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प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील में कार्यरत अधिवक्ता रोशन सिंह को गुरुवार दोपहर करीब 1:06 बजे एक अज्ञात नंबर से फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। बीबीपुर निवासी अधिवक्ता ने जैसे ही फोन उठाया और अपना नाम बताया, फोन करने वाले शख्स ने उन्हें माँ-बहन की भद्दी गालियाँ देते हुए गोली मारकर हत्या करने की धमकी दी। इस घटना की जानकारी मिलते ही पट्टी के सैकड़ों अधिवक्ता बार अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी के नेतृत्व में एकजुट हुए और पट्टी कोतवाली पहुंचे। अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर पट्टी कोतवाल को घटना की लिखित तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है। पट्टी कोतवाल आनंदपाल सिंह ने बताया कि उन्हें प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है और इस पर नियमानुसार जांच कराकर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
Amit Rekha News New
प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील में कार्यरत अधिवक्ता रोशन सिंह को गुरुवार दोपहर करीब 1:06 बजे एक अज्ञात नंबर से फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। बीबीपुर निवासी अधिवक्ता ने जैसे ही फोन उठाया और अपना नाम बताया, फोन करने वाले शख्स ने उन्हें माँ-बहन की भद्दी गालियाँ देते हुए गोली मारकर हत्या करने की धमकी दी। इस घटना की जानकारी मिलते ही पट्टी के सैकड़ों अधिवक्ता बार अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी के नेतृत्व में एकजुट हुए और पट्टी कोतवाली पहुंचे। अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर पट्टी कोतवाल को घटना की लिखित तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है। पट्टी कोतवाल आनंदपाल सिंह ने बताया कि उन्हें प्रार्थना पत्र प्राप्त हो गया है और इस पर नियमानुसार जांच कराकर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- सुलतानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र में 29 जून को युवक आजाद वर्मा की मौत के मामले में पुलिस ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आजाद की मौत किसी हमले में नहीं हुई थी, बल्कि स्कॉर्पियो में नई अवैध पिस्टल चलाने के दौरान हुई एक्सीडेंटल फायरिंग के कारण हुई थी। गोली स्कॉर्पियो की सीट को चीरते हुए आजाद की कमर में लगी थी, जिससे उनकी जान चली गई। पुलिस के अनुसार, इस घटना के बाद आजाद के तीनों साथी घायल युवक को लेकर इधर-उधर घूमते रहे और बाद में सुलतानपुर होते हुए लखनऊ पहुंचे। इस दौरान, कथित तौर पर घटना को एक दूसरा रूप देने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो भी वायरल कराए गए, जिससे एक झूठी कहानी गढ़ी जा सके। वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर और अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक को लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। उनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त काली स्कॉर्पियो बरामद हुई, जिसमें अवैध पिस्टल, खोखा कारतूस, खून के निशान और सीट पर गोली के प्रवेश व निकास के स्पष्ट निशान मिले। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है, जबकि मामले में शामिल तीसरे फरार आरोपी की तलाश जारी है। इस मामले में आगे की विवेचना और विधिक कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।1
- 8 जुलाई को हुई एक दुर्घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी द्वारा प्रदान की गई जानकारी को भ्रामक और मिथ्या बताया गया है। शिकायत के अनुसार, अधिकारी ने दुर्घटना का जो समय बताया, वह गलत है; वास्तविक घटना 1:00 बजे हुई थी। साथ ही, जिस व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हुई, वह ऑल सैंट स्कूल में कंडक्टर के रूप में कार्यरत थे। अधिकारियों द्वारा इस प्रकार की गलत और भ्रामक सूचना का दिया जाना बिल्कुल भी उचित नहीं है।1
- जौनपुर जिले के मछली शहर स्थित अदारी डभिया गांव के निवासी जैवलीन थ्रोअर रोहित यादव के पिता सभाजीत यादव पुरानी यादों में खोकर भावुक हो गए, जिससे उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। सभाजीत यादव ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों के बावजूद गांव में रहकर जीवन यापन किया और अपनी मेहनत के दम पर मैराथन दौड़ में 101 मेडल हासिल किए। सभाजीत यादव ने सीमित संसाधनों और धन के अभाव वाली चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करते हुए अपने बच्चों का हौसला बढ़ाया और उन्हें ग्रामीण परिवेश से ऊपर उठकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इन्ही पुरानी यादों को साझा करते हुए वे भावुक हो उठे और उनके आंसू छलक आए।1
- सुलतानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र में 29 जून को आजाद वर्मा की मौत के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि आजाद की मौत किसी हमले या साजिश का परिणाम नहीं, बल्कि एक स्कॉर्पियो में अवैध पिस्टल चलाने के दौरान हुई एक्सीडेंटल फायरिंग के कारण हुई थी। जब युवक गाड़ी में मौजूद नई अवैध पिस्टल का परीक्षण कर रहे थे, तब अचानक चली एक गोली सीट को चीरते हुए आजाद वर्मा की कमर में जा लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद आरोपी उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय इधर-उधर घुमाते रहे और अंततः लखनऊ ले गए। पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों ने घटना को छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और झूठी कहानियां फैलाई थीं। वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर और अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक को लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त काली स्कॉर्पियो, अवैध पिस्टल, कारतूस का खोखा और सीट पर मौजूद खून के निशान व गोली के प्रवेश-निकास के साक्ष्य बरामद किए गए हैं। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है, जबकि घटना में शामिल तीसरे आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है। सुलतानपुर पुलिस का कहना है कि विवेचना जारी है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस खुलासे ने यह साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक जांच के सामने सोशल मीडिया पर रची गई कोई भी झूठी कहानी टिक नहीं सकती।1
