गुमला /बसिया: बाघमुंडा जलप्रपात में डूबने से बुजुर्ग की मौत, दो दिन बाद कोयल नदी से मिला शव* बसिया (गुमला): बसिया थाना क्षेत्र के प्रसिद्ध बाघमुंडा जलप्रपात में कोयल नदी पार करने के दौरान एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान बसिया प्रखंड के बम्बियारी गांव निवासी शंकर चिक बड़ाइक के रूप में हुई है। रविवार को कड़ी मशक्कत के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से शव को नदी से बाहर निकाला गया। *मेले से लौटने के दौरान हुआ हादसा* प्राप्त जानकारी के अनुसार, शंकर चिक बड़ाइक रामनवमी के दिन सुकुरडा में आयोजित मेला देखने गए थे। मेले से घर लौटने के क्रम में उन्होंने बाघमुंडा जलप्रपात के पास कोयल नदी को पार करने का प्रयास किया। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने या गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे नदी के तेज बहाव में बह गए और डूब गए। *परिजनों ने दी थी गुमशुदगी की सूचना* जब शंकर रात भर घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। काफी तलाश के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने इसकी सूचना बसिया थाना को दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से नदी में तलाशी अभियान चलाया। *दो दिनों बाद मिला शव* हादसे के करीब दो दिन बाद, रविवार को घटनास्थल से कुछ दूरी पर शव को नदी में तैरते हुए देखा गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से शव को बाहर निकाला। बसिया पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई (पंचनामा) पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गुमला भेज दिया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।
गुमला /बसिया: बाघमुंडा जलप्रपात में डूबने से बुजुर्ग की मौत, दो दिन बाद कोयल नदी से मिला शव* बसिया (गुमला): बसिया थाना क्षेत्र के प्रसिद्ध बाघमुंडा जलप्रपात में कोयल नदी पार करने के दौरान एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान बसिया प्रखंड के बम्बियारी गांव निवासी शंकर चिक बड़ाइक के रूप में हुई है। रविवार को कड़ी मशक्कत के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से शव को नदी से बाहर निकाला गया। *मेले से लौटने के दौरान हुआ हादसा* प्राप्त जानकारी के अनुसार, शंकर चिक बड़ाइक रामनवमी के दिन सुकुरडा में आयोजित मेला देखने गए थे। मेले से घर लौटने के क्रम में उन्होंने बाघमुंडा जलप्रपात के पास कोयल नदी को पार करने का प्रयास किया। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने या गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे नदी के तेज बहाव
में बह गए और डूब गए। *परिजनों ने दी थी गुमशुदगी की सूचना* जब शंकर रात भर घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। काफी तलाश के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने इसकी सूचना बसिया थाना को दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से नदी में तलाशी अभियान चलाया। *दो दिनों बाद मिला शव* हादसे के करीब दो दिन बाद, रविवार को घटनास्थल से कुछ दूरी पर शव को नदी में तैरते हुए देखा गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से शव को बाहर निकाला। बसिया पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई (पंचनामा) पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गुमला भेज दिया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।
- बसिया। प्रखंड के नवाटोली स्थित संत अन्ना चर्च में रविवार को खजूर पर्व (पाम संडे) का आयोजन पारंपरिक उल्लास और गहरी आस्था के साथ किया गया। इस विशेष अवसर पर मसीही समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हाथों में खजूर की डालियाँ लेकर प्रभु यीशु के यरूशलेम प्रवेश की याद ताजा की। *विशेष मिस्सा और भक्तिमय वातावरण* कार्यक्रम की शुरुआत फादर सिप्रियन कुल्लू के नेतृत्व में हुई। विशेष मिस्सा पूजा के दौरान चर्च परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने गीतों और प्रार्थनाओं के माध्यम से प्रभु की आराधना की। इस दौरान भारी संख्या में उपस्थित जनसमूह की प्रार्थनाओं से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। *प्रेम और त्याग का संदेश* अपने संदेश में फादर सिप्रियन कुल्लू ने खजूर पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा: "खजूर पर्व हमें प्रेम, त्याग और शांति का संदेश देता है। यह पर्व प्रभु यीशु के यरूशलेम में विनम्र प्रवेश का प्रतीक है, जो हमें सच्चाई और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।" उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा बनाए रखने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर जोर देते हुए सभी से मानवता की सेवा करने का आह्वान किया। