तीन महीने में ही दम तोड़ने लगी नई सड़क, पुलिया भी ध्वस्त होने की कगार पर भाऊपुर चौरासी मार्ग पर उखड़ी गिट्टियों ने खोली निर्माण गुणवत्ता की पोल, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का लगाया आरोप फर्रुखाबाद। सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बदायूं स्टेट हाईवे से भाऊपुर चौरासी जाने वाले मार्ग पर करीब तीन महीने पहले कराया गया निर्माण अभी से उखड़ने लगा है। सड़क की ऊपरी परत कई स्थानों पर गायब हो गई है और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। वहीं इसी मार्ग पर बनाई गई पुलिया भी क्षतिग्रस्त होकर गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। सड़क और पुलिया की हालत को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मौके की तस्वीरें भी सड़क की बदहाल स्थिति की गवाही दे रही हैं। सड़क पर जगह-जगह गिट्टियां बिखरी हैं और कई हिस्सों में ऊपरी परत उखड़ चुकी है। पुलिया के आसपास भी पानी भरा हुआ है। महज तीन महीने के भीतर सड़क और पुलिया की ऐसी हालत होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पूछा-तीन महीने में ही क्यों उखड़ गई सड़क? भाऊपुर निवासी अनूप मिश्रा, नसीम खान, छोटू सिंह, मोहन, नितिन कुमार, श्यामवीर, बृजेश, मनीष, ताबिश खान, अली मोहम्मद, रवि, मोहम्मद जुम्मन खान, गरीब खान और वाशिद खां समेत अन्य ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में धांधली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका असर निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद दिखाई देने लगा। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया होता तो महज तीन महीने में सड़क की ऊपरी परत इस तरह नहीं उखड़ती और पुलिया में दरारें नहीं आतीं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सड़क अभी नई है तो इतनी जल्दी उसकी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ गई? उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई और पुलिया निर्माण की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। क्रैक भरने के साथ सड़क पर डाली गई गिट्टी ग्रामीण नजीम खान ने बताया कि विभाग की ओर से शनिवार को पुलिया में आए क्रैक को भरने का काम कराया गया। सड़क पर भी कुछ गिट्टी डाली गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल दरार भरने और सड़क पर गिट्टी डालने से मामले का स्थायी समाधान नहीं होगा। यदि निर्माण में गुणवत्ता संबंधी खामी है तो उसकी जांच कराकर मूल समस्या को दूर किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करे और यह पता लगाया जाए कि निर्माण में निर्धारित मानकों और सामग्री का पालन किया गया था या नहीं। पीडब्ल्यूडी ने बाढ़ के पानी को बताया वजह वहीं मामले में निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के पीछे बाढ़ के पानी को वजह बताया। उन्होंने कहा कि सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिसके कारण पुलिया और सड़क क्षतिग्रस्त हुई हैं। शनिवार को इसका मरम्मत कार्य भी कराया गया है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि पानी भरा होने के कारण फिलहाल रोड रोलर मौके तक पहुंचाना संभव नहीं है। रोड रोलर चलाने से सड़क के और धंसने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई सड़क और पुलियाओं की मरम्मत कराई जाएगी। बाढ़ की वजह या निर्माण की खामी, जांच से साफ होगी तस्वीर विभाग सड़क और पुलिया की क्षति के लिए जहां बाढ़ के पानी को जिम्मेदार बता रहा है, वहीं ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सड़क और पुलिया बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुईं या निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी का भी इसमें योगदान है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सड़क की मोटाई, पुलिया की मजबूती और निर्माण के दौरान हुई विभागीय निगरानी की जांच होनी चाहिए। यदि जांच में मानकों की अनदेखी या निर्माण संबंधी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। महज तीन महीने में नई सड़क का उखड़ना और पुलिया का क्षतिग्रस्त होना सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन मामले की तकनीकी जांच कराकर निर्माण की असलियत सामने लाता है या बाढ़ का हवाला देकर मामला केवल मरम्मत तक सीमित रह जाएगा।
