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नन्हे कदम IVF सेंटर की नई शाखा का गंगानगर में भव्य शुभारंभ हो गया है, जिससे अब इस क्षेत्र में भी बच्चों की किलकारी गूंजेगी। यह निसंतान दंपत्तियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि उन्हें अब गंगानगर में ही विश्वस्तरीय IVF उपचार का लाभ मिल सकेगा।
Duc News Rajsthan चैनल
नन्हे कदम IVF सेंटर की नई शाखा का गंगानगर में भव्य शुभारंभ हो गया है, जिससे अब इस क्षेत्र में भी बच्चों की किलकारी गूंजेगी। यह निसंतान दंपत्तियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि उन्हें अब गंगानगर में ही विश्वस्तरीय IVF उपचार का लाभ मिल सकेगा।
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- नर्सेज ने न्याय की मांग और सम्मान की लड़ाई के तहत अपनी एकजुटता दिखाते हुए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है। जिलाध्यक्ष रविन्द्र शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक मृतक नर्स के परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह संघर्ष किसी भी सूरत में नहीं रुकेगा।1
- रायसिंहनगर में 22 जून 2026 को बस स्टैंड से गुरुद्वारा सिंह सभा की ओर जाने वाले मार्ग पर एक नए शोरूम के शुभ मुहूर्त के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल हो गई। इस अव्यवस्था के चलते एक ऑटो चालक को नुकसान उठाना पड़ा, जिसका ऑटो ईंटों से भरे एक ट्राले के आगे और एक अन्य ट्रैक्टर ट्रॉली के पीछे फंसा हुआ था। वाहनों को आगे-पीछे करने की प्रक्रिया में ऑटो का हेडलाइट टूट गया। यातायात व्यवस्था के बदहाल होने के कारण ही ऑटो चालक को यह क्षति हुई।1
- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।1
- छत्तरगढ़ और सत्तासर से रिपोर्टर उदावत देवीसिंह ने समाचार भेजा है।1
- मध्यप्रदेश का बताया जा रहा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक पिता अपनी बेटी को RE-NEET परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, वे निर्धारित समय से मात्र 2 मिनट की देरी से पहुंचे थे। गार्ड से काफी अनुरोध किए जाने के बावजूद, वहां मौजूद स्टाफ द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। निस्संदेह, परीक्षा के नियमों का पालन करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है और सभी को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना चाहिए। लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या सारी जवाबदेही केवल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की ही है? पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि जब चाहो परीक्षा स्थगित कर दो, जब चाहो निरस्त कर दो, और जब चाहो नई तारीखें घोषित कर दो, लेकिन इन फैसलों का मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान आखिर अभ्यर्थी ही क्यों भुगतें? नियम जरूरी हैं, लेकिन संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। इन परीक्षाओं के पीछे सिर्फ रोल नंबर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपने और उनके परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।1
- स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसी परिस्थितियाँ बन गई हैं जहाँ सच बोलना गुनाह माना जा रहा है। बताया गया है कि जहाँ कभी सरेआम एनकाउंटर कर दिए जाते हैं तो कभी किसी को सीधे गिरफ्तार कर लिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इस सब में अपराधियों को नहीं, बल्कि अपराधों को उजागर करने वाले लोगों को निशाना बनाकर गिरफ्तार किया जा रहा है। इस स्थिति पर सवाल उठाया गया है कि क्या यह तरीका सही है और इस पर आम जनता की क्या राय है।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्रीगंगानगर में आनंद विहार सोसायटी योगा ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने केवल योग दिवस का उत्सव ही नहीं मनाया, बल्कि स्वास्थ्य, अनुशासन और सामूहिक जागरूकता की एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश की। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों ने भाग लेकर योग के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता दर्शाई। योगासन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से उपस्थित लोगों ने स्वस्थ जीवन का संदेश दिया, जिससे पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का माहौल छा गया। इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर शामिल हुईं समाजसेवी वीना चौहान ने सभी को योग दिवस की शुभकामनाएँ दीं। सुनीता गोयल ने इस अवसर पर कहा कि दस वर्ष पहले जब योग कक्षाएँ शुरू की गई थीं, तब शायद किसी ने यह नहीं सोचा था कि यह पहल इतनी बड़ी मुहिम का रूप ले लेगी। उन्होंने इस दस साल की 'तपस्या' को लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया, जिसके चलते स्वास्थ्य आनंद विहार सोसायटी में योग दिवस पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।3
- मारवाड़ के लोकदेवता खेमाबाबा के दर्शन कर प्रशिक्षार्थियों ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया है।1
- मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में पेपर लीक के विवादों के बीच 21 जून को आयोजित दोबारा परीक्षा से एक अत्यंत प्रेरणादायक घटना सामने आई है। एक भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद छात्रा सृष्टि दुबे ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी NEET की परीक्षा दी। उनके इस दृढ़ संकल्प को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लिया और परीक्षा केंद्र पर उनके लिए विशेष व्यवस्था करवाई। सृष्टि के एक गंभीर एक्सीडेंट में 9 पसलियां टूट गई थीं, लेकिन इस असहनीय दर्द और शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने परीक्षा देने का निर्णय लिया, जो डॉक्टर बनने के उनके अटूट सपने को दर्शाता है। छात्रा के पिता द्वारा मदद की गुहार लगाने पर, शिक्षा मंत्री ने मानवीय आधार पर तुरंत उनकी अपील स्वीकार की। उनके निर्देश पर प्रशासन ने सृष्टि के लिए परीक्षा केंद्र में एक अलग कमरे की व्यवस्था की और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेंटर के बाहर एंबुलेंस और मेडिकल सपोर्ट टीम भी तैनात की गई। प्रशासन ने इस साहसिक कदम में पूरी संवेदनशीलता के साथ उनका साथ दिया। परीक्षा के बाद, छात्रा के माता-पिता ने फोन के माध्यम से शिक्षा मंत्री का विशेष रूप से धन्यवाद किया। यह घटना उन 22 लाख से अधिक छात्रों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो इस परीक्षा में हिस्सा ले रहे हैं। सृष्टि का यह समर्पण साबित करता है कि यदि लक्ष्य के प्रति सच्ची निष्ठा और अटल इरादा हो, तो कोई भी शारीरिक या मानसिक बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती।1