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में कई धर्मगुरुओं का सानिध्य प्राप्त हुआ। मौके पर मुख्य रूप से फादर अमृत एक्का, ,फादर अमृत तिर्की, फादर जॉन अल्बर्ट बाड़ा, फादर माइकल टोप्पो, फादर निकोलस सोरेंग सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।1
- गुमला मुख्यालय से 5 किमी दूर सीलम ढलान के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सामने से आ रही तेज रफ्तार बस ने सवारी ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे ऑटो सड़क पर पलट गया। हादसे में ऑटो में सवार 9 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनमें 3 को गंभीर चोट पहुंची। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए सभी घायलों को ऑटो से निकालकर सदर अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है कि सभी यात्री ऑटो से गुमला की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सीलम ढलान के पास सामने से आ रही बस ने टक्कर मार दी, जिससे ऑटो पलट गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस फरार बस और चालक की तलाश में जुटी हुई है।1
- सिसई (गुमला)।जनजातीय सुरक्षा मंच झारखंड के तत्वाधान में प्रखंड स्तरीय एक दिवसीय बैठक संजय कुमार वर्मा के पिलखी मोड़ स्थित आवास में संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में बिहार झारखंड के संयोजक संदीप उरांव शामिल हुए। संयोजक संदीप उरांव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जो "भोलेनाथ का नहीं वो हमारे जात का नहीं"। उन्होंने सिसई के अनुसूचित जनजाति से अपील करते हुए कहा कि सिसई कार्तिक बाबा का जन्मस्थल क्षेत्र है उनके सपनों को साकार करने हेतु मई महीना में दिल्ली में जनआक्रोश रैली का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने इस रैली में सिसई प्रखंड से सैकड़ों की संख्या में दिल्ली पहुँचने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सरना अनुसूचित जन जातियों का पूजा स्थल है यह कोई जाति या धर्म नहीं है। हम सभी सरना सनातन हैं और रहेंगे। जनजातीय सुरक्षा मंच के रांची जिला संयोजक जगरनाथ भगत ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव जी का सपना था कि जो आदिवासी से धर्मांतरित होकर ईसाई बन चुके हैं वो आदिवासी नहीं हैं कार्तिक बाबा ने पूरे धर्मांतरित ईसाई का विरोध सदन में किया था और आरक्षण समाप्त करने का आवाज़ उठाया था। उन्होंने ये भी कहा कि हम माता अंजनि एवं बजरंग बली के उपासक हैं हमें ईसाई एजेंटों के द्वारा दिग्भ्रमित किया जा रहा है और सरना सनातन को तोड़ने का कार्य किया जा रहा है उन्होंने कहा कि हम सनातन थे, सनातन हैं और सनातन ही रहेंगे। बैठक में सोमेश्वर उरांव को सिसई का संयोजक नियुक्त किया गया है वहीं बालेश्वर उरांव कोडेकेरा, विश्व भूषण बिलुङ, भुरसो,दिनेश उरांव लठदाग, देवकु भगत ओलमुंडा एवं बालेश्वर भगत कोटारी को सह संयोजक बनाया गया है। बैठक में सभी पंचायत के प्रतिनिधि कार्यकर्ता उपस्थित थे।3
- सिमडेगा:- जिले में तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण, कोटपा अधिनियम 2003 एवं तम्बाकू मुक्त शिक्षण संस्थान के प्रभावी अनुपालन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण सिविल सर्जन की अध्यक्षता एवं जिला नोडल पदाधिकारी (एनटीपीसी) के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, सिमडेगा प्रकाश चन्द्र गुग्गी एवं चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक राज (ठेठईटांगर) द्वारा शिक्षा विभाग के बीपीओ, बीआरपी एवं सीआरपी को कोटपा 2003 एवं संशोधित 2021 अधिनियम तथा तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान से संबंधित दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई।प्रशिक्षण के दौरान तंबाकू के सेवन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों एवं उसके रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही जिले के सभी विद्यालयों को तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान घोषित कराने की प्रक्रिया एवं आवश्यक मानकों को भी समझाया गया।अधिकारियों ने उपस्थित प्रतिभागियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं एवं स्कूल के छात्र-छात्राओं को तंबाकू से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को “जिंदगी चुने, तंबाकू नहीं” की शपथ दिलाई गई।1