तीन महीने में ही दम तोड़ने लगी नई सड़क, पुलिया भी ध्वस्त होने की कगार पर भाऊपुर चौरासी मार्ग पर उखड़ी गिट्टियों ने खोली निर्माण गुणवत्ता की पोल, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का लगाया आरोप फर्रुखाबाद। सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बदायूं स्टेट हाईवे से भाऊपुर चौरासी जाने वाले मार्ग पर करीब तीन महीने पहले कराया गया निर्माण अभी से उखड़ने लगा है। सड़क की ऊपरी परत कई स्थानों पर गायब हो गई है और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। वहीं इसी मार्ग पर बनाई गई पुलिया भी क्षतिग्रस्त होकर गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। सड़क और पुलिया की हालत को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मौके की तस्वीरें भी सड़क की बदहाल स्थिति की गवाही दे रही हैं। सड़क पर जगह-जगह गिट्टियां बिखरी हैं और कई हिस्सों में ऊपरी परत उखड़ चुकी है। पुलिया के आसपास भी पानी भरा हुआ है। महज तीन महीने के भीतर सड़क और पुलिया की ऐसी हालत होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पूछा-तीन महीने में ही क्यों उखड़ गई सड़क? भाऊपुर निवासी अनूप मिश्रा, नसीम खान, छोटू सिंह, मोहन, नितिन कुमार, श्यामवीर, बृजेश, मनीष, ताबिश खान, अली मोहम्मद, रवि, मोहम्मद जुम्मन खान, गरीब खान और वाशिद खां समेत अन्य ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में धांधली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री
का इस्तेमाल किया गया, जिसका असर निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद दिखाई देने लगा। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया होता तो महज तीन महीने में सड़क की ऊपरी परत इस तरह नहीं उखड़ती और पुलिया में दरारें नहीं आतीं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सड़क अभी नई है तो इतनी जल्दी उसकी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ गई? उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई और पुलिया निर्माण की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। क्रैक भरने के साथ सड़क पर डाली गई गिट्टी ग्रामीण नजीम खान ने बताया कि विभाग की ओर से शनिवार को पुलिया में आए क्रैक को भरने का काम कराया गया। सड़क पर भी कुछ गिट्टी डाली गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल दरार भरने और सड़क पर गिट्टी डालने से मामले का स्थायी समाधान नहीं होगा। यदि निर्माण में गुणवत्ता संबंधी खामी है तो उसकी जांच कराकर मूल समस्या को दूर किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करे और यह पता लगाया जाए कि निर्माण में निर्धारित मानकों और सामग्री का पालन किया गया था या नहीं। पीडब्ल्यूडी ने बाढ़ के पानी को बताया वजह वहीं मामले में निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के पीछे बाढ़ के पानी को वजह बताया। उन्होंने कहा कि सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिसके
कारण पुलिया और सड़क क्षतिग्रस्त हुई हैं। शनिवार को इसका मरम्मत कार्य भी कराया गया है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि पानी भरा होने के कारण फिलहाल रोड रोलर मौके तक पहुंचाना संभव नहीं है। रोड रोलर चलाने से सड़क के और धंसने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई सड़क और पुलियाओं की मरम्मत कराई जाएगी। बाढ़ की वजह या निर्माण की खामी, जांच से साफ होगी तस्वीर विभाग सड़क और पुलिया की क्षति के लिए जहां बाढ़ के पानी को जिम्मेदार बता रहा है, वहीं ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सड़क और पुलिया बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुईं या निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी का भी इसमें योगदान है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सड़क की मोटाई, पुलिया की मजबूती और निर्माण के दौरान हुई विभागीय निगरानी की जांच होनी चाहिए। यदि जांच में मानकों की अनदेखी या निर्माण संबंधी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। महज तीन महीने में नई सड़क का उखड़ना और पुलिया का क्षतिग्रस्त होना सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन मामले की तकनीकी जांच कराकर निर्माण की असलियत सामने लाता है या बाढ़ का हवाला देकर मामला केवल मरम्मत तक सीमित रह जाएगा।
