मध्यप्रदेश का बताया जा रहा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक पिता अपनी बेटी को RE-NEET परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, वे निर्धारित समय से मात्र 2 मिनट की देरी से पहुंचे थे। गार्ड से काफी अनुरोध किए जाने के बावजूद, वहां मौजूद स्टाफ द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। निस्संदेह, परीक्षा के नियमों का पालन करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है और सभी को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना चाहिए। लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या सारी जवाबदेही केवल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की ही है? पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि जब चाहो परीक्षा स्थगित कर दो, जब चाहो निरस्त कर दो, और जब चाहो नई तारीखें घोषित कर दो, लेकिन इन फैसलों का मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान आखिर अभ्यर्थी ही क्यों भुगतें? नियम जरूरी हैं, लेकिन संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। इन परीक्षाओं के पीछे सिर्फ रोल नंबर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपने और उनके परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
मध्यप्रदेश का बताया जा रहा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक पिता अपनी बेटी को RE-NEET परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, वे निर्धारित समय से मात्र 2 मिनट की देरी से पहुंचे थे। गार्ड से काफी अनुरोध किए जाने के बावजूद, वहां मौजूद स्टाफ द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। निस्संदेह, परीक्षा के नियमों का पालन करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है और सभी को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना चाहिए। लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या सारी जवाबदेही केवल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की ही है? पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि जब चाहो परीक्षा स्थगित कर दो, जब चाहो निरस्त कर दो, और जब चाहो नई तारीखें घोषित कर दो, लेकिन इन फैसलों का मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान आखिर अभ्यर्थी ही क्यों भुगतें? नियम जरूरी हैं, लेकिन संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। इन परीक्षाओं के पीछे सिर्फ रोल नंबर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपने और उनके परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।
- Ramesh KumarHasanpur, Amrohaetne sakht kanoon ki jarurat nhi h traffic ki bhi samahya h desh mei kuch toh concettion dena chiye1 hr ago
- Ramesh KumarHasanpur, Amroha😡1 hr ago
- मध्यप्रदेश का बताया जा रहा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक पिता अपनी बेटी को RE-NEET परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार, वे निर्धारित समय से मात्र 2 मिनट की देरी से पहुंचे थे। गार्ड से काफी अनुरोध किए जाने के बावजूद, वहां मौजूद स्टाफ द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। निस्संदेह, परीक्षा के नियमों का पालन करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है और सभी को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना चाहिए। लेकिन यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या सारी जवाबदेही केवल अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की ही है? पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि जब चाहो परीक्षा स्थगित कर दो, जब चाहो निरस्त कर दो, और जब चाहो नई तारीखें घोषित कर दो, लेकिन इन फैसलों का मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान आखिर अभ्यर्थी ही क्यों भुगतें? नियम जरूरी हैं, लेकिन संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है। इन परीक्षाओं के पीछे सिर्फ रोल नंबर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपने और उनके परिवारों की उम्मीदें जुड़ी होती हैं।1
- स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसी परिस्थितियाँ बन गई हैं जहाँ सच बोलना गुनाह माना जा रहा है। बताया गया है कि जहाँ कभी सरेआम एनकाउंटर कर दिए जाते हैं तो कभी किसी को सीधे गिरफ्तार कर लिया जाता है। हैरानी की बात यह है कि इस सब में अपराधियों को नहीं, बल्कि अपराधों को उजागर करने वाले लोगों को निशाना बनाकर गिरफ्तार किया जा रहा है। इस स्थिति पर सवाल उठाया गया है कि क्या यह तरीका सही है और इस पर आम जनता की क्या राय है।1
- झुंझुनू जिले में एक 26 वर्षीय युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मृत्यु हो गई है।1
- नवलगढ़ विधायक विक्रम सिंह जाखल ने शेखावाटी के प्रसिद्ध तीर्थस्थल लोहार्गल धाम में चल रहे विभिन्न नवनिर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से जायजा लिया। बढ़ती तीर्थयात्री संख्या को देखते हुए, प्रशासक जगमोहन सिंह की पहल पर, कावड़िया मंदिर से खाक चौक तक करीब एक करोड़ रुपये की लागत से नाला निर्माण और उसके ऊपर पैदल यात्रियों के लिए सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है। विधायक जाखल ने मौके पर पहुंचकर इस महत्वपूर्ण कार्य का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। इस निरीक्षण के दौरान, लोहार्गल में विभिन्न स्थानों पर वट वृक्षों के लिए बड़े गट्टों के निर्माण और सामुदायिक भवन निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों का भी अवलोकन किया गया। इस अवसर पर लोहार्गल सरपंच जगमोहन सिंह, वार्ड पंच विष्णु शर्मा, बजरंगलाल बोहरा, श्यामलाल स्वामी सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।1