- Post by RAMSEWAK SAHU1
- सड़क दुर्घटना में मोटरसाइकिल चालक घायल कंडरा में अज्ञात बोलोरो के चपेट में आने हुआ हादसा1
- राउरकेला। ओडिशा में चल रहे माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सक्रिय सदस्य मोंगड़ी होनहागा ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए राउरकेला पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकार की पुनर्वास नीति और संगठन के भीतर हो रहे उत्पीड़न से तंग आकर उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। जानकारी के अनुसार 19 वर्षीय मोंगड़ी होनहागा झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मारांगपोंगो गांव की निवासी है। वह माओवादी संगठन के एलजीएस (लोकल गुरिल्ला स्क्वाड) की सदस्य के रूप में एसवीएन (दक्षिण छोटानागरा) डिवीजन में सक्रिय रूप से कार्य कर रही थी। संगठन में रहते हुए वह विभिन्न गतिविधियों में शामिल रही और कई अभियानों में उसकी भूमिका बताई जा रही है। पुलिस पूछताछ के दौरान मोंगड़ी ने बताया कि माओवादी संगठन के अंदर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की घटनाओं के कारण उसका मोहभंग हो गया था। इसके साथ ही हिंसक विचारधारा से निराशा और लगातार बढ़ते सुरक्षा बलों के दबाव ने उसे संगठन छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। ओडिशा सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी उसे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। पुलिस के अनुसार मोंगड़ी का नाम कई नक्सली गतिविधियों में सामने आया है। वह अनमोल उर्फ सुशांत के दस्ते की सदस्य रही है और संगठन के लिए रसद आपूर्ति तथा नए सदस्यों की भर्ती में सक्रिय भूमिका निभाती थी। वर्ष 2022 में कुमडीही जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान भी वह मौजूद थी, लेकिन उस समय वह मौके से फरार हो गई थी। राज्य सरकार ने उसे ‘बी’ श्रेणी के नक्सली कैडर के रूप में चिन्हित किया है। इसके तहत उसे ओडिशा सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत 2 लाख 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन शुरू कर सके। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना है। वहीं प्रशासन ने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए नई जिंदगी की शुरुआत करें।1
- बसिया (गुमला): बसिया थाना क्षेत्र के प्रसिद्ध बाघमुंडा जलप्रपात में कोयल नदी पार करने के दौरान एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान बसिया प्रखंड के बम्बियारी गांव निवासी शंकर चिक बड़ाइक के रूप में हुई है। रविवार को कड़ी मशक्कत के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से शव को नदी से बाहर निकाला गया। *मेले से लौटने के दौरान हुआ हादसा* प्राप्त जानकारी के अनुसार, शंकर चिक बड़ाइक रामनवमी के दिन सुकुरडा में आयोजित मेला देखने गए थे। मेले से घर लौटने के क्रम में उन्होंने बाघमुंडा जलप्रपात के पास कोयल नदी को पार करने का प्रयास किया। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने या गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे नदी के तेज बहाव में बह गए और डूब गए। *परिजनों ने दी थी गुमशुदगी की सूचना* जब शंकर रात भर घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। काफी तलाश के बाद भी जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने इसकी सूचना बसिया थाना को दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से नदी में तलाशी अभियान चलाया। *दो दिनों बाद मिला शव* हादसे के करीब दो दिन बाद, रविवार को घटनास्थल से कुछ दूरी पर शव को नदी में तैरते हुए देखा गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों की सहायता से शव को बाहर निकाला। बसिया पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कागजी कार्रवाई (पंचनामा) पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गुमला भेज दिया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।2