- 8 दिन से नहीं पूरे गॉव मे बिजली ग्रामीण बेहाल जिम्मेदार बोले जाँच उपरांत आएगी बिजली विकासखंड राजेपुर की ग्राम सभा नगला हूसा के मजरा कलट्टरगंज में इन दिनों ग्रामीण बिजली और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब आठ दिनों से पूरे गांव की बिजली आपूर्ति बंद है, जिसके चलते भीषण उमस भरी गर्मी में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के अंदर बिजली के खंभे लगे हुए हैं और गांव के अंदर बाढ़ का पानी भी नहीं है। बाढ़ का पानी गांव के बाहरी हिस्से में है। इसके बावजूद बिजली विभाग की ओर से पूरे गांव की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। बिजली न होने के कारण छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय पूरे गांव में अंधकार छाया रहता है। बाढ़ के पानी के आसपास होने के कारण सांप और जहरीले कीड़े निकलने का भी डर बना रहता है। बिजली नहीं होने के कारण मोबाइल फोन तक चार्ज नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को आपात स्थिति में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव को बाढ़ प्रभावित मानकर बिजली आपूर्ति बंद की गई है तो उन्हें बाढ़ राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीणों ने मांग की कि यदि गांव के अंदर बाढ़ का पानी नहीं है तो बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए, ताकि लोगों को गर्मी और अंधेरे से राहत मिल सके। समस्या से परेशान चंद्रकली, जगरानी, सुशीला देवी, विमला देवी, उमेश, आदेश, अनिल, पप्पू शर्मा, सर्वेंद्र शर्मा, संदीप, विपिन, संतोष, शिवकुमार, राधेश्याम, गोपाल सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है। ग्रामीणों की समस्या के संबंध में बिजली विभाग के एसडीओ को फोन के माध्यम से अवगत कराया गया। एसडीओ ने बताया कि जल्द ही बिजली कर्मियों को मौके पर भेजकर गांव की स्थिति की जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी। यदि गांव में बिजली सप्लाई देने में किसी प्रकार का खतरा नहीं रहता है तो बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।2
- उत्तर प्रदेश जनपद फर्रुखाबाद से खबर हर छोटी बड़ी खबर आप सावन के महीने में सोमवार के दिन भक्त भोलेनाथ बाबा के गीतों पर झूम कर नाच रहे1
- फर्रुखाबाद ब्यूरो रिपोर्ट दबंगों द्वारा सताए जा रहे कई वर्षों से कलेक्टर कप्तान के दरबार पर लगा चुके थे। फरियाद नहीं हुआ था। मुकदमा दर्ज पत्रकार की पहल पर थाने में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया सुश्री अनुष्का यादव की रिपोर्ट।1
- CITY NEWS: नगर पंचायत शमशाबाद की ओर से 28 मेधावी छात्र-छात्राएं सम्मानित1
- विश्व हिंदू परिषद की जिला स्तरीय मासिक बैठक सम्पन्न,,,,,, जलालाबाद। नगर के ब्लॉक सभागार में विश्व हिंदू परिषद की जिला स्तरीय मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी कार्यक्रमों एवं संगठन की गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने आगामी आयोजनों की तैयारियों, संगठन के विस्तार तथा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए हिंदू समाज को एकजुट करने की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए। इस दौरान आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के साथ ही उनकी सफलता के लिए जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गईं। बैठक में जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता मौजूद रहे।2
