विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: जब 'विकास भवन' ही हुआ जलमग्न और सड़कें बनीं जानलेवा, तो पूरे ग़ाज़ीपुर का क्या होगा हाल? उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर जिले में इस मॉनसून की बारिश और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर आम जनजीवन को पूरी तरह तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है [m7Nfw9REY88]। जिले का सबसे अहम प्रशासनिक केंद्र, विकास भवन, इस समय पूरी तरह से पानी में डूब चुका है [m7Nfw9REY88]। स्थानीय जनता अब तीखे सवाल पूछ रही है कि जिस जगह से पूरे जिले के विकास और जल निकासी की योजनाएं बनती हैं, जब वह खुद 'समंदर' बन चुकी है, तो आम मोहल्लों और गांवों का क्या हाल होगा? ग़ाज़ीपुर शहर के सबसे महत्वपूर्ण और पॉश इलाकों में शुमार होने वाले दफ्तरों के बाहर इस समय घुटनों तक पानी भरा हुआ है। विकास भवन के अलावा कचहरी, डीएम कार्यालय, सीडीओ कार्यालय, और एसपी ऑफिस के सामने की सड़कें पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। जलभराव के साथ-साथ इस समय जिले की सड़के भी सैकड़ों जानलेवा गड्ढों से युक्त हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के 'गड्ढामुक्त सड़क' अभियान के बड़े-बड़े दावों को ठेंगा दिखाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) और ठेकेदारों की पोल खुल गई है। भारी बारिश और जलजमाव के कारण तारकोल की सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और अब सड़कों पर सिर्फ गहरे गड्ढे ही नजर आ रहे हैं। इन जर्जर और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण आम जनता का आवागमन पूरी तरह से दुश्वार हो चुका है। सड़कों पर बने ये गहरे गड्ढे इस समय 'अदृश्य काल' बने हुए हैं। जब सड़कों पर पानी भर जाता है, तो राहगीरों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता। इसके कारण हर दिन बाइक सवार और ई-रिक्शा पलट रहे हैं, जिससे लोग चोटिल हो रहे हैं। जर्जर सड़कों की वजह से वाहनों की रफ्तार थम गई है और गाजीपुर के मुख्य मार्गों पर हर समय लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है। जो सफर महज 10 मिनट में पूरा होना चाहिए, उसमें अब घंटों का समय लग रहा है। सबसे बदतर स्थिति जिला अस्पताल और महिला अस्पताल जाने वाले रास्तों की है। प्रसव पीड़िताओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को लेकर जाने वाली एम्बुलेंस इन गड्ढों में हिचकोले खाते हुए रेंगने को मजबूर हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आ रही है। शहरी जलभराव के बीच, ग़ाज़ीपुर के ग्रामीण इलाकों में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने तबाही मचाई थी। यद्यपि अब गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन बाढ़ के बाद की चुनौतियां भयानक रूप ले चुकी हैं। रेवतीपुर, नगदिलपुर, बीरउपुर और हसनपुरा जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों के रास्ते तो खुल गए हैं, लेकिन गलियों में कीचड़ और गंदगी की मोटी परत जम गई है। हफ्तों तक खेतों में पानी डूबे रहने के कारण किसानों की फसलें सड़कर बर्बाद हो चुकी हैं। वहीं रुके हुए पानी और गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी संक्रामक महामारियों का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल करोड़ों रुपये का बजट नाला सफाई और पैचवर्क (गड्ढा भराई) के नाम पर पास होता है, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। जनता का सीधा आरोप है कि जब तक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभाएंगे, तब तक विकास भवन से लेकर आम नागरिक के घर तक, पूरा ग़ाज़ीपुर ऐसे ही नारकीय स्थिति झेलता रहेगा। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जलभराव को खत्म करने, सड़कों को तुरंत चलने लायक बनाने और ग्रामीण इलाकों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने की है।
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: जब 'विकास भवन' ही हुआ जलमग्न और सड़कें बनीं जानलेवा, तो पूरे ग़ाज़ीपुर का क्या होगा हाल? उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर जिले में इस मॉनसून की बारिश और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर आम जनजीवन को पूरी तरह तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है [m7Nfw9REY88]। जिले का सबसे अहम प्रशासनिक केंद्र, विकास भवन, इस समय पूरी तरह से पानी में डूब चुका है [m7Nfw9REY88]। स्थानीय जनता अब तीखे सवाल पूछ रही है कि जिस जगह से पूरे जिले के विकास और जल निकासी की योजनाएं बनती हैं, जब वह खुद 'समंदर' बन चुकी है, तो आम मोहल्लों और गांवों का क्या हाल होगा? ग़ाज़ीपुर शहर के सबसे महत्वपूर्ण और पॉश इलाकों में शुमार होने वाले दफ्तरों के बाहर इस समय घुटनों तक पानी भरा हुआ है। विकास भवन के अलावा कचहरी, डीएम कार्यालय, सीडीओ कार्यालय, और एसपी ऑफिस के सामने की सड़कें पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। जलभराव के साथ-साथ इस समय जिले की सड़के भी सैकड़ों जानलेवा गड्ढों से युक्त हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के 'गड्ढामुक्त सड़क' अभियान के बड़े-बड़े दावों को ठेंगा दिखाते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) और ठेकेदारों की पोल खुल गई है। भारी बारिश और जलजमाव के कारण तारकोल की सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं और अब सड़कों पर सिर्फ गहरे गड्ढे ही नजर आ रहे हैं। इन जर्जर और गड्ढायुक्त सड़कों के कारण आम जनता का आवागमन पूरी तरह से दुश्वार हो चुका है। सड़कों पर बने ये गहरे गड्ढे इस समय 'अदृश्य काल' बने हुए हैं। जब सड़कों पर पानी भर जाता है, तो राहगीरों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता। इसके कारण हर दिन बाइक सवार और ई-रिक्शा पलट रहे हैं, जिससे लोग चोटिल हो रहे हैं। जर्जर सड़कों की वजह से वाहनों की रफ्तार थम गई है और गाजीपुर के मुख्य मार्गों पर हर समय लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है। जो सफर महज 10 मिनट में पूरा होना चाहिए, उसमें अब घंटों का समय लग रहा है। सबसे बदतर स्थिति जिला अस्पताल और महिला अस्पताल जाने वाले रास्तों की है। प्रसव