- गुरुवार को हुई हल्की बारिश ने सुल्तानपुर के लंभुआ विकास खंड परिसर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। कुछ ही देर की वर्षा के बाद पूरा ब्लॉक परिसर पानी से लबालब भर गया और तालाब में तब्दील हो गया। कार्यालय आने वाले कर्मचारियों, फरियादियों और आम नागरिकों को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ा, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा और सरकारी कार्यालयों तक पहुँचना भी मुश्किल हो गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण हर साल बरसात में ऐसी ही समस्या उत्पन्न होती है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि हल्की बारिश में यह स्थिति है, तो लगातार या मूसलाधार बारिश होने पर हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तुरंत नालियों की सफाई कराने और ब्लॉक परिसर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। हल्की बारिश में ही विकास खंड परिसर के जलमग्न होने से लोगों में गहरी नाराजगी है और वे प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।1
- पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बड़ाईक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इन तीनों नेताओं ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में पार्टी का दामन थामा। भाजपा ने इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल में अपने संगठन के विस्तार और अपनी विचारधारा के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बताया है। भाजपा नेताओं का मानना है कि इन नए सदस्यों के अनुभव से आगामी चुनावों में पार्टी को मजबूती मिलेगी। दूसरी ओर, टीएमसी के लिए इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है और राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस बदलाव से राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।1
- सुल्तानपुर जिले के गोसाईगंज थाना क्षेत्र में दिनांक 29-6-26 को वादी बादल वर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर दी गई तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान यह सामने आया कि मृतक आज़ाद वर्मा अपने तीन साथियों—अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा उर्फ कल्लू (लगभग 21 वर्ष), अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा (लगभग 23 वर्ष), और अमन वर्मा पुत्र दिलीप वर्मा—के साथ अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा की काली स्कॉर्पियो में एक नई अवैध पिस्टल लेकर आए थे। पिस्टल चलाने के प्रयास में अभिषेक पुत्र विजय बहादुर द्वारा गलती से हुई फायरिंग में एक गोली गाड़ी की सीट से आर-पार होकर आज़ाद वर्मा की कमर में लग गई, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद अमन वर्मा का बाकी तीनों से विवाद हो गया, जिसके बाद उसे गाड़ी से उतार दिया गया। खून तेज़ी से बहता देख, तीनों अभियुक्त आज़ाद को स्कॉर्पियो से सुल्तानपुर ले गए और वहां पुलिस को सूचना देने के बाद लखनऊ रवाना हो गए। लखनऊ में उन्होंने पूर्व प्रचलित क्रॉस अभियोगों से संबंधित अभियुक्त/वादी और गवाहों का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिससे मामले को गुमराह करने का प्रयास किया गया। विश्वसनीय और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर की गई पड़ताल में पता चला कि घटना के बाद तीनों आरोपी गांव से फरार हो गए थे। दिनांक 8-9, 7-26 की रात को मिली विश्वसनीय सूचना पर थाना पीजीआई, लखनऊ के वृंदावन योजना सेक्टर 16 से अभिषेक वर्मा पुत्र विजय बहादुर वर्मा और अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उनकी निशानदेही पर घटना से संबंधित अभिषेक वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा की काली स्कॉर्पियो को बाईपास रेलवे ओवरब्रिज पकरौली से बरामद किया गया। फील्ड यूनिट की तलाशी में वाहन से घटना में प्रयुक्त हथियार, खोखा कारतूस और खून के निशान मिले हैं, साथ ही ड्राइविंग सीट के बगल वाली सीट पर गोली के प्रवेश और निकास के छेद भी मौजूद हैं। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है, और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई प्रचलित है।1
- उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर में नगर कोतवाली की शाहगंज पुलिस चौकी में भाजपा नेत्री पूजा कसौधन द्वारा एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में थप्पड़ मारने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में चौकी प्रभारी मूकदर्शक बने हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि कथित तौर पर भाजपा नेत्री थप्पड़ मारने के बाद यह कहते हुए भी सुनाई देती हैं कि 'अब तुम अपनी औकात भूल जाओगे'। इस वायरल वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए, यह घटना केवल एक थप्पड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून के सम्मान और उसकी धज्जियां उड़ाने का गंभीर प्रश्न खड़ा करती है। मूल प्रश्न यह है कि क्या किसी राजनीतिक पद या प्रभाव के बल पर पुलिस चौकी के भीतर किसी के साथ अभद्रता और मारपीट की जा सकती है, और यदि ऐसा हुआ तो पुलिस की भूमिका केवल तमाशबीन बनने की क्यों रही। यह भी बताया गया है कि संबंधित भाजपा नेत्री पहले भी कई विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं, जिससे यह घटना और भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन और भाजपा संगठन दोनों पर टिकी हैं, यह देखने के लिए कि क्या इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होगी या राजनीतिक दबाव में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।1