- तीन महीने में ही दम तोड़ने लगी नई सड़क, पुलिया भी ध्वस्त होने की कगार पर भाऊपुर चौरासी मार्ग पर उखड़ी गिट्टियों ने खोली निर्माण गुणवत्ता की पोल, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री के इस्तेमाल का लगाया आरोप फर्रुखाबाद। सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बदायूं स्टेट हाईवे से भाऊपुर चौरासी जाने वाले मार्ग पर करीब तीन महीने पहले कराया गया निर्माण अभी से उखड़ने लगा है। सड़क की ऊपरी परत कई स्थानों पर गायब हो गई है और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। वहीं इसी मार्ग पर बनाई गई पुलिया भी क्षतिग्रस्त होकर गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। सड़क और पुलिया की हालत को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। मौके की तस्वीरें भी सड़क की बदहाल स्थिति की गवाही दे रही हैं। सड़क पर जगह-जगह गिट्टियां बिखरी हैं और कई हिस्सों में ऊपरी परत उखड़ चुकी है। पुलिया के आसपास भी पानी भरा हुआ है। महज तीन महीने के भीतर सड़क और पुलिया की ऐसी हालत होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने पूछा-तीन महीने में ही क्यों उखड़ गई सड़क? भाऊपुर निवासी अनूप मिश्रा, नसीम खान, छोटू सिंह, मोहन, नितिन कुमार, श्यामवीर, बृजेश, मनीष, ताबिश खान, अली मोहम्मद, रवि, मोहम्मद जुम्मन खान, गरीब खान और वाशिद खां समेत अन्य ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में धांधली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसका असर निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद दिखाई देने लगा। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया गया होता तो महज तीन महीने में सड़क की ऊपरी परत इस तरह नहीं उखड़ती और पुलिया में दरारें नहीं आतीं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सड़क अभी नई है तो इतनी जल्दी उसकी मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ गई? उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई और पुलिया निर्माण की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। क्रैक भरने के साथ सड़क पर डाली गई गिट्टी ग्रामीण नजीम खान ने बताया कि विभाग की ओर से शनिवार को पुलिया में आए क्रैक को भरने का काम कराया गया। सड़क पर भी कुछ गिट्टी डाली गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल दरार भरने और सड़क पर गिट्टी डालने से मामले का स्थायी समाधान नहीं होगा। यदि निर्माण में गुणवत्ता संबंधी खामी है तो उसकी जांच कराकर मूल समस्या को दूर किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने मांग की कि संबंधित अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की तकनीकी जांच करे और यह पता लगाया जाए कि निर्माण में निर्धारित मानकों और सामग्री का पालन किया गया था या नहीं। पीडब्ल्यूडी ने बाढ़ के पानी को बताया वजह वहीं मामले में निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने के पीछे बाढ़ के पानी को वजह बताया। उन्होंने कहा कि सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी भरा हुआ है, जिसके कारण पुलिया और सड़क क्षतिग्रस्त हुई हैं। शनिवार को इसका मरम्मत कार्य भी कराया गया है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि पानी भरा होने के कारण फिलहाल रोड रोलर मौके तक पहुंचाना संभव नहीं है। रोड रोलर चलाने से सड़क के और धंसने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई सड़क और पुलियाओं की मरम्मत कराई जाएगी। बाढ़ की वजह या निर्माण की खामी, जांच से साफ होगी तस्वीर विभाग सड़क और पुलिया की क्षति के लिए जहां बाढ़ के पानी को जिम्मेदार बता रहा है, वहीं ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सड़क और पुलिया बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुईं या निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी का भी इसमें योगदान है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सड़क की मोटाई, पुलिया की मजबूती और निर्माण के दौरान हुई विभागीय निगरानी की जांच होनी चाहिए। यदि जांच में मानकों की अनदेखी या निर्माण संबंधी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। महज तीन महीने में नई सड़क का उखड़ना और पुलिया का क्षतिग्रस्त होना सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन मामले की तकनीकी जांच कराकर निर्माण की असलियत सामने लाता है या बाढ़ का हवाला देकर मामला केवल मरम्मत तक सीमित रह जाएगा।3
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