और डॉक्टरों व स्टाफ की सतत निगरानी से बच्ची के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ और उसके वजन में भी वृद्धि हुई। इलाज के बाद 11 मार्च 2026 को बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। डिस्चार्ज के समय बच्ची का वजन 1.5 किलोग्राम हो गया था। साथ ही बच्ची की आरओपी स्क्रीनिंग भी की गई। बच्ची के सफल उपचार में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बच्ची की माँ ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया। वहीं एसएनसीयू के समस्त स्टाफ ने बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।1