- झुंझुनू जिले की 14 ग्राम पंचायतों में 22 जून 2026, सोमवार को ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया जाएगा। ये शिविर सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेंगे, जहाँ विभिन्न विभागों के अधिकारी सीधे ग्रामीणों की समस्याओं को सुनेंगे और मौके पर ही उनका समाधान करेंगे। यह पहल ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सरकारी सेवाओं और शिकायतों के निवारण का अवसर प्रदान करेगी। ये विशेष शिविर अजाड़ी कला, उदयपुरवाटी के चवरा, अलसीसर के सोनासर और कोदेसर, बुहाना के पचेरी कला, सिंघाना के डूमोली कला, पिलानी के घंडावा, मंडावा के हिमतसर, चिड़ावा के केहरपुरा कला, खेतड़ी के बसाई और सीहोड़, नवलगढ़ के बिरोल और बाय, सूरजगढ़ के स्वामी सेही तथा गुड्डागौड़जी के पोषाणा ग्राम पंचायतों में आयोजित होंगे। इन शिविरों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, जिससे उनकी विभिन्न जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।1
- झुंझुनूं शहर में आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति को नई दिशा देने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) का एक भव्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र शुरू हो गया है। झुंझुनूं की मित्तल कॉलोनी स्थित ढंढारिया गेस्ट हाउस में इस नवनिर्मित केंद्र का भव्य शुभारंभ किया गया, जहां पूरे परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और श्री नृसिंह यज्ञ से हुई, जिसमें मुख्य यजमान रामौतार अग्रवाल गुढावाला ने अपने परिवार सहित पूजा-अर्चना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक हवन में भाग लेकर आहुतियां दीं, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। इसके उपरांत हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें मृदंग और मंजीरों की मधुर धुन पर भक्त कृष्ण भक्ति में सराबोर नज़र आए। शाम को कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नवीन भवन और श्री श्री राधा मदन गोपाल गौरहरि मंदिर की वेदी का उद्घाटन रहा। झुंझुनूं के जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने फीता काटकर इस केंद्र का शुभारंभ किया, जिस अवसर पर इस्कॉन परिवार ने उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया। डॉ. नवीन कांतिदास बंसल ने जानकारी दी कि यह केंद्र फिलहाल अस्थायी रूप से संचालित होगा, जबकि अगले तीन वर्षों में भव्य मुख्य मंदिर का निर्माण पूरा किया जाएगा। तब तक यह केंद्र धर्म प्रचार, संस्कार और आध्यात्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहेगा। अपने संबोधन में जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने मानवता और आध्यात्मिक उत्थान के लिए इस्कॉन संस्था द्वारा पिछले 50 वर्षों से किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र झुंझुनूं में आध्यात्मिक जागरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। कार्यक्रम में बच्चों ने महाभारत के प्रसंगों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, वहीं संध्या आरती और महाप्रसाद वितरण में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह इस्कॉन केंद्र आने वाले समय में संस्कार, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।1
- रींगस के ग्राम पंचायत चोमू पुरोहितान में चोरी की एक वारदात सामने आई है, जहाँ शैतान सिंह नेहरा के घर से शनिवार रात्रि में अज्ञात चोरों ने गैस सिलेंडर चुरा लिए। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिससे चोरी का फुटेज उपलब्ध है। घटना की जानकारी मिलते ही रींगस पुलिस थाना को तत्काल सूचित किया गया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि चोरों का सुराग मिल सके। गाँव में चोरी की बढ़ती वारदातों को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है। ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए पुलिस ने जल्द से जल्द इस मामले का खुलासा करने का आश्वासन दिया है।1
- मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में पेपर लीक के विवादों के बीच 21 जून को आयोजित दोबारा परीक्षा से एक अत्यंत प्रेरणादायक घटना सामने आई है। एक भीषण सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद छात्रा सृष्टि दुबे ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी NEET की परीक्षा दी। उनके इस दृढ़ संकल्प को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लिया और परीक्षा केंद्र पर उनके लिए विशेष व्यवस्था करवाई। सृष्टि के एक गंभीर एक्सीडेंट में 9 पसलियां टूट गई थीं, लेकिन इस असहनीय दर्द और शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने परीक्षा देने का निर्णय लिया, जो डॉक्टर बनने के उनके अटूट सपने को दर्शाता है। छात्रा के पिता द्वारा मदद की गुहार लगाने पर, शिक्षा मंत्री ने मानवीय आधार पर तुरंत उनकी अपील स्वीकार की। उनके निर्देश पर प्रशासन ने सृष्टि के लिए परीक्षा केंद्र में एक अलग कमरे की व्यवस्था की और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सेंटर के बाहर एंबुलेंस और मेडिकल सपोर्ट टीम भी तैनात की गई। प्रशासन ने इस साहसिक कदम में पूरी संवेदनशीलता के साथ उनका साथ दिया। परीक्षा के बाद, छात्रा के माता-पिता ने फोन के माध्यम से शिक्षा मंत्री का विशेष रूप से धन्यवाद किया। यह घटना उन 22 लाख से अधिक छात्रों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो इस परीक्षा में हिस्सा ले रहे हैं। सृष्टि का यह समर्पण साबित करता है कि यदि लक्ष्य के प्रति सच्ची निष्ठा और अटल इरादा हो, तो कोई भी शारीरिक या मानसिक बाधा सफलता के मार्ग में रुकावट नहीं बन सकती।1