पीड़िताओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को लेकर जाने वाली एम्बुलेंस इन गड्ढों में हिचकोले खाते हुए रेंगने को मजबूर हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आ रही है। शहरी जलभराव के बीच, ग़ाज़ीपुर के ग्रामीण इलाकों में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने तबाही मचाई थी। यद्यपि अब गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन बाढ़ के बाद की चुनौतियां भयानक रूप ले चुकी हैं। रेवतीपुर, नगदिलपुर, बीरउपुर और हसनपुरा जैसे बाढ़ प्रभावित गांवों के रास्ते तो खुल गए हैं, लेकिन गलियों में कीचड़ और गंदगी की मोटी परत जम गई है। हफ्तों तक खेतों में पानी डूबे रहने के कारण किसानों की फसलें सड़कर बर्बाद हो चुकी हैं। वहीं रुके हुए पानी और गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी संक्रामक महामारियों का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल करोड़ों रुपये का बजट नाला सफाई और पैचवर्क (गड्ढा भराई) के नाम पर पास होता है, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। जनता का सीधा आरोप है कि जब तक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभाएंगे, तब तक विकास भवन से लेकर आम नागरिक के घर तक, पूरा ग़ाज़ीपुर ऐसे ही नारकीय स्थिति झेलता रहेगा। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जलभराव को खत्म करने, सड़कों को तुरंत चलने लायक बनाने और ग्रामीण इलाकों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने की है।
- गाजीपुर समाजवादी पार्टी के सदर ब्लाॅक अध्यक्ष संतोष जी PDA सम्मान समारोह मे।1
- उत्तर प्रदेश जिला गाजीपुर कासिमाबाद क्षेत्र सोनबरसा रामलीला मैदान में गणपति भगवान का भाव पूजा समारोह आज दिनांक 16,9 सन 2026 को धूमधाम से मनाया गया ग्राम और क्षेत्रवासी गणपति पूजन समारोह श्रद्धा भक्तिके रंग मे झूमते दिखे3
- पुलिस अभिरक्षा से फरार 50 हजार का इनामी सुधीर पासी गिरफ्तार: । पुलिस अभिरक्षा से फरार 50 हजार का इनामी सुधीर पासी गिरफ्तार: चौकिया मोड़ पर घेराबंदी देख भागने लगा, KTM डिवाइडर से टकराई; 35 मुकदमों का है आपराधिक इतिहास गाजीपुर में पुलिस अभिरक्षा से फरार 50 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त सुधीर उर्फ ध्रुव पासी को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 31 वर्षीय सुधीर पासी, मरदह थाना क्षेत्र के नोनरा गांव का रहने वाला है और उसके खिलाफ गाजीपुर, मऊ और सुल्तानपुर समेत अलग-अलग थानों में कुल 35 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त 2026 को जिला जेल गाजीपुर में न्यायिक अभिरक्षा में बंद सुधीर को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया था, जहां वह पुलिस कर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 15 सितंबर की रात प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह की टीम संदिग्धों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान चौकिया मोड़ ओवरब्रिज के नीचे मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी की गई। पुलिस को देखते ही सुधीर KTM बाइक से भागने लगा, लेकिन तेज रफ्तार में सड़क किनारे रखे डिवाइडर पत्थर से बाइक टकरा गई और वह गिर पड़ा। पुलिस ने मौके पर उसे पकड़ लिया। दाहिने पैर में चोट लगने के कारण उसे जिला अस्पताल भेजा गया। उसके कब्जे से KTM बाइक बरामद हुई है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।1
- barish Ka sambhavna hai sham tak le barish hone ki anuman hai barish Ki sambhavna hai sham tak le barish hone ki purv armaan Hai1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मऊ पहुंचे ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, वृद्धाश्रम में बांटे वस्त्र और फल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मऊ पहुंचे ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, वृद्धाश्रम में बांटे वस्त्र और फल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना स्थित वृद्धाश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने बुजुर्गों से मुलाकात की और वस्त्र, फल व मिष्ठान समेत सामग्री का वितरण किया।1
- मऊ में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने सुनीं जनशिकायतें, प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण के निर्देश जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक मऊ कमलेश बहादुर द्वारा पुलिस कार्यालय में जनसुनवाई की गई। इस दौरान फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए। एसपी ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक शिकायत का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए तथा पीड़ितों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण में समयबद्धता और पारदर्शिता बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए।3
- ग्रामीणों के साथ चकबंदी की उठाई मांग, डीएम को सौंपा ज्ञापन; मीडिया के सामने रखी अपनी बात #चकबंदी #डीएमज्ञापन #ग्रामीणसमस्या #मऊएक्सप्रेसन्यूज1
- मऊ में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने रक्तदान कार्यक्रम का किया शुभारंभ मऊ में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने रक्तदान कार्यक्रम का किया शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मऊ जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्तदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह पहुंचे और रक्तदान कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मऊ जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कार्यक्रम में पहुंचकर रक्तदान कर रहे लोगों और कार्यकर्ताओं से जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा, सुशासन और संकल्प के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मऊ में रक्तदान के बाद फल वितरण समेत अन्य सेवा गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल में विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित लोगों को भी कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना को लेकर अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।1