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ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल
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- Post by ब्यूरो चीफ एवीपी न्यूज चैनल4
- संविदा कर्मियों की प्रमुख मांगों पर गुरूवार, समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अधीक्षण अभियन्ता, कार्यालय कृष्णानगर, म में एक दिवसीय सत्याग्रह किया कार्यरत संविदा कर्मियों ने प्रमुख मांगों को दिया ज्ञापन शाहजहांपुर। विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ उप्र के घटक संगठन विद्युत संविदा मजूदर संगठन उप्र के प्रान्तीय आवाहन पर प्रदेश अध्यक्ष नवल किशोर सक्सेना के नेतृत्व में कार्यरत संविदा कर्मियों की प्रमुख मांगों पर गुरूवार, समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अधीक्षण अभियन्ता, कार्यालय कृष्णानगर, म में एक दिवसीय सत्याग्रह किया गया, सत्याग्रह की अध्यक्षता मध्यांचल अध्यक्ष अशोक कुमार पाल जी और संचालन जिला अध्यक्ष मुनीश पाल ने किया। उप्र पावर कारपोरेशन लि लखनऊ से अनुबन्धित कार्यदायी संस्था द्वारा संविदा कर्मियो का निरन्तर शोषण किया जा रहा है। संविदा कर्मियों के साथ हो रहे शोषण को रोकने के लिए प्रमुख मांग उ०प्र० सरकार द्वारा गठित आउटसोर्स सेवा निगम में ऊर्जा विभाग के सभी आउटसोर्स / संविदा कर्मियों को तत्काल शामिल किया जाये। इस मौके पर रतनलाल अशोक सक्सेना शकील अहमद सतीश कटारिया सतपाल शिवकुमार पीयूष कुमार ऋषि श्रीवास्तव संजय कुमार चंद्र प्रकाश अमृतपाल मनोज कुमार रचित कश्यप आदि सदस्य उपस्थित थे। कार्यरत संविदा कर्मियों को विभाग द्वारा समान कार्य समान वेतन कुशल श्रमिक को रू0-25000/- तथा अकुशल श्रमिक को रू0-22,000/- दिया जाये। मण्डल में बढ़ते उपभोक्ताओं की संख्या एंव बढ़ते कार्य को देखते हुए 45 प्रतिशत छंटनी में निकाले गये संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए।कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय दिल्ली के आदेश वर्ष 1995 के अनुसार संविदा कर्मियों की पेंशन सेवाकाल आयु सीमा 58 वर्ष है इसलिए संविदा कर्मियों की आयु 60 वर्ष की जाए। कर्मियों की उपस्थिति फेसियल अटेंडेन्स एप के माध्यम से उपस्थिति अनिवार्यता समाप्त कर, पूर्व की भॉति उपस्थिति दर्ज की जाये। प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल के आदेशानुसार कार्यरत संविदा कर्मियों को प्रत्येक माह की 01 तारीख से 07 तारीख तक वेतन भुगतान तथा अगस्त-2026 का वेतन 28 रक्षाबन्धन महापर्व को ध्यान में रखते हुए कार्यदायी संस्था द्वारा भुगतान 26 तक कराना सुनिश्चित किया जाए। मण्डल में कार्यरत संविदा कर्मियों के साथ घटना/दुर्घटना के दौरान कैशलेस इलाज की सुविधा तथा मृत्यु उपरान्त / स्थायी अपंगता आश्रित परिवार को तत्कालित सहायता अनुग्रह धनराशि रू 10 लाख से बढ़ाकर रू0 20 लाख तत्काल विभाग द्वारा चेक से भुगतान किया जाए। मण्डल पूर्व में कार्यदायी संस्था मै ओरियन सिक्योरिटी सॉल्यूशन प्रा०लि०, दिल्ली द्वारा कार्यरत संविदा कर्मचारियों 14 माह फरवरी-2022 से अप्रैल-2023 तक ई०पी०एफ० जमा कराया जाए तथा कार्यालय एम०डी० द्वारा सी०पी०सी० के माध्यम से नई ई०पीएफ० मेम्बर आई०डी० मध्याचंल विद्युत वितरण निगम लि0, लखनऊ द्वारा कुछ माह और कुछ कर्मचारियों का ई०पी०एफ० जमा किया गया शेष माह का ई०पी०एफ० अतिशीघ्र जमा कराया जाए तथा पूर्व में कार्यरत समस्त कार्यदायी सस्थाओं द्वारा कर्मियों के ई०पी०एफ० खातों में सही एग्जिट डेट अनुबन्ध के अनुसार लगायी जाये। मण्डल के विगत 5 वर्षों या उससे अधिक वर्षों से कार्यरत अकुशल संविदा कर्मियों को लाइन अनुरक्षण का कार्य के अनुरूप कुशल श्रेणी में समायोजित किया जाए।विद्युत उपकेन्द्रों पर कार्यरत संविदा कर्मियों के निरन्तर कार्य की अधिकता को देखते हुए उपकेन्द्र परिचालन की संख्या 4 की जाये तथा शहरी क्षेत्र में 36 कर्मियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 24 कर्मियों द्वारा शिफ्ट के अनुसार कार्य लिया जाये तथा फीडरों के अनसार लाइन अनुरक्षण कार्य हेतु संविदा कर्मियों की संख्या बढ़ायी जाये।1
- डीएम की अगुवाई में तिरंगे के सैलाब से गूंजा शाहजहांपुर1
- naaliyo ki safai hathaurha bujurg kailash nagar colony me kafi baar khne pr bhi naaliyo ki safai nhi hui1
- purane jodon ka dard ka gharelu upay video ko like karo share karo follow karo1
- ****खराब प्रगति पर डीएम का कड़ा एक्शन, बीएमएम को चेतावनी और एडीओ आईएसबी को प्रतिकूल प्रविष्टि*** 👉15 दिन में सुधार नहीं हुआ तो बीएमएम की सेवा समाप्ति और एडीओ आईएसबी पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश शाहजहांपुर, 13 अगस्त। जिलाधिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित बिस्मिल सभागार में पंचायत राज विभाग, वीबी राम जी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जीरो पॉवर्टी, गौ-संरक्षण, ग्रामीण पुस्तकालय, फैमिली आईडी, अन्नपूर्णा भवन एवं रिक्त दुकानों समेत विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में स्वयं सहायता समूहों की खराब प्रगति पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा में विकासखंड निगोही और ददरौल में स्वयं सहायता समूहों के गठन की स्थिति संतोषजनक नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने दोनों विकासखंडों के दो-दो बीएमएम को चेतावनी तथा संबंधित एडीओ आईएसबी को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि 15 दिनों के भीतर प्रगति में सुधार नहीं हुआ तो बीएमएम की सेवा समाप्त करने तथा एडीओ आईएसबी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को सीसीएल एवं सीआईएफ फंड उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूहों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। वीबी राम जी योजना की समीक्षा में जिलाधिकारी ने डीसी मनरेगा को प्राथमिक विद्यालयों में वीबी राम जी के माध्यम से मिड-डे-मील शेड बनवाने के निर्देश दिए। ध्वस्त हो चुके विद्यालय भवनों वाले स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर शेड निर्माण कराने को कहा। अन्नपूर्णा भवनों की समीक्षा में सभी खंड विकास अधिकारियों को अधूरे भवनों का निर्माण शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही जनपद में रिक्त पड़ी 24 राशन दुकानों का नियमानुसार जल्द आवंटन सुनिश्चित करने को कहा। गौ-संरक्षण की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अस्थायी गौशालाओं की स्थिति जानी। उन्होंने निर्देश दिया कि 100 से कम गोवंश वाली गौशालाओं को बंद कर वहां संरक्षित गोवंश को अन्य गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए। यह कार्य 31 अक्टूबर तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए। गौशालाओं में हरा चारा, पर्याप्त पानी, छाया और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं हर हाल में सुनिश्चित करने को कहा। पंचायती राज विभाग की समीक्षा में व्यक्तिगत शौचालयों के लंबित आवेदनों का एक सप्ताह में निस्तारण तथा स्वीकृत शौचालयों की प्रथम किस्त तत्काल जारी कराने के निर्देश दिए गए। सभी बीडीओ एवं एडीओ को चयनित गांवों को शत-प्रतिशत मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने के लिए जन चौपाल आयोजित कर स्थलीय निरीक्षण करने को कहा। जिलाधिकारी ने ओडीएफ प्लस ग्रामों में ई-रिक्शा के माध्यम से घर-घर कूड़ा उठान व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। कूड़ा उठान के फोटोग्राफ जीपीएस लोकेशन सहित उपलब्ध कराने तथा सामुदायिक शौचालयों के फोटोग्राफ भी प्रस्तुत करने को कहा। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी, परियोजना निदेशक अवधेश राम, जिला विकास अधिकारी ऋषि पाल सिंह, डीसी मनरेगा यशोवर्धन, जिला पंचायत राज अधिकारी, अपर जिला पंचायत राज अधिकारी, समस्त सहायक विकास अधिकारी पंचायत, समस्त खंड विकास अधिकारी एवं जिला कंसलटेंट उपस्थित रहे।1
- ***गौवंश को बचाने के चक्कर में हुआ हादसा, 8 से 10 कांवड़िये घायल—प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल*** शाहजहांपुर। कांट थाना क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान लगातार दूसरे दिन हादसे ने पुलिस-प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार रात जरावन गांव के पास कांवड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क पर अचानक गौवंश आ जाने से अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में करीब 8 से 10 कांवड़िये घायल हो गए। गनीमत रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और सभी घायल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। कांवड़ियों के मुताबिक, ट्रैक्टर-ट्रॉली फर्रुखाबाद के पांचाल घाट से जल लेने जा रही थी। अचानक सड़क पर गौवंश आ जाने पर चालक ने ब्रेक लगा दिए। तेज ब्रेक लगने से ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। कुछ कांवड़ियों ने ट्रॉली पलटने से पहले ही छलांग लगा दी, जिससे उन्हें गंभीर चोट नहीं आई। ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार कांवड़िये लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर तीन के निवासी बताए गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित, क्षेत्राधिकारी शुभम वर्मा, थाना प्रभारी और पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया और सड़क पर पलटी ट्रैक्टर-ट्रॉली को हटवाने की कार्रवाई शुरू कराई। 👉एक दिन पहले दो कांवड़ियों की हो चुकी है मौत कांट थाना क्षेत्र में बुधवार शाम भी जमौर के पास कांवड़ियों के साथ दर्दनाक हादसा हुआ था। ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में दो कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य घायल हुआ था। इसके ठीक अगले दिन फिर कांवड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 👉तीन महीने से चल रही तैयारियां, फिर भी हादसे क्यों? कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से कई सप्ताह से तैयारियों, बैठकों और मार्ग निरीक्षण के दावे किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी के स्तर से भी कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा, यातायात और मार्ग व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कांट क्षेत्र में लगातार दो दिन कांवड़ियों के साथ हादसे होना इन तैयारियों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। अब सवाल यह है कि जब तीन महीने से तैयारियां चल रही थीं और अधिकारियों को लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे, तो कांवड़ियों की सुरक्षा के इंतजाम धरातल पर कितने प्रभावी रहे? लगातार दूसरे दिन हादसे के बाद क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ निरीक्षण तक सीमित रहेंगे या सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव भी दिखाई देगा?1